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14-09-2019
चंद्रयान-2 : खत्म हो रही विक्रम लैंडर की बैटरी, बचाने के लिए सिर्फ हफ्ते भर का समय

नई दिल्ली। लगभग एक हफ्ते का समय बीत जाने के बाद विक्रम से फिर सें संपर्क स्थापित करने की उम्मीदें अब धीरे-धीरे धुंधली पड़ती जा रही हैं। इंडियन स्पेस रिसर्च सेंटर (इसरो) चांद की सतह पर विक्रम से संपर्क करने की आखिरी कोशिश में लगा हुआ है। बता दें कि भारत के मिशन चंद्रयान-2 के दौरान चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग से ठीक पहले लैंडर विक्रम से मिशन कंट्रोल का संपर्क टूट गया था। दरअसल, विक्रम और उसके भीतर मौजूद रोवर प्रज्ञान को चांद की सतह पर एक चंद्र दिवस (धरती के 14 दिन के बराबर) का वक्त गुजारना था। ऐसे में इसरो के पास अब थोड़ा ही वक्त बचा है।

इसरो के एक वैज्ञानिक ने बताया, जैसे-जैसे वक्त गुजरता जा रहा है, विक्रम से संपर्क करना जटिल होता जा रहा है। उसकी बैटरी खत्म हो रही है। वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है कि अगर बैटरी खत्म हो गई तो विक्रम में जान फूंकने के लिए उसे बिजली देने वाला कोई नहीं होगा। हर गुजरते मिनट के साथ हालात बदतर ही होते जा रहे हैं। एक वैज्ञानिक ने बताया कि विक्रम दूर और दूर होता दिख रहा है। इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क की एक टीम विक्रम से संपर्क की कोशिश में दिन-रात लगी हुई है। बीते सात सितंबर को विक्रम को सॉफ्ट लैंडिंग करनी थी, मगर चांद की सतह से ठीक 2.1 किमी पहले ही विक्रम का संपर्क इसरो से टूट गया था।

हालांकि, बाद में चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने हार्ड लैंडिंग के बाद सतह पर पडे़ विक्रम को खोज निकाला था, जिसके बाद वैज्ञानिकों में फिर उम्मीद जगी थी। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा भी विक्रम से संपर्क करने की कोशिशों में जुटा है। इसरो के वैज्ञानिक ने बताया कि विक्रम की स्थिति फिलहाल जस की तस है। यह अब भी बिजली पैदा कर सकता है। यह अपनी बैटरियों को सौर पैनलों से रिचार्ज कर सकता है। हालांकि, इसमें किसी तरह की प्रगति की उम्मीद अब धुंधली हो चली है। इसरो के एक और वैज्ञानिक ने बताया, चांद की सतह पर विक्रम की हार्ड लैंडिंग ने उससे संपर्क करने के प्रयास को बेहद दुरूह बना दिया है। यह सही दिशा में नहीं है, जिससे विक्रम इसरो द्वारा भेजे जा रहे रेडियो संकेतों को ग्रहण नहीं कर पा रहा है। सतह पर झटके से उतरने के चलते हो सकता है कि विक्रम को खासा नुकसान पहुंचा हो।

 

10-09-2019
चंद्रयान -2: चांद की सतह पर सलामत विक्रम लैंडर, किए जा रहा संपर्क का प्रयास : इसरो

नई दिल्ली। चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर से संपर्क स्थापित करने को लेकर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) लगातार प्रयासरत है। इसरो ने कहा कि विक्रम लैंडर के लोकेशन का चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर द्वारा पता लगा लिया गया है, मगर अब तक उससे संपर्क नहीं साधा जा सका है। विक्रम लैंडर से कम्यूनिकेशन स्थापित करने को लेकर सभी प्रयास किए जा रहे हैं। बता दें कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के एक अधिकारी ने सोमवार को कहा कि 'चंद्रयान-2 का लैंडर 'विक्रम चांद की सतह पर सलामत और साबुत अवस्था में है और यह टूटा नहीं है। हालांकि 'हार्ड लैंडिंग की वजह से यह झुक गया है तथा इससे पुन: संपर्क स्थापित करने की हरसंभव कोशिश की जा रही है। बता दें कि विक्रम का शनिवार को 'सॉफ्ट लैंडिंग के प्रयास के अंतिम क्षणों में उस समय इसरो के नियंत्रण कक्ष से संपर्क टूट गया था जब यह चांद की सतह से 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर था। लैंडर के भीतर 'प्रज्ञान नाम का रोवर भी है। मिशन से जुड़े इसरो के एक अधिकारी ने कहा, ऑर्बिटर के कैमरे से भेजी गईं तस्वीरों के मुताबिक यह तय जगह के बेहद नजदीक एक 'हार्ड लैंडिंग थी। लैंडर वहां साबुत है, उसके टुकड़े नहीं हुए हैं। वह झुकी हुई स्थिति में है।

 

09-09-2019
मोदी सरकार की दूसरी पारी के 100 दिन, कठोर परिश्रम-बड़े निर्णयों के : केंद्रीय मंत्री गहलोत

रायपुर। केंद्र की मोदी सरकार की दूसरी पारी के 100 दिन पूरे होने पर केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत ने आज सोमवार को राजधानी के न्यू सर्किट हाउस में पत्रकारवार्ता ली। उन्होंने इसे कठोर परिश्रम और बड़े निर्णयों के 100 दिन कहा। उन्होंने मोदी सरकार 2.0 की उपलब्धियां गिनवाते हुए कहा कि दूसरी पारी के लिए पहले से ही हमने कार्य योजना बनाई, उसी के मुताबिक काम करते हुए 100 दिनों के भीतर कई महत्वपूर्ण कामों को अंजाम तक पहुंचाया गया। केंद्रीय मंत्री गहलोत ने कहा कि हमारी सरकार ने जो काम किया है, उसकी देश और दुनिया में सराहना हो रही है। सरकार ने एक नहीं बल्की कई ऐतिहासिक कदम के उठाएं हैं। उन्होंने कहा कि उपलब्धियों की श्रृंखला तो बहुत लंबी है लेकिन कुछ झलकियां आपके सामने रख रहा हूं। उन्होंने बताया कि हमारी सरकार के अभूतपूर्व फैसले में जम्मू और कश्मीर को मुख्य धारा में लाया गया। जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 के विशेष प्रावधानों को हटाने का ऐतिहासिक काम किया है। अनुच्छेद 35-ए को निरस्त कर दिया गया। यह पहल राज्य में सामाजिक आर्थिक बुनयादी ढांचे की बेहतरी ले लिए की गई है। विवाहित मुस्लिम महिलाओं के लिए ऐतिहासिक ट्रिपल तलाक की कुप्रथा को खत्म किया गया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार भारत को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के प्रतिबद्ध है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का ऐतिहासिक विलय और बैंकों के माध्यम से अतिरिक्त क्रेडिट विस्तार। बैंकों ऋणों की ब्याज दरों में समय कटौती। आटोमोबाइल क्षेत्र में गति के उपाय और 5 वर्षों में 100 लाख करोड़ रुपए से अधिक की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की पाइपलाइन को अंतिम रूप देने के लिए गठित एक अंतर मंत्रालयी कार्य बल।

उन्होंने इज ऑफ डूइंग बिजनेस, समाज के सभी वर्गों के लिए सामाजिक न्याय सुनिश्चित किया गया। हमारी सरकार ने सबका सशक्तिकरण, आदिवासी कल्याण,किसानों की आय दुगनी करना, जल सुरक्षा की ओर कदम, सुशासन, आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई, मोटरयान संसोधन अधिनियम,इलेक्ट्रिक गतिशीलता को प्रोत्साहन,फिट इंडिया मूवमेंट, चंद्रयान-2 नए क्षितिज की खोज,सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र, भारत को विश्व के साथ, भारत का बढ़ता वैश्विक कद, ग्लोबल लीडरशीप में भारत अग्रणी आदि विषयों पर मोदी सरकार की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। इस दौरान पत्रकारवार्ता में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष विक्रम उसेंडी, नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक, सांसद सुनील सोनी और रायपुर दक्षिण विधायक बृजमोहन अग्रवाल भी मौजूद थे।

08-09-2019
इसरो ने माना-चांद से टकराया था 'विक्रम लैंडर', नुकसान होने का डर!

नई दिल्ली। चंद्रयान-2  के विक्रम लैंडर  को इसरो ने चांद की सतह पर खोज निकाला है। इसके साथ ही रविवार को इसरो प्रमुख के सिवन ने कहा है कि देखकर लगता है कि विक्रम लैंडर जाकर चांद की सतह से टकरा गया है। इसके साथ उन्होंने यह भी स्वीकार कर लिया है कि विक्रम लैंडर की प्लान की गई लैंडिंग सॉफ्ट नहीं रही। उन्होंने कहा है कि हां, हमने चांद की सतह पर लैंडर को ढूंढ लिया है। यह जरूर चांद की सतह पर तेजी से गिरा होगा। इसके बाद जब इसरो चीफ के सिवन से पूछा गया कि क्या तेजी से चांद से टकराने के चलते लैंडर को नुकसान पहुंचा है, जिस पर सिवन ने कहा है कि वे अभी इस बात को नहीं जानते हैं। लेकिन कई अंतरिक्ष जानकारों का कहना है कि तेजी से चांद से टकराने के चलते विक्रम लैंडर को हुए नुकसान की बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि रोवर प्रज्ञान अभी भी लैंडर के अंदर है। यह बात चंद्रयान-2 के ऑनबोर्ड कैमरे के जरिए खींची गई लैंडर की तस्वीर को देखकर पता चलती है। साथ ही इसरो ने यह भी बताया कि चंद्रयान 2 का ऑर्बिटर जो कि पूरी तरह से स्वस्थ, सुरक्षित और सही तरह से काम कर रहा है, चंद्रमा के चक्कर लगातार लगा रहा है। इससे पहले बेंगलुरू स्थित इसरो के हेडक्वार्टर की ओर से यह बयान भी जारी किया गया था कि ऑर्बिटर का कैमरा सबसे ज्यादा रिजोल्यूशन वाला कैमरा है। जो अभी तक किसी भी चंद्र मिशन में इस्तेमाल हुए कैमरे से ज्यादा अच्छी रिजोल्यूशन वाली तस्वीर खींच सकता है। यह तस्वीरें अंतरराष्ट्रीय विज्ञान समुदाय के लिए बहुत ज्यादा काम की हो सकती हैं।

 

08-09-2019
Breaking : चंद्रयान-2 : चांद पर विक्रम लैंडर की स्थिति का पता चला

नई दिल्ली। चंद्रयान 2 के संपर्क टूटने से देश में निराश छा गई थी। ऐसे में रविवार को एक खुशखबरी है। खबर के मुताबिक इसरो को चांद पर विक्रम लैंडर की स्थिति का पता चल गया है। ऑर्बिटर ने थर्मल इमेज कैमरा से उसकी तस्वीर ली है। उससे अभी कोई संचार स्थापित नहीं हो पाया है। इसरो के मुताबिक विक्रम लैंडर लैंडिंग वाली तय जगह से 500 मीटर दूर पड़ा है। चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर में लगे ऑप्टिकल हाई रिजोल्यूशन कैमरा ने विक्रम लैंडर की तस्वीर ली है। अब इसरो वैज्ञानिक ऑर्बिटर के जरिए विक्रम लैंडर को संदेश भेजने की कोशिश कर रहे हैं ताकि, उसका कम्युनिकेशन सिस्टम ऑन किया जा सके। इसरो के सूत्रों के अनुसार बेंगलुरु स्थित इसरो सेंटर से लगातार विक्रम लैंडर और ऑर्बिटर को संदेश भेजा जा रहा है ताकि कम्युनिकेशन शुरू किया जा सके। 

 

08-09-2019
चंद्रयान-2 : लैंडर से दोबारा संपर्क साधने की जारी है कोशिश : इसरो चीफ के. सिवन

नई दिल्ली। चंद्रयान-2 के लैंडर ‘विक्रम’ का चांद की सतह को छूने से ठीक पहले इसरो से संपर्क भले ही टूट गया हो पर उम्मीदें अभी कायम हैं। जी हां इसरो के वैज्ञानिक अब भी हिम्मत नहीं हारे हैं और उनका हौसला बुलंद है। इसरो चीफ के. सिवन ने साक्षात्कार में स्पष्ट कहा कि लैंडर से दोबारा संपर्क साधने की कोशिश की जा रही है। सिवन ने साफ कहा कि यह कोई झटका नहीं है, हम अगले 14 दिनों तक 'विक्रम' से संपर्क साधने की पूरी कोशिश करेंगे। निश्चित तौर पर 135 करोड़ भारतीयों में छाई मायूसी के बीच इस तरह की कोशिश एक नई उम्मीद को जगा रही है। इसरो के वैज्ञानिक अब भी मिशन के काम में डटे हुए हैं। ऐसे में देश पॉजिटिव सोच रहा है। बता दें कि भारत के चंद्रयान-2 मिशन को शनिवार तड़के उस समय झटका लगा, जब चंद्रमा के सतह से महज 2 किलोमीटर पहले लैंडर विक्रम से इसरो का संपर्क टूट गया। इसरो ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि विक्रम लैंडर उतर रहा था और लक्ष्य से 2.1 किलोमीटर पहले तक उसका काम सामान्य था। उसके बाद लैंडर का संपर्क जमीन पर स्थित केंद्र से टूट गया। आंकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है। इसरो प्रमुख के. सिवन ने बताया कि लैंडर विक्रम से दोबारा संपर्क बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि चंद्रयान-2 मिशन 95 फीसदी सफल रहा है। उन्होंने कहा है कि चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर करीब 7.5 साल तक काम कर सकता है। उन्होंने यह भी जानकारी दी है कि गगनयान समेत इसरो के सारे मिशन तय समय पर पूरे होंगे।

07-09-2019
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कुछ इस अंदाज में इसरो के वैज्ञानिकों को दी बधाई, पढ़ें क्या कहा...

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसरो के वैज्ञानिकों को अलग ही अंदाज में बधाई दी है। उन्होंने महाभारत के एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए ट्वीट किया है- हो सकता है कि चक्रव्यूह का सातवां चरण भेदने में थोड़ा विलम्ब हो जाए लेकिन 6 चरणों को भेदकर विश्व भर में अपना इतिहास गढ़ना ही किसी को 'अभिमन्यु' बनाता है। इसरो ने विश्व को संदेश दे दिया है कि 21वीं सदी भारत की ही होने वाली है। सभी के कठिन परिश्रम और लगन को मेरा सलाम। बता दें कि शुक्रवार रात चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम से चंद्रमा की सतह से महज दो किलोमीटर पहले इसरो का संपर्क टूट गया था।

इसरो के टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क केंद्र के स्क्रीन पर देखा गया कि विक्रम अपने तय रास्ते से थोड़ा हट गया और उसके बाद संपर्क टूट गया। इसके बाद इसरो के सभी वैज्ञानिकों के चेहरे पर मायूसी साफ देखी जा रही थी तो इधर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो)के अध्यक्ष के. शिवन मिशन में आई बाधा के बाद भावुक हो गए, उनकी आंखों में आंसू आ गए थे, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें गले लगाकर ढांढ़स बंधाया। मिशन में आई बाधा के बावजूद भी सभी इसरो के साथ है, इसरो के वैज्ञानिकों के परिश्रम की सर्वत्र सराहना हो रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैज्ञानिकों का मनोबल और हौसला बढ़ाते हुए कहा कि वे निराशा के पलों को पीछे छोड़कर देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नए संकल्प और दृढ इच्छा शक्ति के साथ निरंतर जारी रखेें। इसी तरह छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने ट्वीट कर कहा है- आज पूरा देश इसरो के आप सभी वैज्ञानिकों के साथ खड़ा है। बाधाओं से आगे बढ़कर आप सभी को देश के लिए आगे अनेक कार्य करने हैं, हिम्मत रखें हम सभी साथ मिलकर ऐसे अनेकों-अनेक नये मिशन पर कार्य करेंगे।

 

07-09-2019
ऑर्बिटर अब भी लगा रहा चांद के चक्कर, 95 प्रतिशत सलामत है चंद्रयान-2

नई दिल्ली। चंद्रयान 2 के लैंडर विक्रम के चांद पर लैंडिग से ठीक 2.1 किमी पहले उसका इसरो से संपर्क टूट गया। विक्रम का संपर्क क्यों टूट गया या फिर वो दुर्घटनाग्रस्त तो नहीं हुआ? अभी भले इसकी कोई जानकारी नहीं है लेकिन 978 करोड़ रुपये लागत वाला चंद्रयान-2 मिशन में अभी सबकुछ खत्म नहीं हुआ है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के एक अधिकारी ने नाम न जाहिर करने के अनुरोध पर बताया कि 'मिशन का सिर्फ पांच प्रतिशत -लैंडर विक्रम और प्रज्ञान रोवर- नुकसान हुआ है, जबकि बाकी 95 प्रतिशत - चंद्रयान-2 ऑर्बिटर- अभी भी चंद्रमा का सफलतापूर्वक चक्कर काट रहा है।' एक साल मिशन अवधि वाला ऑर्बिटर चंद्रमा की कई तस्वीरें लेकर इसरो को भेज सकता है।

अधिकारी ने कहा कि ऑर्बिटर लैंडर की तस्वीरें भी लेकर भेज सकता है, जिससे उसकी स्थिति के बारे में पता चल सकता है। चंद्रयान-2 अंतरिक्ष यान में तीन खंड हैं -ऑर्बिटर, विक्रम  और प्रज्ञान। विक्रम दो सितंबर को आर्बिटर से अलग हो गया था। चंद्रयान-2 को इसके पहले 22 जुलाई को भारत के हेवी रॉकेट जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हिकल-मार्क 3 के जरिए अंतरिक्ष में लांच किया गया था। पीएम ने विक्रम लैंडर से संपर्क टूटने के बाद कहा, हर मुश्किल, हर संघर्ष, हर कठिनाई, हमें कुछ नया सिखाकर जाती है, कुछ नए आविष्कार, नई टेक्नोलॉजी के लिए प्रेरित करती है और इसी से हमारी आगे की सफलता तय होती हैं। ज्ञान का अगर सबसे बड़ा शिक्षक कोई है तो वो विज्ञान है। विज्ञान में विफलता नहीं होती, केवल प्रयोग और प्रयास होते हैं।

06-09-2019
महासमुंद की बेटी श्रीजल चंद्राकर देखेगी प्रधानमंत्री के साथ चंद्रयान-2 की लैंडिंग

नई दिल्ली। दो दिन से चंद्रमा के चारों ओर 35 किमी की ऊंचाई पर मंडरा रहा भारत का चंद्रयान-2 छह और सात सितंबर की दरमियानी रात चंद्रमा की सतह पर कदम रखेगा। लैंडिंग का समय करीब आते ही इसरो के वैज्ञानिकों सहित सभी की धड़कनें तेज होने लगी हैं। 978 करोड़ लागत वाले इस मिशन पर भारत सहित पूरी दुनिया की निगाह है। 1471 किलो के लैंडर ‘विक्रम’ की सॉफ्ट लैंडिंग सफल रही तो भारत ऐसा करने वाले दुनिया के चार देशों में शामिल हो जाएगा। चंद्रमा पर अब तक अमेरिका, रूस और चीन ही अपने यान उतार सके हैं। बंगलूरू स्थित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) के वैज्ञानिक लैंडिंग की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सभी का ध्यान विक्रम की गतिविधि पर टिका है। इसरो अध्यक्ष के. सिवन भी लैंडिंग को बेहद चुनौतीपूर्ण बता चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसरो पहुंचकर 70 स्कूली बच्चों के साथ सॉफ्ट लैंडिंग का सीधा प्रसारण देखेंगे।

ऐसे होगी लैंडिंग
 रात 1 से 2 बजे के बीच विक्रम और इसमें रखे रोवर ‘प्रज्ञान’ को बूस्टर प्रोपल्शन सिस्टम की मदद से लैंडिंग के लिए तैयार किया जाएगा 1:30 से 2:30 के बीच विक्रम को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतारा जाएगा। ध्रुव के इस हिस्से में आज तक कोई देश लैंडिंग नहीं कर सका है। 5:30 से 6:30 के बीच छह पहिये वाला 27 किलो का प्रज्ञान लैंडर से निकलेगा। यह चांद की सतह पर 500 मीटर चलेगा। इसके पहियों पर उकेरा गया राष्ट्रचिह्न चांद की सतह पर अंकित हो जाएगा।

इसरो के पूर्व अध्यक्ष एएस किरण कुमार के अनुसार सॉफ्ट लैंडिंग मिशन का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। अब तब सब योजना के अनुसार हुआ है, आगे भी ऐसा ही होगा। चंद्रयान-1 मिशन के निदेशक रहे ए अन्नादुरई ने कहा, इसरो के पास 40 से अधिक जियोसिंक्रोनस इक्वेटेरियल ऑर्बिट (जीओ) मिशन संभालने का अनुभव है। ऐसे में सॉफ्ट लैंडिंग सफल होने की पूरी उम्मीद है। करीब 35 किमी ऊंचाई से विक्रम 15 मिनट में उतरेगा। विक्रम और प्रज्ञान एक चंद्र दिवस (पृथ्वी के 14 दिन) तक काम करेंगे। चांद की परिक्रमा करते हुए ऑर्बिटर एक वर्ष शोध व अध्ययन करता रहेगा। मिशन का उद्देश्य चांद पर मौजूद खनिजों-धातुओं और तत्वों की खोज और अध्ययन, चंद्रमा की मैपिंग और पानी की खोज करना है।

06-09-2019
लैंडिंग के समय इन खतरों का सामना करेगा 'चंद्रयान-2'...

नई दिल्ली। पृथ्वी से 22 जुलाई को निकला अपना चंद्रयान-2 आज देर रात और तकनीक रूप से कहें तो सात सितंबर की रात चंद्रमा की सतह पर उतरेगा। इस पूरे समय इसने बिना किसी बाधा और अड़चन के अपनी यात्रा पूरी की। लेकिन सबसे रोचक और रोमांचक चंद्रमा की सतह पर उतरने से पहले के 30 मिनट होंगे, जिसमें हर मिनट उसके लिए एक परीक्षा होगा। इसरो ने इसे मिशन का सबसे चुनौतीपूर्ण काम माना है। 2 सितंबर को ऑर्बिटर से अलग होने के साथ ही चंद्रयान के बाकी दो हिस्सों लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान ने चंद्रमा की सतह के लिए अपनी यात्रा शुरू कर दी थी। पहले जीएसएलवी मार्क-3 के सख्त कवच के भीतर और फिर ऑर्बिटर का मजबूत साथ उसे मंजिल तक पहुंचने में मदद कर रहे हैं। लेकिन आगे की राह उसे खुद ही तय करनी होगी। चंद्रमा की परिक्रमा करने के बाद चंद्रमा की ओर शुरू होने वाली लैंडिंग कई खतरे और चुनौतियां लेकर आएगी।

लैडिंंग के दौरान इन खतरों से गुजरेगा चंद्रयान-2
इसरो ने गहन शोध के बाद विक्रम को उतारने की जगह का चुनाव किया है और तमाम खतरों को कम किया गया, जैसा अमर उजाला ने पिछली रिपोर्ट में बताया। इसके बावजूद कुछ खतरे चंद्रमा की भौगोलिक स्थिति की वजह से शत-प्रतिशत खत्म नहीं हुए हैं। इनमें यह चार प्रमुख हैं -

1). गुरुत्वाकर्षण और तनाव :
चंद्रमा पर उतरते समय उसके गुरुत्वाकर्षण से संतुलन बनाए रखना और दबाव से गुजरना विक्रम के लिए मुश्किल होगा। यहां उसे सौर गतिविधियों व आंधियों से पैदा हुए दबाव को भी सहना है। हालांकि चंद्रमा का अपना वातावरण न होने की वजह से उसके लिए कुछ मुश्किलें आसान होगी। लेकिन रेडिएशन के अलग-अलग स्तर खतरनाक हैं।

2). 23,605 गड्ढों के बीच लैंडिंग :
करोड़ों वर्षों के दौरान चंद्रमा की सतह पर अंतरिक्ष पिंड टकराने से लेकर इसकी अपनी भूगर्भीय हलचलों जैसी वजहों से क्रेटर यानी गड्ढे बनते रहे हैं। चंद्रयान-2 की लैंडिंग के लिए 15 गुणा 8 किमी का दीर्घवृत निर्धारित किया गया है। इस छोटे से क्षेत्र में 23,605 गड्ढे हैं। इनकी गणना जर्मनी के ग्रह शोध संस्थान और डॉर्टमंड टेक्नीकल यूनिवर्सिटी के साथ भारत की फिजिकल रिसर्च लैबोरेट्री के वैज्ञानिकों की टीम ने की है। टीम के अनुसार इनमें से 13,600 गड्ढों का व्यास 10 मीटर से भी कम है। वहीं केवल 11 गड्ढे ऐसे हैं जो 500 मीटर या उससे बड़े हैं। इनके बीच विक्रम उतारने के लिए बेहद सटीक योजना बनाई गई है। जरा सी चूक पूरे मिशन को खतरे में डाल सकती है।

3). छह प्रतिशत क्षेत्र में ढलान 15 डिग्री से ज्यादा
इसरो को लैंडिंग के लिए पहले से ही ऐसी जगह का चुनाव करना था, जहां ढलान 15 डिग्री से अधिक न हो। इससे विक्रम को उतारने में आसानी होगी। हालांकि लैंडिंग के दीर्घवृत में 94 प्रतिशत जगह ढाल 15 डिग्री से कम है, लेकिन छह प्रतिशत क्षेत्र ऐसे भी हैं, जहां ढलान 15 डिग्री से अधिक है। स्लोप-मैप के अनुसार यह ढाल गड्ढों के किनारों की वजह से बने हैं। विक्रम को यहां उतारने की योजना के दौरान इस खतरे से भी निपटा गया है।

4). और अपने पांवों पर लैंडिंग
चंद्रमा की सतह पर उतरने के लिए विक्रम को पूरी तरह समतल सतह देना संभव नहीं था। ऐसे में अपने चार पैरों के बल पर उतरना भी चुनौतीपूर्ण है। लेकिन इन्हीं पैरों में लगे शॉक-अब्जॉबर्स उसे इन झटकों से बचाने के लिए लगाए गए हैं। लैंडिंग के बाद धूल छंटने का चार घंटे इंतजार विक्रम के उतरने के बाद भी उसके भीतर रखे गए रोवर प्रज्ञान को अगले चार घंटे तक बाहर नहीं निकालने की योजना बनाई गई है। इसकी वजह लैंडिंग की वजह से उड़ी धूल है। चंद्रमा के कमजोर गुरुत्वाकरर्षण में यह धूल न केवल काफी समय बनी रह सकती है, बल्कि उपकरणों को नुकसान भी पहुंचा सकती है। प्रज्ञान जिसे 14 दिन काम करना है और चंद्र सतह पर 500 मीटर चलना है, उसके लिए मिशन को जोखिम में डालने वाली स्थितियां होंगी।

ऑर्बिटर : यह अपना काम पहले ही शुरू कर चुका है। उसने पहले पृथ्वी और फिर चंद्रमा की कई तस्वीरें इसरो को भेजी हैं। 2379 किलो का यह उपकरण आठ किस्म के उपकरणों से लैस है। वे सभी चंद्रमा की मैपिंग से लेकर स्कैनिंग और भौगोलिक संरचना का विश्लेषण करने में जुटेंगे।

विक्रम और प्रज्ञान : विक्रम लैंडर का सबसे महत्वपूर्ण काम प्रज्ञान के साथ चंद्रमा की सतह पर उतरना है। ये दोनों मिलकर 14 दिन (चंद्रमा का एक दिन) काम करेंगे। लैंडिंग के चार घंटे बाद 7 सितंबर को ही सुबह करीब 5:45 बजे प्रज्ञान रोवर विक्रम से बाहर आकर अपने प्रयोग करेगा। चंद्रमा का दक्षिण ध्रुव होने की वजह से यहां सूर्य की रोशनी लंबे समय तक मिलेगी। वे इसका उपयोग अपनी बैटरियां चार्ज करने में करेंगे।

विशेष : आगे भी काम करते रह सकते हैं सौर ऊर्जा से बैटरियाें को चार्जिंग मिलने की वजह से कुछ वैज्ञानिकाें का अनुमान है कि विक्रम और प्रज्ञान आगे भी काम करते रह सकते हैं। हालांकि यह सौर गतिविधियों के लैंडिंग स्थल पर असर, तापमान के उतार-चढ़ाव और सूर्य के प्रकाश की उपलब्धता पर निर्भर करेगा। 14 दिन के बाद रात होगी, जिसके विकट हालात अगर उन्हें बहुत नुकसान नहीं पहुंचाते हैं तो बहुत संभव है कि कुछ समय बाद इसरो हमें सूचना दे कि ये दोनों विभिन्न प्रयोगों को अंजाम दे रहे हैं।

04-09-2019
इतिहास रचने से केवल 35 किलोमीटर दूर चंद्रयान-2

नई दिल्ली। चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर से लैंडर विक्रम के अलग होने के एक दिन बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने मंगलवार को बताया कि उसने यान को चांद की निचली कक्षा में उतारने का दूसरा चरण भी सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। 7 सितंबर को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग से पहले बुधवार को 3:42 बजे सुबह यान को एक और निचली कक्षा में ले जाया गया। इससे यह चांद के 35 किलोमीटर दूर अब चक्कर लगा रहा है। इसरो ने बताया कि चंद्रयान को बुधवार को भारतीय समयानुसार सुबह 3:42 बजे पर निचली कक्षा में पूर्व निर्धारित योजना के तहत उतारा गया। यह प्रक्रिया कुल नौ सेकेंड की रही। चंद्रयान-2 ऑर्बिटर चांद की मौजूदा कक्षा में लगातार चक्कर काट रहा है और ऑर्बिटर व लैंडर पूरी तरह से ठीक हैं। इससे पहले सोमवार को लैंडर विक्रम ऑर्बिटर से सफलतापूर्वक अलग हुआ था। अगर सब कुछ ठीक रहा तो विक्रम और उसके भीतर मौजूद रोवर ‘प्रज्ञान’ के शनिवार देर रात 1 बजकर 30 मिनट से 2 बजकर 30 मिनट के बीच चांद की सतह पर उतरने की उम्मीद है। चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग के बाद रोवर उसी दिन सुबह 3 बजकर 30 मिनट से 6 बजकर 30 मिनट के बीच निकलेगा और चांद की सतह पर रहकर परीक्षण करेगा। इसरो के मुताबिक, प्रज्ञान एक चंद्र दिवस यानी पृथ्वी के 14 दिनों के बराबर चांद की सतह का परीक्षण करेगा। लैंडर का मिशन एक चंद्र दिवस होगा, जबकि ऑर्बिटर एक साल तक काम करेगा। इसरो के अध्यक्ष के. सिवन ने कहा कि चांद पर लैंडर के उतरने का क्षण ‘खौफनाक’ होगा क्योंकि एजेंसी ने पहले ऐसा कभी नहीं किया है। जबकि चंद्रयान-1 मिशन में यान को निचली कक्षा में ले जाने का काम पहले भी सफलतापूर्वक किया गया था। 

भारत बनेगा चौथा देश 

चांद पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग के साथ ही भारत ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा। इससे पहले केवल चीन, अमेरिका और रूस ही ऐसा कर सके हैं। भारत ने 22 जुलाई को 3,840 किलोग्राम वजनी चंद्रयान-2 को जीएसएलवी मैक-3 रॉकेट से प्रक्षेपित किया था। इस योजना पर कुल 978 करोड़ रुपये की लागत आई है। 

03-09-2019
चंद्रयान-2 की पहली डी-ऑर्बिटिंग प्रक्रिया सफलतापूर्वक हुई पूरी

बेंगलुरु। चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर के सफलतापूर्वक ऑर्बिटर से अलग होने के एक दिन बाद मंगलवार को चंद्रयान-2 की पहली डी-ऑर्बिटिंग की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हुई। 
पहली डी-ऑर्बिटिंग की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी करने के बाद चंद्रयान-2 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचने की यात्रा में एक और बाधा पार कर ली है और इसी के साथ यह अपने लक्ष्य के और करीब पहुंच गया है। 
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बताया कि योजनानुसार मंगलवार सुबह चंद्रयान-2 की पहली डी-ऑर्बिटिंग की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हो गई। इस प्रक्रिया में चार सेंकड का समय लगा और वर्तमान में चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर चंद्रमा की कक्षा में परिक्रमा करता रहेगा। चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर और लैंडर दोनों सही तरह से और सही दिशा में कार्य कर रहे हैं। चंद्रयान-2 की डी-ऑर्बिटिंग की अगली प्रक्रिया कल सुबह साढ़े तीन और साढ़े चार बजे के बीच पूरी होगी। 

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