GLIBS
25-08-2020
प्रशांत भूषण के खिलाफ अवमानना मामले में सुनवाई टली,10 सितंबर को होगी सुनवाई

 नई दिल्ली। वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ चल रहे अवमानना केस की सुनवाई 10 सितंबर तक टल गई है। बीते दिनों ही सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को कोर्ट की अवमानना का दोषी पाया था। उन्हें बिना शर्त माफी मांगने के लिए तीन दिन की मोहलत दी गई थी, जो कि सोमवार को समाप्त हो गई। प्रशांत भूषण ने कल बयान दाखिल करके कह दिया कि वो माफी नहीं मांगेंगे।2009 के एक मामले में प्रशांत भूषण के खिलाफ सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण के वकील राजीव धवन ने इस मसले को संविधानिक पीठ में भेजने की मांग की। इस पर जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि इस मामले में ये एक पेचीदा सवाल है कि क्या यह सब स्वत: संज्ञान मामले में  किया जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब हम कहते हैं कि यह भ्रष्टाचार के समान कब होगा? सबसे पहले हमें सवालों पर गौर करते हुए सुनवाई करनी होगी। जब यह एक स्वत: संज्ञान वाला मामला हो तब क्या होगा और तब क्या जब यह शिकायत पर आधारित है।

यह दोनों अलग स्थितियां हैं। जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि इनमें से कुछ सवालों पर बहस हो सकती है, लेकिन अन्य सवालों को कवर किया जा सकता है। मेरे पास समय की कमी है, क्योंकि मैं दफ्तर छोड़ (रिटायरमेंट) रहा हूं, जबकि इसके लिए 4 से 5 घंटे की विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता है। जस्टिस अरूण मिश्रा ने कहा कि वो रिटायर हो रहे हैं। अब अगली सुनवाई करने वाली उचित बेंच ये तय करेगी कि इस मैटर को बडी बेंच के पास भेजा जा सकता है या नहीं। उन्होंने कहा कि जज तो अस्थाई और कालब्द्ध होते हैं, लेकिन सीनियर एडवोकेट्स से सुसज्जित बार स्थाई होती है। जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि फली नरीमन और परासरण जैसे अलंकृत वकीलों ने जितनी प्रैक्ट्रिस की है, वो हमारे सेवा काल से कई गुना ज़्यादा है। अब करीब दस साल से लंबित इस अवमानना मामले की सुनवाई 10 सितंबर तक टाल दी गई है।

 

 

19-08-2020
राज्य महिला आयोग ने किया 4 मामलों का निराकरण,प्रताड़ित महिला को अगली सुनवाई तक के लिए सखी वन स्टाफ सेंटर भेजा

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ.किरणमयी नायक एवं सदस्य खिलेश्वरी किरण द्वारा बुधवार को संयुक्त रूप से सुनवाई कर महिला प्रताड़ना से संबंधित चार मामलों का सफल निराकरण किया गया। महिला आयोग में प्रकरणों की सुनवाई के दौरान इच्छा मृत्यु की मांग को लेकर उपस्थित हुईं एक महिला की मनोदशा को देखते हुए अध्यक्ष डॉ.किरणमयी नायक ने आगामी सुनवाई तक उसे सखी वन स्टाफ सेंटर में रखवाने के निर्देश दिए। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग द्वारा आज कुल 20 प्रकरणों की सुनवाई रखी गई थी,जिसमें से 14 मामलों से संबंधित पक्षकार उपस्थित हुए। सुनवाई में 4 प्रकरणों का निराकरण किया गया। यह प्रकरण पति-पत्नी विवाद, दैहिक शोषण, मारपीट, दहेज प्रताड़ना, कार्य स्थल पर प्रताड़ना व घरेलू हिंसा से संबंधित थे। प्रकरणों की सुनवाई के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग एवं फिजिकल डिस्टेंसिंग के नियमों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने के साथ ही सैनिटाइजर एवं अन्य आवश्यक प्रबंध किए गए थे।

आयोग के समक्ष एक आवेदिका इच्छा मृत्यु की मांग को लेकर उपस्थित हुई। इस आवेदक महिला को उसके पति द्वारा गुमराह कर अकेला छोड़ दिया गया है। महिला के साथ लगातार मानसिक व घरेलू हिंसा की जा रही है। आयोग के न्यायपीठ ने इस मामले को तत्काल संज्ञान में लेते हुए महिला के पति को तत्काल सुनवाई स्थल पर तलब कर मामले की सुनवाई भी की। संबंधितों को आगामी सुनवाई में उपस्थित होने का निर्देश देने के साथ ही आवेदिका की मनोदशा को देखते हुए उसे अगली सुनवाई तक के लिए सखी वन स्टाफ सेंटर भेजा गया है। महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ.किरणमयी नायक ने कहा कि महिलाओं के उत्पीड़न एवं प्रताड़ना से संबंधित मामलों में आयोग द्वारा तत्परता से कार्रवाई की जा रही है। प्रताड़ित एवं समस्याग्रस्त महिलाए आयोग ने निसंकोच अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह देखा जा रहा है कि महिला आयोग में पुरूषों द्वारा भी आवेदन दिए जा रहे हैं,जिसमें अधिकांशतः महिला के द्वारा प्रताड़ित किए जाने की शिकायत होती है। आयोग द्वारा ऐसे आवेदनों को संज्ञान में नहीं लिया जाता है।

 

08-08-2020
संपर्क नहीं होने पर भी होगी सुनवाई,विधायक ने तीन लोगों को अधिकृत कर जारी किए नंबर

रायपुर। विधायक व संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने अपने रायपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र की जनता को सुविधा प्रदान की है। उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र से संबंधित कार्यालयीन कार्य और संबंधित समस्त कार्यों का समन्वय करने के लिए तीन लोगों को अधिकृत किया है। यह जानकारी देते हुए विधायक प्रतिनिधि एसएम शफीक ने कहा है कि विधायक उपाध्याय से संपर्क नहीं होने पर अधिकृत तीनों व्यक्ति क्षेत्र के लोगों के साथ-साथ अन्य व्यक्ति और संबंधित अधिकारी को  जानकारी देने जवाबदेह होंगे। विमल गुप्ता (93030-38494, 75870-33333), मो. बिलाल ( 88391-11600, 99811-45792) और शिवश्याम शुक्ला ( 98266-17811,98266-17811) कोे विधायक से संपर्क नहीं होने पर कॉल किया जा सकता है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।

01-08-2020
सुशांत सिंह मामले में रिया चक्रवर्ती की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 5 अगस्त को करेगा सुनवाई

नई दिल्ली। सुशांत सिंह राजपूत आत्महत्या मामले में पटना में दर्ज प्राथमिकी मुंबई स्थानांतरित करने के लिए एक्‍ट्रेस रिया चक्रवर्ती की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 5 अगस्त को सुनवाई करेगा। शीर्ष न्यायालय की वेबसाइट पर मौजूद सूची के मुताबिक चक्रवर्ती की मामले को स्थानांतरित करने वाली याचिका पर सुनवाई बुधवार को न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय की पीठ के समक्ष होगी। बिहार सरकार के बाद शुक्रवार को महाराष्ट्र सरकार ने कैविएट दाखिल की। महाराष्ट्र सरकार ने भी न्यायालय से अनुरोध किया है कि इस याचिका पर कोई भी आदेश देने से पहले उसका पक्ष भी सुना जाये। बिहार सरकार और सुशांत सिंह राजपूत के पिता द्वारा न्यायालय में कैविएट दाखिल किये जाने के बाद महाराष्ट्र सरकार के इस कदम का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि रिया चक्रवर्ती की स्थानांतरण याचिका पर उसका पक्ष सुने बगैर कोई भी आदेश नहीं दिया जाए। शीर्ष अदालत में अपनी याचिका में चक्रवर्ती ने आरोप लगाया कि राजपूत के पिता ने बिहार के पटना में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया।

रिया ने अपनी याचिका में कहा कि वह और राजपूत लिव-इन-रिलेशनशिप में थे। राजपूत की मौत तथा खुद उन्हें हत्या और बलात्कार की धमकियां मिलने के बाद से वह गहरे सदमे में हैं। उन्होंने याचिका में कहा, ”यह जिक्र करना मुनासिब होगा कि मृतक और याचिकाकर्ता आठ जून 2020 तक करीब एक वर्ष से लिव-इन-रिलेशनशिप में रह रहे थे, उसके बाद याचिकाकर्ता मुंबई में अपने आवास पर अस्थायी रूप से चली गई थीं।” चक्रवर्ती ने याचिका में यह भी कहा, ”राजपूत पिछले कुछ समय से अवसाद में थे, इसके लिए दवाएं ले रहे थे और 14 जून 2020 की सुबह उन्होंने बांद्रा स्थित आवास पर खुदकुशी कर ली थी।” उन्होंने कहा कि जब घटना पटना में नहीं हुई तो वहां जांच शुरू करना गलत है।

 

23-07-2020
राजस्थान सियासी हलचल : स्पीकर की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सोमवार को सुनवाई

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने संबंधी राज्य विधानसभा अध्यक्ष का अनुरोध गुरुवार को ठुकरा दिया। न्यायालय ने हालांकि, यह स्पष्ट कर दिया कि कांग्रेस नेता सचिन पायलट एवं उनके खेमे के 18 विधायकों के खिलाफ कार्रवाई के मामले में उच्च न्यायालय का कोई भी फैसला शीर्ष अदालत के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा।न्यायमूर्ति अरुण कुमार मिश्रा, न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की खंडपीठ ने विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल तथा पायलट खेमे की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे और मुकुल रोहतगी की दलीलें सुनने के बाद कहा कि वह इस मामले में सोमवार को विस्तृत सुनवाई करेगी।

इस बीच उच्च न्यायालय के मंगलवार के आदेश पर रोक नहीं लगेगी।शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इस बाबत सुनवाई करेगी कि क्या उच्च न्यायालय सदन के अध्यक्ष के नोटिस के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर सकता है या नहीं? खंडपीठ अध्यक्ष के अधिकार बनाम अदालत के क्षेत्राधिकार जैसे महत्वपूर्ण सवाल पर विचार करेगी। न्यायालय ने हालांकि यह भी स्पष्ट कर दिया कि उच्च न्यायालय का 24 जुलाई का कोई भी फैसला इस मामले में शीर्ष अदालत के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा।विधानसभा अध्यक्ष ने राजस्थान उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी है,जिसमें उसने शुक्रवार तक सचिन पायलट और उनके खेमे के 18 विधायकों के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगा दी है। याचिका में कहा गया है कि उच्च न्यायालय विधानसभा अध्यक्ष को सचिन गुट पर कार्रवाई करने से नहीं रोक सकता। न्यायालय का कल का आदेश न्यायपालिका और विधायिका में टकराव पैदा करता है।

21-07-2020
सूचना आयोग में सुनवाई 22 से 28 जुलाई तक रहेगी स्थगित,अगली सुनवाई की सूचना पृथक से दी जाएगी

रायपुर। नवा रायपुर अटलनगर स्थित छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में 22 जुलाई से 28 जुलाई 2020 तक की अवधि में द्वितीय अपील, शिकायतों की सुनवाई स्थगित रहेगी। अपीलार्थी, शिकायतकर्ता, जनसूचना अधिकारी, प्रथम अपीलीय अधिकारी को राज्य सूचना आयोग में अगली सुनवाई की सूचना पृथक से दी जाएगी।सचिव राज्य सूचना आयोग आईआर देहारी ने बताया कि राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने कोरोना नियंत्रण के लिए प्रतिबंधात्मक आदेशों से प्रभावित क्षेत्र में शासकीय कार्यालयों के संचालन के लिए दिशा निर्देश जारी किए हैं। शासन ने प्रतिबंधात्मक आदेश से प्रभावित क्षेत्र में स्थित शासकीय कार्यालयों का संचालन प्रतिबंधात्मक आदेश के प्रभावी रहने की अवधि तक नहीं करने के निर्देश दिए हैं। जारी निर्देश के तहत आदेश से प्रभावित क्षेत्र की सीमा में स्थित शासकीय कार्यालयों और विभिन्न विभागों के अंतर्गत निगम, मंडल,आयोग और अन्य प्रशासकीय इकाईयों पर लागू होंगे। ये निर्देश केवल प्रतिबंधात्मक आदेश के प्रभावी रहने की अवधि तक ही प्रभावी रहेंगे।

 

14-07-2020
विकास दुबे मामले में सुप्रीम कोर्ट करेगा 20 जुलाई को सुनवाई,समिति गठित करने पर विचार

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि वह विकास दुबे और उसके सहयोगियों की मुठभेड़ों में मौत के मामले में प्रशासन द्वारा उठाये गये कदमों के विस्तृत विवरण के साथ एक स्थिति रिपोर्ट पेश करेगी।प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायमूर्ति आर.सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना की पीठ ने कहा कि वह दुबे और उसके सहयोगियों की मुठभेड़ में मौत के साथ ही गैंगस्टर द्वारा आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले की जांच के लिये पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने पर विचार कर सकती है। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि वह इस मामले में 16 जुलाई तक स्थिति रिपोर्ट पेश करेंगे।
शीर्ष अदालत ने कहा कि दुबे और उसके सहयोगियों की पुलिस मुठभेड़ में मौत के मामलों की न्यायालय की निगरानी में जांच के लिये दायर याचिकाओं पर 20 जुलाई को सुनवाई की जाएगी। कानपुर के चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव में तीन जुलाई की रात विकास दुबे को गिरफ्तार करने गई पुलिस की टुकड़ी पर घात लगाकर किए गए हमले में पुलिस उपाधीक्षक देवेन्द्र मिश्रा सहित आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे।

पुलिस की इस टुकड़ी पर विकास दुबे के घर की छत से गोलियां बरसाईं गई थीं।विकास दुबे 10 जुलाई की सुबह कानपुर के निकट भौती इलाके में पुलिस मुठभेड़ में उस समय मारा गया जब उसने कथित तौर पर पुलिस की दुर्घनाग्रस्त गाड़ी से निकल कर भागने का प्रयास किया। उप्र पुलिस इसी गाड़ी में विकास दुबे को उज्जैन से कानपुर ला रही थी।बिकरू पुलिस मुठभेड़ के आरोपी 50 हजार के इनामी और विकास दुबे के सहयोगी शशिकांत को कानपुर पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि उसकी निशानदेही पर पुलिस मुठभेड़ के दौरान लूटी गई पुलिस की एके-47 रायफल व 17 कारतूस और इंसास रायफल व 20 कारतूस बरामद किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक इसके साथ ही पुलिस मुठभेड़ में लूटे गए सभी हथियार बरामद कर लिए गए हैं।

 

09-06-2020
अल्पसंख्यक आयोग न्यायालय में हुई सुनवाई, मदरसों के संबंध में बयान दर्ज

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग मुख्यालय में स्थित आयोग न्यायालय में मंगलवार को सुनवाई की गई। कोविड-19 के नियंत्रण व बचाव के लिए जारी निर्देशों का पालन कर आयोग में प्रकरण की सुनवाई हुई। अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष महेन्द्र छाबड़ा ने बताया कि राज्य में संचालित मदरसों के संदर्भ में एक प्रकरण आयोग में दर्ज किया गया है। प्रकरण में बताया गया है, कि सत्र 2016-17 में 282 मदरसे अनुदानित थे। इसमें 218 मदरसों को ही भुगतान किया गया और 64 मदरसों को इनका प्रस्ताव अनियमितता के वजह प्राप्त नहीं हुआ। साथ ही बोर्ड की ओर से माध्यमिक शाला को सत्र 2015-16 में कम्प्यूटर दिया गया था।

जितने भी दिए गए सब घटिया किस्म के हैं। ज्यादातर खराब हो चुके हैं। मदरसा बोर्ड की ओर से प्रतिवर्ष प्रत्येक शिक्षकों को शासन से 1500 रुपए प्राप्त होता है, किन्तु शिक्षकों को बगैर प्रशिक्षण दिए, फण्ड कहां जाता है पता नहीं, इसमें भी मदरसा बोर्ड की ओर से अर्थिक अनियमितता प्रतीत होती है।  मदरसा के संबंध में जब भी मदरसा शिक्षक/शिक्षिकाएं मदरसा बोर्ड के अधिकारी/कर्मचारियों से संपर्क करते हैं तो डांट फटकार अभद्र व्यवहार किया जाता हैै। उपरोक्त बिन्दुओं समेंत कुल 9 बिन्दुओं पर संबंधित शिकायतकर्ता का बयान दर्ज किया गया है, इसके बाद आयोग के अधिनियमों के अनुसार कार्यवाही की जाएगी। इस दौरान आयोग के सदस्य हफीज खान और अनिल जैन, आयोग के सचिव एमआर खान भी मौजूद थे।

 

02-06-2020
देश का नाम 'इंडिया' की जगह 'भारत' करने की मांग, सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर सुनवाई स्थगित

नई दिल्ली। देश के नाम को 'इंडिया' के बजाए 'भारत' से संबोधित किए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर मंगलवार को सुनवाई टल गई। कोर्ट ने इसकी सुनवाई के लिए अगली तारीख भी नहीं दी है। इस याचिका पर प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई होनी थी। लेकिन सीजेआई बोबडे के मंगलवार को अवकाश पर होने की वजह से इसे टाल दिया गया। देश की शीर्ष अदालत में दायर इस याचिका में कहा गया है कि संविधान के पहले अनुच्छेद में लिखा है कि इंडिया यानी भारत। ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि जब देश एक है तो उसके दो नाम क्यों है? एक ही नाम का प्रयोग क्यों नहीं किया जाता है? याचिकाकर्ता का कहना है कि इंडिया शब्द से गुलामी झलकती है और यह भारत की गुलामी का निशान है। इसलिए इस…

26-05-2020
सुप्रीम कोर्ट ने प्रवासी मजदूरों की समस्याओं को स्वत: संज्ञान में लिया, 28 मई को होगी सुनवाई

नई दिल्ली। लॉक डाउन के कारण देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे प्रवासी मजदूरों की समस्याओं और मुसीबतों का सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को 28 मई के लिए सूचीबद्ध किया है और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से इस मामले में सहयोग करने को कहा है।जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट इस मामले पर 28 मई को सुनवाई करेगा।कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार, दोनों ओर से कमियां रही हैं। कोर्ट ने कहा कि प्रवासी मजदूरों को आवास, भोजन और यात्रा की सुविधा देने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने की जरूरत है। बता दें कि लॉक डाउन के चलते लाखों की संख्या में प्रवासी मजदूर उन राज्यों में फंस गए थे जहां वह काम करने गए थे। आय और भोजन का कोई साधन न होने के चलते कई श्रमिक घर जाने के लिए पैदल ही सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा पर निकल गए थे। हालांकि, बाद में केंद्र सरकार ने इन मजदूरों को घर पहुंचाने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन और बस सुविधा संचालित करने का फैसला किया था। मजदूरों के पलायन के बाद मानवता को शर्मसार कर देने वाली घटनाएं सामने आई हैं। कहीं, गर्भवती महिला ने सड़क पर ही बच्चे को जन्म दिया और उसके कुछ घंटे बाद फिर यात्रा शुरू कर दी। वहीं, कुछ मजदूरों की ट्रेन के नीचे आ जाने से हुई मौत ने भी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। 

 

13-05-2020
छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में प्रकरणों की सुनवाई जारी

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील और शिकायत के प्रकरणों की सुनवाई की जा रही है। अपीलार्थी और जनसूचना अधिकारी/प्रथम अपीलीय अधिकारी प्रकरण से संबंधित तर्क/जवाब लिखित रूप से आयोग को ई-मेल या व्हाट्सअप और फैक्स से भेज सकते हैं। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील और शिकायत के प्रकरणों की सुनवाई वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्तों के द्वारा की जा रही है। राज्य के ग्रीन जोन जिले के अपीलार्थी और जनसूचना अधिकारी अपने जिले के कलेक्टोरेट स्थित एनआईसी (राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र) के वीडियोकक्ष में उपस्थित होकर अपना पक्ष रख सकते हैं और आयोग को अपना जवाब ई-मेल, व्हाट्सअप और फैक्स से भेज सकते हैं। छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग को अपना जवाब ई-मेल sic.cg@nic.in फैक्स नम्बर 0771-2512102 व्हाट्सअप नम्बर 9425502363 पर भेज सकते हैं।बताया गया कि कोविड-19 लॉकडाउन की अवधि में छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील और शिकायत के प्रकरणों की सुनवाई के लिए राज्य सूचना आयोग में अपीलार्थी/शिकायतकर्ता और प्रथम अपीलीय अधिकारी की उपस्थिति अनिवार्य नहीं है।

 

11-05-2020
रेरा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से शुरु की प्रकरणों की सुनवाई, दिशा निर्देश जारी

रायपुर। लॉकडाउन के दौरान छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) ने विभिन्न प्रकरणों की सुनवाई शुरु कर दी है। सोमवार से भू-संपदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2016 की धारा 31 के अंतर्गत प्राप्त शिकायतों की जांच के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई शुरु की गई है। रेरा के अध्यक्ष विवेक ढांड और सदस्य आरके टम्टा ने आज सुनवाई की। बताया गया कि आज आवेदक हरिद्वार से और अनावेदक प्रमोटर और अधिवक्ता रायपुर में अपने निवास से सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से शामिल हुए।रेरा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की प्रक्रिया के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिनके अनुसार पक्षकार और अधिवक्तागण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से प्रकरणों की सुनवाई में शामिल हो सकते हैं। अध्यक्ष विवेक ढांड ने बताया कि रेरा की ओर से 11 मई से सुनवाई के लिए नियत प्रकरणों की केस लिस्ट प्राधिकरण के वेब पोर्टल https ://rera.cgstate.gov.in पर उपलब्ध है। वर्तमान परिदृश्य में प्राधिकरण के समक्ष पक्षकारों की उपस्थिति के स्थान पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से उपस्थिति दर्ज की जा सकेगी। केस लिस्ट में उल्लेखित निर्धारित तिथि पर सुनवाई के लिए नियत  प्रकरणों से संबंधित पक्षकारों और अधिवक्तागणों को सुनवाई के एक दिन पूर्व और सुनवाई के एक घंटे पूर्व पुन: उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी पर सूचित किया जाएगा।उन्होंने बताया कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई के लिए सभी पक्षकारों को अपने मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी की जानकारी रेरा की शासकीय मेलडी office.rera.cg@gov.in पर एक सप्ताह के भीतर निर्धारित प्रारूप में भेजने को कहा गया है। इसमें प्रकरण क्रमांक, पक्षकार तथा अधिवक्ता (यदि कोई हो) का नाम, ई-मेल आईडी, मोबाइल नंबर स्पष्ट रूप से लिखा हो। प्राधिकरण की ओर से तीन कार्य दिवसों में ई-मेल प्राप्त होने की पुष्टि की जाएगी। इसमें किसी प्रकार की त्रुटि होने पर पक्षकार या अधिवक्ता प्रकरण की पेशी तिथि के तीन कार्य दिवस पूर्व तक नवीन मेल से सुधरी हुई जानकारी भेज कर प्राधिकरण के टेलीफोन नंबर 0771-4918927 पर सूचित कर सकेंगे।

Advertise, Call Now - +91 76111 07804