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01-08-2020
विभिन्न गांवों के प्रवेश द्वारों पर अब भी लगी है पूर्व मुख्यमंत्री और मंत्रियों की फोटो

गुंडरदेही। स्थानीय प्रशासन की लापरवाही के चलते पूर्व में सत्ता में रहे नेताओं तथा मंत्रियों की फोटो गुंडरदेही ब्लॉक के विभिन्न गांवों के प्रवेश द्वारों पर आज भी लगी दिखाई देती है। गौरतलब है कि सिकोसा के समीप ग्राम खुटेरी से अर्जुंदा की तरफ जाने वाले मार्ग पर प्रवेश द्वार पर तत्कालीन सरपंच सारिका मेहर द्वारा लगवाई गई पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह तथा पूर्व महिला बाल विकास मंत्री रमशिला साहू की फोटो लगी हुई थी किंतु प्रदेश में कांग्रेस की सत्ता को लगभग डेढ़ वर्ष का समय हो जाने तथा पंचायत के एक कार्यकाल लगभग 5 वर्ष का समय बीत जाने के बावजूद भी पूर्ववर्ती सरकार के मंत्रियों तथा पूर्व मुख्यमंत्री की फोटो आज तक प्रवेश द्वार में चस्पा है। बता दें कि ग्राम पंचायत के एक सरपंच का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है जबकि इस प्रवेश द्वार को बनाएं लगभग 8 वर्ष होने को हैं बावजूद ग्राम पंचायत खुटेरी की लापरवाही कहें पूर्व सरपंच द्वारा उक्त प्रवेश द्वार पर लगे तत्कालीन सरपंच सारिका मेहर की फोटो आज भी लगी हुई है। वही ग्राम सरपंच रुपेश गोरे से पूछे जाने पर उन्होंने कहा, प्रवेश द्वार पर लगी फोटो की तरफ ध्यान ही नहीं गया क्योंकि फोटो पुरानी होने की वजह से साफ दिखाई नहीं पड़ रही है। उपरोक्त मुद्दे पर चर्चा करने के लिए गुंडरदेही विधायक तथा संसदीय सचिव कुंवर सिंह निषाद से मोबाइल से बात करने का प्रयास किया गया किंतु उन्होंने मोबाइल रिसीव ही नहीं किया।

शब्बीर रिजवी की रिपोर्ट

13-06-2020
मिट्टी के टीले के नीचे दबकर 5 मजदूरों की मौत, 3 घायल

भोपाल। शहडोल जिले में शनिवार को एक खदान में दर्दनाक हादसा हो गया। हादसे में कम से कम पांच मजदूरों की जान चली गई है। जबकि तीन मजदूर जख्मी हुए है। बताया जा रहा है कि पपरेड़ी गांव में हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंचा और मजदूरों को मलबे से निकाला।रिपोर्ट के मुताबिक शहडोल जिले के बेओहारी इलाके में मिट्टी के एक टीले के गिरने से पांच लोगों की जान चली गई और कम से कम तीन अन्य घायल हो गए।. घटनास्थल पर रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है। हादसे में तीन गंभीर रूप से घायल मजदूरों को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया हैं। फिलहाल हादसे की पीछे का कारण पता नहीं चल सका है।

 

07-04-2020
स्थानीय प्रशासन ने की डोनेशन ऑन व्हील की शुरुआत

आरंग। कोरोना संक्रमण के चलते बेसहारा और जरूरतमंद लोगो तक राशन सामग्री पहुंचाने स्थानीय प्रशासन द्वारा "डोनेशन ऑन व्हील" की शुरुआत नगर में की गई है। लॉक डाउन की वजह से अत्यंत गरीब, बेसहारा परिवारों को राहत पहुंचाने स्थानीय प्रशासन को लगातार दानदाताओं का सहयोग प्राप्त हो रहा है। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) विनायक शर्मा द्वारा अपील की गई है कि कोरोना वायरस के रोकथाम के प्रबंधों के तहत लोग घर पर ही रह कर राहत पैकेट के रूप में अपना सहयोग प्रदान कर सकते हैं। इस व्यवस्था के अंतर्गत घर बैठे ही दानदाताओं से राहत सामग्री प्राप्त करने के लिए डोनेशन ऑन व्हील अभियान के जरिए दानदाताओं के निवास से ही राहत पैकेट प्राप्त किया जाएगा। राहत पैकेट में 6 किलो चावल,1 किलो दाल,1 किलो बेसन, आधा किलो नमक एवं एक साबुन शामिल करने की दानदाताओं से अपील की गई है। सहयोग के इच्छुक व्यक्ति या संस्थाएं सूची में लिखे अधिकारियों और कर्मचारियों से संपर्क कर सकते हैं।

 

03-01-2020
'सांस' दिलाएगी बच्चों को निमोनिया से निजात

रायपुर। देश भर में 5 साल से कम आयु वर्ग के बच्चों में होने वाली कुल मौतों में निमोनिया का भी एक प्रमुख कारण है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अनुसार प्रति 1000 जीवित जन्म में 5.3 मौतें सिर्फ निमोनिया के ही कारण होते हैं। इसको ध्यान में रखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा सोशल अवेयरनेस एंड एक्शन प्लान टू नयूट्रीलाईज निमोनिया सक्सेसफुली(सांस) कार्यक्रम का शुरुआत की गई है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सभी स्वास्थ्य केन्द्रों में निमोनिया प्रबंधन को सुदृढ़ करना है।

वर्ष 2025 तक निमोनिया से होने वाली मौतों को 3 से कम करने का लक्ष्य
राज्य बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ.अमर सिंह ठाकुर ने बताया बच्चों में निमोनिया से होने वाली मौतों पर अंकुश लगाने में ‘सांस’ कार्यक्रम कारगर साबित होगा। 5 साल से कम आयु वर्ग के बच्चों में प्रति 1000 जीवित जन्म में निमोनिया से होने वाली मौतों को 3 से कम करने का लक्ष्य इस कार्यक्रम के तहत वर्ष 2025 तक निर्धारित किया गया है। इसके लिए निमोनिया प्रबंधन पर विशेष बल दिया जाएगा। सामुदायिक स्तर पर कार्यकर्ताओं द्वारा अधिक से अधिक लोगों को निमोनिया के विषय में जागरूक किया जाएगा। साथ ही समस्त सेवा प्रदाताओं का निमोनिया प्रबंधन पर क्षमतावर्धन भी किया जाएगा ।

कार्यक्रम के ये होंगे मुख्य उद्देश्य
निमोनिया प्रबंधन में सहायक जैसे स्तनपान, पीसीबी का टीकाकरण एवं उम्र के मुताबिक अनुपूरक आहार की शुरुआत के विषय में आम लोगों में जागरूकता फैलाना। निमोनिया के मामलों में बच्चों को रेफरल करने से पहले मितानिन द्वारा एंटीबायोटिक के प्रयोग पर बल देना।
स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षण प्रदान कर निमोनिया की पूर्व पहचान पर बल देना।

ये होंगे लक्षित लाभार्थी
अभियान को सफल बनाने के लिए लक्षित लाभार्थियों को पूर्व में ही चिन्हित किया गया है। इसमें 5 साल से कम आयु के बच्चे के माता-पिता एवं स्वास्थ्य सेवा प्रदाता प्राथमिक लाभार्थी के रूप में होंगे। इन्हें समुदायिक जागरूकता से जोड़ा जाएगा। वहीं जन-प्रतिनिधि,स्थानीय प्रशासन, ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण कमिटी के सदस्य, स्वास्थ्य एवं आईसीडीएस के पदाधिकारी द्वितीय लाभार्थी के रूप में होंगे। अभियान के तहत दोनों लक्षित लाभार्थियों के जरिए अभियान के उद्देश्यों की प्राप्ति करने पर ज़ोर होगा।

लक्षण से जाने रोग
निमोनिया अचानक से एक-दो दिन में भी शुरू हो सकता है या फिर धीरे-धीरे कई दिनों में सामने आता है। कई बार यह पता लगाना मुश्किल होता है कि यह केवल अत्याधिक सर्दी-जुकाम ही है या कुछ और। खाँसी निमोनिया के शुरुआती लक्षणों में से एक है।  

इन लक्ष्णों से निमोनिया की पहचान की जा सकती है
बुखार के साथ पसीना एवं कंपकंपी होना। अत्यधिक खाँसी में गाढ़ा, पीला, भूरा या खून के अंश वाला बलगम आना। तेज-तेज और कम गहरी सांस लेने के साथ सांस का फूलना (सांस लेने में मोटी, सीटी जैसी आवाज आना)। होंठ एवं उँगलियों के नाख़ून नीले दिखाई देना। बच्चों में परेशानी एवं उत्तेजना का बढ़ जाना।

 

11-12-2019
नागरिकता संशोधन बिल का असम व पूर्वोत्तर में हिंसक विरोध, सेना तैनात, शेष भारत मे स्वागत

रायपुर। नागरिकता संशोधन बिल का सारे देश में जहां स्वागत हो रहा है वही पूर्वोत्तर सहित असम में उसका जमकर विरोध हो रहा है। असम की स्थिति स्थानीय प्रशासन के नियंत्रण से निकलती देख वहां सेना तैनात कर दी गई है। त्रिपुरा में भी स्थिति तनावपूर्ण है। गुवाहाटी और दिसपुर में भीड़ हिंसक प्रदर्शन कर रही है। आगजनी और तोड़फोड़ रुक नहीं पा रही है। इस बिल का जहां पूर्वोत्तर में जमकर विरोध हो रहा है। वही देश के अन्य हिस्सों में इसका खुलकर स्वागत किया जा रहा है। सरकार ने आज से राज्यसभा में भी पारित करा लिया है। ऐसे में इस बिल के कानून बनने की अड़चनें साफ हो गई है। कांग्रेस समेत विपक्ष ने इस बिल का जमकर विरोध किया लेकिन जरूरी आंकड़े जुटाकर मोदी सरकार इसे पास कराने में सफल हो गई। अब जहां देश के हर हिस्से में इसका स्वागत हो रहा है वही असम, दिसपुर और पूर्वोत्तर में इसके विरोध के बढ़ने की भी आशंका उतनी ही है। सेना की तैनाती के बावजूद विरोध बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। अब देखना यह है कि मोदी सरकार ने इस बिल को पास कराने में राज्यसभा और लोकसभा में तो सफलता हासिल कर ली लेकिन इसके विरोध को पूर्वोत्तर में रोकने में कैसे सफल होती है।

 

16-11-2019
मिड डे मील बनाते समय हुआ बड़ा हादसा, बॉयलर फटने से 4 की मौत

पटना। मोतिहारी में स्थित एनजीओ के एक किचन में बॉयलर फटने से चार लोगों की मौत हो गई है। वहीं पांच से ज्यादा लोग घायल हैं। यह घटना शनिवार सुबह सुगौली में घटित हुई। घायलों को अस्पताल में भर्ती किया गया है। घटनास्थल पर राहत और बचाव का कार्य जारी है। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंच गई है। जानकारी के अनुसार घटना उस समय घटी जब कुछ लोग सरकारी विद्यालयों में बच्चों के लिए मिड डे मील सप्लाई करने वाले एनजीओ की रसोई में खाना बना रहे थे। सुगौली नगर परिषद के स्कूलों के लिए खाना बनाया जा रहा था। इसी बीच सुबह करीब पांच बजे बॉयलर में धमाका हो गया। इसके कारण मकान के परखच्चे उड़ गए। घायलों को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। विस्फोट की आवाज सुनने के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा हो गया। घटनास्थल पर लोगों की भीड़ लग गई। स्थानीय लोगों ने आनन-फानन में पुलिस को घटना की जानकारी दी। सूचना मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ पूर्व वन एवं पर्यावरण मंत्री और वर्तमान विधायक रामचंद्र सहनी भी मौके पर पहुंचे और घटना का जायजा लिया।

 

16-10-2019
कांकेर का सीताफल है खास, दूर-दूर तक पहुंच रही मिठास

रायपुर। सीताफल का स्वाद आखिर कौन नही लेना चाहता। इसकी मिठास और स्वाद इतना बढ़िया है कि सीजन में इस फल को हर कोई स्वाद चखना चाहता है। यह फल जितना मीठा है, उतना ही स्वादिष्ट और पौष्टिक भी है। कांकेर जिले में इस फल की न सिर्फ प्राकृतिक रूप से खूब पैदावार हो रही है, हर साल उत्पादन एवं विपणन भी बढ़ रहा है। स्थानीय प्रशासन द्वारा सीताफल को न सिर्फ विशेष रूप से ब्रांडिंग, पैकेजिंग एवं मार्केटिंग में सहयोग कर इससे जुड़ी महिला स्व सहायता समूह को लाभ पहुंचाने का काम किया जा रहा है। उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी दिया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि इस वर्ष सीताफल का ग्रेडिंग और संग्रहण करने वाली स्व सहायता की महिलाओं एवं इससे जुड़े पुरुषों को लगभग 25 लाख रुपये तक की आमदनी होने की उम्मीद है। प्रशासन द्वारा कांकेर वैली फ्रेश सीताफल के रूप में अलग-अलग ग्रेडिंग कर 200 टन विपणन का लक्ष्य रखा गया हैं।

वैसे तो सीताफल का उत्पादन अन्य जिलों में भी होता है लेकिन कांकेर जिला का यह सीताफल राज्य में प्रसिद्ध है। यहाँ प्राकृतिक रूप से उत्पादित सीताफल के 3 लाख 19 हजार पौधे हैं, जिससे प्रतिवर्ष अक्टूबर से नवम्बर माह तक 6 हजार टन सीताफल का उत्पादन होता है। यहां के सीताफल के पौधौ में किसी भी प्रकार के रासायनिक खाद या कीटनाशक का प्रयोग नहीं किया जाता है। यह पूरी तरह जैविक होता है। इसलिए यह स्वादिष्ट होने के साथ पौष्टिक भी होता हैं। यहां से प्राकृतिक रूप से उत्पादित सीताफल को आसपास की ग्रामीण महिलाएं एवं पुरूष संग्रह कर बेचते आ रहे हैं। इससे थोड़ी बहुत आमदनी उनको हो जाती थी। लेकिन उन्हें पहले कोई ऐसा मार्गदर्शक नही मिला जो मेहनत का सही दाम दिला सके। कुछ कोचिए और बिचौलियों द्वारा औने-पौने दाम में वनवासी ग्रामीण संग्राहकों से सीताफल खरीदकर अधिक दाम में बेचा जाता था। इसे देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा संग्राहकों को आर्थिक लाभ के साथ आत्मनिर्भर बनने की राह बताई गई। स्वसहायता समूह के माध्यम से सीताफल को बाजार तक पहुचाने के उपाय बताए गए। इसके लिए महिलाओं को प्रशिक्षण और साधन उपलब्ध कराकर स्थानीय लोगों को वास्तविक फायदा पहुंचाने की पहल की गई। अब स्थानीय संग्राहक गांव में ही सीधे स्वसहायता समूह की महिलाओं को सीताफल विक्रय कर उचित दाम प्राप्त करते है। समूह से जुड़ी महिलाएं रायपुर, धमतरी सहित दुर्ग भिलाई के मरीन ड्राइव, मंडी एवं अन्य शहरों में सीताफल बेचकर लाभ कमा रही है। शासन की पहल पर वन विभाग द्वारा स्वसहायता समूह की महिलाओं को पैकेजिंग और वाहन की सुविधा प्रदान की गई है।  इस संबंध में शासन की ओर से कलकत्ता और वारंगल में सीताफल विक्रेताओं की बात हो रही है, वहां लगभग 5 से 10 टन सीताफल की मांग की गई है।

 

16-10-2019
प्रशासन मस्त जनता पस्त, शहर में आवारा मवेशियों का आतंक

डोंगरगढ़। नगर में आए दिन हो रहे सड़क हादसों के मुख्य कारणों में से एक है आवारा मवेशी, जी हां विडंबना कुछ ऐसी है कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद भी नगरपालिका के अधिकारी इस ओर ध्यान देना जरूरी नहीं समझ रहे है|  नगर के प्रमुख मार्ग जैसे खैरागढ़ रोड हो या ओवर ब्रिज, जो शहर को हाई वे से जोड़ता है उन पर खुले आम मवेशी घूमते या बीच रोड पर बैठे नजर आएंगे, जो हादसों को दावत देते है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट द्वारा एक जनहित याचिका में आदेश पारित कर नगरीय निकायों में घूमते मवेशियों को पकड़ कर उनके मालिकों के खिलाफ कार्यवाही करने का आदेश दिया, जिसे दरकिनार कर स्थानीय प्रशासन अपनी ही मनमानी करने पर आमादा है।  शहर के इन मुख्य मार्गो पर कॉलेज और स्कूल भी है, जिनमें देश के भविष्य कहे जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। जब मीडिया ने उनसे बात की तो उन्होंने अपने व्यथा बताई और कहा कि उन्हें भी आए दिन रोड ऐक्सिडेंट का डर सताता रहता है। एक तो रोड पर दौड़ते तेज वाहन और उपर से बीच में घूमते मवेशी ऐसा लगता है जाए कहा ?  ऐसे में क्या प्रशासन की यह नैतिक जिम्मेदारी नहीं बनती की वह हाईकोर्ट के आदेश का सम्मान करे और मानवता का परिचय देते हुए लोगों के मन में व्याप्त रोड ऐक्सिडेंट के डर को दूर करे। 

वर्जन
शहर में आवारा मवेशियों को मुख्य मार्गो से पालिका कर्मचारियों द्वारा लगातार हटाया जा रहा है, जिससे आवागमन सुचारू हो सके। साथ ही शहर में तीन स्थानों पर गौठान निर्माण के लिए जमीन की मांग शासन से की गई है।
सुभाष दीक्षित, सीएमओ नगरपालिका परिषद डोंगरगढ़ 

09-10-2018
Assembly Election : 2 लाख से  अधिक होर्डिंग्स,  अधिक होर्डिंग्स, पोस्टर,  बैनर-झंडे हटे

रायपूर। प्रदेश में आचार संहिता लागू होने के बाद अब स्थानीय प्रशासन इसका मुस्तैदी से पालन कराने की कवायद में जुट गया है।  मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुब्रत साहू ने बताया कि विधानसभा निर्वाचन-2018 के अंतर्गत प्रदेश में सम्पत्ति विरूपण अधिनियम के तहत कार्यवाहियां तेज कर दी गई है। इसके तहत 8 अक्टूबर की अवधि तक शासकीय परिसम्पत्तियों से दो लाख 17 हजार 969 होर्डिंग्स, पोस्टर, दीवार लेखन सहित बैनर-झंडे इत्यादि हटाये जाने की कार्यवाही की गई है। जिसमें एक लाख 10 हजार 286 होर्डिंग्स एवं पोस्टर 69 हजार 745 दीवार लेखन और 37 हजार 917 बैनर-झंडे आदि हटाया जाना शामिल हैं।

शासकीय परिसम्पतियों के साथ-साथ निजी परिसम्पत्तियों से भी इसी प्रकार की कार्यवाही की जाएगी।  इसके लिए कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए है। उन्होंने बताया कि 7 अक्टूबर की अवधि तक एक लाख 34 हजार 578 होर्डिंग्स एवं पोस्टर, दीवार लेखन, बैनर-झंडे हटाये गए। जिसमें 74 हजार 645 होर्डिंग्स एवं पोस्टर 41 हजार 642 दीवार लेखन और 18 हजार 291 बैनर-झंडे आदि हटाया जाना शामिल है।

इसी प्रकार 8 अक्टूबर को 83 हजार 391 सम्पत्ति विरूपण अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाही की गई।  जिनमें 35 हजार 641 होर्डिंग्स एवं पोस्टर, 28 हजार 104 दीवार लेखन और 19 हजार 646 बैनर-झंडे हटाये गए। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में 6 अक्टूबर 2018 से आदर्श आचार संहिता प्रभावशील कर दी गई है, इसे दृष्टिगत रखते हुए सम्पत्ति विरूपण अधिनियम के तहत कार्यवाही की जा रही है। जो आगे भी जारी रहेगी। 

नियंत्रण कक्ष स्थापित 
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में एक नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया गया है। इस नियंत्रण कक्ष का दूरभाष क्रमांक 0771-4913677 है। सम्पत्ति विरूपण संबंधी शिकायतों के लिए उक्त दूरभाष नम्बर पर भी कोई भी नागरिक सूचना दे सकते हैं।

सम्पत्ति विरूपण अधिनियम 

सम्पत्ति विरूपण निवारण अधिनियम की धारा-3 में उल्लेख है कि कोई भी जो सम्पत्ति के स्वामी की लिखित अनुज्ञा के बिना सार्वजनिक दृष्टि में आने वाली किसी सम्पत्ति से स्याही, खड़िया, रंग या किसी अन्य पदार्थों से लिखकर या चिन्हित करके उसे विरूपित करेगा वह जुर्माने से जो 1000 रूपए तक का हो सकेगा वो दण्डनीय होगा। अधिनियम के तहत जारी आदेश में यह कहा गया है कि किसी भी राजनीतिक दल या निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्याशी द्वारा किसी निजी सम्पत्ति पर बैनर लगाने, पोस्टर चिपकाने, चुनाव प्रचार से संबंधित झंडे लगाने या रंग, खड़िया से लिखे जाने से पूर्व निजी सम्पत्ति के स्वामी की लिखित सहमति, से संभावित दस्तावेज निर्वाचन कार्यालय में आवश्यक रूप से उपलब्ध करायें।

कोई भी राजनीतिक दल या प्रत्याशी अपने समर्थकों, अनुयायियों को झंडे लगाने, बैनरों को लटकाने, नोटिसों को चिपकाने, नारे आदि लिखने के लिए सम्पत्ति स्वामी की अनुमति के बिना नहीं कर सकेंगे। इसमें भवन, भूमि, अहाता आदि शामिल है। यदि बिना सहमति से किसी निजी सम्पत्ति पर बैनर लगा हो, पोस्टर चिपका हो, चुनाव प्रचार संबंधी झंडे लगे हो या रंग अथवा खड़िया से लिखकर सम्पत्ति को विरूपित किया जाना पाया जाएगा तो, सम्पत्ति विरूपण निवारण अधिनियम के तहत न केवल दण्डित किया जाएगा।

अपितु उसे हटाये जाने में होने वाले व्यय की वसूली भू-राजस्व बकाया की भांति निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्याशी, राजनीतिक दल आदि से की जाएगी। इसके साथ ही साथ होने वाले व्यय को राजनीतिक दल अथवा प्रत्याशी के व्यय लेखा में जोड़ा जाएगा। भारतीय दण्ड संहिता और दण्ड प्रक्रिया संहिता के अधीन दण्डात्मक कार्यवाही की जाएगी।

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