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01-08-2020
प्रदेश में मीसा बंदियों की पेंशन योजना समाप्त, पढ़े पूरी खबर...

रायपुर। राज्य सरकार ने मीसा बंदियों को पेंशन देने वाली योजना को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। सत्ता परिवर्तन के बाद जनवरी 2019 से कांग्रेस सरकार ने मीसा बंदियों की पेंशन पर रोक लगा दी थी। पहले कहा गया कि सत्यापन कराया जा रहा है, लेकिन अब नियम ही खत्म कर दिया गया है। 29 जुलाई को सरकार ने इसके लिए अधिसूचना जारी की है। इसमें कहा गया है कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण (मीसा/डीआइआर राजनैतिक या सामाजिक कारणों से निरुद्ध व्यक्ति) सम्मान निधि नियम 2008 को जनवरी 2019 से निरस्त किया जाता है। लोकतंत्र सेनानी संघ ने इसे हाईकोर्ट के आदेश अवमानना करार देते हुए कोर्ट जाने की चेतावनी दी है। बता दें कि भाजपा सरकार ने 2008 में मीसा बंदियों को पेंशन देने का नियम बनाया था। इसके तहत प्रदेश के करीब सवा तीन सौ लोगों को 15 से 25 हजार रुपये मासिक पेंशन दिया जा रहा था।

कौन हैं मीसा बंदी :

मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट (मीसा) 1971 में इंदिरा गांधी सरकार ने बनाया था। इस कानून से सरकार के पास असीमित अधिकार आ गए। 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लागू किया गया। इसका विरोध करने वालों को जेल में बंद कर दिया गया था। उन्हें ही मीसा बंदी कहा गया।

14-02-2019
मीसा बंदियों की चेतावनी, एक हफ्ता में करें सत्यापन नहीं तो करेंगे धरना प्रदर्शन

धमतरी। जिले के लोकतंत्र सेनानी मीसा बंदियों ने भौतिक सत्यापन जल्द किए जाने की मांग की है। मांग पूरी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन धरना की चेतावनी दी है। बता दें कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने लोकतंत्र सेनानी मीसा बंदियों की पेंशन बंद कर दी है। इसके बाद से अब लगातार मांग उठ रही है कि पेंशन शुरू की जाए। गुरुवार को जिले के मीसा बंदी कलेक्ट्रेट पहुंचे और ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि 2008 से उन्हें हर माह सरकार की ओर से मानदेय दिया जा रहा था। लेकिन वर्तमान सरकार ने फरवरी से आवंटन रद्द कर दिया और सत्यापन के बाद चालू करने को कहा गया। वे चाहते हैं कि जल्द से जल्द सत्यापन हो ताकि उनकी पेंशन शुरू हो सके । संघ के सदस्यों ने अल्टीमेटम देते हुए कहा कि 1 सप्ताह के भीतर सत्यापन कर लिया जाए नहीं करने पर जिला कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे। संघ के सदस्यों ने कहा कि पेंशन बंद होने से आर्थिक परेशानी हो रही है इनमें कई विधवा महिलाएं भी हैं, जो इसी पेंशन के सहारे अपना जीवन यापन कर रहीं थीं।

30-01-2019
मीसा बंदियों के भौतिक सत्यापन तक उन्हें मिलने वाली सम्मान निधि की रकम पर रोक

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने मीसा बंदियों के भौतिक सत्यापन तक उन्हें दी जाने वाली सम्मान निधि की राशि पर रोक लगा दी है। राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने मंगलवार को यहां बताया कि राज्य सरकार ने लोकतंत्र सेनानियों (मीसा बंदियों) का भौतिक सत्यापन करने और उन्हें दी जाने वाली सम्मान निधि के भुगतान की प्रक्रिया का पुनर्निधारण करने का फैसला किया है। इसके लिए आगामी फरवरी माह से इस राशि के वितरण पर रोक लगा दी गई है। राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि लोक नायक जयप्रकाश नारायण सम्मान निधि, 2008 के प्रावधानों के तहत लोकतंत्र सेनानियों को भुगतान की जाने वाली सम्मान निधि की राशि का समुचित नियमन करने और भुगतान की वर्तमान प्रक्रिया को और अधिक सटीक, पारदर्शी बनाया जाना आवश्यक है। साथ ही राज्य में लोकतंत्र सेनानियों का भौतिक सत्यापन कराया जाना भी आवश्यक है। अधिकारियों ने बताया कि इस कार्यवाही के बाद ही लोकतंत्र सेनानियों को सम्मान निधि की राशि दी जाएगी। इधर लोकतंत्र सेनानियों ने इसे लेकर सरकार की नीयत पर सवाल उठाया है।

बंद करना जरूरी नहीं है

लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सच्चिदानंद उपासने कहा है कि सरकार ने सत्यापन की बात कही है। सत्यापन के लिए इसे बंद करना जरूरी नहीं है। यदि सरकार की नीयत सत्यापन की होती तब बंद नहीं करते। बंद किए बिना भी सत्यापन शासकीय स्तर पर किया जा सकता है। इसके पीछे सरकार की नीयत ठीक नहीं दिख रही है। साथ ही इसमें अवधि भी नहीं दी गई है। उपासने ने कहा कि यदि ऐसा सोचा जा रहा है कि इसमें केवल राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ या भारतीय जनता पार्टी के लोग हैं तब यह सही नहीं है। इसमें समाजवादी और कांग्रेस के लोग भी हैं। साथ ही इसमें वकील, समाजसेवी और पत्रकार भी हैं।

जेल अवधि के आधार पर रकम

मीसा बंदियों को राज्य में वर्ष 2008 से सम्मान निधि की राशि दी जा रही है। जो तीन महीने जेल में रहे उन्हें 10 हजार रूपए, जो तीन से छह महीने तक जेल में रहे उन्हें 15 हजार रूपए तथा छह माह से अधिक जेल में रहे उन्हें 25 हजार रूपए सम्मान निधि की राशि मिलती है। राज्य में सम्मान निधि पाने वालों की संख्या लगभग तीन सौ है। जिनमें से अधिकांश लोगों का निधन हो चुका है। जिनकी विधवाओं को आधी राशि मिल रही है। इनमें से ज्यादातर बुजुर्ग हैं और उनका इलाज कर चल रहा है। इसे बंद करने पर दवाइयों के अभाव में उनकी हालत खराब हो सकती है। 

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