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11-11-2020
महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों के प्रति सजग हैं भूपेश सरकार, कहा- महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ किरणमयी नायक ने रायपुर जिले के पंजीकृत प्रकरणों की आयोग कार्यालय रायपुर मुख्यालय में सुनवाई की। डॉ. नायक ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों के प्रति राज्य सरकार सजग है। उन्होंने महिलाओं के लिए अपमान जनक शब्दों का प्रयोग करने, अपमानित करने और बदनाम करने वालों के विरूद्ध कड़ी कार्रवई करने की बात कही। अध्यक्ष डॉ. नायक ने महिला को अपमानित और बदनाम करने, पति की ओर से उधार में दी गई राशि को उनकी पत्नी को वापस दिलाने, पति-पत्नी के बीच झगड़ा, पति से अश्लील वीड़ियों डाउनलोड कर पत्नी को ब्लेकमेल करने आदि से संबंधित प्रकरणों की सुनवाई की और आवश्यक निर्देश दिए।

05-11-2020
राज्य महिला आयोग ने की छः प्रकरणों की सुनवाई

कोंडागाँव। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डाॅ.किरणमयी नायक ने गुरुवार को महिलाओं के उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों की सुनवाई जिला कार्यालय के सभाकक्ष में की। सुनवाई के प्रकरणों में कोण्डागांव जिले के पांच एवं नारायणपुर जिले के एक प्रकरण शामिल थे। इसमें मानसिक प्रताड़ना,मारपीट से संबंधित प्रकरण थे। सुनवाई के दौरान शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार सोशल डिस्टेंस एवं फिजिकल डिस्टेंस का पालन किया गया। इसके पूर्व जिला कार्यालय पहुंचने पर राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक का कलेक्टर पुष्पेन्द्र कुमार मीणा द्वारा पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया।  सुनवाई के दौरान सभी पक्षकार सहित महिला बाल विकास एवं पुलिस विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

 

12-10-2020
ऋचा जोगी ने छानबीन समिति को भेजा जवाब  

रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री स्व. अजीत जोगी की बहु और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) अध्यक्ष अमित जोगी की पत्नि डॉ. ऋचा जोगी ने मुंगेली जिला स्तरीय प्रमाणपत्र छानबीन समिति को जवाब भेज दिया है। 8 अक्टूबर को ऋचा जोगी की जाति मामले की प्रथम सुनवाई के दौरान दिए गए पत्र का उन्होंने सोमवार को समिति को जवाब भेजा है। ऋचा ने अपने जवाब में कहा है कि 8 अक्टूबर को समिति द्वारा उन्हें 29 सितम्बर को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस और उनके विरुद्ध की गई शिकायत की प्रति उपलब्ध करवाई गई जिसके लिए वे समिति सदस्यों की आभारी है। डॉ. जोगी ने कहा है कि 8 अक्टूबर को समिति द्वारा उनसे आवेदन की मूल प्रति मांगी गई थी। उन्होंने आवेदन चॉइस सेंटर के माध्यम से ऑनलाइन किया था।

चॉइस सेंटर के कर्मचारी द्वारा मांगे गए सभी दस्तावेज दिखाने के बाद कर्मचारी द्वारा यह फॉर्म ऑनलाइन भरा गया था। डॉ. ऋचा जोगी के भाई ने समिति का पत्र मिलने के तुरंत बाद मुंगेली कलेक्टर के समक्ष ऑनलाइन आवेदन और दस्तावेजों की कॉपी उपलब्ध करवाने का आवेदन दिया था। उनके भाई ने स्वयं के जाती प्रमाण पत्र के लिए भी चॉइस सेंटर से आवेदन किया था। कलेक्टर मुंगेली को दिए गए आवेदन में डॉ. जोगी के भाई ने स्वयं के आवेदन से सम्बंधित दस्तावेज भी मांगे हैं, लेकिन आज तक उन्हें मुंगेली कलेक्टर कार्यालय से दस्तावेज नहीं मिले हैं।

डॉ. ऋचा जोगी ने कहा कि समिति द्वारा भेजे गए पत्र में उनसे 1950 से पहले का राजस्व दस्तावेज (मिसल) और 2 जून 1940 के बिक्रीनामे की मूलप्रति मांगी गई थी। डॉ. जोगी ने  सभी रिकॉर्ड की सत्यापित प्रति समिति के समक्ष प्रस्तुत कर दी थी। सभी मूल दस्तावेज बिलासपुर जिला रजिस्ट्रार के पास जमा हैं, जिन्हें लेने उनके भाई गए थे। लेकिन बिलासपुर जिला रजिस्ट्रार कार्यालय में एक कर्मचारी के कोरोना पॉजिटिव होने के कारण कार्यालय 7 अक्टूबर से 11 अक्टूबर तक बंद है जिस वजह से उन्हें यह दस्तावेज उपलब्ध नहीं हो पाए हैं।  डॉ. जोगी ने मांग की है कि उन्हें ये सभी दस्तावेज उपलब्ध करवाने के लिए 7 दिनों का और समय दिया जाए। डॉ. ऋचा जोगी ने यह भी लिखा है कि समिति द्वारा उन्हें शिकायत की जानकारी 8 अक्टूबर को ही दी गई और सिर्फ 4 दिन बाद 12 अक्टूबर को अगली सुनवाई रख दी जिसमें भी बीच में 2 दिन शनिवार-इतवार गैर कार्यदिवस थे। इसलिए उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए जरूरी दस्तावेज अभी तक नहीं मिल पाए हैं। डॉ. जोगी ने कहा कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को देखते हुए उन्हें खुद का पक्ष रखने के लिए न्यायोचित समय दिया जाना चाहिए। इसलिए समिति को आज की मीटिंग स्थगित करके उन्हें कम से कम 10 दिनों का समय देना चाहिए। 

डॉ. जोगी ने मांग की है कि नियमों के तहत समिति को उन्हें व्यक्तिगत सुनवाई और वीडियोग्राफी में गवाहों के प्रतिपरीक्षण का अवसर भी देना चाहिए। क्योंकि वे 2 माह के बच्चे की माँ हैं, जिसे लगातार ब्रेस्टफीड और मातृत्व केयर की जरूरत है तथा कोरोना महामारी को देखते हुए वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन और आईसीएमआर की गाइडलाइन्स के अनुसार 10 दिनों बाद समिति द्वारा चिकित्सकीय निगरानी में कोरोना फ्री माहौल में उन्हें सुनवाई का अवसर दिया जाए।

06-10-2020
हाथरस कांड: सुप्रीम कोर्ट ने योगी सरकार से हलफनामा दाखिल करने कहा, अगले सप्ताह होगी सुनवाई

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने हाथरस सामूहिक दुष्कर्म घटना को भयानक बताते हुए उत्तप्रदेश सरकार के कई सवाल पूछे। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को हलफनामा दाखिल कर बताने को कहा कि हाथरस मामले में गवाहों की सुरक्षा कैसे की जा रही है। मामले की सुनवाई अगले हफ्ते के लिए सूचीबद्ध की गई है।प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध एक जनहित याचिका की प्रतिक्रिया में प्रदेश सरकार ने उच्चतम न्यायालय से हाथरस मामले में सीबीआई जांच का निर्देश देने का अनुरोध किया। उत्तर प्रदेश सरकार ने कोर्ट को बताया कि वह निष्पक्ष जांच में निहित स्वार्थों द्वारा उत्पन्न की जा रही बाधाओं से बचने के लिए सीबीआई जांच कराने का आदेश देने का अनुरोध कर रही है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने चीफ जस्टिस एसए बोबड़े, एएस बोपन्ना और वी रामासुब्रमणियन की पीठ को बताया कि उसने पहले ही केंद्र से हाथरस मामले में सीबीआई जांच कराने का अनुरोध किया है। योगी सरकार ने कहा कि सीबीआई जांच सुनिश्चित करेगी कि कोई निहित स्वार्थ से गलत और झूठे विमर्श नहीं रच पाएगा।

सरकार ने कहा कि इस मामले में तरह-तरह की बातें फैलाईं जा रही हैं, इस पर रोक लगाए जाने की जरूरत है।सुप्रीम कोर्ट ने कुछ याचिकाकर्ताओं से उनका मामले से संबंध पूछा और कहा कि हाथरस मामला काफी महत्वपूर्ण है, इसलिए उनकी सुनवाई की जा रही है। उच्चतम न्यायालय ने हाथरस मामले में वकीलों से कहा कि यह एक भयानक घटना है और हम अदालत में दलीलों का दोहराव नहीं चाहते।उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से सुप्रीम कोर्ट ने यह बताने के लिए कहा कि हाथरस मामले में गवाहों और पीड़ित परिवार के सदस्यों की सुरक्षा कैसे की जा रही है? उच्चतम न्यायालय ने कहा कि हम इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सामने कार्यवाही के दायरे के बारे में सभी से सुझाव चाहते हैं और हम इसका दायरा बढ़ाने के लिए क्या कर सकते हैं? पीठ ने यूपी सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसीटर जनरल से यह भी पछा कि क्या पीड़ित परिवार ने प्रतिनिधित्व के लिए कोई वकील चुना है?

 

24-09-2020
सिविल सेवा परीक्षा: दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने की सुनवाई,जारी किया यूपीएससी और केंद्र को नोटिस

नई दिल्ली। इस साल होने वाली सिविल सेवा परीक्षा को स्थगित करने के लिए डाली गई एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई की। अदालत ने इसे लेकर केंद्र और संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को नोटिस जारी किया है। मामले की सुनवाई की अगली तारीख 28 सितंबर तय की गई है। यूपीएससी ने सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2020 के लिए एडमिट कार्ड पहले ही जारी कर दिए हैं। कोविड-19 के कारण यूपीएससी ने पहले जून में होने वाली सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का शेड्यूल भी बदला था। नए शेड्यूल के अनुसार यह परीक्षा 4 अक्टूबर को आयोजित की जाएगी। यूपीएससी अभ्यर्थियों ने इसे लेकर कह रहे हैं कि यह कोई अकादमिक परीक्षा नहीं बल्कि भर्ती परीक्षा है, इसे रोका जा सकता है। अभी तक जेईई और नीट परीक्षा के आयोजन को स्थगित करने की मांग की जा रही थी। हालांकि, ये परीक्षाएं स्थगित नहीं हुईं। ऐसे में सिविल सेवा परीक्षा के भी स्थगित होने के आसार कम ही हैं।

 

22-09-2020
रिया की मुसीबत बढ़ी, 6 अक्टूबर तक रहना होगा जेल में, जमानत याचिका पर सुनवाई बुधवार को

मुंबई। सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में ड्रग एंगल सामने आने के बाद रिया चक्रवर्ती पिछले 14 दिनों से मुंबई के भायखला जेल में बंद हैं। मंगलवार को रिया को कोर्ट में पेश किया गया,जहां से उन्हें 6 अक्टूबर तक के लिए जेल भेज दिया गया। रिया के अलावा शौविक चक्रवर्ती और सैम्युल मिरांडा भी 6 अक्टूबर तक जेल में ही रहेंगे। इसी बीच रिया के वकील ने मुंबई हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की है जिस पर बुधवार को सुनवाई होगी।
सुशांत की गर्लफ्रेंड रही रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शौविक चक्रवर्ती पर ड्रग्स प्रोक्योर करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। 14 दिन जेल में काटने के बाद मंगलवार को रिया को कोर्ट में पेश किया गया,जहां से उन्हें 6 अक्टूबर तक के लिए जेल भेज दिया गया। अब रिया को मुंबई हाईकोर्ट से दरकार है। बता दें इससे पहले रिया की जमानत याचिका दो बार सेशन कोर्ट से खारिज हो चुकी है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए रिया चक्रवर्ती को मंगलवार को कोर्ट में पेश किया गया। बता दें 8 सितंबर को रिया को सुशांत के लिए ड्रग प्रोक्योर करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट में पेशी के बाद रिया को जेल भेज दिया गया था। हालांकि रिया खुद पर लग रहे आरोपों को शुरुआत से ही बेबुनियाद बता रही हैं।

25-08-2020
प्रशांत भूषण के खिलाफ अवमानना मामले में सुनवाई टली,10 सितंबर को होगी सुनवाई

 नई दिल्ली। वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ चल रहे अवमानना केस की सुनवाई 10 सितंबर तक टल गई है। बीते दिनों ही सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को कोर्ट की अवमानना का दोषी पाया था। उन्हें बिना शर्त माफी मांगने के लिए तीन दिन की मोहलत दी गई थी, जो कि सोमवार को समाप्त हो गई। प्रशांत भूषण ने कल बयान दाखिल करके कह दिया कि वो माफी नहीं मांगेंगे।2009 के एक मामले में प्रशांत भूषण के खिलाफ सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण के वकील राजीव धवन ने इस मसले को संविधानिक पीठ में भेजने की मांग की। इस पर जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि इस मामले में ये एक पेचीदा सवाल है कि क्या यह सब स्वत: संज्ञान मामले में  किया जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब हम कहते हैं कि यह भ्रष्टाचार के समान कब होगा? सबसे पहले हमें सवालों पर गौर करते हुए सुनवाई करनी होगी। जब यह एक स्वत: संज्ञान वाला मामला हो तब क्या होगा और तब क्या जब यह शिकायत पर आधारित है।

यह दोनों अलग स्थितियां हैं। जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि इनमें से कुछ सवालों पर बहस हो सकती है, लेकिन अन्य सवालों को कवर किया जा सकता है। मेरे पास समय की कमी है, क्योंकि मैं दफ्तर छोड़ (रिटायरमेंट) रहा हूं, जबकि इसके लिए 4 से 5 घंटे की विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता है। जस्टिस अरूण मिश्रा ने कहा कि वो रिटायर हो रहे हैं। अब अगली सुनवाई करने वाली उचित बेंच ये तय करेगी कि इस मैटर को बडी बेंच के पास भेजा जा सकता है या नहीं। उन्होंने कहा कि जज तो अस्थाई और कालब्द्ध होते हैं, लेकिन सीनियर एडवोकेट्स से सुसज्जित बार स्थाई होती है। जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि फली नरीमन और परासरण जैसे अलंकृत वकीलों ने जितनी प्रैक्ट्रिस की है, वो हमारे सेवा काल से कई गुना ज़्यादा है। अब करीब दस साल से लंबित इस अवमानना मामले की सुनवाई 10 सितंबर तक टाल दी गई है।

 

 

19-08-2020
राज्य महिला आयोग ने किया 4 मामलों का निराकरण,प्रताड़ित महिला को अगली सुनवाई तक के लिए सखी वन स्टाफ सेंटर भेजा

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ.किरणमयी नायक एवं सदस्य खिलेश्वरी किरण द्वारा बुधवार को संयुक्त रूप से सुनवाई कर महिला प्रताड़ना से संबंधित चार मामलों का सफल निराकरण किया गया। महिला आयोग में प्रकरणों की सुनवाई के दौरान इच्छा मृत्यु की मांग को लेकर उपस्थित हुईं एक महिला की मनोदशा को देखते हुए अध्यक्ष डॉ.किरणमयी नायक ने आगामी सुनवाई तक उसे सखी वन स्टाफ सेंटर में रखवाने के निर्देश दिए। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग द्वारा आज कुल 20 प्रकरणों की सुनवाई रखी गई थी,जिसमें से 14 मामलों से संबंधित पक्षकार उपस्थित हुए। सुनवाई में 4 प्रकरणों का निराकरण किया गया। यह प्रकरण पति-पत्नी विवाद, दैहिक शोषण, मारपीट, दहेज प्रताड़ना, कार्य स्थल पर प्रताड़ना व घरेलू हिंसा से संबंधित थे। प्रकरणों की सुनवाई के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग एवं फिजिकल डिस्टेंसिंग के नियमों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने के साथ ही सैनिटाइजर एवं अन्य आवश्यक प्रबंध किए गए थे।

आयोग के समक्ष एक आवेदिका इच्छा मृत्यु की मांग को लेकर उपस्थित हुई। इस आवेदक महिला को उसके पति द्वारा गुमराह कर अकेला छोड़ दिया गया है। महिला के साथ लगातार मानसिक व घरेलू हिंसा की जा रही है। आयोग के न्यायपीठ ने इस मामले को तत्काल संज्ञान में लेते हुए महिला के पति को तत्काल सुनवाई स्थल पर तलब कर मामले की सुनवाई भी की। संबंधितों को आगामी सुनवाई में उपस्थित होने का निर्देश देने के साथ ही आवेदिका की मनोदशा को देखते हुए उसे अगली सुनवाई तक के लिए सखी वन स्टाफ सेंटर भेजा गया है। महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ.किरणमयी नायक ने कहा कि महिलाओं के उत्पीड़न एवं प्रताड़ना से संबंधित मामलों में आयोग द्वारा तत्परता से कार्रवाई की जा रही है। प्रताड़ित एवं समस्याग्रस्त महिलाए आयोग ने निसंकोच अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह देखा जा रहा है कि महिला आयोग में पुरूषों द्वारा भी आवेदन दिए जा रहे हैं,जिसमें अधिकांशतः महिला के द्वारा प्रताड़ित किए जाने की शिकायत होती है। आयोग द्वारा ऐसे आवेदनों को संज्ञान में नहीं लिया जाता है।

 

08-08-2020
संपर्क नहीं होने पर भी होगी सुनवाई,विधायक ने तीन लोगों को अधिकृत कर जारी किए नंबर

रायपुर। विधायक व संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने अपने रायपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र की जनता को सुविधा प्रदान की है। उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र से संबंधित कार्यालयीन कार्य और संबंधित समस्त कार्यों का समन्वय करने के लिए तीन लोगों को अधिकृत किया है। यह जानकारी देते हुए विधायक प्रतिनिधि एसएम शफीक ने कहा है कि विधायक उपाध्याय से संपर्क नहीं होने पर अधिकृत तीनों व्यक्ति क्षेत्र के लोगों के साथ-साथ अन्य व्यक्ति और संबंधित अधिकारी को  जानकारी देने जवाबदेह होंगे। विमल गुप्ता (93030-38494, 75870-33333), मो. बिलाल ( 88391-11600, 99811-45792) और शिवश्याम शुक्ला ( 98266-17811,98266-17811) कोे विधायक से संपर्क नहीं होने पर कॉल किया जा सकता है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।

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