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17-09-2020
कृषि विधेयकों के विरोध में केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर ने दिया इस्तीफा

नई दिल्ली। कृषि विधेयकों के विरोध में केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर ने केंद्र सरकार से इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले लोकसभा में अकाली दल के प्रमुख सुखबीर बादल ने बिल के विरोध में चेतावनी देते हुए ऐलान किया था कि केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल कृषि संबंधी विधेयकों के विरोध में सरकार से इस्तीफा देंगी। बता दें कि केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल मोदी सरकार में अकाली दल की एकमात्र प्रतिनिधि थीं। हरसिमरत कौर ने इस्तीफे की जानकारी ट्वीट के जरिए दी है। उन्होंने ट्वीट में लिखा है कि मैंने किसान विरोधी अध्यादेशों और कानून के विरोध में केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है। किसानों के साथ उनकी बेटी और बहन के रूप में खड़े होने का गर्व।
लोकसभा में बोलते हुए आज सुखबीर सिंह बादल ने साफ कहा कि शिरोमणि अकाली दल इस बिल का सख्त विरोध करता है। हर बिल, जो देश के लिए हैं, देश के कुछ हिस्से उसे पसंद करते हैं, कुछ हिस्सों में उसका स्वागत नहीं होता है, किसानों को लेकर आए इन तीन बिलों से पंजाब के 20 लाख हमारे किसान प्रभावित होने जा रहे हैं। 30 हजार आढ़तिए, 3 लाख मंडी मजदूर, 20 लाख खेत मजदूर इससे प्रभावित होने जा रहे हैं। सुखबीर बादल ने कहा, 'शिरोमणि अकाली दल किसानों की पार्टी है और वह कृषि संबंधी इन विधेयकों का विरोध करती है।’ निचले सदन में चर्चा के दौरान कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा, ‘ शिरोमणि अकाली दल ने कभी भी यू-टर्न नहीं लिया। बादल ने कहा, 'हम राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथी हैं। हमने सरकार को किसानों की भावना बताई, हमने इस विषय को हर मंच पर उठाया। हमने प्रयास किया कि किसानों की आशंकाएं दूर हों लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।'
लोकसभा में कांग्रेस के अलावा दूसरे विपक्षी दलों ने बिल का विरोध किया है। कांग्रेस, द्रमुक, तृणमूल कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने कृषि उपज एवं कीमत आश्वासन संबंधी विधेयकों को ‘किसान विरोधी’ करार देते हुए गुरुवार को लोकसभा में आरोप लगाया कि इन विधेयकों से जमाखोरी, कालाबाजारी को बढ़ावा मिलेगा तथा उद्योगपतियों एवं बिचौलियों को फायदा होगा जबकि किसान बर्बाद हो जाएंगे। वहीं, भाजपा ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत, स्वावलंबी भारत बनाने के लिए यह कानून बन रहा है जो ऐतिहासिक साबित होगा। ये विधेयक कृषि क्षेत्र में सुधार के लिये महत्वपूर्ण कदम हैं जो किसानों को मजबूत और समृद्ध बनाएंगे।

16-09-2020
लोकसभा में पास हुआ बैंकिंग विनियम (संशोधन) विधेयक, 2020, निर्मला सीतारमण ने कहा-होगा बेहतर प्रबंधन

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मानसून सत्र के दौरान बुधवार को लोकसभा में बैंकिंग विनियमन संशोधन विधेयक, 2020 को पारित कर दिया। लोकसभा में वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक सहकारी बैंकों को नियंत्रित नहीं करता है। सहकारी बैंकों का विनियमन 1965 से ही आरबीआई के पास है। हम कुछ नया नहीं कर रहे। जो नया कर रहे हैं वह जमाकर्ताओं के हित में है। इस बिल में जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिये बेहतर प्रबंधन और समुचित नियमन के जरिये सहकारी बैंकों को बैकिंग क्षेत्र में हो रहे बदलावों के अनुरूप बनाने का प्रावधान किया गया है। यह विधेयक इससे संबंधित अध्यादेश के स्थान पर लाया गया है। विपक्षी दलों के सदस्यों द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या राज्यों से विचार विमर्श किया गया, वित्त मंत्री ने कहा कि जो विषय समवर्ती सूची में होते हैं, उन्हीं पर राज्यों से विमर्श करने की जरूरत होती है लेकिन यह मुद्दा संघ सूची है और इसके लिये राज्यों से चर्चा की जरूरी नहीं है।

बता दें कि, यह विधेयक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को अवश्यकता पड़ने पर सहकारी बैंकों के प्रबंधन में बदलाव करने का अधिकार देता है। इससे सहकारी बैंकों में अपना पैसा जमा करने वाले आम लोगों के हितों की रक्षा होगी। विधेयक में कहा गया है कि आरबीआई को सहकारी बैंकों के नियमित कामकाज पर रोक लगाये बिना उसके प्रबंधन में बदलाव के लिये योजना तैयार करने का अधिकार मिल जायेगा। कृषि सहकारी समितियां या मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र में काम करने वाली सहकारी समितियां इस विधेयक के दायरे में नहीं आयेंगी। वहीं विपक्ष ने इस विधेयक को सहकारी संगठनों को लेकर राज्यों के अधिकारों में हस्तक्षेप बताया था। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने आरोप लगाया कि सरकार सहकारी बैंकों के निजीकरण का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि इससे सहकारी बैंकों की स्वायत्तता खतरे में पड़ जायेगी।

 

 

15-09-2020
एक साल तक सांसदों के वेतन में 30 प्रतिशत की होगी कटौती,विधयेक लोकसभा में हुआ पास

नई दिल्ली। लोकसभा में मंगलवार को संसद सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन (संशोधन) विधेयक, 2020 पास हो गया। इस विधेयक के तहत एक साल तक सांसदों को सैलरी 30 फीसदी कटकर मिलेगी। लोकसभा में ज्यादातर सांसदों ने इस बिल का समर्थन किया, लेकिन उनकी यह मांग थी कि सरकार सांसद निधि में कटौती ना करे। निचले सदन में संक्षिप्त चर्चा के बाद संसद सदस्य वेतन, भत्ता एवं पेशन संशोधन विधेयक 2020 को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी गई। यह विधेयक इससे संबंधित संसद सदस्य वेतन, भत्ता एवं पेशन अध्यादेश 2020 के स्थान पर लाया गया है। इसके माध्यम से संसद सदस्यों के वेतन, भत्ता एवं पेशन अधिनियम 1954 में संशोधन किया गया है। कोरोना वायरस महामारी के बीच इस अध्यादेश को 6 अप्रैल को मंत्रिमंडल की मंजूरी मिली थी और यह 7 अप्रैल को लागू हुआ था। चर्चा में भाग लेते हुए अधिकतर विपक्षी सदस्यों ने कहा कि सांसदों के वेतन में कटौती से उन्हें कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन सरकार को सांसद निधि के निलंबन पर पुनर्विचार करना चाहिए।
लोकसभा में इस बिल पर चर्चा के दौरान अमरावती सांसद समेत कई संसद सदस्यों ने कहा कि केन्द्र सरकार चाहे तो हमारी पूरी सैलरी ले ले, लेकिन एमपी लैड्स फंड पूरा मिलना चाहिए। तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि सरकार हमारा पूरा वेतन ले ले, कोई भी सांसद इसका विरोध नहीं करेगा। लेकिन एमपी लैड्स फंड पूरा मिलना चाहिए। जिससे कि हम लोगों के फायदे के लिए काम कर सकें।उधर, टीएमसी के सांसद सौगत रॉय ने कहा कि जितना पैसा हो आप सांसदों से ले सकते हैं। आप हमारा पूरा वेतन ले सकते हैं लेकिन एमपी लैड्स फंड दे देजिए। हम इसी के सहारे अपने क्षेत्रों में काम करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के पास 303 सांसद हैं तो इसका मतलब ये है क्या कि बाकी सांसदों का कोई महत्व नहीं है।
संसदीय मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने निचले सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि कोविड-19 के कारण उत्पन्न अभूतपूर्व स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं। यह कदम उनमें से एक है। उन्होंने कहा कि परोपकार की शुरूआत घर से होती है, ऐसे में संसद के सदस्य यह योगदान दे रहे हैं और यह छोटी या बड़ी राशि का सवाल नहीं है बल्कि भावना का है। जोशी ने कहा कि प्राकृतिक आपदा आती है तब एक विशिष्ट क्षेत्र को प्रभावित करती है, युद्ध दो देशों की सीमाओं को प्रभावित करता है। लेकिन कोविड-19 ने पूरे विश्व को प्रभावित किया है, दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने 20 लाख करोड़ रूपये के पैकेज के साथ ही 1.76 लाख करोड़ रूपये की गरीब कल्याण योजना की शुरूआत की। सरकार ने मनरेगा का आवंटन बढ़ाया और ग्रामीण आधारभूत ढांचे के लिये काम किया ।
सांसद क्षेत्र विकास निधि (एमपीलैड) के बारे में सदस्यों के सवालों के जवाब में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सांसद निधि को अस्थायी रूप से दो वर्षो के लिये निलंबित किया गया है। उन्होंने कहा कि लोगों की मदद के लिये कुछ कड़े फैसले लेने की जरूरत थी। चर्चा में हिस्सा लेते हुए लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि वह एक पिछड़े हुए क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और ऐसे में सांसद निधि नहीं होने से विकास कार्य प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि सांसद निधि का अधिकतर पैसा गांवों, अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों के लिए खर्च होता है और ऐसे में यह निधि निलंबित करके सरकार इनके खिलाफ काम कर रही है। कांग्रेस के ही डीन कुरियाकोस ने कहा कि सरकार को सांसद निधि निलंबित करने के बजाय धन जुटाने के लिए दूसरे साधनों पर विचार करना चाहिए था।
भाजपा के विजय बघेल ने कहा कि कोरोना महामारी के समय सभी सांसदों ने अपने क्षेत्रों के लिए काम किया और अब उन्हें इस विधेयक का समर्थन करके भी अपना योगदान देना चाहिए। द्रमुक के कलानिधि वीरस्वामी, वाईएसआर कांग्रेस के एम भारत और कुछ अन्य सदस्यों ने भी सांसद निधि के निलंबन का विरोध किया। 

14-09-2020
लोकसभा में याद किए गए अजीत जोगी,परिवार ने माना आभार

रायपुर। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश प्रवक्ता भगवानू नायक ने कहा कि,कोरोना महामारी के बीच संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हुआ। लोकतंत्र की सबसे बड़ी  पंचायत लोकसभा, संसद में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी व छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री व पूर्व लोकसभा सदस्य (12वीं व 14वीं लोकसभा ) स्व. अजीत जोगी सहित 13 सदस्यों को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई है। साथ ही सदन की कार्यवाही एक घंटे के लिए स्थगित की गई। जोगी परिवार के सदस्य स्व. अजीत जोगी की धर्मपत्नी रेणु जोगी, पुत्र अमित अजीत जोगी व पुत्र वधु ऋचा जोगी ने छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से लोकसभा  के सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।

16-08-2020
संसद में दिखेगा कोरोना वायरस का असर,बैठक व्यवस्था में होगा बदलाव,की गईं खास तैयारियां

नई दिल्ली। कोविड-19 के मद्देनजर पहली बार कई तरह की कवायदों के साथ संसद के मॉनसून सत्र के लिए तैयारियां की जा रही हैं। संक्रमण से बचाव के लिए लोकसभा और राज्यसभा में बैठने की व्यवस्था में भी बदलाव किया जा रहा है। उचित दूरी का पालन करते हुए सदस्यों के बैठने के लिए दोनों चैंबरों और दीर्घाओं का इस्तेमाल होगा। अधिकारियों ने इस बारे में बताया। अगस्त के अंतिम सप्ताह या सितंबर के आरंभ में मॉनसून सत्र की शुरुआत होने की संभावना है।
राज्यसभा सचिवालय के मुताबिक सत्र के दौरान ऊपरी सदन के सदस्यों को दोनों चैंबर और दीर्घाओं में बैठाया जाएगा। भारतीय संसद के इतिहास में पहली बार इस तरह की व्यवस्था होगी जहां 60 सदस्य चैंबर में बैठेंगे और 51 सदस्य राज्यसभा की दीर्घाओं में बैठेंगे। इसके अलावा बाकी 132 सदस्य लोकसभा के चैंबर में बैठेंगे। लोकसभा सचिवालय भी सदस्यों के बैठने के लिए इसी तरह की व्यवस्था कर रहा है।

दीर्घाओं से भागीदारी के लिए पहली बार बड़े डिस्प्ले वाली स्क्रीन और कंसोल लगाए जाएंगे। दोनों सदनों के बीच विशेष तार बिछाए जाएंगे और कुर्सियों के बीच पॉलीकार्बोनेट शीट की व्यवस्था होगी। राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू और लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला ने 17 जुलाई को बैठक कर सत्र चलाने के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार-विमर्श करने के बाद दोनों सदनों के चैंबरों और दीर्घाओं का इस्तेमाल करने का फैसला किया।
नायडू ने अधिकारियों को अगस्त के तीसरे सप्ताह तक सत्र के लिए तैयारियां पूरी कर लेने का निर्देश दिया था, ताकि इस व्यवस्था का मुआयना हो जाए और इसे अंतिम रूप दिया जा सके। राज्यसभा सचिवालय भी इस काम के लिए पिछले दो सप्ताह से लगातार काम कर रहा है।

सूत्रों ने बताया कि आम तौर पर दोनों सदनों में एक साथ बैठकें होती हैं लेकिन इस बार असाधारण परिस्थिति के कारण एक सदन सुबह के समय बैठेगा और दूसरे की कार्यवाही शाम में होगी। कोरोना वायरस महामारी के कारण संसद के बजट सत्र की अवधि में कटौती कर दी गयी थी और 23 मार्च को दोनों सदनों को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया था। परिपाटी के तहत अंतिम सत्र से छह महीने के अंत के पहले संसद का सत्र आहूत होता है।
अधिकारियों ने बताया कि कोविड-19 का प्रसार रोकने के लिए सामाजिक दूरी के नियमों के पालन के साथ पहली बार सदन में बैठने की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने बताया कि विभिन्न दलों को संख्या के आधार पर राज्यसभा के चैंबर और दीर्घाओं में सीट आवंटित किए जाएंगे और बाकी सदस्यों को सत्तारूढ़ दलों और अन्य के लिए दो खंड में लोकसभा के चैंबर में बैठाया जाएगा। राज्यसभा चैंबर के भीतर प्रधानमंत्री, सदन के नेता, विपक्ष के नेता और अन्य दलों के नेताओं के लिए सीटें चिन्हित की जाएंगी। पूर्व प्रधानमंत्री-मनमोहन सिंह और एचडी देवेगौड़ा के साथ ही केंद्रीय मंत्रियों और राज्यसभा सदस्य-रामविलास पासवान और रामदास आठवले के लिए भी सदन के चैंबर में चिन्हित सीटें होंगी। अन्य मंत्रियों को सत्तारूढ़ सदस्यों के लिए तय सीटों पर बैठाया जाएगा।

 

28-07-2020
मुख्यमंत्री से हाथ जोड़कर प्रार्थना कोरोना पीड़ितों की सुध लें, बढ़ता संक्रमण सरकार की उदासीनता का परिणाम : सुनील सोनी

रायपुर। रायपुर लोकसभा के सांसद सुनील सोनी ने राज्य में कोरोना के बढ़ते मामलों के लिए सरकार पर उदासीनता, लापरवाही और असंवेदनशीलता का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोरोना पॉजीटिव पाए जा रहे मरीजों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। मरीजों को चार-चार दिन बीत जाने के बाद भी अस्पतालों तक नहीं ले जाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की गरीब जनता हर मोर्चे पर संघर्ष कर रही है उनके पास सरकार के मंत्रियों की तरह घरों में पांच-सात कमरे नहीं है कि वे खुद को क्वारंटाइन कर लें। हालात ऐसे हैं कि लोग बेहद भयभीत हैं। सांसद सोनी ने कहा कि मैं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से हाथ जोड़कर प्रार्थना करता हूं कि पीड़ित लोगों की सुध लें।

सुनील सोनी ने कहा कि प्रदेश सरकार लगातार कोरोना को लेकर बड़े बड़े दावे करती रही है। 20 हजार मरीजों को रखने की तैयारी का दावा करने वाली सरकार ने बीते महीनों में कैसी व्यवस्था बनाई, क्या तैयारियां की है जो आज 1200 मरीज सामने आने पर हाथ खड़े कर प्राइवेट अस्पताल का मुंह ताकना पड़ रहा है। आम जनता पर निजी अस्पताल में इलाज के खर्च का बोझ डालने की स्तिथि आ गयी है। सरकार को अपनी जिम्मेदारियों से भागना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कल्पना कर के ही डर लगता है कि यदि प्रदेश में एम्स न होता तो क्या स्थिति होती क्योंकि यदि एम्स की सेवा को हटा दें तो प्रदेश सरकार ने सात सौ मरीजों को भी नहीं रखा होगा।

सांसद सुनील सोनी ने कहा कि प्रदेश सरकार की गंभीरता और संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से सहज ही लगाया जा सकता है कि प्रदेश में लोगों का सैम्पल लेने के बाद कई-कई दिनों तक रिपोर्ट नहीं दी जा रही है, जिसका ताजा उदाहरण अभी बलौदाबाजार और भाटापारा में देखने मिला लोग रिपोर्ट के इंतजार में परेशान है, भय का वातावरण निर्मित हो रहा है। उन्होंने कहा कि यदि प्राइवेट हॉस्पीटल को अनुमति दी गई है, तो वहां टेस्ट की संख्या बढ़ाने की दिशा में सरकार को काम करना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम केयर्स फंड में आई राशि से करोड़ों रुपए राज्य सरकार को दिए हैं। उस पैसे से मरीजों के इलाज की व्यवस्था सरकार को करनी चाहिए। सांसद सुनील सोनी ने कहा कि आज हमारी मजबूरी है कि हम धरना-प्रदर्शन, आंदोलन नहीं कर सकते। सरकार मजबूरी का फायदा उठा रही है। सरकार जनता की सुध ले गंभीरता दिखाए। उन्होंने कहा कि सांसद बनने के बाद से आज तक कभी इतना दुखी नहीं हुआ, पर लोगों की तकलीफ देखकर मन बेहद दुखी है।

26-06-2020
छाया वर्मा का संसद रत्न पुरस्कार के लिए चयन, 10 सांसदों का होगा सम्मान

रायपुर। प्रदेश के लिए गौरव की बात है कि राज्यसभा सदस्य छाया वर्मा का चयन संसद रत्न पुरस्कार के लिए हुआ है। 2 राज्यसभा और 8 लोकसभा सदस्यों को सत्रहवीं लोकसभा के प्रथम वर्ष के दौरान, उनके प्रदर्शन के आधार पर विभिन्न श्रेणियों के तहत चयन किया गया है। प्राइम प्वाइंट फाउंडेशन पूर्व राष्ट्रपति स्व.एपीजे अब्दुल कलाम के सुझाव के बाद 2010 से संसद रत्न पुरस्कार के साथ लोकसभा में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले सांसदों को सम्मानित कर रहा है। संसद रत्न पुरस्कार 2020 के लिए नामित सांसदों में राज्यसभा सदस्य छाया वर्मा, विशम्भर प्रसाद निषाद और लोकसभा सदस्य सुप्रिया सुले, सुभाष रामराव भामरे, हीना गावित, अमोल रामसिंग कोल्हे, शशि थरूर, निशिकांत दुबे, अजय मिश्रा, राममोहन नायडू है। राज्यसभा के वर्तमान सांसदों को सम्मानित करने की इस श्रेणी को इस साल शुरू किया गया है।

प्राइम प्वाइंट फाउंडेशन के अनुसार भर्तृहरि महताब,सुप्रिया सुले और श्रीरंग अप्पा बार्ने को 16वीं लोकसभा में निरंतर गुणात्मक प्रदर्शन के लिए प्रतिष्ठित संसद महारत्न पुरस्कार प्राप्त होगा। यह पुरस्कार पांच साल में एक बार दिया जाता है। पुरस्कार पाने वालों का चयन संसदीय कार्य राज्यमंत्री अर्जुनराम मेघवाल की अध्यक्षता में आयोजित तीन सदस्यीय निर्णायक मंडली की ओर से किया गया। अन्य दो सांसद एनके प्रेमचंद्रन और श्रीरंग अप्पा बार्ने हैं। तीनों जूरी सदस्य पिछली लोकसभा में संसद रत्न पुरस्कारों के उत्कृष्ट सांसद और प्राप्तकर्ता रहे हैं। मेघवाल के अनुसार नागरिक समाज से सांसदों की मान्यता और प्रदर्शन समीक्षा से लोकतंत्र को मजबूत करने में मदद मिलती है।

10-05-2020
कटघोरा का जनजीवन हो जल्द सामान्य : ज्योत्सना महंत

कोरबा। कोरबा लोकसभा क्षेत्र की सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत ने कोरबा व कटघोरा को कोरोना से संकटमुक्त करने में प्रशासन व नागरिकों के सहयोग की सराहना कर कटघोरा का जनजीवन जल्द ही सामान्य होने की अपेक्षा जाहिर की है। सांसद ने कहा है कि कटघोरा में बीते 24 दिन से एक भी केस नहीं है। 6 अप्रैल से पूरे नगर की सीमा सील है। प्रशासन व स्वास्थ्य अमला के कर्तव्यनिष्ठा से कोरोना पर नियंत्रण पाया जा सका है। अब कटघोरा क्षेत्र का भी जनजीवन सामान्य होना चाहिए और नागरिकों को छूट मिले। सांसद ने जिला व संसदीय क्षेत्रवासियों से कहा कि लॉकडाउन में लागू नियमों का पालन करें। उन्होंने संकट के इस दौर में प्रशासन, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पुलिस विभाग व नागरिकों के सहयोग को सराहा है। संकट की घड़ी में घर पहुंच सेवा देने वाले वालंटियर्स व कोरोना वारियर्स के सहयोग की भी प्रशंसा की है। सांसद महंत ने कलेक्टर किरण कौशल से चर्चा कर जनजीवन सामान्य करने की दिशा में नियमानुसार छूट देने का आग्रह किया है। कटघोरा के हालात पर सांसद ने कटघोरा के स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी चर्चा की है और जल्द ही हालात सामान्य होने के मध्य जनजीवन भी सामान्य होने की अपेक्षा जताई है।

27-04-2020
अधीर रंजन चौधरी ने कहा, कोरोना के खिलाफ जंग में अमेरिका और यूरोप से आगे हैं भारत

नई दिल्ली। लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के नेता और पश्चिम बंगाल से सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में केंद्र और राज्य सरकारों की सराहना की है। उन्होंने कहा है कि इस लड़ाई में अमेरिका और यूरोप के मुकाबले भारत कहीं आगे है और भारत के एक मॉडल देश के रूप में उभरने की संभावना है। अधीर रंजन चौधरी ने कहा, कोविड19 से लड़ने के लिए केंद्र,राज्य सरकार और डॉक्टरों ने अच्छा काम किया है। जब हम अमेरिका और यूरोप को देखते हैं तब पता चलता हैं कि हम उनसे बहुत आगे हैं। अगर हम कोविड से लड़ने के लिए ऐसे ही ठोस कदम उठाते रहे तो आने वाले दिनों में भारत एक मॉडल देश के रूप में उभरने की संभावना है।”

20-04-2020
लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय में आज से शुरू होगा कामकाज, 24 मार्च से स्थगित था  काम

नई दिल्ली। संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा के सचिवालय में सोमवार से कामकाज शुरु हो जाएगा। दोनों सदनों के सचिवालय का कामकाज कोविड-19 के मद्देनजर मार्च के अंतिम सप्ताह से बंद था। लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय द्वारा जारी आधिकारिक आदेश से यह जानकारी प्राप्त हुई है। लोकसभा और राज्यसभा के सचिवालय में 24 मार्च से कामकाज अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था। संसद का बजट सत्र 3 अप्रैल को समाप्त होना था, लेकिन कोरोना संकट के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही निर्धारित समय से पहले ही स्थगित कर दी गई थी। राज्यसभा और लोकसभा सचिवालय के अधिकारिक आदेश के अनुसार यह सोमवार से काम करना शुरू कर देगा और सभी संयुक्त सचिव स्तर और उसके उपर के अधिकारी कार्यालय से काम करेंगे। इनके अलावा अन्य अधिकारी बारी-बारी से काम करेंगे। आदेश में आगे कहा गया है कि कार्यालय से काम करते हुए सचिवालय के कर्मचारी सामाजिक दूरी की व्यवस्था का पालन करेंगे। ई-कार्यालय में फाइल इलेक्ट्रानिक माध्यम से भेजे जायेंगे।

08-04-2020
लॉक डाउन पर 11 अप्रैल को प्रधानमंत्री करेंगे सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से चर्चा

नई दिल्ली। कोरोना वायरस और लॉक डाउन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को लोकसभा और राज्यसभा में विभिन्न दलों के नेताओं के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की। बैठक में पीएम मोदी ने विपक्षी दलों को देश में लॉकडाउन बढ़ाने के संकेत दिए। पीएम ने इस दौरान कहा कि वह 11 अप्रैल को फिर से सभी राज्यों के सीएम से बात करेंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि 14 अप्रैल को देशव्यापी लॉकडाउन को खत्म करना संभव नहीं होगा। क्योंकि देश ने कोरोना वायरस बीमारी के 5000 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। सांसदों के साथ बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि देश में स्थिति 'सामाजिक आपातकाल' के समान है। इसके लिए कड़े फैसलों की जरूरत है और हमें सतर्क रहना चाहिए। राज्यों, जिला प्रशासन और विशेषज्ञों ने वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लॉकडाउन के विस्तार का सुझाव दिया है।

पीएम के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बातचीत में कांग्रेस से गुलाम नबी आजाद, टीएमसी से सुदीप बंद्योपाध्याय, शिवसेना से संजय राउत, बीजेडी से पिनाकी मिश्रा, एनसीपी से शरद पवार, समाजवादी पार्टी से रामगोपाल यादव, अकाली देल से सुखबीर सिंह बादल, बीएसपी से सतीश चंद्र मिश्रा, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी से विजय साई रेड्डी और मिथुन रेड्डी, जेडीयू से राजीव रंजन सिंह, एलजेपी से चिराग पासवान आदि शामिल हुए। भाजपा की ओर से केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, थावरचंद गहलोत, अमित शाह, प्रह्लाद जोशी, अर्जुनराम मेघवाल, वी.मुरलीधरन, नरेंद्र तोमर और निर्मला सीतारमण मौजूद रहीं। पीएम मोदी के साथ हुई नेताओं की इस बैठक ने कई अहम मांगे की गई हैं। इसमें एफआरबीएम राजकोषीय सीमा को 3 से 5 फीसदी करने, राज्यों को उनका बकाया देने, राहत पैकेज को जीडीपी के एक फीसदी से बढ़ाकर 5 फीसदी करने,कोरोना टेस्ट को फ्री करने और पीपीई समेत सभी मेडिकल इक्विपमेंट को मुहैया कराने की अपील की गई है।

 

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