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16-10-2019
नोटिस देने के बाद भी बंगला खाली नहीं करने वाले सांसदों पर होगी कड़ी कार्यवाही, जानिए क्या...

नई दिल्ली। चुनाव हारने के बाद भी कई सांसद अपने सरकारी बंगलो में डटे हुए हैं। इन्हें कई नोटिस दी जा चुकी है मगर फिर भी यह बंगला खाली नहीं कर रहे हैं। अब ऐसे सांसदों के खिलाफ संसद की संसदीय समिति कड़ी कार्रवाई करने जा रही है। संसदीय समिति ने ऐसे सांसदोंं की पहचान कर ली है। इन 27 पूर्व सांसदों के खिलाफ संसद की आवासीय समिति कड़ी कार्रवाई की तैयारी में है। समिति ने इन घरों के बिजली, पानी और गैस कनेक्शन काटने का निर्देश दिया है। इसमें पुलिस की मदद भी ली जाएगी। आवास समिति ने इस मकसद से दिल्ली पुलिस से संपर्क किया है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आवंटित आवास को ये पूर्व सांसद खाली कर दें। नियमों के मुताबिक, पिछली लोकसभा भंग होने के एक महीने के बाद इन पूर्व सांसदों को बंगला खाली करना होता है। इन पूर्व सांसदों के बंगले खाली नहीं करने से मौजूदा संसद के निर्वाचित नए सांसदों को अपने राज्यों के गेस्ट हाउस या वेस्टर्न कोर्ट में रहना पड़ रहा है। नए सांसदों के कई बार अनुरोध करने के बावजूद समिति उन्हें बंगला आवंटित नहीं कर पा रही है।

13-10-2019
सांसद सुनील सोनी ने किया कपड़े के थैलों का वितरण, कही ये बात....

रायपुर। सांसद सुनील सोनी ने रविवार को पुरानी बस्ती शीतला बाजार में कपड़े के थैलों का वितरण किया। सांसद सोनी का कहना है कि वह जब थैला वितरण के लिए बाजार पहुंचे तो उन्हें यह देखकर बेहद खुशी हुई कि लोग सब्जी बाजार में खरीदारी करने के लिए घर से ही कपड़े का थैला लेकर पहुंचे हुए थे। उन्होंने कहा कि कही न कही लोग प्रधानमंत्री के अभियान से जुड़ रहे हैं और सहर्ष स्वीकार भी रहे हैं। सुनील सोनी ने कहा कि वे लगातार लोकसभा क्षेत्र में थैलों का वितरण करेंगे। बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी ने अपील की है कि सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग न करें। पीएम मोदी ने कहा कि सिंगल यूज प्लास्टिक से हमें छुटकारा पाना ही होगा। हमें कोशिश करनी है कि अपने दफ्तरों, घरों और अपने आसपास के वातावरण को सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त करना है। इसके तहत देश भर में प्लस्टिक मुक्त भारत अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में आज रायपुर के सांसद सुनील सोनी ने कपड़े के थैलों का वितरण किया।

29-09-2019
एक देश एक चुनाव के एजेंडे पर तेजी से बढ़ रही मोदी सरकार, जाने कब होगा एलान

नई दिल्ली। मोदी सरकार देश में एक साथ चुनाव कराने के अपने कोर एजेंडे की ओर तेजी से बढ़ रही है। संभावना है कि अगले वर्ष नवंबर तक राज्यसभा में एनडीए का बहुमत होने के बाद सरकार एक साथ चुनाव कराने के लिए आवश्यक संविधान संशोधन को पारित करने पर आगे बढ़ेगी। सरकार 2022 में आजादी की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर पूरे देश में 2023 में एक साथ चुनावों की घोषणा करने की संभावना बन सकती है। इसके लिए लोकसभा का कार्यकाल दो वर्ष कम किया जाएगा तथा विधानसभाओं का कार्यकाल कम या ज्यादा करने की बात होगी। एनडीए सरकार को सामान्य बहुमत राज्यसभा में अगले साल नवंबर में मिल जाएगा।

क्योंकि राज्यसभा की लगभग 55 सीटें असम, महाराष्ट्र, झारखंड, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल, उत्तराखंड सीटें वर्ष 2020 अप्रैल में खाली हो रही हैं। अकेले यूपी से 10 सीटें हैं और एक को छोड़ ये सभी सीटें भाजपा द्वारा जीते जाने की संभावना है क्योंकि भाजपा की प्रदेश में दो तिहाई बहुमत (309 सीटें) की सरकार है। भाजपा का जोर पार्टी के स्तर पर बहुमत लेने का है, मगर इसमें उसे वर्ष 2021-22 तक इंतजार करना होगा। अगले साल भाजपा असम, ओडिशा, हिमाचल और उत्तराखंड से भी कुछ सीटें हासिल कर सकती है। कुछ राज्यसभा सीटें वह मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में खोएगी। सरकारों को स्थायित्व देने के लिए दल बदल कानून को भी सरकार को देखना पड़ेगा। सदस्यों को एक दल से दूसरे दल में आना जाना उदार करना होगा। एकसाथ चुनाव कराने को जहां मानव संसाधनों और कोष की भारी बचत होगी, वहीं कुछ दिक्कतें भी सामने आएंगी। जैसे, मिलीजुली सरकार बनने पर कोई दल समर्थन वापस लेता है और सरकार को अल्पमत में ले आता है तो क्या होगा। हालांकि इसे मुद्दे का हल समर्थन वापस लेने वाले दल पर वैकल्पिक सरकार बनाने की शर्त रख कर किया जा सकता है। या राज्य को राष्ट्रपति शासन के अधीन रखा जा सकता है या वहां दोबारा चुनाव करवाए जा सकते हैं जो बचे हुए कार्यकाल के लिए होंगे।  

27-09-2019
अजा वर्ग को 16 प्रतिशत आरक्षण वापस करने की मांग, राज्यपाल से हस्तक्षेप करने निवेदन

रायपुर। प्रदेश के अनुसूचित जाति वर्ग द्वारा छत्तीसगढ़ सरकार से 16 प्रतिशत आरक्षण वापस लौटाने की मांग की गई है। अपनी 8 सूत्रीय मांगों को लेकर ओमप्रकाश खुंटे पूर्व अध्यक्ष, प्रगतिशील छग सतनामी समाज जिला बलौदाबाजार (युवा प्रकोष्ठ) एवं महामंत्री प्रदेश कांग्रेस कमेटी अजा विभाग (छग) ने राज्यपाल से निवेदन किया है कि वे 16 प्रतिशत आरक्षण लौटाने में सहयोग प्रदान करें। मांगें नहीं माने जाने पर 29 सितंबर को सुबह 11 बजे राजधानी के ईदगाह भाठा में समाज के लोगों से एकजुट होने की अपील की गई है। ओमप्रकाश खुंटे का कहना है कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार बनने से पहले कांग्रेस पार्टी ने चुनावी घोषणा पत्र में पुन: 16 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कही थी। आज सरकार बनने पर आरक्षण 16 प्रतिशत नहीं किया गया, जिससे सतनामी समाज सहित अनुसूचित जाति के अंतर्गत आने वाले सभी समाज अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे है।13 प्रतिशत अजा, 32 प्रतिशत अजजा,  27 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग, 10 प्रतिशत सवर्ण इस तरह से  82 प्रतिशत आरक्षण प्रदेश सरकार दे रही है। कहा जा रहा है कि जनगणना अनुसार सबको अधिकार दिया जा रहा है। ऐसा है तो 3 प्रतिशत आबादी वाले को 10 प्रतिशत आरक्षण क्यों? 23 प्रतिशत आबादी वाले अजा को 1 प्रतिशत बढ़ोत्तरी कर 13 प्रतिशत आरक्षण देकर सरकार वाहवाही लूट रही है। हमारी मांग है कि यदि सरकार सर्वसमाज की हितैषी है तो 85 प्रतिशत आरक्षण कर हमें भी 16 प्रतिशत आरक्षण दे। ओमप्रकाश खुंटे का कहना है कि हमारा समाज किसी समाज के खिलाफ  नहीं है, सबको अधिकार मिलना चाहिए। पर हमारे समाज के साथ मजाक किया गया है। पूर्व सरकार ने जनसंख्या को आधार मानकर अजा का 16 प्रतिशत आरक्षण को घटाकर 12 प्रतिशत कर दिया था, जिसका विरोध कर समाज के विभिन्न संगठनों ने पूरे प्रदेश में आंदोलन किया था, जिसका समर्थन कांग्रेस पार्टी ने भी किया था। विभिन्न संगठन और व्यक्तिगत रिट् पिटीसन पूर्व सांसद पीआर खुंटे व पूर्व विधायक पद्मा मनहर ने हाईकोर्ट बिलासपुर में लगाई थी, जो आज तक लंबित है, क्योंकि आरक्षण 50 प्रतिशत से ऊपर नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट का अनुच्छेद 15 (4)16 (4) के अधीन आदेश है,जबकि पूर्ववर्ती सरकार ने आरक्षण को 50 प्रतिशत बढ़ाकर 58 प्रतिशत कर दिया। वर्तमान सरकार ने 58 प्रतिशत को बढ़ाकर 82 प्रतिशत कर दिया। ओमप्रकाश खुंटे  ने  8 सूत्रीय मांगों के बारे में कहा कि संविधान संरक्षित 50 प्रतिशत आरक्षण पुन: लागू किया जाए। अनुसूचित जाति का 16 प्रतिशत आरक्षण पुन: लागू किया जाए। 10 विधानसभा अजा, 29 विधानसभा अजजा के लिए सुरक्षित विधायक हैं, ऐसे में 39  सदस्य आरक्षित विधानसभा क्षेत्र है, इसलिए प्रदेश का मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री अनुजाति या अनुसूचित जनजाति से हो। जिले में रोस्टर अनुपात में आरक्षण लाभ दिया जाए। पाठ्यपुस्तक निगम में समाज से एक पदेन सदस्य रखा जाए ताकि गुरु बाबा घासीदास के जीवन चरित्र से छेड़छाड़ न हो और समाज से अनुमोदन के बाद ही प्रकाशित किया जाए। पाठ्यक्रम में भारतीय संविधान को शामिल किया जाए। अगले परिसीमन में छत्तीसगढ़ की 24 विधानसभा, 3 लोकसभा व 1 राज्यसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया जाए।  बलौदाबाजार जिला को संत गुरु घासीदास जिला का नाम दिया जाए।

 

31-08-2019
सीएम भूपेश बघेल ने पूर्व सांसद रजनीगंधा देवी के निधन पर किया शोक व्यक्त 

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पूर्व सांसद रजनीगंधा देवी के निधन पर शोक प्रकट किया है। उन्होंने ईश्वर से मृतात्मा को शांति प्रदान करने तथा शोकाकुल परिवार को दुख की इस घड़ी को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है। रजनीगंधा देवी का 82 वर्ष की उम्र में शनिवार सुबह रायपुर के एक अस्पताल मे निधन हो गया। वे सारंगढ के राजा नरेशचन्द्र सिंह की बेटी थीं और रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद रह चुकी थीं। वे 1967 मे चौथी लोकसभा के लिए निर्वाचित हुई थीं। 

12-08-2019
फोटोयुक्त निर्वाचक नामावलियों का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण

कोरबा। भारत निर्वाचन आयोग के निदेर्शानुसार 1 जनवरी 2020 की अर्हता तिथि के संदर्भ में फोटोयुक्त निर्वाचक नामावलियों का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण 2020 कार्यक्रम 1 से 31 अगस्त तक चलाया जा रहा है। इसके तहत पिछले लोकसभा निर्वाचन 2019 के दौरान मतदाता सूचियों की विसंगति एवं विलोपन को दृष्टिगत रखते हुए भारत निर्वाचन आयोग ने विशेष मतदाता सत्यापन कार्यक्रम प्रारंभ किया है। इसके तहत निर्धारित अवधि 1 अगस्त से 31 अगस्त तक मतदाताओं को प्रेरित किया जाएगा कि वे निर्धारित दस्तावेजों में भारतीय पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड, राशन कार्ड, सरकारी अर्द्धशासकीय पहचान पत्र, बैंक पासबुक और किसान पहचान पत्र प्रस्तुत कर अपना सत्यापन करा सकते हैं। मतदाता स्वयं वोटर हेल्पलाइन 1950, मोबाइल एप, एनवीएसपी पोर्टल या लोक सेवा केंद्र जाकर अपना सत्यापन करा सकते हैं।

साथ ही मतदाता सूची में नाम, सरनेम, लिंग, आयु, जन्मतिथि, फोटो एवं अन्य त्रुटियों को भी इस दौरान सुधारा जाएगा। जिले के सभी मतदान केंद्रों पर 15 अक्टूबर को मतदाता सूची का प्रारंभिक प्रकाशन किया जाएगा। इस दौरान मतदाता अपने मतदान केंद्र पर जाकर मतदाता सूची में अपने नाम का अवलोकन कर सकते हैं। नाम जुड़वाने, नाम विलोपित करवाने एवं त्रुटि सुधार करने की कार्यवाही फार्म 6, फार्म 7, फार्म 8 एवं फार्म 8‘क’ के माध्यम से की जाएगी। इसके साथ ही बूथ लेवल के अधिकारी भी समांतर रूप से घर-घर जाकर ईवीपी (मतदाता सत्यापन कार्यक्रम) के तहत मतदाताओं  का सत्यापन करेंगे। कामकाजी लोगों व महाविद्यालयीन विद्यार्थियों की सहूलियत के लिए इस दौरान दो शनिवार और दो रविवार को भी विशेष शिविर का आयोजन किया जाएगा। शनिवार 2 नवंबर, रविवार 3 नवंबर, शनिवार 9 नवंबर तथा रविवार 10 नवंबर को मतदान केंद्रों में आयोजित विशेष शिविरों में मतदाता सूची में नाम जोड़ने और संशोधन के लिए आवेदन लिए जाएंगे। अतएव विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत जिन लोगों की आयु 1 जनवरी 2020 को 18 वर्ष पूर्ण हो जाएगी वे अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वा सकते हैं।

06-08-2019
लोकसभा में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल पास

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को लोकसभा में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल पेश किया। बिल पर चर्चा के बाद सदन में वोटिंग हुई। जम्मू कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाने वाला बिल पास हो गया है। इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पहले हुई वोटिंग को रद्द कर फिर से कराने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि, मशीनों ने ठीक से काम नहीं किया है। जिसके बाद से फिर से पुर्नमतदान का आदेश दिया। इस बिल के पक्ष में 366 वोट पड़े और विपक्ष में 66 वोट पड़े, जबकि एक सदस्य अनुपस्थित रहा। पहले लोकसभा में अमित शाह की ओर से लाया गया संकल्प स्वीकार किया गया है। इसके बाद लोकसभा में राज्य पुनर्गठन बिल और जम्मू कश्मीर आरक्षण बिल पेश किया गया। इस पर वोटिंग हुई जिसमें बिल के पक्ष में 366 और विपक्ष में 66 वोट पड़े। एक सांसद गैर मौजूद रहा जबकि कुल 433 सदस्यों ने वोटिंग में हिस्सा लिया। इसके बाद लोकसभा में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को रद्द करने का प्रस्ताव रखा गया। इसके बाद इस प्रस्ताव पर हुई वोटिंग में पक्ष में 351 वोट पड़े जबकि विरोध में 72 वोट पड़े। इसके बाद सदन के पटल पर राज्यसभा से पास हो चुके जम्मू कश्मीर आरक्षण संशोधन बिल पर वोटिंग हुई। इसके पक्ष में 370 और विपक्ष में 70 वोट पड़े।

 

06-08-2019
लोकसभा में अनुच्छेद-370 को लेकर केन्द्रीय मंत्री अमित शाह और अधीर रंजन में बहस 

नई दिल्ली। लोकसभा में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस की किरकिरी हुई है। दरअसल, कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने अनुच्छेद-370 पर ऐसा सवाल पूछा कि गृहमंत्री अमित शाह ने उनकी खिंचाई कर दी। अमित शाह ने कहा, 'इस मामले में कांग्रेस को अपना रुख साफ करना चाहिए। कांग्रेस बताए कि क्या कश्मीर को संयुक्त राष्ट्र (यूएन) मॉनिटर करे।' दरअसल, कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि कश्मीर का मसला यूएन में है। ऐसे में अगर यूएन मॉनिटर कर रहा है तो इस मामले में सरकार कैसे बिल बना रही है। अधीर रंजन के इस बयान पर अमित शाह ने कांग्रेस को घेरा और कहा कि कांग्रेस अपना रुख साफ करे। क्या वह चाहती है कि कश्मीर मामले में यूएन मॉनिटर करे।

31-07-2019
समाजवादी पार्टी के सांसद आज़म खान के विधायक बेटे को पुलिस ने लिया हिरासत में 

नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के वरिष्‍ठ नेता और रामपुर लोकसभा सीट से सांसद आजम खान के विधायक बेटे अब्‍दुल्‍लाह आजम खान को जौहर यूनिवर्सिटी से रामपुर पुल‍िस ने हिरासत में ले लिया है। अब्दुल्लाह आज़म पर आऱोप है कि वे जौहर यूनिवर्सिटी मामले में पुलिस द्वारा की जा रही जांच में बाधा पहुंचा रहे थे। बता दें कि आज़म खान की जौहर यूनिवर्सिटी में यूपी पुलिस द्वारा मंगलवार से छापेमारी की कार्यवाही की जा रही है, जो आज भी जारी है। आज़म खान के विधायक पुत्र अपने समर्थकों के साथ यूनिवर्सिटी पहुँचे पुलिस की कार्यवाही में बाधा डाली। जांच में बाधा उत्पन्न करने के कारण उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

 

26-07-2019
बाल मृत्यु दर कम करना सरकार की प्राथमिकता

नई दिल्ली। सरकार ने बाल मृत्यु दर को कम करने की प्राथमिकता दोहराते हुए लोकसभा में शुक्रवार को कहा कि सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का कार्यान्वयन कर रही है और बाल उत्तरजीविता तथा नवजात शिशु एवं पांच वर्ष से कम आयु की मृत्यु दर से जुड़े कारकों का समाधान करना उनका मुख्य उद्देश्य है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न के उत्तर में यह भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि पिछले दशक में देश में पांच साल से कम आयु की मृत्यु दर साल 2008 में प्रति एक हजार जीवित शिशु जन्म पर 69 से कम होकर 2017 में प्रति एक हजार जीवित शिशु जन्म पर 37 हो गयी है। इस अवधि में राष्ट्रीय स्तर पर नवजात शिशु मृत्यु दर 53 से कम होकर 33 हो गयी है। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों में पिछले दशक के दौैरान पांच वर्ष से कम आयु की मृत्यु दर में गिरावट आयी है। इसके अलावा सरकार राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम ( आरबीएसके) का भी कार्यान्वयन कर रही है जिसके तहत नवजात एवं शिशु स्वास्थ्य संबंधी जांच और उत्तरजीविता की गुणवत्ता में सुधार के लिए जन्म विकारों, रोगों, खामियों और विकासात्मक विलंब हेतु नि:शुल्क शल्य चिकित्सा सहित प्रारंभिक कार्याकलाप सेवाएं एवं परिवारों का जेब खर्च कम करना शामिल है। हर्षवर्धन ने एक अन्य पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा कि आयुष्मान भारत- प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एसबी-पीएमजेएबाई) के तहत लाभार्थी परिवारों की कुल संख्य लगभग 10.74 करोड़ है। इस योजना के तहत राज्य अपनी लागत पर अतिरिक्त परिवारों को जोड़ने के लिए स्वतंत्र है। एसबी-पीएमजेएबाई के तहत अब तक 16039 अस्पतालों को पैनलबद्ध किया गया है जिनमें 8059 निजी अस्पताल तथा 7980 सार्वजनिक अस्पताल हैं।

26-07-2019
आजम खान के व्यवहार की एक सुर में निंदा, जल्द कार्रवाई करेंगे अध्यक्ष

नई दिल्ली। लोकसभा में गुरुवार को समाजवादी पार्टी के सदस्य आजम खान के व्यवहार की आज सभी दलों ने एक सुर में निंदा की और अध्यक्ष ओम बिरला ने जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया। कई वरिष्ठ मंत्रियों और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के अन्य सदस्यों द्वारा शुक्रवार को शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाये जाने पर बिरला ने कहा मैंने आप सबकी बात सुनी है। सभी दलों के नेताओं के साथ बैठक बुलाकर इस पर शीघ्र निर्णय लिया जायेगा।

25-07-2019
लोकसभा में अंतरराज्यीय नदी जल विवाद संशोधन विधेयक पेश

नई दिल्ली। सरकार ने अप्रासंगिक हो चुके ब्रिटिशकालीन 58 कानूनों को निरस्त करने, अंतरराज्यीय नदी जल विवाद के निपटारे के लिए स्थायी न्यायाधिकरण की स्थापना करने तथा कंपनी कानून में संशोधन करने वाले विधेयकों को लोकसभा में गुरुवार को पेश किया। जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने अंतरराज्यीय नदी जल विवाद (संशोधन) विधेयक 2019 पेश किया। इस विधेयक में देश के छह जल विवाद पंचाटों को समाप्त करके एक स्थायी पंचाट बनाने और उसकी शाखाएं अलग-अलग जगहों पर स्थापित करने तथा विवादों का निपटारा दो साल के भीतर करने का प्रावधान किया गया है। विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने 58 पुराने कानूनों को समाप्त करने के लिए निरसन एवं संशोधन विधेयक 2019 पेश किया, जबकि वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने कंपनी अधिनियम संशोधन विधेयक 2019 पेश किया।

विपक्ष ने इस विधेयक को लाने के तौर-तरीकों पर आपत्ति व्यक्त करते हुए कहा कि इसे संघीय ढांचे की मूल भावना के अनुरूप राज्यों से विचार विमर्श करने के बाद लाना चाहिए था। कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी, बीजू जनता दल के भर्तृहरि मेहताब, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के टी. आर. बालू ने यह आपत्ति भी उठायी कि विधेयकों के बारे में निर्धारित दो दिन पहले जानकारी नहीं दी जाती है। भाजपा के निशिकांत दुबे ने कहा कि यह विधेयक इसलिए जरूरी है क्योंकि बहुत से राज्यों में जलविवाद का समाधान नहीं होने से लोगों की तकलीफों का अंत नहीं हो पा रहा है। विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने निरसन एवं संशोधन विधेयक 2019 पेश करते हुए कहा कि सरकार 16वीं लोकसभा के दौरान छह विधेयकों के माध्यम से 1458 ऐसे कानूनों को निरस्त कर चुकी है, जो ब्रिटिश राज के दौरान बनाये गये थे और जनता के लिए परेशानी का कारण थे।

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