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20-04-2020
गले में खराश और बुखार होने पर अस्पताल पहुंचे युवक की इलाज के दौरान मौत, 4 दिन से पीएम के लिए रखा है शव

रायपुर/रायगढ़। कोरोना की रिपोर्ट नहीं आने के कारण मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मर्च्युरी में 4 दिन से पड़ी लाश पोस्टमार्टम का इंतजार कर रही है। बता दें कि गुरूवार को अंबेडकर नगर निवासी युवक की संदिग्ध लक्षणों के बाद मौत हुई थी। रिपोर्ट नहीं आने के कारण शव का पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार नहीं हो पाया है। ज्ञातव्य है कि गले में खराश और बुखार का इलाज कराने मेडिकल कॉलेज अस्पताल गए युवक अश्वनी सूर्यवंशी ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। संदिग्ध मामला और कोरोना से मिला जुला लक्षण होने पर लाश को मर्च्युरी में रखा गया है। उसका कोरोना टेस्ट कराने के लिए सैंपल भेज दिया।

गुरूवार को हुई इस मौत के बाद भेजा गया सैंपल रिजेक्ट हो गया तो शनिवार को दोबारा से इसके सैंपल लिए गए और एम्स में भेजा गया। अब 4 दिन बीत चुके है। लेकिन लाश पोस्टमार्टम का इंतजार कर रही है। वहीं परिजन हर दिन सुबह-शाम अपने बेटे का अंतिम संस्कार करने के लिए पोस्टमार्टम कर लाश देने के लिए गुहार लगा रहे हैं लेकिन डाॅक्टरों का कहना है कि जब तक कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक लाश का पोस्टमार्टम भी नहीं किया जा सकता है। इस स्थिति में 4 दिनों से युवक की लाश मेडिकल कालेज के मर्च्युरी में पड़ी हुई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मृत युवक की रिपोर्ट नेगेटिव मिलने पर लाश को सुपुर्द कर परिजनों को सौंप दिया जाएगा। यदि रिपोर्ट कोरोना पाॅजिटीव आई तो डॉक्टरी स्टॉफ से लेकर अंबेडकर नगर कालोनी को भी क्वारेंटिन में भेजा जाएगा।

29-03-2020
पेंड्री के नए मेडिकल कॉलेज भवन में 31 मार्च से ओपीडी होगी शुरू

राजनांदगांव। पेंड्री के नए मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल भवन में मंगलवार 31 मार्च से सर्दी,खांसी और बुखार के मरीजों के इलाज के लिए ओपीडी शुरू हो रही है। यहां पर आईसीयू और सामान्य इलाज भी होगा। कलेक्टर जयप्रकाश मौर्य ने नए भवन में ओपीडी शुरू करने के लिए की जा रही व्यवस्थाओं निरीक्षण किया। यहां पर कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए 150 बेड के वार्ड  की व्यवस्था रहेगी। इसी प्रकार उपकरणों से सुसज्जित 26 बेड की आईसीयू की व्यवस्था होगी। डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टॉफ के रहने व भोजन का प्रबंध किया जा रहा है। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवम स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.मिथलेश चौधरी,अधीक्षक डॉ.पी.बेक भी उपस्थित थे।

26-03-2020
कोरोना विशेष : खांसी बुखार और सांस लेने में हो परेशानी तो डॉक्टर की सलाह लें

रायपुर। कोविड-19 नोवल कोरोना वायरस से संक्रमित किसी व्यक्ति के संपर्क में आने पर आपको अपना विशेष ध्यान रखना चाहिए। यदि आपको खांसी, बुखार, सांस लेने में परेशानी है तो आप नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाएं। डॉक्टर से सलाह और उपचार ले इतना ही नहीं आप जिन-जिन व्यक्तियों के साथ निकट संपर्क में रहे हैं। उनकी जानकारी डॉक्टर को भी दें। अधिक जानकारी के लिए भारत सरकार और राज्य सरकार के टोल फ्री नंबर पर संपर्क करें।

07-02-2020
मजनू और लैला पर छाया इश्क का बुखार, आया माह-ए-इश्क फरवरी

रायपुर। मजनू और लैलाओं पर इश्क का बुखार यानी फरवरी माह की शुरूआत हो गई। शुक्रवार को रोज डे पर लाखों दिल एक-दूसरे को लाल गुलाब देकर अपने-अपने इश्क का इजहार कर रहे हैं। कहीं-कहीं ऐसी स्थिति भी होगी जहां रूठे सैय्यां को मनाने के लिए लैला और मजनू दोनों को जद्दोजहद करनी पड़ेगी। रोज डे यानी आज 7 फरवरी अपने दोस्तों या फिर प्रेमी और प्रेमिका को रोज डे विश कर रहे हैं, वहीं राजधानी में हल्की ठंड और खुशनुमा मौसम के साथ लव सीजन की शुरूआत हो गई है। वेलेंटाइन डे वीक प्रेमी जोड़ों के लिए बेहद खास होता है। इस खास मौके पर लोग नए प्यार का इजहार एक-दूसरे को लाल गुलाब देकर कर सकते हैं, तो पुराना प्यार और गहरा होता जाता है। वैलेंटाइन डे का पूरा सप्ताह केवल प्यार करने वालों के नाम रहता है। 7 फरवरी से शुरुआत हो गई है।

अंकिता सिंह की रिपोर्ट 

13-01-2020
Breaking: मुख्यमंत्री का आज का दौरा कार्यक्रम रद्द

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के आज के दौरा कार्यक्रमों को रद्द कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि स्वास्थ्यगत कारणों से सीएम के सभी कार्यक्रम रद्द किए गए हैं। सीएम भूपेश बघेल को सर्दी-खांसी और बुखार के बाद डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच के बाद आराम करने की सलाह दी है। सीएम बघेल को आज रायगढ़, जांजगीर, कोरिया और दुर्ग के दौरे पर जाना था। अब स्वास्थ्य लाभ के बाद और डॉक्टरों की सलाह पर कार्यक्रम तय होंगे।

 

08-01-2020
बदलते मौसम में नवजात शिशुओं का रखें विशेष ध्यान: डॉ.एके सिन्हा

रायपुर। बदलते मौसम में 5 साल से कम उम्र के बच्चों की तुलना में नवजातों की देखभाल और अधिक बढ़ जाती है जब मौसम में उतार-चढ़ाव होने लगता है। ज्यादातर देखा गया है जब ऋतु परिवर्तन होता है तब बच्चे सर्दी और मौसमी बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। बच्चों को सर्दी के मौसम में खास ख्याल की जरुरत होती है। डॉ.एके सिन्हा शिशु रोग विशेषज्ञ एवं नोडल अधिकारी डीएचओ ने बताया ठंड के मौसम में या ऋतु परिवर्तन का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ता है क्योंकि इस मौसम में वायरस और बैक्टीरिया बहुत तेजी से बच्चों पर हमला करते हैं। इस वजह से उन्हें सर्दी-जुकाम, नाक बंद, सासं लेने में तकलीफ, गले में इंफेक्शन, वायरल डायरिया, निमोनिया और बुखार जैसी समस्याएं हो जाती हैं। इसलिए बच्चों को सर्दी के मौसम में खास ख्याल की जरूरत होती है। सर्दी के मौसम में जिस कमरे में नवजात शिशु को रखा जाए उस कमरे का तापमान हल्का गर्म होना चाहिए,जिसके लिए रूम हीटर का इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन ध्यान रहे की हीटर बच्चे से दूर रखा हो।

डॉ.सिन्हा ने कहा बच्चे की साफ-सफाई नियमित रूप से ठंड के मौसम में गर्म पानी से करनी चाहिये साथ ही बच्चा जब गीला करे तो तुरंत उसका नैपी बदल देना चाहिये। माता और नवजात शिशु को शीतल चीज़ों का सेवन नहीं करना चाहिये। बच्चे को सुलाते समय उनका चेहरा कभी ना ढकें। ऐसा करने से बच्चे की सांस घुट सकती है। सर्दी में बच्चे को डायपर पहना कर रखें और थोड़ी-थोड़ी देर बाद उसे बदलते रहें। इससे बच्चे को सर्दी नहीं होगी। नवजात बच्चे को घर से बाहर ले जाने से पूर्व यह सुनिश्चित कर ले कि नवजात मौसम के अनुरूप गर्म कपड़े पहने हैं।अगर बच्चे के सामान्य व्यवहार में परिवर्तन लगे तो तुरंत मितानिन दीदी या नजदीक के शासकीय अस्पताल से संपर्क कर उचित परामर्श ले। मौसम का परिवर्तन खासकर सर्दी का मौसम बच्चों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

 

03-01-2020
'सांस' दिलाएगी बच्चों को निमोनिया से निजात

रायपुर। देश भर में 5 साल से कम आयु वर्ग के बच्चों में होने वाली कुल मौतों में निमोनिया का भी एक प्रमुख कारण है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अनुसार प्रति 1000 जीवित जन्म में 5.3 मौतें सिर्फ निमोनिया के ही कारण होते हैं। इसको ध्यान में रखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा सोशल अवेयरनेस एंड एक्शन प्लान टू नयूट्रीलाईज निमोनिया सक्सेसफुली(सांस) कार्यक्रम का शुरुआत की गई है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सभी स्वास्थ्य केन्द्रों में निमोनिया प्रबंधन को सुदृढ़ करना है।

वर्ष 2025 तक निमोनिया से होने वाली मौतों को 3 से कम करने का लक्ष्य
राज्य बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ.अमर सिंह ठाकुर ने बताया बच्चों में निमोनिया से होने वाली मौतों पर अंकुश लगाने में ‘सांस’ कार्यक्रम कारगर साबित होगा। 5 साल से कम आयु वर्ग के बच्चों में प्रति 1000 जीवित जन्म में निमोनिया से होने वाली मौतों को 3 से कम करने का लक्ष्य इस कार्यक्रम के तहत वर्ष 2025 तक निर्धारित किया गया है। इसके लिए निमोनिया प्रबंधन पर विशेष बल दिया जाएगा। सामुदायिक स्तर पर कार्यकर्ताओं द्वारा अधिक से अधिक लोगों को निमोनिया के विषय में जागरूक किया जाएगा। साथ ही समस्त सेवा प्रदाताओं का निमोनिया प्रबंधन पर क्षमतावर्धन भी किया जाएगा ।

कार्यक्रम के ये होंगे मुख्य उद्देश्य
निमोनिया प्रबंधन में सहायक जैसे स्तनपान, पीसीबी का टीकाकरण एवं उम्र के मुताबिक अनुपूरक आहार की शुरुआत के विषय में आम लोगों में जागरूकता फैलाना। निमोनिया के मामलों में बच्चों को रेफरल करने से पहले मितानिन द्वारा एंटीबायोटिक के प्रयोग पर बल देना।
स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षण प्रदान कर निमोनिया की पूर्व पहचान पर बल देना।

ये होंगे लक्षित लाभार्थी
अभियान को सफल बनाने के लिए लक्षित लाभार्थियों को पूर्व में ही चिन्हित किया गया है। इसमें 5 साल से कम आयु के बच्चे के माता-पिता एवं स्वास्थ्य सेवा प्रदाता प्राथमिक लाभार्थी के रूप में होंगे। इन्हें समुदायिक जागरूकता से जोड़ा जाएगा। वहीं जन-प्रतिनिधि,स्थानीय प्रशासन, ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण कमिटी के सदस्य, स्वास्थ्य एवं आईसीडीएस के पदाधिकारी द्वितीय लाभार्थी के रूप में होंगे। अभियान के तहत दोनों लक्षित लाभार्थियों के जरिए अभियान के उद्देश्यों की प्राप्ति करने पर ज़ोर होगा।

लक्षण से जाने रोग
निमोनिया अचानक से एक-दो दिन में भी शुरू हो सकता है या फिर धीरे-धीरे कई दिनों में सामने आता है। कई बार यह पता लगाना मुश्किल होता है कि यह केवल अत्याधिक सर्दी-जुकाम ही है या कुछ और। खाँसी निमोनिया के शुरुआती लक्षणों में से एक है।  

इन लक्ष्णों से निमोनिया की पहचान की जा सकती है
बुखार के साथ पसीना एवं कंपकंपी होना। अत्यधिक खाँसी में गाढ़ा, पीला, भूरा या खून के अंश वाला बलगम आना। तेज-तेज और कम गहरी सांस लेने के साथ सांस का फूलना (सांस लेने में मोटी, सीटी जैसी आवाज आना)। होंठ एवं उँगलियों के नाख़ून नीले दिखाई देना। बच्चों में परेशानी एवं उत्तेजना का बढ़ जाना।

 

14-11-2019
सरिया के नागरिक दूषित पानी पीने मजबूर, कई लोग उल्टी-दस्त से पीड़ित

सरिया। नगर पंचायत सरिया के वार्ड क्रमांक 6 और 7 में पिछले चार दिनों से करीब 23 लोग उल्टी-दस्त से पीड़ित हैं। वार्डवासियों की मानें तो 100 से 150  लोगों की आबादी वाले इस वार्ड में ऐसा कोई घर शेष नहीं बचा जहां लोग बीमार न हुए हों। दस्त की शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से कैंप लगाकर लोगों का इलाज किया जा रहा है। गुरुवार को बीएमओ सहित दो अन्य लोगों की टीम ने पहुंचकर वार्ड में शिविर लगाया। इस दौरान कुछ मरीजों को रायगढ़ रैफर किया गया। स्वास्थ्य विभाग ने ओआरएस घोल के साथ उल्टी-दस्त और बुखार की दवाएं वितरित कीं। लोग इस बीमारी की वजह नगर पंचायत की कुर्सियों पर बैठे जिम्मेदारों को मान रहे हैं। वार्डवासियों ने बताया कि नाली का सीपेज पानी घरों के नलों में आ रहा है। इसकी शिकायत नगर पंचायत अध्यक्ष से लेकर सीएमओ और पार्षद तक को की गई, पर ध्यान किसी ने भी नहीं दिया। अगर समय रहते नाली के सीपेज को रोका गया होता तो शायद वार्ड क्रमांक 6 और 7 के लोग बीमार नहीं पड़ते। इसी वजह से वार्डवासियों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि आगामी नगरीय निकाय चुनाव में ऐसे लोगों को सबक सिखाया जाएगा जो लोगों की सेवा के नाम पर सिर्फ और सिर्फ पिछले पांच सालों से मलाई खा रहे हैं।

15-09-2019
मुख्यमंत्री के पालतू कुत्ते की मौत के बाद दो पशु चिकित्सकों के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर

नई दिल्ली। तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव के आधिकारिक बंगले में रहने वाले एक पालतू कुत्ते हस्की की बिमारी के बाद मौत हो गई। जिसके बाद पशु चिकित्सकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इस मामले की जांच अब बंजारा हिल्स पुलिस कर रही है। आरोपों के सही पाए जाने पर डॉक्टरों को पांच साल तक की जेल हो सकती है। जानकारी के अनुसार पुलिस ने एनिमल केयर क्लिनिक के डॉक्टर लक्ष्मी और डॉक्टर रंजीत पर भारतीय दंड संहिता की धारा 429 और 11 के तहत एफआईआर दर्ज की है। बुधवार शाम तक 11 महीने का पालतू कुत्ता हस्की बिलकुल ठीक था।

शाम को वह अचानक बीमार हो गया। जिसके बाद मुख्यमंत्री के बंगले पर काम करने वाले कर्मचारियों ने हस्की के बीमार होने की सूचना उसके डॉक्टर रंजीत को जाकर दी। अपनी जांच में डॉक्टर रंजीत ने पाया कि हस्की को 101 डिग्री का बुखार है। जिसके बाद उन्होंने पहले उसे दवा दी और फिर एनिमल केयर क्लिनिक में शिफ्ट कर दिया। हालांकि हस्की ने क्लिनिक में दम तोड़ दिया। मुख्यमंत्री के बंगले पर नौ पालतू कुत्ते रहते हैं। जिसके केयरटेकर आसिफ अली खान हैं। राव के इस कदम ने विपक्ष को उनपर निशाना साधने का मौका दे दिया है। विपक्ष ने उनकी आलोचना करते हुए कहा है कि हैदराबाद और तेलंगाना के अन्य हिस्सों में फैले डेंगू की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कांग्रेस सांसद ए रेवंथ रेड्डी ने सवाल करते हुए कहा, 'स्वर्णिम तेलंगाना के लोग प्रगति भवन के कुत्ते की तरह ही महत्व नहीं रखते हैं?'

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