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22-09-2020
भूपेश बघेल की पहल पर विषम परिस्थियों में भी बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने में जुटी है सरकार

रायपुर/नारायणपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल से इस विषम परिस्थिति में भी बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने का प्रयास जारी है। कोरोना काल में स्कूल बंद होने से ग्रामीण अंचलों के बच्चों का घर में रहकर पढ़ाई करना बहुत ही बड़ी परेशानि बानी हुई है। ख़ासकर नक्सल प्रभावित क्षेत्र में ऑनलाइन पढ़ाई में दिक्कत आती है क्योंकि नारायणपुर जिले की विषम भौगोलिक परिस्थिति के बीच बसे गाँव में नेटवर्क की समस्या हमेशा बनी रहती है। इस विश्वव्यापी संकट के दौर में पढ़ने वाले बच्चों की जिन्दगी स्थिर हो गई है। सरकार, अभिभावकों और शिक्षकों को अब उनकी शिक्षा की निरन्तरता की चिन्ता सताने लगी है। राज्य शासन द्वारा इस समस्या को दूर करने हर सम्भव प्रयास कर रही है। बच्चों तक शिक्षा की अलख जगाने व बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने  पढई तुंहर दुआर जैसे महत्वकांक्षी योजना का क्रियान्वयन पूरे प्रदेश में किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पहल से इस विषम परिस्थिति में भी बच्चों तक शिक्षा की अलख जगाने एवं बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने पढई तुंहर दुआर जैसे महत्वकांक्षी योजना का क्रियान्वयन पूरे राज्य के स्कूलों में करते हुए बच्चों तक बेहतर शिक्षा पहुंचाने का सराहनीय प्रयास किया जा रहा है। इस अभियान की सफलता में कई चुनौतियां है। मसलन एन्ड्राइड मोबाइल, मोबाइल डाटा आदि की उपलब्धता घर में ये साधन हो भी तो बच्चों के लिए इनकी उपलब्धता और सबसे बड़ी बात समाज और अभिभावकों की सहभागिता। राज्य शासन से अब ऑनलाइन पढ़ाई के अतिरिक्त वैकल्पिक व्यवस्था गांव और मोहल्ले में समुदाय की सहायता से बच्चों की सीखने की व्यवस्था, लाउडस्पीकर तथा बुलटू के बोल के माध्यम से पढ़ाई की व्यवस्था करने के निर्देश मिले थे जिससे बच्चों को ऑनलाइन के बिना भी शिक्षा उपलब्ध हो सके।

नारायणपुर विकासखण्ड अन्तर्गत स्वामी आत्मानंद महाविद्यालय कुम्हारपारा नारायणपुर की छात्रा सविता सलाम को पढ़ाई तुंहर दुआर पोर्टल मे हमारे नायक बनाये गये हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते महाविद्यालय बंद होने के कारण छात्रा घर में ही रककर पढ़ाई कर रही थी। तब उसे राज्य शासन की महत्वाकांक्षी योजना पढ़ई तुंहर दुआर कार्यक्रम के बारे में पता चला। जिसमें वे अपने मोहल्ले के बच्चों को मोहल्ला क्लास के माध्यम से पढ़ाने का बीड़ा उठाया। सविता लगभग 45 दिनों से बच्चों को शिक्षा प्रदान करने का सराहनीय काम कर रही है। चर्चा करने पर सविता ने बताया कि वह अपने मोहल्ले में पढ़ने वाले प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों को पढ़ाती है। इस दौरान वे विद्यार्थियों को सोशल डिसटेंसिंग का पालन भी कराती है। उनकी कक्षा में विद्यार्थी बड़े उत्साह से पढ़ाई करते हैं। कक्षा के बाद विद्यार्थियों को होमवर्क भी दिया जाता है। जिसे विद्यार्थी सफलतापूर्वक पूर्ण कर उन्हें अगले दिन कक्षा में दिखाकर जांच कराते हैं।

18-09-2020
जिले के नीली छतरी वाले गुरुजी ने कोरोना महामारी में भी पढ़ाई की राह बनाई आसान,बच्चों को मिल रहा शिक्षा का लाभ

कोरिया। कोरोना महामारी ने हर क्षेत्र को बुरी तरह से प्रभावित किया है,जिसमें शिक्षा भी शामिल है। कोरोना अवधि मे बच्चो की पढ़ाई का नुकसान ना हो, इसके लिए राज्य शासन द्वारा ऑनलाइन क्लास के लिए पढ़ई तुंहर दुआर कार्यक्रम शुरू किया गया है। सुदूर अंचलों में जब नेटवर्क का समस्या आने लगी तो शिक्षकों ने इसके वैकल्पिक नवाचारी प्रयास करना प्रारंभ किये। ‘नीली छतरी वाले गुरूजी आते हैं हमको पढ़ाने, हम लोग देहरी में बैठते हैं दूर-दूर, फिर सर हमको पढ़ाते हैं, अभी स्कूल बंद हैं ना‘‘ ये बात विकासखण्ड खड़गवां के शासकीय प्राथमिक शाला सकड़ा के बच्चे बताते हैं। इनके बारे में ये बात कही गई है,वे शिक्षक हैं रुद्र प्रताप सिंह राणा। जिले में कोरोना संक्रमण के इस दौर में भी शिक्षकों ने ज्ञान की लौ को जलाए रखा है। नए-नए प्रयास कर बच्चों को पढ़ाने का कार्य किया जा रहा है,जिसमें शामिल है नीली छतरी वाले गुरुजी। स्कूल तुंहर पारा के अंतर्गत मोटरसाइकिल में छोटा पुस्तकालय एवं व्हाइट बोर्ड लेकर अलग-अलग 5 मोहल्ले में लगभग 62 बच्चों के साथ सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए रुद्र राणा द्वारा बिना एक दूसरे के सीधे संपर्क में आये शिक्षण कार्य किया जा रहा है। इस मोहल्ला क्लास में बच्चे एक स्थान या एक घर में ना बैठ कर अपने अपने घर के सामने डेहरी में बैठते हैं और शिक्षक रुद्र चलते-फिरते उनको सिखाते हैं। उनके पास चित्रों से परिपूर्ण रोचक कहानियों का छोटा पुस्तकालय भी है। भाषा विकास के लिए इन पुस्तकों का उपयोग किया जा रहा है।

बच्चे अलग अलग किताबें पढ़कर उस कहानी को अपने साथियों एवं शिक्षक को सुनाते हैं और एक दूसरे से प्रश्न पूछ कर जवाब देते हैं। राणा बताते हैं कि बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए ऑनलाइन एवं मोहल्ला क्लास के माध्यम से बच्चों तक गुणवत्ता युक्त शिक्षण कार्य करवाने के साथ-साथ मिस कॉल गुरुजी के मेथड पर कार्य करके बच्चों की शंकाओं का समाधान निरंतर किया जा रहा है और टीम के साथ मिलकर अनेक कई प्रतियोगिताओं का सफल संचालन भी कर रहे हैं, जिनमें से कुछ प्रतियोगिताएं तो राज्य लेवल पर भी की जा रही हैं। विभिन्न ऐप के माध्यम से प्रशिक्षण कार्य भी किया जा रहा है और जानकारी को बच्चों के साथ सफलतापूर्वक साझा किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों द्वारा निरंतर इस कार्य का अवलोकन किया जा रहा है एवं राज्य द्वारा दिए गए प्रत्येक दिशानिर्देश को गंभीरता पूर्वक लेकर हमारे जिले में इसका क्रियान्वयन किया जा रहा है। हमारे जिले की टीम के सहयोगी शिक्षक, जिसमे शशि भूषण पांडेय, खुशबू दास, नीतू कुशवाहा, जेपी साहू, अशफाक उल्ला खान, परवीन खान जैसे कुशल शिक्षकों के द्वारा जिले का प्रतिनिधित्व करते हुए अनेकों गुणवत्ता युक्त कार्य किए जा रहे हैं,जिसका प्रमाण है कि कोरिया जिले में राज्य द्वारा संचालित प्रत्येक नवाचारी प्रक्रिया बहुत अच्छे तरीके से क्रियान्वयन की जा रही है। हमारे जिले के एपीसी राजकुमार द्वारा मार्गदर्शन के माध्यम से हम अपना संपूर्ण कार्य संचालित कर रहे हैं और बच्चों के हित में नित नए प्रयासों से उन्हें शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

 

 

16-09-2020
लॉक डाउन के दौरान 90 प्रतिशत से अधिक बच्चों को मिला मध्यान्ह भोजन का लाभ, सर्वेक्षण में छत्तीसगढ़ टॉप पर 

रायपुर। कोरोना संकट काल में भी मध्यान्ह भोजन योजना के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल रहा है। प्रदेश में लॉक डाउन के दौरान 90 प्रतिशत से अधिक बच्चों को मध्यान्ह भोजन का लाभ मिला है, जबकि इस दौरान अन्य राज्यों में मध्यान्ह भोजन वितरण की स्थिति काफी खराब रही। आक्सफैम इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार स्कूल बंद होने से देश के 27 करोड़ बच्चे प्रभावित हुए हैं, जबकि नेशनल फूड सिक्यूरिटी एक्ट 2013 के तहत मध्यान्ह भोजन प्रत्येक बच्चे का अधिकार है। लोकसभा में विगत 14 सितंबर को एक प्रश्न के उत्तर में केन्द्र सरकार ने यह माना कि, मध्यान्ह भोजन योजना के लाभ से बहुत से बच्चों को वंचित रहना पड़ा। आक्सफैम इंडिया के सर्वेक्षण में छत्तीसगढ़ का देश में सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा है। छत्तीसगढ़ में 90 प्रतिशत से अधिक बच्चों को मध्यान्ह भोजन योजना का लाभ मिला है।

जबकि उत्तर प्रदेश में 92 प्रतिशत बच्चों को मध्यान्ह भोजन से वंचित रहे। सर्वेक्षण में यह भी बताया गया है कि, उत्तर प्रदेश में जहां खाद्यान्न सुरक्षा भत्ता प्रदान करने पर ध्यान केन्द्रित किया गया। छत्तीसगढ़ में राशन की होम डिलिवरी पर ध्यान केन्द्रित किया गया। लॉक डाउन के दौरान पिछले मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में स्कूलों के बंद होने के बीच मध्यान्ह भोजन की आपूर्ति तय करने के निर्देश दिए थे। इसके तारतम्य में छत्तीसगढ़ ने तत्काल कदम उठाते हुए स्कूली बच्चों को स्कूलों और बच्चों के घरों तक पहुंचाकर मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराने के इंतजाम किए। 

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 21 मार्च को सभी कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों मध्यान्ह भोजन योजना के तहत स्कूली बच्चों को सूखा राशन वितरण के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए थे। गांव-गांव में इसकी मुनादी कराई गई। देश के अन्य राज्यों में सूखा राशन वितरण की प्रक्रिया काफी बाद में शुरू कराई गई। छत्तीसगढ़ में लॉक डाउन के पहले 40 दिनों के लिए स्कूली बच्चों को सूखा राशन दिया गया। इसके बाद एक मई से 15 जून तक 45 दिनों के लिए, 16 जून से 10 अगस्त तक 45 दिन का सूखा राशन वितरित किया गया। इस प्रकार अब तक 130 दिन का सूखा राशन वितरण किया जा चुका है। इस योजना से राज्य के लगभग 43 हजार स्कूलों में 29 लाख बच्चों को मध्यान्ह भोजन योजना के तहत सूखा राशन वितरण से लाभ मिला है। मध्यान्ह भोजन योजना के तहत सूखा राशन के घर-घर वितरण की व्यवस्था स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से किया गया।

वितरित किए गए सूखा राशन पैकेट में चावल, तेल, सोयाबीन, दाल, नमक और अचार शामिल हैं। राज्य सरकार ने स्थानीय स्तर पर स्कूली बच्चों और पालकों की सुविधा को देखते हुए यह व्यवस्था भी की गई कि, यदि माता-पिता पैकेट लेने के लिए स्कूल नहीं जा सकते हैं तो स्व-सहायता समूह और स्कूल स्टाफ के माध्यम से घर घर जाकर सूखा राशन के पैकेटों की होम डिलवरी की जाए। खाद्य सुरक्षा भत्ता के रूप में बच्चों को सूखा चावल और कुकिंग कास्ट की राशि से अन्य आवश्यक सामग्री दाल, तेल, सूखी सब्जी इत्यादि वितरित की गई। मध्यान्ह भोजन योजना की गाइडलाइन के अनुसार कक्षा पहलीं से आठवीं तक के उन बच्चों को जिनका नाम शासकीय शाला, अनुदान प्राप्त अशासकीय शाला अथवा मदरसा-मकतब में दर्ज है, उन्हें मध्यान्ह भोजन दिया गया।

15-09-2020
पढ़ई तुंहर द्वार के अंतर्गत मटका गांव में हिंदी दिवस मनाया गया और बच्चों को पौधों का महत्व बताया गया

रायपुर/बेमेतरा। कोरोना काल में शिक्षा विभाग के माध्यम से चलाये जा रहे ‘पढ़ई तुंहर पारा’ के अंतर्गत विकासखंड बेमेतरा के ग्राम मटका में शास.पूर्व माध्यमिक शाला के बच्चों को (मोहल्ला क्लास) के माध्यम से शिक्षा प्रदान की जा रही है। इसमें 15 बच्चे उपस्थित थे और बाकी बच्चों  को भी क्लास आने के लिए बोला गया है। साथ ही साथ प्रति वर्ष कि भांति शाला में हिंदी दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पौधों की महत्ता पर चर्चा की गई और बच्चों को बताया गया कि पेड़-पौधे हमारे जीवन में कितना उपयोगी व महत्वपूर्ण है। साथ ही बच्चों को औषधीय पौधों के बारे में भी बताया गया तथा बच्चो के साथ मिलकर पौधरोपण किया। इस अवसर पर बच्चों ने कहानी, कविताएँ प्रस्तुति की ।

 

13-09-2020
नक्सली प्रभावित क्षेत्र के बच्चों ने जेईई मेन्स में मारी बाजी,कलेक्टर ने दी शुभकामनाएं

बीजापुर। जिले के धुर नक्सली प्रभावित इलाके के सामान्य कृषक परिवारों के बच्चों ने देश की सर्वोच्च इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई मेन्स को क्रेक कर अपनी मेहनत और लगन को साबित कर दिया है। वहीं साधनों की कमी तथा दूरस्थ इलाके से होने के बावजूद इस सर्वोच्च इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में अपना परचम लहराकर अन्य बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं।जिले के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय भैरमगढ़ में अध्ययनरत अनिल तेलम, राजेश गोटा और रमेश वेंजाम जेईई मेन्स क्रेक करने के बाद अब जेईई एडवांस की परीक्षा में सम्मिलित होंगे, ताकि इन्हें आईआईटी,एनआईटी जैसी उच्च प्रौद्योगिकी संस्थानों में पढ़ाई करने का अवसर मिल सके। जिला कलेक्टर रितेश कुमार अग्रवाल ने जिले के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के इन बच्चों की सफलता पर उन्हें बधाई देने के साथ ही जेईई एडवांस परीक्षा की बेहतर तैयारी और इस परीक्षा में सफल होने के लिए शुभकामनाएं दी है। उन्होंने उक्त बच्चों की अच्छी तैयारी के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने का निर्देश सम्बंधित अधिकारियों को दिया है।

जेईई मेन्स क्वालीफाई करने वाले इन बच्चों में भोपालपट्टनम निवासी राजेश गोटा और बीजापुर एरमनार निवासी रमेश वेंजाम ने बताया कि उनकी पढ़ाई-लिखाई भाई-बहन करवा रहे हैं। राजेश के पिताजी का स्वर्गवास हो चुका है और बड़े भाई नागेश गोटा एवं महेश गोटा खेती-किसानी कर उसकी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दे रहे हैं। राजेश भी अपने भाईयों के सपने को साकार करने के कृतसंकल्प है और पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रीत कर दिया है। उसने बताया कि अब तो हर हालत में जेईई एडवांस की बेहतर तैयारी करना है। एरमनार के रमेश वेंजाम तो अपने माता लक्ष्मी वेंजाम तथा दो छोटी बहनों विमला एवं रमीला के साथ समय-समय पर खेती-किसानी करते हैं। इसके बावजूद पढ़ाई के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं।रमेश ने बताया कि उसके छोटी बहन विमला और रमीला गुदमा तथा धनोरा में क्रमशः 10 वीं और 8 वीं पढ़ रहे हैं। रमेश ने अपनी सफलता के लिए गुरुजनों के प्रेरणा तथा मार्गदर्शन का स्मरण करते हुए बताया कि शिक्षकों ने उसे निरन्तर आगे बढ़ने के लिये प्रोत्साहित किया, जिससे वह अच्छी तैयारी कर पाया। जिले के आवापल्ली निवासी अनिल तेलम के पिता शिक्षक हैं, इसलिए वह अपने लक्ष्य के प्रति सजग है और जेईई एडवांस की योजनाबद्ध ढंग से तैयारी कर परीक्षा में सफल होकर इंजीनियरिंग की उच्च शिक्षा हासिल करने कटिबद्व है। इन बच्चों के प्राचार्य गोविंदराम जैन ने बताया कि घोर माओवाद प्रभावित इलाके के इन बच्चों की सफलता से हम सभी खुश हैं लेकिन अब इनके जेईई एडवांस परीक्षा की तैयारी तथा इस परीक्षा में सफलता पर हम लोगों का ध्यान है। इस ओर बच्चों को आवासीय सुविधा उपलब्ध करवा कर उन्हें बेहतर तैयारी करवायेंगे। जिले के सहायक आयुक्त आदिवासी विकास श्रीकांत दुबे इन बच्चों की सफलता से प्रभावित होकर कहते हैं कि अब उक्त बच्चों को जेईई एडवांस परीक्षा की तैयारी करवाने पूरा ध्यान देंगे,इस दिशा में उक्त बच्चों को उनके शिक्षकों के साथ ही अन्य विशेषज्ञ शिक्षकों से मार्गदर्शन सुलभ कराया जायेगा।

12-09-2020
एकलव्य स्कूल का जेईई परीक्षा में परिणाम शतप्रतिशत,कलेक्टर ने परीक्षा में सफल पांचों बच्चों को दी शुभकामनाएं

कोरिया। जिले के विकासखण्ड खड़गवां स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय स्कूल पोड़ीडीह का जेईई मेन की परीक्षा में परिणाम शत प्रतिशत रहा है। एकलव्य स्कूल के पांच बच्चे जेईई मेन की परीक्षा में शामिल हुए थे। परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी बच्चों ने सफलता हासिल की है। इनमें रोहित कुमार सिंह, सत्येंद्र, अनुराग सिंह, मनमोहन सिंह एवं सोनू सिंह शामिल हैं। कलेक्टर  एसएन राठौर एवं आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त ने सभी बच्चों को परीक्षा में सफलता के लिए बधाई एवं बेहतर भविष्य के लिए शुभकामनाएं प्रेषित की।

 

12-09-2020
स्कूलों की ऑनलाइन क्लास से बच्चों को रिमूव करने की धमकियां देने पर भड़का अभिभावकों का आक्रोश

रायपुर/बिलासपुर। निजी स्कूलों के द्वारा मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हुए बच्चों को ऑनलाइन क्लास से रिमूव करने की कार्रवाई के खिलाफ अभिभावकों का गुस्सा चरम पर है। उन्होंने एक बैठक आयोजित कर यह निर्णय लिया है कि निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ सोमवार को दोपहर 12 बजे सभी अभिभावक नेहरू चौक पर एकत्र होंगे एवं यहां से जिला कलेक्टर व जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय का घेराव कर अपनी मांगों की ओर शासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए न्यायोचित दबाव बनाया जाएगा।

निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के परिजनों ने आज आयोजित बैठक में इन स्कूलों की मनमानी के खिलाफ शासन प्रशासन की ओर से किसी भी प्रकार की सख्त और निर्णायक कार्यवाही नहीं होने को लेकर काफी दुख और आक्रोश प्रकट किया। बैठक में मौजूद पालकों का कहना था कि बिना अनुमोदित किए हुए, बढ़ी हुई ट्यूशन फीस, दबाव पूर्वक अभिभावकों से  वसूल करने के लिए निजी स्कूलों के द्वारा एन केन प्रकारेण दुष्चक्र रचा जा रहा है। अभिभावकों ने यह तय किया है निजी स्कूलों की मनमानी तथा उन्हें अधिकारियों की ओर से दिए जा रहे अभयदान के खिलाफ सोमवार को दोपहर 12 बजे नेहरू चौक पर सभी अभिभावक बड़ी संख्या में एकत्रित होकर कलेक्ट्रेट जाकर कलेक्टर कार्यालय तथा जिला शिक्षा अधिकारी का घेराव कर निजी स्कूलों की लूटखोरी के खिलाफ शासन प्रशासन को जगाने की सार्थक पहल की करेंगे। वहीं बेजा फीस के नाम पर अभिभावकों को आर्थिक मानसिक प्रताड़ना देने वाले निजी स्कूल प्रबंधन के खिलाफ एक्शन लेने के लिए शासन को ज्ञापन दिया जाएगा और इस मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग की जाएगी।

10-09-2020
सीख कार्यक्रम बच्चों को शिक्षा से जोड़ने में होगी प्रभावी : कलेक्टर

बीजापुर। कोरोना संक्रमण के दौर में बच्चों की पढ़ाई निरंतर चलती रहे इसके लिए जिला प्रशासन ने यूनिसेफ के सहयोग से सीख कार्यक्रम लांच किया है। कार्यक्रम के तहत् वाॅलिंटियर सप्ताह में 3 दिन बच्चों के बीच जाकर उन्हे मनोरंजन के साथ अध्यापन कार्य कराएंगे। प्राथमिकता के तौर पर सीख कार्यक्रम बीजापुर ब्लाक में लागू किया गया है। इसमें स्थानीय बेरोजगार वालिंटियर के रूप में चयनित किए गए हैं। बीजापुर में 140 वालिंटियर इस कार्यक्रम से जुड़कर बच्चों के बीच शिक्षा की रोशनी फैलाने का काम करेंगे। इस कार्यक्रम के तहत् वालिंटियर गली मोहल्ले में जाकर बच्चों को चिन्हित कर सोमवार,गुरूवार और शुक्रवार को कक्षाओं का संचालन कर बच्चों को नियमित शिक्षा से जोड़कर रखेंगे। सोमवार भाषा,बुधवार को गणित एवं शुक्रवार को खेल और मनोरंजक गतिविधि का संचालन किया जायेगा। सीख कार्यक्रम के लाॅचिंग के अवसर पर कलेक्टर रितेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि कोरोना संक्रमण के दौर में बच्चों की पढ़ाई में कोई बाधा न आये इसलिए छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा पढ़ई तुंहर दुवार के माध्यम से दूर करने का प्रयास किया गया है।

ऑनलाइन क्लासेस का लाभ सभी बच्चों तक नहीं मिल पा रहा था। इसके विकल्प के रूप में मोहल्ला क्लास और यूनिसेफ के सहयोग से सीख कार्यक्रम लागू किया गया है। इसका लाभ क्षेत्र के ज्यादातर बच्चों को सुगमता के साथ मिलेगा। बीजापुर में 140 वालिंटियर मोहल्लों में जाकर बच्चों को मनोरंजक शिक्षा प्रदान करेंगे। कार्यक्रम के संचालन के लिए वालिंटियर को शैक्षणिक सामग्री युक्त पिटारा प्रदान किया गया है। इसमें यूनिसेफ द्वारा प्रदत्त पुस्तक, चार्ट पेपर,लपेट श्यामपट,काॅपी,पेन सहित अन्य शिक्षण सामग्री उपलब्ध है। कार्यक्रम में जिला शिक्षा अधिकारी डी.सम्मैया,जिला मिशन समन्वयक विजेन्द्र राठौर,विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी मो.जाकिर खान एवं छवितेश डोंगरे एपीसी मूौजूद थे।

 

10-09-2020
बच्चों,महिलाओं को सुपोषण चौपाल में बताया जा रहा पौष्टिक आहार का महत्व

कोरबा। बच्चे, गर्भवती तथा शिशुवती महिलाओं को कुपोषण से निजात दिलाने के लिए राज्य शासन द्वारा नए-नए प्रयास किए जा रहे हैं। 7 सितंबर से शुरू हुआ राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही है। सुपोषण के बारे में जागरूकता लाने के लिए चित्रकारी, स्लोगन तथा रंगोली द्वारा संदेश दिया जा रहा है। गांवों में सुपोषण चौपाल का भी आयोजन किया जा रहा है। सुपोषण चौपाल में पौष्टिक आहार से संबंधित जानकारियां भी दी जा रही है। सुपोषण से संबंधित इन रचनात्मक गतिविधियों के द्वारा महिलाओं तथा बच्चों मे सुपोषण के बारे मे जागरूकता आ रही है। कोरोना महामारी के इस दौर मे कोविड प्रोटोकाॅल का पालन करते हुए सभी गतिविधियां सम्पन्न की जा रही है। सुपोषण के बारे मे जागरूकता लाने तथा बच्चों, महिलाओं को कुपोषण से बचाने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा विशेष निर्देश दिया गया है। आंगनबाड़ी केन्द्रों में चित्रकारी, सुपोषण से संबंधित स्लोगन तथा रचनात्मक चित्रकारी को बच्चों के साथ बड़े भी रूचि लेकर सुपोषण का महत्व समझ रहे हैं। बच्चों तथा महिलाओं को कुपोषण से मुक्ति दिलाने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर पौष्टिक आहार का वितरण किया जा रहा है। आहार वितरण के साथ-साथ सुपोषण के प्रति जागरूकता लाने के लिए विविध गतिविधियां भी आयोजित की जा रही है। जिले के विभिन्न आंगनबाड़ी केन्द्रों में कार्यकर्ताओ एवं समूहों की महिलाओं द्वारा केन्द्रों और अपने घरोें में पोषण अभियान संबंधी आकर्षक रंगोली तथा चित्रकारी बनाई जा रही है।

 

09-09-2020
बच्चों,शिशुवती महिलाओं को कुपोषण से बचाने गांव-गांव पहुंच रहा पोषण रथ

कोरबा। कोरोना महामारी के इस दौर मे भी राज्य शासन बच्चों, गर्भवती तथा शिशुवती माताओं को कुपोषण से बचाने मे जुटी हुई है। कोरोना काल में जहां लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं ऐसी परिस्थितियो में भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर बच्चों, गर्भवती-शिशुवती माताओं को पोषण आहार का वितरण कर रहीं हैं। इसके साथ ही गांव-गांव में पोषण रथ के माध्यम से राज्य शासन की सुपोषण संबंधी योजनाओं और महत्वपूर्ण जानकारियों का प्रचार किया जा रहा है। पोषण रथ के द्वारा आडियो के माध्यम से पोषण के विषय-एक हजार दिवस के महत्व के संदेशो का गांव-गांव मे प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। पोषण माह के दौरान पोषण रथ के द्वारा एनिमिया, डॉयरिया, स्वच्छता तथा पौष्टिक आहार, साफ-सफाई एवं स्वच्छता पर आधारित संदेशोु का गांव-गांव में जाकर प्रचार किया जा रहा है।

कोरबा जिले मे पोषण रथ के माध्यम से पोषण एवं स्वास्थ्य के संबंध मे प्रचार करने के लिए 173 बड़े गांवो का चयन किया गया है। पोषण रथ आगामी दस दिनो में सभी चयनित गांव मे पहुंचेगी और पोषण संबंधी संदेशो का प्रचार-प्रसार करेगी। जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास कोरबा एपी किस्पोट्टा ने बताया कि आज पोषण रथ को हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया गया। शुभारंभ के मौके पर वल्र्ड विजन इंडिया के जिला प्रमुख जोशी बाबू, परियोजना अधिकारी कोरबा शहरी मनोज अग्रवाल के साथ-साथ महिला एवं बाल विकास अधिकारी, विभागीय एवं संस्था के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।पोषण माह के दौरान जिले के दो हजार 539 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा हितग्राहियों के घरों में जाकर महिलाओं तथा बच्चों की काउंसिलिंग करके इस कोरोना काल में उनका मनोबल बढ़ाने का भी कार्य किया जा रहा है।  

 

03-09-2020
आंगनबाड़ी खोलने के आदेश ने बढ़ाई चिंता, कैसे बच्चों को कराएंगे नियमों का पालन, कार्यकर्ता और सहायिकाएं हैरान

महासमुंद। कोरोना संकट के बीच आंगनबाड़ी खोलने के आदेश से कार्यकताओं की चिंता बढ़ गई है। दरअसल बच्चों को स्थास्थ्य एवं पोषण दिवस के लिए गरम भोजन प्रदान करने केन्द्र खोले जाने के आदेश के बाद से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। जिले में लगातार कोरोना के केस में दिन प्रतिदिन बढ़ोत्तरी हो रही है। कलेक्टर कार्यालय के डिप्टी कलेक्टर, अपर कलेक्टर कोरोना संक्रमित हो गए हैं। महासमुन्द के विधायक व संसदीय सचिव भी चपेट में आ गए हैं। बावजूद इसके आंगनबाड़ी केन्द्र में गरम भोजन प्रदाय करने बच्चों का हुजुम लगाना कहा तक उचित होगा। शासन के आदेश में हालांकि कहा गया है कि, आंगनबाड़ी केन्द्र को खोलने से पूर्व सेनेटाइज किया जाएगा। कंटेनमेंट जोन में आने वाले केन्द्र को बंद रखा जाएगा।

भोजन पकाने के बर्तनों को उपयुक्त  पाउडर और गरम पानी से साफ कराया जाएगा। भोजन परोसते समय थाली में पत्तल, केला पत्ता रखा जाएगा। एक समय में 15 से अधिक व्यक्ति भवन में नहीं होंगे। हितग्राहियों के मध्य 6 फीट की दूरी होगी। बच्चों को मास्क पहनने के संबंध में भारत सरकार के दिशा निर्देश का पालन किया जाएगा इत्यादि। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि, कोविड के बावजूद कार्यकर्ता लगातार काम कर रही हैं। घर-घर पहुंच कर गर्भवती महिलाओं को दवाईयां खिलाई जा रही है। साथ ही आंगनबाड़ी में दर्ज बच्चों को घर तक रेडी टू इट पहुंचाया जा रहा है। जब से कोविड-19 की शुरुआत हुई,तब से लेकर अब तक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लगातार काम कर रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानना है कि, केन्द्र में पहुंचने वाले बच्चे 6 साल तक के होते हैं और बच्चों में इस बात का बिलकुल भी ज्ञान नहीं है कि, वह सोशल और फिजिकल डिस्टेंस का पालन कर सकें। वर्तमान में कोरोना का प्रकोप बढ़ता चला जा रहा है। बावजूद इसके आंगनबाड़ी की महिलाएं काम कर रही है। 7 सितम्बर से केन्द्र खोले जाने के बाद बच्चे एक दूसरे के सम्पर्क में आएंगे और कोरोना का खतरा बड़ जाएगा।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि,सरकार एक तरफ बच्चों और बजुर्गों को घर में रहने की सलाह दे रही है और एक तरफ स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस और गरम भोजन प्रदान करने के लिए आंगनबाड़ी केन्द्र खोलने के आदेश जारी करता है।  सरकार के आदेश के बाद से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर रोष देखा जा रहा है। हालांकि अभी तक कार्यकर्ताओं ने इस विषय पर शासन प्रशासन के सामने अपना विरोध दर्ज नहीं कराया है, लेकिन आने वाले दिनों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रणनीति तैयार कर पूरे प्रदेश में इसका विरोध कर सकती हैं। यह बात तो एकदम साफ है कि, कोरोना किसी भी उम्र के व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है। यह वायरस बच्चों और बुजुर्गों के लिए अधिक खतरनाक माना जा रहा है क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता युवाओं से कम होती है। आदेश की कॉपी देखने के लिए यहां क्लिक करें...

 

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