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23-09-2020
250 आंगनबाड़ी केंद्रों पर तैयार हो रहे पोषण वाटिका...

रायपुर/दुर्ग। राष्ट्रीय पोषण माह के अवसर पर पोषण वाटिका (Nutri Garden) तैयार कर दुर्ग जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में फलदार पौधे रोपे जा रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़ी गर्भवती महिलाओं को पोषण युक्त हरी व ताजी सब्जियां गर्मभोजन के साथ मिलेगी। पोषण अभियान के तहत जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से 1502 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 250 पोषण वाटिका विकसित की जा रही है। जिला कार्यक्रम प्रबंधक विपीन जैन ने बताया जिले के 250 आंगनबाड़ी केंद्रों में पर्याप्त खाली जगह होने पर चिंहांकित किए गए हैं। उन्होंने बताया दुर्ग जिले में 15,000 बच्चे कुपोषित हैं जो 5 साल तक के बच्चों में कुपोषण की दर 15 प्रतिशत है। इस कुपोषण की दर को कम करने सुपोषण अभियान में गंभीर कुपोषित बच्चों को चयनित किया जा रहा है। जिले में 10,000 गर्भवती महिलाएं और 10,000 व शिशुवती महिलाएं हैं। दुर्ग जिले के सांसद आदर्श ग्राम मोहलई के भगतसिंह चौक स्थित आंगनबाड़ी केंद्र को 5000 रुपए की आर्थिक सहयोग सरपंच खेमिन बाई निषाद ने गार्डन विकसित करने के लिए प्रदान की ताकि आंगनबाड़ी केंद्रों पर फलदार पौधे व सब्जियां उगाई जाएँ। महतारी जतन योजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्र में पंजीकृत गर्भवती महिलाओं को प्रतिदिन गरम पका भोजन वितरण किया जाता है। 

मोहलई के आंगनबाड़ी केंद्र के लगभग 75 डिसमिल जमीन को आदर्श पोषण वाटिका के रूप में विकसित किया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत दुर्ग ग्रामीण परियोजना के परियोजना अधिकारी अजय साहू ने बताया आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण वाटिका तैयार करने के लिए बीज व पौधे कृषि विज्ञान केंद्र अंजोरा से सहयोग लेते हैं। पंचायत स्तर पर स्वसहायता समूहों की महिलाओं की भागीदारी ली जाती है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देकर किचन गार्डन में उगाई जाने वाली सब्जियां पूरी तरह से जैविक होगी। दुर्ग ग्रामीण परियोजना क्षेत्र की महिला पर्यवेक्षक शशि रैदास ने बताया जिले में चयनित 250 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषण अभियान कार्यक्रम के तहत 1 सितंबर से 30 सितंबर तक प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र से जुड़ी गर्भवती महिलाएं व बच्चों के अभिभावकों को प्रेरित कर पौधारोपण कराया जा रहा है।  

महिला पर्यवेक्षक ने बताया, आंगनबाडी कार्यकर्ता यमुना साहू व सहायिका गीता साहू की जुझारुपन से आंगनबाड़ी केंद्र परिसर के खाली जगह में पोषण वाटिका विकसित किया गया है। पोषण वाटिका में केला, मुनगा, पपीता, लालभाजी, पालकभाजी, भिन्डी, करेला, मिर्च, टमाटर, फूलगोभी, बैगन, बरबट्टी, सेमी, गलका, कांदाभाजी, कुम्भड़ा व लौकी सब्जी लगाई गई है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता यमुना साहू ने बताया, उनके आंगनबाड़ी केंद्र में लगभग 63 बच्चे पंजीकृत हैं। सभी 0 से 5 साल के उम्र के बच्चों का वजन निर्धारित औसत से सामान्य है। यानी की इस आंगनबाड़ी केंद्र में पिछले 3 सालों से एक भी बच्चा कुपोषण के दायरे में नहीं है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की सक्रियता की वजह से यहां की महिलाओं में एनिमिया मुक्त पाया गया है। यमुना साहू बताती हैं वे हर महीने 0 से 5 साल के आयु के बच्चों का वजन लेते हैं। हर महीने बच्चे के वजन में वृद्वि होने की रिपोर्ट तैयार करती हैं। किसी भी बच्चे में 50 से 100 ग्राम की कमी आने पर नियमित गृहभेंट कर खानपान पर ध्यान रखने की सलाह देती है। वहीं  रेडी-टू-ईट के अलावा शिशुओं के शाररिक व मानसिक विकास के लिए घर पर बने भोजन को पौषिटक युक्त पकाकर खिलाने पर जोर देती हैं। 

आंगनबाड़ी केंद्र के अंतर्गत शिशुवती महिलाओं में हितग्राही हिरौंदी टंडन को 6 माह , पूजा यादव को 3 माह, मनीषा ठाकरे को 7 माह, अनसुईया यादव को 3 माह और शिल्पा सोनी को 2 माह  शिशु है। इन सभी शिशुवतियों को गृहभेंट के दौरान शिशुओं को 6 माह तक सिर्फ स्तनपान कराने का लाभ बताती हैं। वहीं 7 वें माह से शिशुओं को ऊपरी आहार के रुप में रेडी-टू-ईट और घर में चावल व दाल को मिलाकर खिलाने की जानकारियां देती हैं। यमुना साहू बताती हैं लॉकडाउन में भी रेडी-टू-ईट का वितरण और पोषण आहार सामाग्री घर-घर प्रदान किया जा रहा है ताकि कोरोना को हराने में सुपोषण अभियान महत्वपूर्ण भूमिका रह सके। उनके केंद्र में पंजीकृत गर्भवती महिलाओं में लुकेश्वरी सोनी को 7 माह की गर्भावस्था में है। वहीं चंद्रप्रभा साहू को 6 माह, वर्षा गायकवाड़ को 7 माह, पूजा कुम्भकार को 7 माह, अहिल्या यादव को 4 माह, टुकेश्वरी देवांगन को 4 माह की गर्भवास्था में हैं। इन सभी कोरोना संक्रमण से बचने के लिए मास्क का उपयोग, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए समय पर भोजन व भरपूर नींद लेने के साथ ही थाली में रंगीन पोषण आहार की जानकारी दी जा रही है।

22-09-2020
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति सप्ताह में 3 लाख से अधिक बच्चे होंगे लाभवान्वित...

रायपुर/बैकुंठपुर। कृमि यानि पेट के कीडे बच्चों के स्वास्थ्य और संपूर्ण विकास को नुकसान पहुंचा सकते हैं। पेट के कीड़े बच्चों में कुपोषण की एक वजह है और कुपोषण के कारण शारीरिक और मानसिक विकास में बाधा पहुँचती है। राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान 23 सितंबर से 30 सितंबर तक राष्ट्रीय कृमि मुक्ति सप्ताह का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान जिले के चिन्हित बच्चों को मितानिन और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा बच्चों को कृमिनाशक दवा एल्बेंडाजोल की गोली दी जाएगी। जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. अशोक कुमार सिंह ने बताया,  “चिन्हांकित 3.06 लाख बच्चों, किशोर व वयस्कों को कृमिनाशक दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है।

इस वर्ष कोरोना संक्रमण को देखते हुए स्कूलों में कृमि नाशक दवा नहीं दी जाएगी। इसलिए मितानिन और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद से गृह भ्रमण के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग नियम का पालन करते हुए दवा दी जाएगी। स्वास्थ्य अधिकारियों ने आम जनता से उक्त स्वास्थ्य सेवा का अधिक से अधिक लाभ लेने अपील की है। महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज खलखो ने बताया, 1 से 19 वर्षीय बच्चों एवं किशोर-किशोरियों को निःशुल्क एलबेंडाजोल गोली खिलाकर राज्य में कृमि संक्रमण से मुक्ति का प्रयास किया जाता है । इस अभियान में महिला एवं बाल विकास विभाग की समान भागीदारी होती है। इस वर्ष कृमि मुक्ति दिवस पर एक वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, और बीमार व्यक्तियों को एलबेंडाजोल की गोली नहीं दी जाएगी।

सीएमएचओ डॉ. रामेश्वर शर्मा ने राष्ट्रीय कृमि मुक्ति सप्ताह के संबंध में बताया अभियान के दौरान खिलाई जाने वाली एल्बेंडाजोल की गोली बच्चों और बड़ों के लिए सुरक्षित है। पेट के कीड़ों के संक्रमण से बचाने के साथ ही स्वास्थ्य एवं पोषण के स्तर में सुधार लाना दवा का सेवन कराने का मुख्य उद्देश्य है। 

कार्यक्रम की है तैयारी : बच्चों को दवाई स्वास्थ्य विभाग की सहयोगी मितानिन और एएनएम के माध्यम से दी जाएगी। 1 से 2 वर्ष तक के बच्चों को आधी गोली (200 एमजी) एल्बेंडाजोल तथा 2 से 19 वर्ष तक के बच्चों को एक गोली (400 एमजी) की दवा अभियान के तौर खिलाई जाएंगी। एल्बेंडाजोल की गोली बच्चों और बड़ों के लिए सुरक्षित है। प्रतिकूल प्रभाव यदि हो तो प्रबंधन के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं उप स्वास्थ्य केन्द्रों पर उपचार की व्यवस्था भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा रहेगी। प्रदेश में 2015 से यह कार्यक्रम चलाया जा रहा है। उस समय प्रीवेलेंट रेट 73 प्रतिशत था जो अब घटकर 13 प्रतिशत हो गया है। रेट को और भी कम करने का प्रयास निरंतर जारी है।

19-09-2020
राष्ट्रीय पोषण माह अंतर्गत मायापुर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

रायपुर/कांकेर। जिले के पखांजूर तहसील अंतर्गत महिला एवं बाल विकास परियोजना पखांजूर के सेक्टर मायापुर में राष्ट्रीय पोषण माह कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम को जनपद उपाध्यक्ष किशोर कुमार मण्डल ने संबोधित करते हुए कहा कि लोगों को कुपोषण से बचाव एवं रोकथाम के लिए जागरूक करने की आवश्यकता है। कुपोषण कोई लाईलाज बिमारी नहीं है। इसके लिए खान-पान में विशेष ध्यान देने के लिए अपील किये। उन्होंने कहा कि अपने-अपने घरों के गर्भवती माताओं एवं एनीमिक महिलाओं को शुरूआत से ही पौष्टिक भोजन जैसे- हरी सब्जी, मुनगा भाजी, अंकुरित आहार, अण्डा, दाल इत्यादि का सेवन कराये, इससे कुपोषित बच्चे पैदा नहीं होंगे। केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा कुपोषण की रोकथाम के लिए कई प्रकार की योजना संचालित की जा रही है, जिसका लाभ लिया जाए। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रथम गर्भवती माताओं को मुख्यमंत्री मातृत्व वंदना योजना से भी लाभान्वित किया जा रहा है। इस अवसर पर कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को कुपोषण मिटाने के लिए शपथ भी दिलाई गई।

18-09-2020
राष्ट्रीय पोषण माह: व्यवहार और जागरूकता से ही स्वस्थ समाज की परिकल्पना होगी साकार

जांजगीर-चांपा। स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए पोषण व्यवहार में परिवर्तन आज एक आवश्यकता बन गई है। जीवन शैली के बदलाव से सामने आई कई बीमारियां हमारे लिए चुनौतियां बन गई हैं। कई देशों में मोटापा खान-पान की व्यवहारगत कमियों की वजह से तेजी से बढ़ रहा है। भोजन में पोषक तत्वों के अभाव ने लोगों की प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर दिया है। पोषण के प्रति जागरूकता की कमी और समुचित पोषण का अभाव या उपेक्षा हमारे सामने कई प्रकार की बीमारियों के रूप में सामने आता है। इसका सबसे बड़ा दुष्प्रभाव कुपोषण का एक विश्वव्यापी समस्या बनकर उभरना है। कोरोना काल में लोगों को इसका महत्व गहराई से समझ आने लगा है। आहार के प्रति सही व्यवहार और जागरूकता से ही एक स्वस्थ समाज की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है।

स्वस्थ बच्चे के लिए मां का भी स्वस्थ होना जरूरी


रिसर्च में महिलाओं और बच्चों में कुपोषण का अधिक प्रभाव पाया गया है। राष्ट्रीय परिवार एवं स्वास्थ्य सर्वे-4 के अनुसार छत्तीसगढ़ के 5 वर्ष से कम उम्र के 37 प्रतिशत बच्चे कुपोषित और 15 से 49 वर्ष की 47 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा 2 अक्टूबर 2019 गांधी जयंती के दिन से मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की शुरूआत कर गर्भवती महिलाओं और 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए गर्म भोजन की व्यवस्था की गई है, जिससे महिलाओं और बच्चों में पोषक तत्वों की कमी को पूरा किया जा सके। स्वस्थ बच्चा स्वस्थ समाज की आधारशिला होता है। इस आधारशिला को मजबूत बनाने के लिए समुदाय स्तर पर सभी की सहभागिता और जन-जागरूकता बहुत जरूरी है। एक स्वस्थ जीवन के लिए तैयारी गर्भावस्था के दौरान ही शुरू कर देनी चाहिए। स्वस्थ बच्चे के लिए मां का भी स्वस्थ होना उतना ही जरूरी है। इसमें पोषण के पांच सूत्र- पहले सुनहरे 1000 दिन, पौष्टिक आहार, एनीमिया की रोकथाम, डायरिया का प्रबंधन और स्वच्छता और साफ-सफाई स्वस्थ नए जीवन के लिए महामंत्र साबित हो सकते हैं।        

 पहले सुनहरे 1000 दिन पहले

1000 दिनों में तेजी से बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक विकास होता है। इनमें गर्भावस्था के 270 दिन और जन्म के बाद पहले और दूसरे वर्ष के 365-365 दिन इस प्रकार कुल 1000 दिन शामिल होते हैं। इस दौरान उचित स्वास्थ्य, पर्याप्त पोषण, प्यार भरा व तनाव मुक्त माहौल और सही देखभाल बच्चों का पूरा विकास करने में मदद करते हैं। इस समय मां और बच्चे को सही पोषण और खास देखभाल की जरूरत होती है। इस समय गर्भवती की कम से कम चार एएनसी जांच होनी चाहिए। गर्भवती और धात्री महिला को कैल्शियम और आयरन की गोलियों का सेवन कराया जाना चाहिए। इसके साथ ही संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जिससे मां और बच्चे का जीवन सुरक्षित हो सके। परिवार के लिए भी यह जानना और व्यवहार में लाना जरूरी है कि जन्म के एक घंटे के भीतर बच्चे को मां का पहला पीला गाढ़ा दूध देना बहुत जरूरी है,यह बच्चे में रोगों से लड़ने की शक्ति लाता है। 6 माह से बड़े उम्र के बच्चे को स्तनपान के साथ ऊपरी आहार दिया जाना चाहिए। इसके साथ बच्चे को सूची अनुसर नियमित टीकाकरण और बच्चे 9 माह होने पर उसे नियमित विटामिन ए की खुराक दी जानी चाहिए।

पौष्टिक आहार

6 महीने के बच्चे और उससे बड़े सभी लोगों को भी पर्याप्त मात्रा में तरह-तरह का पौष्टिक आहार आवश्यक लेना चाहिए। पौष्टिक आहार में विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ जैसे कि अनाज, दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां और मौसमी फल लेने चाहिए। हरी सब्जियों में पालक, मेथी, चौलाई और सरसों, पीले फल जैसे आम व पका पपीता खाए जा सकते हैं। यदि मांसाहारी हैं तो, अंडा, मांस और मछली आदि भोजन में लिया जा सकता है। खाने में दूख, दूध से बने पदार्थ और मेवे आदि शामिल करें। अपने खाने में स्थानीय रूप से उत्पादित पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करें। आंगनबाड़ी से मिलने वाला पोषाहार अवश्य खाएं। यह निश्चित मात्रा में पौष्टिक पदार्थों को मिला कर तैयार किया जाता है। जब बच्चा 6 महीने का हो जाए तो मां के दूध के साथ घर का बना मसला और गाढ़ा ऊपरी आहार भी शुरू कर देना चाहिए जैसे- कद्दू, लौकी, गाजर, पालक तथा गाढ़ी दाल, दलिया, खिचड़ी आदि। यदि मांसाहारी हैं तो अंडा, मांस व मछली भी देना चाहिए। बच्चे के खाने में ऊपर से 1 चम्मच घी, तेल या मक्खन मिलाएं।बच्चे के खाने में नमक, चीनी और मसाला कम डालें। प्रारंभ में बच्चे का भोजन एक खाद्य पदार्थ से शुरू करें, धीरे-धीरे खाने में विविधता लाएं। बच्चे का खाना रूचिकर बनाने के लिए अलग-अलग स्वाद व रंग शामिल करें। बच्चे को बाजार का बिस्कुट, चिप्स, मिठाई, नमकीन और जूस जैसी चीजें न खिलाएं। इससे बच्चे को सही पोषक तत्व नहीं मिल पाते।

एनीमिया की रोकथाम

स्वस्थ शरीर और तेज दिमाग के लिए एनीमिया की रोकथाम करें। सभी उम्र के लोगों में एनीमिया की जांच और पहचान किया जाना महत्वपूर्ण होता है, ताकि व्यक्ति की हीमोग्लोबिन के स्तर के अनुसार उपयुक्त उपचार प्रारंभ किया जा सके। एनीमिया की रोकथाम के लिए आयरन युक्त आहार खाएं जैसे- दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, पालक, मेथी, फल, दूध, दही, पनीर आदि। यदि मांसाहारी है तो अंडा, मांस व मछली का भी सेवन करें। खाने में नींबू, आंवला, अमरूद जैसे खट्टे फल शामिल करें, जो आयरन के अवशोषण में मदद करते हैं। साथ ही आयरन युक्त पूरक लें।  आयरन युक्त पूरक प्रदान करने के लिए 6-59 माह के बच्चे को हफ्ते में 2 बार 1 मिली. आईएफए सिरप, 5-9 वर्ष की उम्र में आईएफए की एक गुलाबी गोली, 10-19 वर्ष तक की उम्र में हफ्ते में एक बार आईएफए की नीली गोली,गर्भवती महिला को गर्भावस्था के चौथे महीने से रोजाना 180 दिन तक आईएफए की एक लाल गोली, धात्री महिला को 180 दिन तक आईएफए की एक लाल गोली और कृमिनाश के लिए कीड़े की दवा (एल्बेण्डाजोल) की निर्धारित खुराक दी जाती है। आंगनबाड़ियों और स्वास्थ्य केन्द्रों के माध्यम से यह खुराक बच्चे को दिलाई जानी चाहिए।
इसके साथ ही प्रसव के दौरान कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं जैसे  कि स्वास्थ्य संस्थाएं जन्म के पश्चात बच्चे की गर्भनाल 3 मिनट बाद ही काटें। इससे नवजात बच्चे के खून में आयरन की मात्रा बनी रहती है।


डायरिया का प्रबंधन

स्वस्थ शरीर और कमजोरी से बचाव के लिए डायरिया का प्रबंधन जरूरी है। इसके लिए व्यक्तिगत साफ-सफाई, घर की सफाई, आहार की स्वच्छता का ध्यान रखें और डायरिया से बचाव के लिए हमेशा स्वच्छ पानी पिएं। माताएं 6 माह तक बच्चे को केवल स्तनपान ही करवाएं। कोई और खाद्य पदार्थ यहां तक पानी भी नही दें क्योंकि वह भी बच्चे में डायरिया का कारण बन सकता है। डायरिया होने पर भी मां स्तनपान नहीं रोके बल्कि बार-बार स्तनपान करवाएं। शरीर को दोबारा स्वस्थ बनाने के लिए 6 माह से बड़े बच्चे को ऊपरी आहार के साथ बार-बार स्तनपान करवाएं। बच्चे को डायरिया होने पर तुरंत ओआरएस तथा अतिरिक्त तरल पदार्थ दें और जब तक डायरिया पूरी तरह ठीक न हो जाए तब तक जारी रखें। डायरिया से पीड़ित बच्चे को डॉक्टर की सलाह पर 14 दिन तक जिंक दें, अगर दस्त रूक जाए तो भी यह देना बंद नहीं करें।

स्वच्छता और साफ-सफाई


स्वास्थ्य और सफाई का हमेशा साथ रहा है। गंदगी कई बीमारियों का खुला निमंत्रण होती है। इसलिए अपनी स्वच्छता सुनिश्चित करें।हमेशा साफ बर्तन में ढक कर रखा हुआ शुद्ध पानी पिएं, बर्तन को ऊंचे स्थान पर लंबी डण्डी वाली टिसनी के साथ रखें। हमेशा खाना बनाने, स्तनपान से पहले, बच्चे को खिलाने से पहले, शौच के बाद और बच्चे के मल के निपटान के बाद साबुन और पानी से हाथ आवश्य धोएं। बच्चे को खाना खिलाने से पहले बच्चे के हाथों को साबुन और पानी से जरूर धोएं। शौच के लिए हमेशा शौचालय का उपयोग ही करें। किशोरियां और महिलाएं माहवारी के दौरान व्यक्तिगत साफ-सफाई का ध्यान रखें।

 

18-09-2020
कुपोषण दूर करने के लिए दी जा रही है ऑनलाइन पोषण शिक्षा

रायपुर/दुर्ग। खाद्य एवं पोषण बोर्ड, रायपुर द्वारा दुर्ग जिले में धमधा महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना क्षेत्र के सभी 7 सेक्टर– धमधा, डगनिया, कोड़ियां, पेंड्रा वन, घोठा,  बोरी और लिटिया में पोषण शिक्षा कार्यक्रमों का आयोजन ऑनलाइन किया गया। प्रतिभागियों को ऑनलाइन ही पौष्टिक व्यंजन बनाकर दिखाये गये। ऑनलाइन परिचर्चा में महिला पर्यवेक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व हितग्राहियों ने भी पोषण आधारित भोजन के महत्व पर चर्चा की। ऑनलाइन डेमो में पौष्टिक भेल बनाना बताया गया। भेल बनाने के लिए मुर्रा, फूटा चना, अनार के दाने, खीरा, र्मिची, नीबू, धनिया, चाट मसाला, नमक, टमाटर व जाम सभी को काट कर मिक्स कर पौष्टिक भेल बनाने की विधि का प्रशिक्षण दिया गया। इसके अलावा बेबीनार में फ्रूट चार्ट का डेमो बताया गया।

राष्ट्रीय पोषण माह जनसाधारण तक पोषण की जानकारी पहुंचाने तथा कुपोषण को दूर करने के लिए मनाया जाता है । पोषण बोर्ड के राज्य प्रभारी मनीष यादव ने बताया इस वर्ष का पोषण माह तीन मुख्य बातों पर केन्द्रित है, जिसमें पोषण वाटिका को बढ़ावा देना, स्तनपान तथा अतिकुपोषित यानी सीवियर एक्यूट मालन्यूट्रिटेड (सैम) बच्चों की पहचान व प्रबंधन शामिल है। ऐसे गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की पहचान कर बाल मृत्युदर में कमी लायी जा सकती है। सैम प्रबंधन के तहत पांच वर्ष से कम उम्र के गंभीर कुपोषित की पहचान माक-टेप्स (मिड अपर आर्म सरकमफेरेंस टेप्स) मध्य ऊपरी भुजा की नाप से होती है। यदि भुजा की माप 11.5 सेंटीमीटर है तो समझिये बच्चा गंभीर कुपोषित श्रेणी का है। यदि 11.5 सेंटीमीटर से 12.4 सेंटीमीटर है तो कुपोषित की श्रेणी में माना जाएगा और 12.5 सेंटीमीटर है तो वह सामान्य श्रेणी में माना जाएगा। दोनों पैरों में गडढे़ वाली सूजन के बच्चे भी गंभीर कुपोषित की श्रेणी में माने जाते हैं।

समुदाय स्तर पर यह जागरूकता होनी चाहिए कि भोजन की थाली में खाने के लिए जो भी भोजन शामिल करें उसके हर निवाले में पोषण हो तथा स्वास्थ्य की दृष्टी से सही हो। अच्छे पोषण की सहायता से हम बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास में सुधार ला सकते हैं जिस तरह का पोषण हम अपने बच्चों को देंगे उसी के अनुरूप उसका विकास होगा और वह मानसिक व शारीरिक विकास के साथ ही आर्थिक और सामाजिक विकास भी कर सकेगा। छह माह तक बच्चे के पोषण की जरूरत माँ के दूध से ही पूरी हो जाती है। उसके बाद उसे माँ के दूध के साथ-साथ ऊपरी आहार की जरूरत होती है। बिना इसके बच्चे का पूर्ण रूप से विकास संभव नहीं है। घर की रसोई में ही उपलब्ध अनाज, दाल, फल और सब्जियों के द्वारा ही बच्चे का पोषण पूरा कर सकते हैं। यदि हम अपने भोजन का पूर्ण पोषण प्राप्त करना चाहते हैं तो स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना ही पड़ेगा । उन्होंने बताया हम अपना भोजन कितना भी पौष्टिक बना लेकिन यदि उसे गंदे बर्तन में रखकर खाएंगे, या गंदे हाथों से खाएंगे तो उसका कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिलने वाला है। इसलिए हमें तीन स्तरीय स्वच्छता का ध्यान रखना होगा जो कि व्यक्तिगत, घरेलू और सामाजिक स्वच्छता है।
 

17-09-2020
गृह भेंट कर हस्त प्रक्षालन और पोषण आहार के प्रति किया जा रहा है जागरूक

रायपुर। महिला एवं बाल विकास विभाग के द्वारा से चलाये जा रहे राष्ट्रीय पोषण माह में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से गृह भेंट कर “सही पोषण देश रोशन” का संदेश पहुंचाने के साथ-साथ हितग्राहियों को हस्त प्रक्षालन और पोषण आहार सेवन के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है। शिशुवती और गर्भवती महिलाओं को थाली में तिरंगा भोजन खाने की सीख दी जा रही है। साथ ही रेडी टू ईट का वितरण भी किया जा रहा है। विकासखण्ड अभनपुर में राष्ट्रीय पोषण माह का आयोजन सीडीपीओ जागेश्वर साहू के मार्गदर्शन में किया गया। ग्राम पंचायत पारागांव की हितग्राही संध्या साहू जो 2 माह की गर्भवती ने बताया आंगनबाड़ी दीदी ने मुझे पोष्टिक थाली के बारे में बताया उन्होंने कहा गर्भवती की थाली कम से कम तिरंगा थाली होना चाहिये। जिसमें दाल चावल और रोटी होना ही चाहिये थाली जितनी रंगीन होगी उतनी ही पौष्टिक भी होती है।

गर्भवती को दूध,दही सूखे मेवे और ताज़ी हरी पत्तेदार सब्ज़ीयॉ खाने से शिशु का उचित विकास होता है। खाना एक बार में पूरा नहीं खाया जा रहा हो तो भरपूर खाने के लियें थोड़ा थोड़ा अंतराल पर खाते रहना चाहिये। 15 वर्षीय किशोरी‌ ग्राम पंचायत चम्पारण की निवासी हेमलता निषाद कहती है कि आंगनबाड़ी दीदी जब गृह भेंट पर आयी तो उन्होंने मुझे बताया की खाने से पहले और शौच के बाद साबुन से हस्त प्रक्षालन करना ,घर से बाहर जाने पर फेस मास्क और शारीरिक दूरी का ध्यान रखना है। माहवारी के विशेष दिनों के दौरान स्वच्छता रखने के तरीके और उसके फायदे भी बताये।

सेक्टर पारागांव की पर्यवेक्षक कांता लकडा ने बताया कि सेक्टर की दस ग्राम पंचायत में कुपोषित बच्चों का अलग से चिन्हांकन करके उन्हें पौष्टिक आहार दिया जा रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर बच्चों के माता-पिता को पौष्टिक भोजन से होने वाले फायदों की जानकारी भी दे रहे हैं। गांव में सुपोषण से संबंधित सभी जानकारी अभिभावकों को दी जा रही है। विभिन्न पौष्टिक आहारों का महत्व के साथ-साथ उसके सेवन करने के तरीके को भी पोषण आहार प्रदर्शनी लगाकर बताया जा रहा है। आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से चित्रकारी, सुपोषण से संबंधित स्लोगन तथा रचनात्मक चित्रकारी बच्चों से बनवाकर व्हाट्सएप के माध्यम से पोषण आहार का संदेश भी दिया जा रहा है। लोग भी सुपोषण के महत्व को समझ रहे हैं।बच्चों तथा महिलाओं को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा गृहभेंट कर रेडी टू ईट का वितरण किया जा रहा है। सेक्टर में राष्ट्रीय पोषण माह संबंधी आकर्षक  रंगोली तथा चित्रकारी बनाकर पोषण आहार का उपयोग करने का संदेश दिया जा रहा है।

15-09-2020
घर में ही मौजूद है पोषण के सारे आहार, गृह भ्रमण और बैठकों के माध्यम से दी जा रही जानकारी

रायपुर। प्रदेश में महिला एवं बाल विकास विभाग के द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रीय पोषण माह के तहत शिशुवती माताओं को पौष्टिक आहार के साथ-साथ पौष्टिक आहार बनाने की सीख भी मिल रही है । साथ ही गर्भवती महिलाओं को गर्भ में पल रहे शिशु की उचित देखभाल के साथ स्वस्थ शिशु के लिए किन पौष्टिक आहार का उपयोग करना है के बारे में भी गृह भ्रमण और बैठकों के माध्यम से जानकारी दी जा रही है। इसी कड़ी में विकाखण्ड अभनपुर के सेक्टर तोरला की ग्राम पंचायत टीला में आंगनबाड़ी क्रमांक 1 से 4 तक में कई गतिविधियों का आयोजन किया गया।  इस दौरान शिशुवती माता जानकी निराला कहती हैं, मुनगा फली हमारे घर के आंगन और खेत में लगी हुई है लेकिन उसके महत्व के बारे में हमें नहीं पता था । ग्राम में चल रहे राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान पौष्टिक आहार की जानकारी आंगनबाड़ी दीदी से मिली। दीदी ने बताया इसकी पत्तियों में प्रोटीन विटामिन बी 6, विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन ई, आयरन, मैग्नीशियम पोटेशियम, जिंक जैसे तत्व पाये जाते हैं। इसकी फली में विटामिन ई और मुनगा की पत्ती में कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं। मुनगा में एंटी ओग्सिडेंट बायोएक्टिव प्लांट कंपाउंड होते हैं। यह पत्तियां प्रोटीन का भी अच्छा स्रोत है। एक कप पानी में 2 ग्राम प्रोटीन होता है। यह प्रोटीन किसी भी प्रकार से मांसाहारी स्रोत से मिले प्रोटीन से कम नहीं है क्योंकि इसमें सभी आवश्यक एमिनों एसिड पाए जाते हैं। जो हमारे शरीर को स्वस्थ रखने में मददगार होते हैं ।

वहीं 6 माह की गर्भवती सुजाता कहती हैं कि गृह भेंट के दौरान आंगनबाड़ी और मितानिन दीदी ने बताया कि गर्भवती महिलाओं और उनके बच्चे के लिए मुनगा भाजी कितना लाभकारी है। बच्चा हो जाने के उपरांत दूध पिलाने वाली मां के लिए भी मुनगा भाजी अमृत के समान है । दीदी ने बताया मुनगा की पत्ती को घी में गर्म करके प्रसूता स्त्री को दिए जाने का पुराना रिवाज है। इससे दूध की कमीं नहीं होती और जन्म के बाद भी कमजोरी और थकान का भी निवारण होता है। साथ ही बच्चा भी स्वस्थ रहता है और वजन भी बढ़ता है। मुनगा में पाये जाने वाला पर्याप्त कैल्शियम किसी भी अन्य कैल्शियम पूरक से कई गुना अच्छा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता करुणा सोनी ने बताया विभाग द्वारा विभिन्न गतिविधियां का आयोजित किया जा रहा है। ग्राम में सुपोषण के बारे में जागरूकता लाने के लिए स्कूली बच्चों के सहयोग से चित्रकारी, स्लोगन तथा रंगोली द्वारा संदेश बनवाये गये और व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से भी पोषण से संबंधित जागरूकता संदेश दिए जा रहे हैं। 

ग्राम में सुपोषण चौपाल कृषक बैठक का भी आयोजन किया जा रहा है। सुपोषण चौपाल में पौष्टिक आहार से संबंधित जानकारियां दी जा रही है। सुपोषण से संबंधित इन रचनात्मक गतिविधियों के द्वारा महिलाओं तथा बच्चों मे सुपोषण के बारे मे जागरूकता लाई जा रही है। ऐसी बैठकों के माध्यम से ग्राम पंचायत द्वारा मुनगा, केला, आम और सब्जी भाजी के पेड़ एवं बीजों का वितरण भी किया जा रहा है। चौपाल और कृषक बैठक के माध्यम से जैविक खेती को बढ़ावा, शारीरिक दूरी अपनाकर कृषि कार्यों के साथ-साथ हाथ को अच्छे से धोना । जगह-जगह गुटका खा कर थूकने से होने वाले दुष्परिणामों के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है ।कोरोना महामारी के इस दौर मे कोविड-19 के संबंधित गाइड लाइन का पालन कर सभी गतिविधियां सम्पन्न की जा रही है। सुपोषण के बारे मे जागरूकता लाने तथा बच्चों, महिलाओं को कुपोषण से बचाने के चित्रकारी, सुपोषण से संबंधित स्लोगन तथा रचनात्मक चित्रकारी को बच्चों के साथ बड़े भी रूचि लेकर सुपोषण का महत्व समझ रहे हैं। बच्चों तथा महिलाओं को कुपोषण से मुक्ति दिलाने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर पौष्टिक आहार “रेडी टू ईट” का वितरण किया भी किया जा रहा है।

14-09-2020
राष्ट्रीय पोषण माह: चित्रकारी, रंगोली के माध्यम से किया जा रहा जागरुक

जांजगीर-चांपा। राष्ट्रीय पोषण माह के तहत जिले मे कुपोषण मुक्ति जनजागरूकता के लिए विभिन्न गतिविधिया आयोजित की जा रही है। कलेक्टर यशवंत के मार्गदर्शन में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा डिजिटल माध्यम से चित्रकारी, रंगोली, पोषण वाटिका के माध्यम से जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का सहयोग मिल रहा है। जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि निर्धारित कार्यक्रम के तहत 14 सितम्बर को कृषक समूह की बैठक आयोजित की गई एवं 15 सितम्बर को टीएचआर वितरण एवं गृह भेंट के संबंध में चर्चा की जाएगी।

 

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