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14-03-2020
एक्साइज ड्यूटी बढ़ाया जाने का फैसला जनविरोधी : कांग्रेस

रायपुर। ईंधन के दामों में एक्साइज ड्यूटी बढ़ाए जाने पर प्रदेश कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरा है। प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि केंद्र की भाजपा सरकार आम आदमी के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है। उन्होंने कहा कि पहले हर सप्ताह और बाद में हर दिन क्रूड आइल के दामों में वृद्धि का हवाला देकर पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने और महंगाई बढ़ाने का जनविरोधी कृत्य करते रहे। अब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल क्रूड आईल का दाम घटकर 30 डालर प्रति बैरल हो जाने के बाद मोदी सरकार द्वारा इसका लाभ पेट्रोल-डीजल के उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के बजाय एक्साइज ड्यूटी में 3 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि का जनविरोधी फैसला मोदी सरकार ने लिया है।
त्रिवेदी ने कहा है कि मोदी सरकार को अंतर्राष्ट्रीय कच्चे तेल के मूल्यों में भारी कमी के अनुरूप पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस के मूल्यों को 35 से 40 प्रतिशत कम करके कच्चे तेल के अंतर्राष्ट्रीय दामों में आई रिकार्ड गिरावट का लाभ देश की जनता को देना चाहिए। ताकि उन्हें स्टैगफ्लेशन (कमर तोड़ महंगाई एवं आर्थिक मंदी) तथा बढ़ती बेरोजगारी से राहत मिल सके।  

 

17-02-2020
मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ जनसंघर्ष की तैयारी में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी

रायपुर। देश में नागरिकता संशोधन कानून, एनआरसी, एनपीआर सहित अन्य मुद्दों पर राजनीतिक संर्घष जारी है। केन्द्र की मोदी सरकार के फैसलों पर देश की विभिन्न राजनीतिक पार्टियां विरोध में है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता संजय पराते ने कहा कि मोदी सरकार की इन नीतियों के चलते देश में सामाजिक-राजनैतिक तनाव बढ़ रहे हैं और आम जनता का जीवन स्तर गिर रहा है। आर्थिक असमानता इतनी बढ़ गई है कि देश में एक करोड़ अमीरों के पास उतना धन एकत्रित हो गया है, जितना देश के 85 करोड़ गरीबों के पास है। उन्होंने कहा कि एक ओर तो मोदी सरकार नागरिकता कानून में संशोधन करके संविधान के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों पर हमला कर रही है, वहीं दूसरी ओर इसके खिलाफ शांतिपूर्ण आंदोलन करने के नागरिक अधिकारों को बर्बरतापूर्वक कुचल रही है। तीसरा हमला देश की सार्वजनिक संपत्तियों को कॉर्पोरेट के हवाले करके देश की आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था पर किया जा रहा है। देश आर्थिक मंदी की चपेट में फंस गया है और बेरोजगारी, भूखमरी और गरीबी बड़ी तेजी से बढ़ रही है। किसानों की बढ़ती आत्महत्याओं के बाद अब व्यवसायी वर्ग भी आत्महत्या करने पर मजबूर हो रहा है। यही मोदी का न्यू इंडिया है, जहां बहुसंख्यक आबादी रोजी-रोटी और जिंदा रहने की लड़ाई लड़ रही है। पराते ने कहा कि इन नीतियों के खिलाफ एक व्यापक जनसंघर्ष विकसित करने की कोशिश माकपा कर रही है।

06-02-2020
आज देश में सबसे बड़ा मुद्दा रोजगार,मोदी ने इस पर कुछ नहीं कहा : राहुल गांधी

नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वक्तव्य के बाद पीएम मोदी पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने बेरोजगारी के बारे में कोई बात नहीं की और सिर्फ ध्यान भटकाने की कोशिश की। गांधी ने लोकसभा में राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा पर प्रधानमंत्री के जवाब की ओर संकेत करते हुए संसद परिसर में संवाददाताओं से यह कहा। उन्होंने कहा,‘आज देश के सामने सबसे बड़ा मुद्दा रोजगार का है, अर्थव्यवस्था का है। हर युवा चाहता है कि पढ़ाई के बाद यह देश उसे रोजगार दे पाए।’ उन्होंने कहा,‘हमने प्रधनमंत्री से कई बार कहा कि आप देश के युवाओं को रोजगार के बारे में बताइए। प्रधानमंत्री जवाब नहीं दे पाए। वह रोजगार के बारे में एक शब्द नहीं बोल सकते। वित्त मंत्री ने भी अपने भाषण में रोजगार के बारे में कुछ नहीं बोला।’ कांग्रेस नेता ने दावा किया, ‘वह भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। कभी जवाहरलाल नेहरू की बात करेंगे, कभी पाकिस्तान की बात करेंगे और कभी बांग्लादेश की बात करेंगे। बस रोजगार की बात नहीं करते।’

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने हर साल दो करोड़ लोगों को रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन नए रोजगार की बात छोड़िए, पिछले साल एक करोड़ युवाओं की नौकरी चली गई। इससे पहले लोकसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्ववर्ती कांग्रेस नीत सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले जो कुछ भी हुआ,‘राजनीति के तराजू से तौलकर और आधे-अधूरे मन से किया गया’ जबकि उनकी सरकार ने चुनौतियों को चुनौती देते हुए समस्याओं का समाधान निकालने के लिये दीर्घकालिक नीति के तहत काम किया, जिससें अर्थव्यवस्था आगे बढ़ी तथा वित्तीय घाटा एवं महंगाई स्थिर रही।

 

 

01-02-2020
राहुल गांधी ने वित्त मंत्री पर कसा तंज,कहा - इतिहास का सबसे लंबा बजट भाषण था खोखला

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में शनिवार को मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का दूसरा बजट पेश किया। करीब पौने तीन घंटे लंबे बजट भाषण के आखिर में गला खराब होने की वजह से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आखिरी दो-तीन पृष्ठ नहीं पढ़ पाई और उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष की अनुमति से उसे पढ़ा मानकर सदन के पटल पर रख दिया। बजट को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष की प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गईं हैं। बजट पर राहुल गांधी ने कहा कि मुख्य मुद्दा बेरोजगारी का है। मैंने ऐसा कोई रणनीतिक विचार नहीं देखा जिससे हमारे युवाओं को रोजगार मिले। मैंने सामरिक चीजें देखी, लेकिन कोई केंद्रीय विचार नहीं था। यह अच्छी तरह से सरकार का वर्णन करता है। बहुत दोहराव है, बजट भाषण में सरकार की मानसिकता दिखी, सभी बात करते हैं, लेकिन कुछ भी नहीं हो रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि शायद यह इतिहास का सबसे लंबा बजट भाषण था, लेकिन इसमें कुछ भी नहीं था, यह खोखला था।
 
वित्त मंत्री ने लच्छेदार भाषण दिया, गणित स्पष्ट करने में विफल रहीं : कांग्रेस

कांग्रेस ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए पेश हुए आम बजट को लेकर दावा किया कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लच्छेदार भाषण दिया, लेकिन वह बजट संबन्धी गणित को स्पष्ट करने में विफल रहीं। पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता आनंद शर्मा ने ट्वीट कर कहा कि किसानों की आय दोगुना करने का वित्त मंत्री का दावा खोखला है और तथ्यात्मक वास्तविकता से परे है। कृषि विकास दर दो फीसदी हो गई है। आय दोगुनी करने के लिए कृषि विकास दर को 11 फीसदी रहना होगा। उन्होंने दावा किया कि  निर्मला सीतारमण बजट संबंधी गणित को स्पष्ट करने में विफल रही हैं। नवंबर महीने तक जो राजस्व आया है वह बजट आकलन का सिर्फ 45 फीसदी है। शर्मा ने वित्त मंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि लच्छेदार भाषा और ऊंची आवाज में बोलना और पुरानी बातें करने का कोई मतलब नहीं। माकपा नेता सीताराम येचुरी ने भी कहा कि सिर्फ लच्छेदार बातें, नारे हैं, लोगों को दुर्दशा और बढ़ती बेरोजगारी से बाहर निकालने के लिए कुछ भी ठोस नहीं है।

 

01-02-2020
आर्थिक सुस्ती, बेरोजगारी, महंगाई को दूर करने में नाकाम होगा यह आम बजट : छाया वर्मा

रायपुर। कांग्रेस पार्टी की राज्यसभा सांसद छाया वर्मा ने आम बजट (2020-21) पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि निर्मला सीतारमन की ओर से प्रस्तुत बजट देश में आर्थिक सुस्ती, बेरोजगारी, महंगाई, उत्पादकता में गिरावट, अविश्वास को दूर करने में असमर्थ होगा। किसानों की आय दोगुनी करने की बात बजट में की गई है पर उसका क्या तरीका होगा, यह नहीं बताया गया है। पिछले 6 वर्षों से यह बात राज्य सरकार करती आ रही है। पर किसानों की आय दोगुनी के बजाय किसान अलाभकारी खेती के कारण कर्ज में डूब रहे हैं इसीलिए किसानों की आत्महत्याओं की घटनाएं देश में बढ़ रही हैं। हद तो तब होती हैं जब किसानों के उपज को केन्द्रीय एजेंसियां न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने से बचने लगती है।
उन्होंने कहा कि देश में आधी आबादी महिलाओं की है, पर आंगनबाड़ी कार्यकतार्ओं को र्स्माट फोन के अलावा महिलाओं के लिए इस बजट में कुछ खास नहीं है। एक महिला वित्तमंत्री से महिलाओं के लिए बहुत कुछ उम्मीद थी, पर सबसे ज्यादा यह बजट महिलाओं को ही निराश किया है। बेरोजगारों को संतुष्ट करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर रिक्यूटमेंट एजेंसी की बात बजट में कही गई है। पर क्या गारंटी है कि जो भर्ती बोर्ड पहले से संचालित हैं जिनका रिजल्ट वर्षों तक नहीं आता और नौकरी की राह देखते-देखते बच्चे ओवर एज हो जाते हैं उन्हें नौकरी राष्ट्रीय स्तर पर रिक्यूटमेंट एजेंसी से मिलेगी। शिक्षा के लिए डीम्ड यूनिवर्सिटी की बात बजट में की गई है। पहले से ही केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में फीस बढ़ोत्तरी की मार विद्यार्थी झेल रहे हैं और अब डीम्ड यूनिवर्सिटी शिक्षा को और महंगा बनाने वाली हैं। क्योंकि यह पूरी तरह निजी हाथों में होती हैं। इन पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं होता है। जैसे निजी स्कूल उसी तर्ज पर अब डीम्ड यूनिवर्सिटी से शिक्षा महंगी होने वाली है। उन्होंने कहा कि रेलवे को निजी क्षेत्रों के हाथों में सौंपा जा रहा है, तकरीबन धीरे-धीरे 100 ट्रेनें निजी क्षेत्रों द्वारा पीपीपी मॉडल के आधार पर संचालित करने का प्रस्ताव बजट में रखा गया है। इसमें किसी भी तरह की रियायत चाहे वे विकलांग हों, सीनीयर सिटिजेन हो, पत्रकार हों, नहीं दी जाएगी और उन ट्रेनों में रेल टिकटों का दर हवाई जहाज के टिकटों के आसपास होगी, क्योंकि वह पूरी तरह से व्यावसायिक हो जाएगी निजी व्यावसायियों द्वारा संचालित ऐसी ट्रेनों में किराया वे खुद-ब-खुद तय करेंगे। कई ट्रेनें ऐसी संचालित की जा रही है जैसे आईआरसीटीसी तेजस, इस ट्रेन का किराया अन्य ट्रेनों के मुकाबले हवाई जहाज जैसा महंगा है। उन्होंने कहा कि हां, इनकम टैक्स का स्लैब जरूर बढ़ाया गया है, पर उसमें भी कंडिशन लगा दी गई है। यदि कोई नए सैलब पर आईटीआर दाखिल करता है, तो उसकी कुछ रियायतें छीन ली जाएगी। यह सांप सीढ़ी के खेल जैसा होगा।

 

29-01-2020
युवा कांग्रेस कर रहा राष्ट्रीय बेरोजगारी रजिस्टर की मांग

कोरबा। भारत में बढ़ते बेरोजगारी के संकट को लेकर भारतीय युवा कांग्रेस द्वारा राष्ट्रीय बेरोजगारी रजिस्टर की मांग की और साथ ही राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरूआत की गई। भारतीय युवा कांग्रेस के निर्देशन पर पूरे देश भर में तथा जिला मुख्यालयों में एनआरयू अभियान की जिला स्तर पर शुरूआत हुई। अभियान का मुख्य लक्ष्य बेरोजगारी की विकराल समस्या की ओर ध्यानाकर्षण करना और भारत के युवाओं को एक मुखर अभिव्यक्ति प्रदान करना है।  कटघोरा के पीडब्ल्यूडी रेस्टहाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के द्रारा युवा कांग्रेस के कार्यकारी जिलाध्यक्ष आकाश शर्मा ने भारत में बढ़ती बेरोजगारी को लेकर एनआरयू के विषय में बताया। इस दौरान युवा कांग्रेस संभाग प्रभारी सजमन बाग, कांग्रेस के हसन अली, राज जायसवाल, सत्य प्रकाश मिश्रा, आशुतोष शर्मा भी मौजूद रहे।

28-01-2020
रोजगार देने की जगह छीनने का काम कर रहे मोदी : राहुल गांधी

नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की नीतियों पर जमकर निशाना साधा। राजस्थान की राजधानी जयपुर में युवा आक्रोश रैली को संबोधित करते हुए राहुल ने पीएम मोदी से बेरोजगारी, अर्थव्यवस्था, विदेश में भारत की साख जैसे मुद्दों पर सवाल किए। राहुल ने कहा कि मोदी 2 करोड़ रोजगार हर साल देने का वादा कर सरकार में आए थे लेकिन वो नौकरियां देने की जगह अपनी नीतियों से लोगों के पुराने चल रहे कामों को ठप कर दे रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा, नरेंद्र मोदी की सरकार ने पिछले एक साल में 1 करोड़ लोगों का रोजगार छीन लिया है। इसके चलते स्थिति ये हो गई है कि बेरोजगारी चार दशक में सबसे ऊपर है। राहुल ने कहा, हमारी सरकार गरीबों तक पैसा पहुंचाती थी। इससे बाजार की खपत बढ़ती थी और ग्रोथ होती थी, लेकिन मोदी ने इकोनॉमिक्स नहीं पढ़ा, इसलिए उन्हें यह बात समझ नहीं आती। यूपीए सरकार के समय देश की ग्रोथ रेट 9 फीसदी थी, जो अब घटकर 5 प्रतिशत रह गई। मोदी की सरकार ने टैक्स लादकर गरीब की कमर तोड़ दी है।

राहुल ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने दुनिया में देश की छवि खराब करने का काम किया है। राहुल ने कहा, नरेंद्र मोदी ने दुनिया में हिंदुस्तान की इमेज खराब की है। पूरी दुनिया कहती थी एक तरफ पाकिस्तान, जो हमेशा लड़ता है। दूसरी तरफ हिंदुस्तान प्यार और भाईचारा। इस इमेज को नरेंद्र मोदी ने बर्बाद कर दिया। पहले हिंदुस्तान में शांति थीं। अब हम पढ़ते हैं कि हिंसा है। हिंदुस्तान के लोग एक-दूसरे से लड़ रहे हैं। हिंदुस्तान की सरकार हिंसा फैला रही है। ऐसे में विदेश के लोग इन्वेस्ट करने से भी घबरा रहे हैं। राहुल ने केंद्र की सरकार और मोदी को निशाने पर लेते हुए कहा, आज हिंदुस्तान का युवा कॉलेज में जाकर पढ़ता है, लेकिन उसे रोजगार नहीं मिलता। पिछले साल हिंदुस्तान में 1 करोड़ युवाओं ने रोजगार खोया है। हमारे पीएम जहां भी जाते हैं, लंबे-लंबे भाषण देते हैं। एनआरसी सीएए और एनपीआर की बात करते हैं, लेकिन जो सबसे बड़ी समस्या है, हमारे पीएम उस पर एक शब्द नहीं बोलते हैं। हमारे युवा जब पीएम से सवाल करते हैं कि देश की इमेज क्यों खराब की। आपने युवाओं के लिए क्या किया,तो आप पर गोली चलाई जाती है। मैं चेलेंज देता हूं पीएम किसी भी यूनिवर्सिटी में चले जाएं और युवाओं से सवाल पुछवाकर देख लें। नरेंद्र मोदी उनका जवाब नहीं दे सकते, लेकिन झूठे वादे जरूर कर सकते हैं।

 

28-01-2020
बेरोजगारी, आर्थिक संकट पर केंद्रित राहुल गांधी की युवा आक्रोश रैली आज 

नई दिल्ली। जयपुर में मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी 'युवा आक्रोश रैली' को संबोधित करेंगे। रैली यहां के रामनिवास बाग में होनी है। कांग्रेस नेता देश के आर्थिक संकट और बेरोजगारी के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधेंगे। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं राजस्थान के पार्टी मामलों के प्रभारी अनिवाश पांडे तथा पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट ने सोमवार को रैली स्थल पर तैयारियों का जायजा लिया।
रैली के दौरान बेरोजगारी, आर्थिक संकट, जीडीपी और बढ़ती महंगाई जैसे मुद्दों पर केंद्रित होगी। राहुल गांधी की युवा आक्रोश रैली का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि केंद्र सरकार भले ही इन सब मुद्दों पर चुप हो और आम जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही हो लेकिन राहुल गांधी इन मुद्दों को उठाने के लिए जयपुर में रैली करेंगे।

21-01-2020
बेरोजगारी की दर पहुंची 7.5 प्रतिशत, उच्च शिक्षित में 60 फीसदी से अधिक

नई दिल्ली। भारत में बेरोजगारी की समस्या कम होने की बजाय लगातार बढ़ती जा रही है। सितंबर-दिसंबर 2019 के बीच ये 7.5 फीसदी पर पहुंच गई। बेरोजगारी की स्थिति पढ़े-लिखे युवाओं में सबसे अधिक पाई गई है। उच्च शिक्षित लोगों में बेरोजगारी दर 60 फीसदी से अधिक पहुंच गई है। ये बात सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के द्वारा जारी आंकड़ों में कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक ग्रेजुएट लोगों के लिए 2019 सबसे बुरा साल रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है,'बेरोजगारी में मई-अगस्त 2017 के बाद लगातार सात बार वृद्धि हुई है। उस वक्त बेरोजगारी दर 3.8 फीसदी थी।' सीएमआईई के सर्वे के अनुसार, इस सर्वे में 1,74,405 घरों को शामिल किया गया। इसमें पता चला कि बेरोजगारी दर ग्रामीण भारत से अधिक शहरी भारत में है। शहरी बेरोजगारी दर राष्ट्रीय औसत से अधिक रही, जो देश में आर्थिक मंदी को दर्शाती है। बता दें सीएमआईई एक निजी थ‍िंक टैंक है, जिसके सर्वे और आंकड़ों को काफी विश्वसनीय माना जाता है।

शहरी भारत में सितंबर-दिसंबर 2019 के दौरान बेरोजगारी की दर 9 फीसदी तक पहुंच गई। वहीं ग्रामीण भारत में इस दौरान बेरोजगारी 6.8 फीसदी रही। यह हाल तब है जब कुल बेरोजगारी में करीब 66 फीसदी हिस्सा ग्रामीण भारत का होता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रामीण भारत में कम बेरोजगारी दर है और इसका भारत की समग्र बेरोजगारी दर को कम करने पर बड़ा प्रभाव पड़ा है। लेकिन, ग्रामीण रोजगार खराब गुणवत्ता का है। रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चिंता की बात ये है कि बेरोजगारी की दर शहरी युवाओं में सबसे अधिक है, खासतौर पर पढ़े लिखे लोगों में। '20-24 आयु वर्ग के युवाओं में बेरोजगारी की दर 37 फीसदी पाई गई, ग्रेजुएट में ये दर सबसे अधिक 60 फीसदी रही। साल 2019 के दौरान उनमें बेरोजगारी की औसत दर 63.4 फीसदी तक पहुंच गई।' बेरोजगारी की ये दर 2016 में 47.1 फीसदी, 2017 में 42 फीसदी और 2018 में 55.1 फीसदी थी। 20-29 साल के ग्रेजुएट्स में बेरोजगारी दर 42.8 फीसदी, पोस्ट-ग्रेजुएट लोगों में 23 फीसदी और 15-19 आयु वर्ग के नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं में 45 फीसदी रही।

 

14-01-2020
देश में बढ़ती बेरोजगारी और महंगाई के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार : शैलेश

रायपुर। 45 साल में देश में आज बेरोजगारी सबसे अधिक है। महंगाई और बेरोजगारी की स्थिति को लेकर भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि 2018 में 12 हजार बेरोजगारों ने एनसीआरबी के आंकड़ो के मुताबिक आत्महत्या की। सरकारी नौकरियां 39 हजार कम हुई है। 16 लाख रोजगार के अवसर कम हुए है। नौकरी वाले घर जो पैसा भेजते हैं उसमें भी कमी आई है। ऊपर महंगाई की मार है। महंगाई की मार झेल रहे झेल-झेल के घरों की गृहस्थी का बजट बिगड़ गया है। महंगाई की इस मार को झेल रहा आदमी बेरोजगारी और आर्थिक मंदी दंश भोगने के लिए मजबूर है। साढ़े पांच साल के सबसे ऊंचे स्तर पर महंगाई पहुंच चुकी है और खाने पीने की वस्तुएं सबसे ज्यादा महंगी हुई है। मोदी सरकार ने लोगों को रोजी-रोजगार से भी वंचित किया है। खाने की चीजें महंगी करके दोहरी मार लोगों पर पड़ी है। इन सबसे ध्यान हटाने के लिये धर्म से धर्म को लड़ाने की कोशिशों हो रही है। इन सबसे लोगों का ध्यान हटाने के लिए नागरिकता कानून जैसे अप्रासंगिक कानून देश के संविधान विरोधी कानून लाये जा रहे है। पिछले 6 साल से जो देश की आर्थिक स्थिति है, महंगाई है, बेरोजगारी है, किसानों की जो दशा इस देश में हो रही है, इन तमाम चीजों की तरफ केन्द्रीय सरकार का कोई ध्यान नहीं है। ये तमाम बातें मोदी सरकार की प्राथमिकता में नहीं हैं। जनता का ध्यान बेकारी और बेरोजगारी की तरफ ना जाए, किसान जो आत्महत्या कर रहे हैं, उसकी तरफ ना जाए, लोग सड़कों पर ना आएं, महंगाई के लिए जिस तरह से पेट्रोलियम प्रोडक्ट, गैस, खाने-पीने की चीजों को लेकर महंगाई है, तो इसलिए इऩ्होंने लोगों को काम दिया है, दो तरीकों का काम दिया है- एक काम तो देश को धर्म के आधार पर बांटने का। दूसरा-कोई ना कोई विवादित कानून लाओ, बिल लाओ, जिसमें लोग आपस में ही झगड़ते रहें, लड़ते रहें और उनका ध्यान असली मुद्दों की तरफ ना जाए।

13-01-2020
शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए डॉ.चरणदास महंत, जयसिंह अग्रवाल, उमेश पटेल, मोहन मरकाम

जांजगीर-चांपा। जिले में सोमवार को मुख्यमंत्री के अपरिहार्य कारण से नहीं आने के बाद से उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के शपथ ग्रहण समारोह में उपस्थित हुए। नगरीय निकाय में जीतकर आए कांग्रेस के पार्षदों का आज हाईस्कूल मैदान में शपथ ग्रहण समारोह हुआ। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ.चरणदास महंत, राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, उच्च शिक्षामंत्री उमेश पटेल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान मीडिया से चर्चा करते हुए मंत्री उमेश पटेल ने कहा कि नगरीय निकाय में एक बड़ी जिम्मदारी मिली है। जनता के विश्वास पर खरा उतरने की कोशिश करेंगे। वहीं उन्होंने बेरोजगारी के मुद्दे पर कहा कि बेरोजगारी पर अलग-अलग लेबल पर अलग-अलग काम हो रहा है। उन्होेंने कहा कि 14 हजार शिक्षकों की भर्ती की गई है। सहायक प्राध्यापकों की भर्ती की गई है। कौशल विकास का भी उन्होंने उदाहरण दिया।

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