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20-01-2020
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई कारोबारी विजय माल्या को फटकार, कही यह बात...

नई दिल्ली। शराब कारोबारी विजय माल्या की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने खरी खोटी सुनाई। विजय माल्या से सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपने अब तक एक पैसा भी वापस नहीं किया है। इस मामले में जस्टिस आरएफ नरीमन ने खुद को सुनवाई अलग कर लिया है। दरअसल, जस्टिस नरीमन के पिता सीनियर एडवोकेट फली नरीमन आरोपी विजय माल्या के लिए दूसरे केस में पैरवी कर चुके हैं। दरअसल, 12 बैंकों ने कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जब्त की गई विजय माल्या की संपत्ति बैंकों को देने की गुहार लगाई है। विजय माल्या ने इसके विरोध में सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई है। बता दें कि माल्या भारतीय बैंकों से लिए गए 9,000 करोड़ रुपए के कर्ज को चुकाए बिना भारत से भाग गया था और वर्तमान में इंग्लैंड में प्रत्यर्पण संबंधी प्रक्रियाओं से गुजर रहा है।

पिछले साल जनवरी में विशेष अदालत ने माल्या को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया था और धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) से संबंधित मामलों में उसकी संपत्ति जब्त करने की कार्यवाही शुरू कर दी थी। फरार चल रहे शराब कारोबारी विजय माल्या के स्वामित्व वाला किंगफिशर हाउस तीन साल में एक बार फिर 8वीं बार नीलामी के लिए रखा जा चुका है। वर्तमान में किंगफिशर हाउस डिफंक्ट किंगफिशर एयरलाइंस लिमिटेड (केएएल) का मुख्यालय है। जब्त संपत्ति के लिए बेंगलुरु स्थित ऋण वसूली अधिकरण (डीआरटी) ने एक ऑनलाइन बोली प्रक्रिया के माध्यम से 27 नवंबर को एक नई नीलामी तिथि की घोषणा की है।

18-01-2020
पवन गुप्ता की याचिका पर 20 को सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई

नई दिल्ली। निर्भया के दोषी पवन गुप्ता की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 20 जनवरी को सुनवाई होगी। इस याचिका में दोषी पवन गुप्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें अदालत ने उसे 2012 में नाबालिग मानने से इनकार कर दिया था।

हाईकोर्ट खारिज कर चुका है याचिका

निर्भया केस में एक बार फिर दोषी पवन गुप्ता ने अपराध के वक्त खुद को नाबालिग होने का दावा किया है। इसके लिए पवन ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटिशन (एसएलपी) दाखिल की है। पवन का कहना है कि अपराध के वक्त वह नाबालिग था और दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस तथ्य की अनदेखी की है। मालूम हो कि 19 दिसंबर को हाईकोर्ट ने पवन गुप्ता की उस अपील को खारिज कर दिया था जिसमें उसने अपने आप को नाबालिग बताया था। वहीं राष्ट्रपति ने आज ही निर्भया के दोषी मुकेश की दया याचिका खारिज कर दी है।

राष्ट्रपति ने 12 घंटे के भीतर खारिज की मुकेश की दया याचिका

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद  ने निर्भया दुष्कर्म और हत्या के दोषी मुकेश सिंह की दया याचिका खारिज कर दी। राष्ट्रपति ने यह फैसला गृहमंत्रालय की ओर से भेजी गई सिफारिश के 12 घंटे केभीतर ही ले लिया। गृहमंत्रालय ने बृहस्पतिवार शाम को अपनी तरफ से भी यह दया याचिका खारिज करने की सिफारिश की थी। मुकेश इस मामले के अन्य तीन दोषियों के साथ तिहाड़ जेल के विशेष वार्ड में बंद है। नीचली अदालत ने अब इन चारों को 1 फरवरी को सुबह छह बजे फांसी पर लटकाने का नया आदेश दिया है। पहले इन्हें 22 जनवरी को फांसी देनी थी। लेकिन मुकेश और विनय कुमार के क्यूरेटिव पेटीशन और मुकेश की दया याचिका के चलते फांसी की तारीख आगे बढ़ानी पड़ी। जानकारों के मुताबिक अब मुकेश के माफीनामें के सभी विकल्प खतम हो चुके हैं। लेकिन बाकी तीन दोषी राष्ट्रपति के पास दया याचिका के लिए जा सकते हैं। इस स्थिति में फांसी की तारीक फिर बढाई जा सकती है।

16-01-2020
हाईकोर्ट का निर्देश अब सीधे नहीं हो पाएगी भ्रूण परीक्षण की शिकायत

रायपुर। जस्टिस संजय के अग्रवाल की एकल पीठ में लिंग परीक्षण की शिकायत पर डॉक्टर दंपत्ति के खिलाफ सीधे दर्ज की गई एफआईआर पर रोग लगा दी है। इसके साथ ही मामले में पुलिस को पीएनडीटी अधिनियम के तहत कोर्ट में परिवाद दायर करने के दिशा निर्देश भी जारी किए है। उल्लेखनीय महासमुंद जिले के सरायपाली बसना के ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी डॉ.रोजेदार ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग हाईकोर्ट में याचिका के माध्यम से लगाई थी। याचिकाकर्ता ने कहा है कि उसके खिलाफ एक महिला ने कलेक्टर से  फर्जी शिकायत की थी। शिकायतकर्ता ने कहा है कि डॉ. रोजेदार और उनकी पत्नी भ्रूण परीक्षण करते हैं। महिला की शिकायत के आधार पर कलेक्टर ने तहसीलदार को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे ।कलेक्टर के निर्देश पर तहसीलदार ने थाने में उसके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया| मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस संजय के अग्रवाल ने चिकित्सक के खिलाफ सीधे दर्ज रोक लगा दी।

 

 

04-01-2020
व्यापम घोटाले की सीबीआई जांच को लेकर दायर याचिका पुनर्जीवित

रायपुर। बिलासपुर हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ व्यापम की सीबीआई जांच की मांग को लेकर दायर की गई याचिका को पुनर्जीवित कर दिया है। मामले की पिछली सुनवाई के दौरान अधिवक्ता की अनुपस्थिति होने के कारण याचिका खारिज कर दी गई थी। याचिकाकर्ता अभिषेक चौबे ने व्यापम घोटाले की आशंका जाहिर करते हुए मामले की सीबीआई या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराए जाने की मांग की थी। याचिका में छत्तीसगढ़ की स्थापना के बाद व्यापम में मनमानी व बड़े पैमाने पर किए जाने का आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई थी। इसकी प्रारंभिक सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस व्यापम को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। मामले की अधिवक्ता योगेश्वर अनुपस्थित रहे थे लिहाजा जनहित याचिका खारिज कर दी गई। शुक्रवार को याचिकाकर्ता चौबे की ओर से आवेदन देकर याचिका को पुनर्जीवित किए जाने की मांग की गई जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर याचिका को पुनर्जीवित कर दिया है।

 

25-12-2019
डीकेएस हॉस्पिटल घोटाले की सुनवाई 6 फरवरी को

रायपुर। राजधानी के डीकेएस सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में हुए 64 करोड रुपए के लोन घोटाले की अगली सुनवाई 6 फरवरी 2020 को होगी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पंकज आलोक तिर्की के अवकाश में होने के कारण मंगलवार को होने वाली सुनवाई की तारीख को आगे बढ़ा दिया गया। इस घोटाले में आरोपी बनाए गए पीएनबी के जीएम राजीव खेड़ा और डीजीएम सुनील अग्रवाल अदालत में उपस्थित हुए थे। वहीं एक्स सीएम रमन सिंह के दामाद डॉ पुनीत गुप्ता की ओर से अधिवक्ता एसके फरहान में आवेदन पेश किया था। बता दे कि राज्य में कांग्रेस की सरकार के गठन होने के बाद सही डिकेएस घोटाले की फाइल खोली गई।  तत्काल अस्पताल अधीक्षक के के सहारे ने गोल बाजार थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इसकी जांच करने के बाद पुलिस ने करीब 2000 पन्नों का चालान कोर्ट में पुट अप किया था। इस मामले में पुनीत गुप्ता, राजीव खेड़ा और सुनील अग्रवाल को आरोपी बनाया गया था। गिरफ्तारी को देखते हुए सभी ने बिलासपुर उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए याचिका लगाई थी। जहां सभी के आवेदन मंजूर किए गए थे।

20-12-2019
जयपुर सीरियल बम ब्लास्ट मामले में कोर्ट ने सुनाई आरोपियों को फांसी की सजा

जयपुर। 13 मई 2008 में जयपुर में हुए सीरियल बम ब्लास्ट मामले में शुक्रवार को स्पेशल कोर्ट ने चारों दोषियों सैफुर्रहमान, मोहम्मद सैफ, मोहम्मद सरवर आजम, मोहम्मद सलमान को फांसी की सजा सुनाई है। उल्लेखनीय है कि जयपुर में साल 2008 में एक साथ कई जगहों पर बम ब्लास्ट हुए थे। इस 11 साल पुराने मामले में बुधवार को सुनवाई करते हुए कोर्ट ने चारों आरोपियों को दोषी करार दिया था, जबकि एक आरोपी बरी कर दिया गया था। शुक्रवार को मामले पर फैसला देते हुए कोर्ट ने दोषी करार दिए गए चारों आरोपियों सैफुर्रहमान, मो.सैफ, मो.सरवर आजम, मो.सलमान को फांसी की सजा सुनाई है। बता दें कि 13 मई, 2008 को शहर के अंदर अलग-अलग जगहों पर 8 सिलसिलेवार धमाके हुए थे, जिनमें 80 लोगों की मौत हो गई थी और 176 घायल हो गए थे। 

 

23-11-2019
एनसीपी-शिवसेना की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में रविवार सुबह होगी सुनवाई

नई दिल्ली। महाराष्ट्र में जारी सियासी उठा-पटक के बीच सुप्रीम कोर्ट रविवार सुबह 11:30 बजे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और शिवसेना की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करेगा। इस याचिका में एनसीपी और शिवसेना ने महाराष्ट्र के गर्वनर भगत सिंह कोश्यारी के देवेंद्र फडणवीस को सरकार बनाने के न्योता देने वाले फैसले को चुनौती दी है। इन दोनों पार्टियों का कहना है कि गवर्नर का भाजपा को सरकार बनाने के लिए न्योता देने का यह फैसला असंवैधानिक है।
इससे पहले महाराष्ट्र में शनिवार सुबह सबको चौंकाते हुए देवेन्द्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री और अजित पवार ने उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। इसके बाद महाराष्ट्र की सियासत में भूचाल आ गया।


 

08-11-2019
अयोध्या पर सुप्रीम फैसला 9 नवंबर को, छत्तीसगढ़ हाई अलर्ट मोड पर

रायपुर। रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर लगातार 40 दिनों तक सुनवाई करने के बाद कल 9 नवंबर को उच्चतम न्यायालय अपना फैसला सुनाने जा रहा है। अतिसंवेदनशील फैसले के मद्देनजर राजधानी रायपुर सहित पूरा छत्तीसगढ़ हाई अलर्ट मोड पर कर दिया गया है। प्रदेश के पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी ने तत्काल आदेश जारी कर सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की  छुट्टियां  रद्द कर दी हैं। बताया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों वाली बेंच मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में कल सुबह 10.30 बजे अयोध्या मामले पर अपना फैसला सुना देगी। इसको ध्यान में रखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को सतर्क कर दिया है। केंद्र सरकार ने आगाह किया है कि फैसले के मद्देनजर असामाजिक तत्व लोगों की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर सकते हैं इसलिए राज्य सरकारों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। छत्तीसगढ़ में भी केंद्र के निर्देशों के अनुपालन में अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है। खास-खास जगहों पर पुलिस बल तैनात किए जा रहे हैं। 

 

05-11-2019
पुलिसकर्मियों ने खत्म किया धरना-प्रदर्शन, वकील बुधवार को  रहेंगे कामकाज से दूर

नई दिल्ली। वकीलों द्वारा अपने खिलाफ मारपीट से आक्रोशित सैकड़ों पुलिसकर्मियों का दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर चल रहा धरना-प्रदर्शन करीब 11 घंटे बाद खत्म हो चुका है। अपनी ज्यादातर मांगों के माने जाने के आश्वासन मिलने और पुलिस के आला अधिकारियों के लगातार समझाने-बुझाने के बाद प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मी धरना खत्म करने को सहमत हो गए। आला अफसर लगातार उन्हें मनाने की कोशिश करते कि उनका मकसद पूरा हुआ और अब वे काम पर लौट जाएं। सीनियर अधिकारी भरोसा दे रहे थे कि पुलिसकर्मियों की सभी जायज मांगें मानी जाएंगी। खुद दिल्ली पुलिस कमिश्नर से लेकर स्पेशल और जॉइंट पुलिस कमिश्नर और दूसरे आला अधिकारियों ने आक्रोशित पुलिसकर्मियों को समझाने की कोशिश की। आला अफसरों को बहुत मशक्कत करनी पड़ी और वे प्रदर्शनकारियों को बार-बार अनुशासन और दिल्ली पुलिस की छवि का वास्ता देते रहे। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों का कोई नेता नहीं था। कभी लगता कि अब प्रदर्शनकारी धरना खत्म करने को तैयार हैं तो उसी वक्त किसी दूसरे कोने से प्रदर्शनकारियों की भीड़ 'वी वॉन्ट जस्टिस' का नारा बुलंद कर धरने पर अड़े रहने का ऐलान कर दे रहे थे। दूसरी तरफ, बार काउंसिल ऑफ इंडिया की हड़ताल खत्म करने की अपील के बाद भी वकील नहीं मान रहे। दिल्ली डिस्ट्रिक्ट कोट्र्स कोऑर्डिनेशन कमिटी ने ऐलान किया किया कि हड़ताल बुधवार को भी जारी रहेगी। कमिटी ने कहा कि उसने फैसला किया है कि दिल्ली की सभी जिला अदालतों में वकील कामकाज से बुधवार को भी दूर रहेंगे। वादियों को अदालत आने दिया जाएगा। दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी (क्राइम) सतीश गोलचा ने प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों को बताया कि हाई कोर्ट के 3 नवंबर के आदेश के खिलाफ  रिव्यू पिटिशन दाखिल की जाएगी। बुधवार दोपहर 3 बजे मामले की सुनवाई है, उसी दौरान रिव्यू पिटिशन भी डाली जाएगी।

02-11-2019
सजा काट रही हनीप्रीत को राहत, अदालत ने हटाया देशद्राेह का आरोप

नई दिल्ली। बलात्कार के जुर्म में उम्रकैद भुगत रहे राम रहीम की खास हनीप्रीत को अदालत ने राहत दी है। हनीप्रीत के खिलाफ पुलिस द्वारा लगाई गई देशद्रोह की धाराएं पंचकूला की अदालत ने हटवा दी हैं। इससे हरियाणा पुलिस को बड़ा झटका लगा है। हनीप्रीत को राम रहीम की राजदार माना जाता है। उस पर अगस्‍त 2017 में राम रहीम को दुष्‍कर्म के मामले में दोषी ठहराने के बाद हुई हिंसा के मामले में देशद्रोह समेत कई धाराओं में केस दर्ज किया गया था। इसमें हनीप्रीत को मुख्‍य आराेपित माना गया। मगर, अब जब कोर्ट ने देशद्रोह की धारा हटवा दी है तो हनीप्रीत के खिलाफ हरियाणा पुलिस देशद्रोह का केस नहीं चला पाएगी। पंचकूला की अदालत में हुई हनीप्रीत की पेशी शनिवार को पंचकूला की अतिरिक्त सेशन कोर्ट में वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये हनीप्रीत की पेशी हुई। हनीप्रीत अंबाला की सेंट्रल जेल में बंद है। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सेशन जज संजय संधीर की बेंच ने हरियाणा पुलिस द्वारा पंचकूला में 25 अगस्त 2017 को हुई हिंसा में मुख्य आरोपित हनीप्रीत पर लगीं देशद्रोह की धाराओं को हटाया। इस केस में बहस के बाद आरोप तय किए गए। हनीप्रीत के खिलाफ एफआईआर 28 अगस्त 2017 को दर्ज की गई थी। राम रहीम को 2017 में हुई थी 20 साल की सजा राम रहीम सुनारिया जेल-रोहतक में उम्रकैद भुगत रहा है। वर्ष 2017 में 29 अगस्त को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने राम रहीम को दोषी मानते हुए 20 साल की सजा सुनाई थी। राम रहीम का पूरा नाम गुरमीत राम रहीम सिंह है। वह 'डेरा सच्चा सौदा' का प्रमुख है। उसे अपनी दो शिष्याओं के साथ दुष्कर्म करने और आपराधिक धमकी देने के अपराध में यह सजा हुई।

 

30-10-2019
चिदंबरम ने हाईकोर्ट से कहा- सेहत खराब है, दे दीजिए जमानत

नई दिल्ली। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने आईएनएक्स मीडिया मनी लॉड्रिंग मामले में स्वास्थ्य आधार पर अंतरिम जमानत मांगते हुए बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ के समक्ष याचिका पेश कर इस पर तत्काल सुनवाई की मांग की। पीठ ने गुरुवार को उचित अदालत के समक्ष मामले को सूचीबद्ध किया। चिदंरबम ने आईएनएक्स मीडिया मनी लांड्रिंग मामले में अपनी मुख्य जमानत याचिका के जरिए ही अंतरिम राहत की याचिका दायर की। पूर्व केंद्रीय मंत्री चिदंबरम को मामले में उनकी प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत अवधि खत्म होने पर बुधवार को निचली अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा। सीबीआई ने आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में 21 अगस्त को उन्हें गिरफ्तार किया गया था। यह मामला 15 मई 2017 को दर्ज किया गया। यह मामला चिदंबरम के वित्त मंत्री रहते हुए 2007 में विदेशों से 305 करोड़ रुपये की निधि हासिल करने के लिए आईएनएक्स मीडिया समूह को विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी देने में कथित अनियमितिताओं से जुड़ा है।

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