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15-12-2020
अमेरिकी अदालत ने खारिज किया नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर दर्ज 10 करोड़ डॉलर का मुकदमा

वाशिंगटन। अमेरिका की एक अदालत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ दर्ज कराए गए दस करोड़ डॉलर के एक मुकदमे को खारिज कर दिया है। यह मुकदमा एक अलगाववादी कश्मीर-खालिस्तान गुट और दो अन्य व्यक्तियों द्वारा दर्ज कराया  था। याचिकाकर्ता, सुनवाई की दो तारीखों पर उपस्थित नहीं हो सके,जिसके बाद मामला खारिज कर दिया गया। टेक्सास के ह्यूस्टन में 19 सितंबर, 2019 को आयोजित हुए “हाउडी मोदी” कार्यक्रम के बाद मुकदमा दर्ज कराया गया था। याचिका में भारत की संसद के उस निर्णय को चुनौती दी गई थी,जिसके तहत जम्मू कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त कर दिया गया था। याचिकाकर्ताओं ने मोदी, शाह और लेफ्टिनेंट जनरल कंवलजीत सिंह ढिल्लों से मुआवजे के तौर पर दस करोड़ डॉलर की मांग की थी। ढिल्लों, वर्तमान में ‘डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी’ के महानिदेशक हैं और प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) के अधीन ‘इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ’ के उप प्रमुख हैं। अमेरिका के दक्षिणी टेक्सास डिस्ट्रिक्ट की अदालत के न्यायाधीश फ्रांसेस एच.स्टेसी ने छह अक्टूबर को दिए अपने आदेश में कहा था कि ‘कश्मीर खालिस्तान रेफरेंडम फ्रंट’ ने इस मामले को आगे बढ़ाने के लिए कुछ नहीं किया और सुनवाई के लिए दो बार तय की गई तारीख पर भी उपस्थित नहीं हुए। इसके साथ ही न्यायाधीश ने मामला खारिज कर दिया। टेक्सास डिस्ट्रिक्ट अदालत में न्यायाधीश एंड्र्यू हनेन ने 22 अक्टूबर को मामले को समाप्त कर दिया। ‘कश्मीर खालिस्तान रेफरेंडम फ्रंट’ के अलावा अन्य दो याचिकाकर्ताओं की पहचान नहीं हो सकी है।  

 

 

26-10-2020
नीरव मोदी की जमानत याचिका ब्रिटेन की अदालत ने की सातवीं बार खारिज

नई दिल्ली। ब्रिटेन की एक अदालत ने भगोड़े नीरव मोदी की जमानत याचिका सातवीं बार खारिज कर दी है। बता दें कि नीरव मोदी भारत में पंजाब नेशनल बैंक से 14 हजार करोड़ रुपए से अधिक के लोन की धोखाधड़ी और मनी-लॉन्ड्रिंग के मामले का आरोपी है और उसे भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। वहीं इससे पहले इस महीने की शुरुआत में ब्रिटेन की अदालत ने चल रही प्रत्यर्पण की सुनवाई को तीन नवंबर तक के लिए बढ़ा दिया था, लेकिन नीरव मोदी बार-बार जमानत पाने के लिए याचिका लगा रहा है। हालांकि उसे इस बार भी सफलता नहीं मिल सकी। गौरतलब है कि लंदन की पुलिस ने 19 मार्च को नीरव मोदी को गिरफ्तार किया था और उसके बाद से वह लंदन की वैंड्सवर्थ जेल में बंद है। वहीं वर्ष 2018 में पीएनबी घोटाले में नाम सामने आने से कुछ महीने पहले ही वह भारत से फरार हो गया था। भारत सरकार द्वारा नीरव मोदी के प्रत्यर्पण की हरसंभव कोशिश की जा रही है, ताकि जल्द से जल्द उसे भारत लाया जा सके।

 

 

04-06-2020
आईएनएक्स मीडिया मामला: पी.चिदंबरम को राहत,सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की सीबीआई की पुनर्विचार याचिका

नई दिल्ली। आईएनएक्स मीडिया मामले में जमानत पर रिहा कांग्रेस के वरिष्ठ्र नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी.चिदंबरम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की उस समीक्षा याचिका को खारिज कर दिया,जिसमें पी.चिदंबरम की जमानत को चुनौती दी गई थी। बता दें कि सीबीआई ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट से पी.चिदंबरम के जमानत के फैसले पर फिर से विचार करने की अपील की थी। इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आईएनएक्स मीडिया धनशोधन मामले पी.चिदंबरम के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। विशेष न्यायाधीश अजय कुमार कुहार की अदालत में चिदंबरम, उनके बेटे कार्ति और अन्य के खिलाफ सोमवार को एक पासवर्ड से संरक्षित ई-आरोपपत्र दायर किया गया। इस पर विशेष न्यायाधीश ने संस्थान को निर्देश दिया कि देशव्यापी लॉकडाउन के बाद जब अदालत का कामकाज समान्य रूप से शुरू हो जाए तो आरोपपत्र को कागजी दस्तावेज के रूप में पेश किया जाए। बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय के आरोप पत्र में पी.चिदंबरम, कार्ति चिदंबरम और चार्टर्ड अकाउंटेंट एसएस भास्कररमन समेत कई लोगों के नाम भी हैं। बता दें कि 15 मई, 2017 को ईडी ने आईएनएक्स मीडिया मामला दर्ज किया था, जिसमें आईएनएक्स मीडिया पीवीटी लिमिटेड ने 4.62 करोड़ रुपये की स्वीकृत एफडीआई राशि के मुकाबले लगभग 403.07 करोड़ रुपये का विदेशी निवेश प्राप्त करने का मामला सामने आया था। ईडी ने अपनी जांच में पाया कि कंपनी की निदेशक इंद्राणी मुखर्जी और पीटर मुखर्जी, पी.चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम समेत कई अधिकारियों की मिलीभगत थी। गौरतलब है कि आईएनएक्स मीडिया केस मामले में 18 अक्टूबर को सीबीआई ने पी.चिदंबरम,उनके बेटे कार्ति चिदंबरम और उनकी दो कंपनियों समेत कुल 15 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई थी। सीबीआई ने उनकी जमानत याचिका का विरोध किया था। दिल्ली हाईकोर्ट में सीबीआई ने चिदंबरम की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि इस मामले में भ्रष्टाचार की जांच जारी है ऐसे में उन्हें जमानत न दी जाए।

 

20-04-2020
 विजय माल्या को झटका, लंदन की अदालत ने खारिज की प्रत्यर्पण के खिलाफ दायर याचिका

नई दिल्ली। लंदन की अदालत ने विजय माल्या की भारत प्रत्यपर्ण के खिलाफ दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया है। भारतीय बैंकों का 9000 करोड़ रुपए लेकर फरार हो चुके किंशफिशर के मालिक माल्या ने लंदन की अदालत में भारत में प्रत्यर्पण के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसे सोमवार को कोर्ट ने खारिज कर दिया। विजय माल्या ने इस साल फरवरी में भारत में अपने प्रत्यर्पण के खिलाफ लंदन की उच्च न्यायालय में अपील की थी। इसपर आज फैसला आया है, जो माल्या के पक्ष में नहीं रहा।लंदन रॉयल कोर्ट में लॉर्ड जस्टिस स्टीफन इरविन और जस्टिस एलिजाबेथ लिंग ने अपना फैसला सुनाते हुए माल्या की अपील खारिज कर दी। इस फैसले के साथ ही भगोड़ा घोषित किए जा चुके शराब कारोबारी विजय माल्या की कोशिशे नाकाम हो गई। वहीं इस फैसले के बाद अब माल्या के प्रत्यर्पण पर अंतिम फैसला वहां की गृह सचिव प्रीति पटेल के पास जाएगा। बता दें कि माल्या ने हाल ही में ट्वीट कर जानकारी दी कि वो बैंकों का पैसा चुकाना चाहते हैं।

 

05-02-2020
निर्भया मामला: हाईकोर्ट के आदेश को केंद्र और दिल्ली सरकार ने दी चुनौती, सुको में की अपील दाखिल

नई दिल्ली। केंद्र और दिल्ली सरकार ने दिल्ली गैंगरेप (2012) के चार दोषियों की फांसी पर रोक लगाने के निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज करने को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रूख किया। हाईकोर्ट के फैसले के कुछ घंटे बाद केंद्र और दिल्ली सरकार ने इसे चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल कर दी।

इससे पहले दोषियों को फांसी की सजा टालने के मामले में बुधवार (5 फरवरी) को दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा कि चारों दोषियों को एक साथ ही फांसी दी जा सकती है, ना कि अलग-अलग। न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत ने कहा कि चारों दोषी एक हफ्ते के भीतर अपने सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर लें। एक हफ्ते बाद उनका डेथ वारंट तामील करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। हाईकोर्ट ने अगले आदेशों तक दोषियों की फांसी पर रोक लगाने के निचली अदालत के आदेश को खारिज करने से इनकार कर दिया था। निचली अदालत ने दोषियों की फांसी पर रोक लगा दी थी। बता दें कि केंद्र और दिल्ली सरकार ने निचली अदालत के 31 जनवरी के आदेश को चुनौती दी थी। इसमें निचली अदालत ने अगले आदेश तक मामले के सभी चारों दोषियों–मुकेश कुमार (32), पवन गुप्ता (25),विनय कुमार शर्मा (26) और अक्षय कुमार (31) को फांसी देने पर रोक लगा दी थी। सभी दोषी तिहाड़ जेल में बंद हैं। हाईकोर्ट के मुताबिक मई 2017 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोषियों की अपीलों को खारिज किए जाने के बाद किसी ने भी उनके खिलाफ मौत का वारंट जारी करने के लिए कदम नहीं उठाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि इसमें कोई विवाद नहीं हो सकता है कि दोषियों ने देरी करने की रणनीतियों का इस्तेमाल कर प्रक्रिया को विफल किया है।

 

28-01-2020
निर्भया के दोषी मुकेश की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज, माँ ने जताया न्यायपालिका पर विश्वास

नई दिल्ली। राष्ट्रपति से दया याचिका खारिज होने के खिलाफ निर्भया मामले के आरोपी मुकेश ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। जस्टिस आर भानुमति, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ दोपहर 12:30 बजे याचिका पर सुनवाई करेगी। इससे पहले, सोमवार को सुबह याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग पर चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा, अगर किसी को एक फरवरी को फांसी दी जाने वाली है, तो याचिका पर तुरंत सुनवाई की जरूरत है। पीठ ने मुकेश के वकील को रजिस्ट्री के पास याचिका का उल्लेख करने को कहा। बता दे की, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 17 जनवरी को मुकेश की दया याचिका खारिज कर दी थी। शनिवार को उसने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग की थी। पटियाला हाउस कोर्ट ने चारों दोषियों को एक फरवरी सुबह छह बजे फांसी पर लटकाने का डेथ वारंट जारी किया है। मुकेश और अक्षय ने क्यूरेटिव याचिका दायर की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। वहीं, पवन गुप्ता और विनय शर्मा ने अभी क्यूरेटिव याचिका दायर नहीं की है। दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को एक दोषी पवन गुप्ता के पिता हीरालाल की याचिका खारिज कर दी। हीरालाल ने लोवर कोर्ट में निर्भया मामले के एकमात्र गवाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसे कोर्ट ने छह जनवरी को खारिज कर दिया था। बता दें कि हीरा लाल ने गवाह और निर्भया के दोस्त पर पैसे लेकर चैनलों को इंटरव्यू देने का आरोप लगाते हुए उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे। निर्भया की मां ने  न्यायपालिका पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि फांसी टालने के सभी पैंतरे नाकाम होंगे। मुझे सुप्रीम कोर्ट पर पूरा विश्वास है।

20-01-2020
झीरम मामले में हाइकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

रायपुर। प्रदेश में बहुचर्चित झीरम घाटी हमले के मामले में गवाही लेने पुन: सुनवाई को लेकर दायर याचिका को पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामले में सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रामचंद्र मेनन और जस्टिस पी.पी साहू की डिवीजन बेंच में हुई। उल्लेखनीय है कि पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने सरकार की याचिका को खारिज कर दिया था। जिसके बाद सरकार ने डिविजन बेंच में पुर्नयाचिका दायर की थी। आज हाईकोर्ट में छत्तीसगढ़ सरकार की रिट याचिका पर सुनवाई हुई। सरकार ने झीरम घाटी मामले में पुन: सुनवाई करने और गवाही लिए जाने को लेकर याचिका दायर की थी। इस मामले में सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है। मामले में कोर्ट जल्द अपना फैसला सुना सकता है।

 

18-01-2020
पवन गुप्ता की याचिका पर 20 को सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई

नई दिल्ली। निर्भया के दोषी पवन गुप्ता की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 20 जनवरी को सुनवाई होगी। इस याचिका में दोषी पवन गुप्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें अदालत ने उसे 2012 में नाबालिग मानने से इनकार कर दिया था।

हाईकोर्ट खारिज कर चुका है याचिका

निर्भया केस में एक बार फिर दोषी पवन गुप्ता ने अपराध के वक्त खुद को नाबालिग होने का दावा किया है। इसके लिए पवन ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटिशन (एसएलपी) दाखिल की है। पवन का कहना है कि अपराध के वक्त वह नाबालिग था और दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस तथ्य की अनदेखी की है। मालूम हो कि 19 दिसंबर को हाईकोर्ट ने पवन गुप्ता की उस अपील को खारिज कर दिया था जिसमें उसने अपने आप को नाबालिग बताया था। वहीं राष्ट्रपति ने आज ही निर्भया के दोषी मुकेश की दया याचिका खारिज कर दी है।

राष्ट्रपति ने 12 घंटे के भीतर खारिज की मुकेश की दया याचिका

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद  ने निर्भया दुष्कर्म और हत्या के दोषी मुकेश सिंह की दया याचिका खारिज कर दी। राष्ट्रपति ने यह फैसला गृहमंत्रालय की ओर से भेजी गई सिफारिश के 12 घंटे केभीतर ही ले लिया। गृहमंत्रालय ने बृहस्पतिवार शाम को अपनी तरफ से भी यह दया याचिका खारिज करने की सिफारिश की थी। मुकेश इस मामले के अन्य तीन दोषियों के साथ तिहाड़ जेल के विशेष वार्ड में बंद है। नीचली अदालत ने अब इन चारों को 1 फरवरी को सुबह छह बजे फांसी पर लटकाने का नया आदेश दिया है। पहले इन्हें 22 जनवरी को फांसी देनी थी। लेकिन मुकेश और विनय कुमार के क्यूरेटिव पेटीशन और मुकेश की दया याचिका के चलते फांसी की तारीख आगे बढ़ानी पड़ी। जानकारों के मुताबिक अब मुकेश के माफीनामें के सभी विकल्प खतम हो चुके हैं। लेकिन बाकी तीन दोषी राष्ट्रपति के पास दया याचिका के लिए जा सकते हैं। इस स्थिति में फांसी की तारीक फिर बढाई जा सकती है।

17-01-2020
हाई कोर्ट ने रद्द किया आप विधायक का निर्वाचन, शैक्षणिक योग्यता के बारे में दी थी गलत जानकारी

नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने 2015 के चुनाव में अपनी शैक्षणिक योग्यता के बारे गलत जानकारी देने के आरोप में दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर का निर्वाचन रद्द कर दिया है। तोमर दिल्ली की त्रि नगर से आम आदमी पार्टी के विधायक हैं। इस बार भी त्रि नगर सीट से आम आदमी पार्टी ने जितेंद्र सिंह तोमर को ही टिकट मिला है। फर्जी डिग्री का मामले के चलते जीतेंद्र सिंह तोमर को दिल्ली सरकार में कानूनी मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। जीतेंद्र सिंह तोमर 2013 और 2015 में त्रिनगर सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। 2013 में तोमर को करीब 2800 वोट से हार का सामना करना पड़ा था, जबकि 2015 में उन्होंने करीब 22 हजार वोट से जीत दर्ज की थी। जीतेंद्र सिंह तोमर को 2015 में दिल्ली सरकार में कानून मंत्री बनाया गया था। लेकिन जुलाई 2015 में उन्हें दिल्ली पुलिस ने फर्जी डिग्री के मामले में गिरफ्तार किया। हालांकि कुछ वक्त के बाद उन्हें जमानत मिल गई थी। कोर्ट ने बीजेपी के एक नेता की याचिका पर तोमर के चुनाव को खारिज करने का आदेश पारित किया। जस्टिस राजीव सहाय एंडलॉ ने कहा, ‘‘याचिका को मंजूर किया जाता है।’’ तोमर आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव भी लड़ रहे हैं और शनिवार को वह त्रिनगर विधानसभा क्षेत्र से नॉमिनेशन दायर कर सकते हैं।

8 फरवरी को दिल्ली में चुनाव

जाहिर है कि दिल्ली में सभी सीटों पर आप ने उम्मीदवारों का एलान कर दिया है। साल 2015 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की 70 में से 67 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस बार दिल्ली में 8 फरवरी को वोटिंग होनी है। नतीजे 22 फरवरी को घोषित किए जाएंगे।

 

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