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23-11-2019
एनसीपी-शिवसेना की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में रविवार सुबह होगी सुनवाई

नई दिल्ली। महाराष्ट्र में जारी सियासी उठा-पटक के बीच सुप्रीम कोर्ट रविवार सुबह 11:30 बजे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और शिवसेना की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करेगा। इस याचिका में एनसीपी और शिवसेना ने महाराष्ट्र के गर्वनर भगत सिंह कोश्यारी के देवेंद्र फडणवीस को सरकार बनाने के न्योता देने वाले फैसले को चुनौती दी है। इन दोनों पार्टियों का कहना है कि गवर्नर का भाजपा को सरकार बनाने के लिए न्योता देने का यह फैसला असंवैधानिक है।
इससे पहले महाराष्ट्र में शनिवार सुबह सबको चौंकाते हुए देवेन्द्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री और अजित पवार ने उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। इसके बाद महाराष्ट्र की सियासत में भूचाल आ गया।


 

08-11-2019
अयोध्या पर सुप्रीम फैसला 9 नवंबर को, छत्तीसगढ़ हाई अलर्ट मोड पर

रायपुर। रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर लगातार 40 दिनों तक सुनवाई करने के बाद कल 9 नवंबर को उच्चतम न्यायालय अपना फैसला सुनाने जा रहा है। अतिसंवेदनशील फैसले के मद्देनजर राजधानी रायपुर सहित पूरा छत्तीसगढ़ हाई अलर्ट मोड पर कर दिया गया है। प्रदेश के पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी ने तत्काल आदेश जारी कर सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की  छुट्टियां  रद्द कर दी हैं। बताया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों वाली बेंच मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में कल सुबह 10.30 बजे अयोध्या मामले पर अपना फैसला सुना देगी। इसको ध्यान में रखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को सतर्क कर दिया है। केंद्र सरकार ने आगाह किया है कि फैसले के मद्देनजर असामाजिक तत्व लोगों की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर सकते हैं इसलिए राज्य सरकारों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। छत्तीसगढ़ में भी केंद्र के निर्देशों के अनुपालन में अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है। खास-खास जगहों पर पुलिस बल तैनात किए जा रहे हैं। 

 

05-11-2019
पुलिसकर्मियों ने खत्म किया धरना-प्रदर्शन, वकील बुधवार को  रहेंगे कामकाज से दूर

नई दिल्ली। वकीलों द्वारा अपने खिलाफ मारपीट से आक्रोशित सैकड़ों पुलिसकर्मियों का दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर चल रहा धरना-प्रदर्शन करीब 11 घंटे बाद खत्म हो चुका है। अपनी ज्यादातर मांगों के माने जाने के आश्वासन मिलने और पुलिस के आला अधिकारियों के लगातार समझाने-बुझाने के बाद प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मी धरना खत्म करने को सहमत हो गए। आला अफसर लगातार उन्हें मनाने की कोशिश करते कि उनका मकसद पूरा हुआ और अब वे काम पर लौट जाएं। सीनियर अधिकारी भरोसा दे रहे थे कि पुलिसकर्मियों की सभी जायज मांगें मानी जाएंगी। खुद दिल्ली पुलिस कमिश्नर से लेकर स्पेशल और जॉइंट पुलिस कमिश्नर और दूसरे आला अधिकारियों ने आक्रोशित पुलिसकर्मियों को समझाने की कोशिश की। आला अफसरों को बहुत मशक्कत करनी पड़ी और वे प्रदर्शनकारियों को बार-बार अनुशासन और दिल्ली पुलिस की छवि का वास्ता देते रहे। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों का कोई नेता नहीं था। कभी लगता कि अब प्रदर्शनकारी धरना खत्म करने को तैयार हैं तो उसी वक्त किसी दूसरे कोने से प्रदर्शनकारियों की भीड़ 'वी वॉन्ट जस्टिस' का नारा बुलंद कर धरने पर अड़े रहने का ऐलान कर दे रहे थे। दूसरी तरफ, बार काउंसिल ऑफ इंडिया की हड़ताल खत्म करने की अपील के बाद भी वकील नहीं मान रहे। दिल्ली डिस्ट्रिक्ट कोट्र्स कोऑर्डिनेशन कमिटी ने ऐलान किया किया कि हड़ताल बुधवार को भी जारी रहेगी। कमिटी ने कहा कि उसने फैसला किया है कि दिल्ली की सभी जिला अदालतों में वकील कामकाज से बुधवार को भी दूर रहेंगे। वादियों को अदालत आने दिया जाएगा। दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी (क्राइम) सतीश गोलचा ने प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों को बताया कि हाई कोर्ट के 3 नवंबर के आदेश के खिलाफ  रिव्यू पिटिशन दाखिल की जाएगी। बुधवार दोपहर 3 बजे मामले की सुनवाई है, उसी दौरान रिव्यू पिटिशन भी डाली जाएगी।

02-11-2019
सजा काट रही हनीप्रीत को राहत, अदालत ने हटाया देशद्राेह का आरोप

नई दिल्ली। बलात्कार के जुर्म में उम्रकैद भुगत रहे राम रहीम की खास हनीप्रीत को अदालत ने राहत दी है। हनीप्रीत के खिलाफ पुलिस द्वारा लगाई गई देशद्रोह की धाराएं पंचकूला की अदालत ने हटवा दी हैं। इससे हरियाणा पुलिस को बड़ा झटका लगा है। हनीप्रीत को राम रहीम की राजदार माना जाता है। उस पर अगस्‍त 2017 में राम रहीम को दुष्‍कर्म के मामले में दोषी ठहराने के बाद हुई हिंसा के मामले में देशद्रोह समेत कई धाराओं में केस दर्ज किया गया था। इसमें हनीप्रीत को मुख्‍य आराेपित माना गया। मगर, अब जब कोर्ट ने देशद्रोह की धारा हटवा दी है तो हनीप्रीत के खिलाफ हरियाणा पुलिस देशद्रोह का केस नहीं चला पाएगी। पंचकूला की अदालत में हुई हनीप्रीत की पेशी शनिवार को पंचकूला की अतिरिक्त सेशन कोर्ट में वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये हनीप्रीत की पेशी हुई। हनीप्रीत अंबाला की सेंट्रल जेल में बंद है। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सेशन जज संजय संधीर की बेंच ने हरियाणा पुलिस द्वारा पंचकूला में 25 अगस्त 2017 को हुई हिंसा में मुख्य आरोपित हनीप्रीत पर लगीं देशद्रोह की धाराओं को हटाया। इस केस में बहस के बाद आरोप तय किए गए। हनीप्रीत के खिलाफ एफआईआर 28 अगस्त 2017 को दर्ज की गई थी। राम रहीम को 2017 में हुई थी 20 साल की सजा राम रहीम सुनारिया जेल-रोहतक में उम्रकैद भुगत रहा है। वर्ष 2017 में 29 अगस्त को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने राम रहीम को दोषी मानते हुए 20 साल की सजा सुनाई थी। राम रहीम का पूरा नाम गुरमीत राम रहीम सिंह है। वह 'डेरा सच्चा सौदा' का प्रमुख है। उसे अपनी दो शिष्याओं के साथ दुष्कर्म करने और आपराधिक धमकी देने के अपराध में यह सजा हुई।

 

30-10-2019
चिदंबरम ने हाईकोर्ट से कहा- सेहत खराब है, दे दीजिए जमानत

नई दिल्ली। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने आईएनएक्स मीडिया मनी लॉड्रिंग मामले में स्वास्थ्य आधार पर अंतरिम जमानत मांगते हुए बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ के समक्ष याचिका पेश कर इस पर तत्काल सुनवाई की मांग की। पीठ ने गुरुवार को उचित अदालत के समक्ष मामले को सूचीबद्ध किया। चिदंरबम ने आईएनएक्स मीडिया मनी लांड्रिंग मामले में अपनी मुख्य जमानत याचिका के जरिए ही अंतरिम राहत की याचिका दायर की। पूर्व केंद्रीय मंत्री चिदंबरम को मामले में उनकी प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत अवधि खत्म होने पर बुधवार को निचली अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा। सीबीआई ने आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में 21 अगस्त को उन्हें गिरफ्तार किया गया था। यह मामला 15 मई 2017 को दर्ज किया गया। यह मामला चिदंबरम के वित्त मंत्री रहते हुए 2007 में विदेशों से 305 करोड़ रुपये की निधि हासिल करने के लिए आईएनएक्स मीडिया समूह को विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी देने में कथित अनियमितिताओं से जुड़ा है।

16-10-2019
अयोध्या मामला: आज ही पूरी हो सकती है सुनवाई, फिर फैसले का इंतजार !

नई दिल्ली।  राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में अब फैसले की घड़ी करीब आ गई है। सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद की नियमित सुनवाई का बुधवार को आखिरी दिन है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई स्पष्ट कर चुके हैं कि बुधवार को मामले की सुनवाई का 40वां और आखिरी दिन है। आज एक घंटा मुस्लिम पक्षकार जवाब देंगे। चार पक्षकारों को 45-45 मिनट मिलेंगे। मोल्डिंग ऑफ रिलीफ पर भी आज को ही सुनवाई हो सकती है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्‍यक्षता वाली पांच न्‍यायाधीशों की संविधान पीठ 39 दिनों से राम जनमभूमि-बाबरी मस्जिद के मुकदमे की सुनवाई कर रही है। इससे पहले 18 अक्‍टूबर को दलीलें खत्‍म करने की समय सीमा तय की गई थी। लेकिन सीजेआई ने मंगलवार को संकेत दिए हैं कि गुरुवार की बजाय बुधवार को सुनवाई पूरी करने की कोशिश करेंगे। वहीं मामले की सुनवाई के दौरान मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में हिंदू पक्ष ने दलील दी कि अयोध्या में भगवान राम के जन्म स्थान पर मस्जिद का निर्माण करके मुगल शासक बाबर द्वारा की गयी ऐतिहासिक भूल को अब सुधारने की आवश्यकता है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के सामने एक हिंदू पक्षकार की ओर से पूर्व अटार्नी जनरल और सीनियर वकील के. परासरन ने कहा कि अयोध्या में अनेक मस्जिदें हैं जहां मुस्लिम इबादत कर सकते हैं, लेकिन हिंदू भगवान राम का जन्म स्थान नहीं बदल सकते।
सुन्नी वक्फ बोर्ड और अन्य के वाद में प्रतिवादी महंत सुरेश दास की ओर से बहस करते हुए परासरन ने कहा कि सम्राट बाबर ने भारत पर जीत हासिल की और उन्होंने खुद को कानून से ऊपर रखते हुए भगवान राम के जन्म स्थान पर एक मस्जिद का निर्माण करके ऐतिहासिक भूल की। संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में जज एसए बोबडे, जज धनन्जय वाई. चंद्रचूड़, जज अशोक भूषण और जज एस. अब्दुल नजीर शामिल हैं।

17-09-2019
आज होगी कर्नाटक के 17 अयोग्य विधायकों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में आज अयोग्य करार दिए गए कर्नाटक के बागी विधायकों की याचिका पर सुनवाई होगी। कांग्रेस के महेश कुमाथल्ली,रमेश जरकिहोली और निर्दलीय आर. शंकर समेत 17 विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट मंक याचिका दी है। उनका कहना है कि स्पीकर ने बिना तय प्रक्रिया के पालन किए उन्हें सदन से बाहर कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट में होने वाली आज की सुनवाई पर सभी की नजरें होंगी। कर्नाटक विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष केआर रमेश कुमार ने विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल खत्म होने तक दल-बदल रोधी कानून के तहत जेडीएस-कांग्रेस और निर्दलीय समेत 17 विधायकों को अयोग्य ठहरा दिया था। खुद को अयोग्य करार दिए जाने के कर्नाटक के पूर्व स्पीकर केआर रमेश कुमार के फैसले के खिलाफ जेडीएस और कांग्रेस के ये विधायक सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। अपनी याचिका में इन नेताओं ने कहा है कि पूर्व स्पीकर का फैसला राजनीतिक दुर्भावना को दर्शाता है। लिहाजा कोर्ट इस आदेश को रद्द करे। उस वक्त कांग्रेस-जेडीएस के इन बागी विधायकों के इस्तीफे के कारण एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली 14 महीने पुरानी सरकार गिर गई थी। इसके बाद बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व में बीजेपी ने कर्नाटक में सरकार बना ली थी। सरकार गिरने के बाद तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष ने विधायकों के इस्तीफों को खारिज कर संबद्ध पार्टियों की अर्जियों को स्वीकार करते हुए विधायकों को अयोग्य करार दिया।

26-08-2019
पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम को झटका, एससी ने किया जमानत याचिका पर सुनवाई से इंकार 

नई दिल्ली। आईएनएक्स मीडिया केस में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को सुप्रीम कोर्ट से सोमवार को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट के द्वारा अंतरिम जमानत रद्द होने के फैसले के खिलाफ दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इसके अलावा चिदंबरम द्वारा सीबीआई हिरासत के खिलाफ दायर याचिका पर अभी सुनवाई नहीं होगी, क्योंकि ये मामला अभी तक लिस्ट नहीं हो पाया है। हालांकि, अभी ईडी की तरफ से जो हलफनामा दायर किया गया है उसपर भी सुनवाई होनी है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से कहा गया है कि अगर सीबीआई रिमांड के खिलाफ जो याचिका है अगर उसमें सुनवाई करनी है तो आपको रेगुलर जमानत के लिए याचिका दायर करनी होगी।

 

21-08-2019
अयोध्या सुनवाई में बोले चीफ जस्टिस-धर्मग्रंथ न सुनाएं, सबूत दें

नई दिल्ली। अयोध्या के राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद जमीन विवाद की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के समक्ष बुधवार को भी हुई। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने रामजन्म स्थान पुनरुद्धार समिति के वकील से कहा कि वह इस मामले में पुख्ता सबूत पेश करें और सिर्फ  पुराणों और अन्य धर्मग्रंथों की कहानी न सुनाएं। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कहा कि ये मामला किसी आस्था का नहीं है बल्कि विवादित जमीन से जुड़ा है। इस मामले पर अब गुरुवार को सुनवाई होगी। बता दें कि 6 अगस्त से सुप्रीम कोर्ट अयोध्या मामले की रोजाना सुनवाई कर रही है। बुधवार को इसका नौवां दिन था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम आस्था को लेकर लगातार दलीलें सुन रहे है, जिन पर हाईकोर्ट ने विश्वास भी जताया है। इस पर जो भी स्पष्ट साक्ष्य हैं वह बताएं। सीजेआई ने कहा कि मानचित्र में यह साफ करिए कि मूर्तियां कहां हैं? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिंदू ग्रंथों में आस्था का आधार विवादित नहीं है, मंदिर के लिए दस्तावेजी सबूत पेश करिए। इससे पहले रामजन्म स्थान पुनरुद्धार समिति के वकील पीएन मिश्रा ने स्कंद पुराण का जिक्र किया, जिसमें लोग सरयू नदी में स्नान करने के बाद जन्मस्थान का दर्शन करते थे। इसमें मंदिर का जिक्र नहीं है, लेकिन जन्मस्थान का दर्शन करते थे। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि स्कंद पुराण कब लिखा गया था? राम जन्मस्थान पुनरुद्धार समिति के वकील पीएन मिश्रा ने कहा कि ब्रिटिश लिखक के अनुसार गुप्तवंश के समय में लिखा गया, यह भी कहा जाता है 4-5 एडी में लिखा गया। पीएन मिश्रा ने कहा कि हमारा मानना है कि बाबर ने वहां कभी कोई मस्जिद नहीं बनवाई और हिंदू उस स्थान पर हमेशा पूजा करते रहे हैं। हम इसको जन्मभूमि कहते हैं। इससे पहले रामलला विराजमान की तरफ  से वरिष्ठ वकील एसएन वैद्यनाथन ने विवादित जमीन पर रामलला का दावा बताते हुए कई दलीलें पेश की। वैद्यनाथन ने कहा कि अगर वहां पर कोई मंदिर नहीं था, कोई देवता नहीं है तो भी लोगों की जन्मभूमि के प्रति आस्था काफी है। वहां पर मूर्ति रखना उस स्थान को पवित्रता प्रदान करता है। उन्होंने आगे कहा कि अयोध्या के भगवान रामलला नाबालिग हैं। नाबालिग की संपत्ति को न तो बेचा जा सकता है और न ही छीना जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर जन्मस्थान देवता है, अगर संपत्ति खुद में एक देवता है तो भूमि के मालिकाना हक का दावा कोई और नहीं कर सकता। कोई भी बाबरी मस्जिद के आधार पर उक्त संपत्ति पर अपने कब्जे का दावा नहीं कर सकता।

21-08-2019
पी.चिदंबरम की याचिका पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई, लटकी गिरफ्तारी की तलवार

नई दिल्ली। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी.चिदंबरम को सुप्रीम कोर्ट से भी तुरंत राहत नहीं मिली है। चिदंबरम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करके अंतरिम संरक्षण की मांग की थी। कोर्ट नंबर तीन में जस्टिस एनवी रमना के सामने याचिका दाखिल करके जल्द सुनवाई की मांग की गई थी। लेकिन जस्टिस रमना ने कहा कि वह याचिका सीजेआई को भेज रहे हैं, वे तय करेंगे कि याचिका पर सुनवाई कब होगी? अब खबर आ रही है कि आज केस मेंशन नहीं हो पाया है। अब मामले की सुनवाई शुक्रवार को होगी। वहीं, सीबीआई तथा प्रवर्तन निदेशालय ने पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदम्बरम की गिरफ्तारी से राहत मांगने वाली याचिका के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल किए हैं। अब कोर्ट कैविएट दायर करने वालों का पक्ष सुने बिना मामले में कोई फैसला नहीं सुना सकता है। आईएनएक्स मीडिया मामले में पी. चिदंबरम पर लगातार गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। हाईकोर्ट के बाद आज पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को फौरी राहत देने से इंकार कर दिया। हालांकि, बाद में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को तुरंत सुनवाई वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने सूचीबद्ध कर लिया। पी. चिदंबरम की ओर से वकीलों की टीम की अगुआई कपिल सिब्बल कर रहे हैं। 

 

 

25-06-2019
सीबीआई के फंदे में फंस सकती है मायावती, तीन मामलों की हो सकती है सुनवाई

नई दिल्ली। केंद्र में नई सरकार के गठन के बाद अब बसपा प्रमुख मायावती की मुश्किलें बढ़ सकती है। बसपा प्रमुख सीबीआई के फंदे में फंस सकती है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मायावती के शासनकाल में 21 सरकारी चीनी मिलों की बिक्री में कथित अनियमतता के मामले में तीन मामलों की नियमित रूप से सुनवाई कर सकती है। अभी तक इन मामलों की प्रारंभिक जांच चल रही थी।

साल 2011-12 के दौरान हुई इन सरकारी चीनों की बिक्री से सरकारी खजाने को कथित रूप से 1179 करोड़ रुपये के नुकसान होने की बात कही गई थी। डेक्कन क्रोनिकल की खबर के अनुसार सूत्रों का कहना है कि जांच के दौरान मिले सबूतों के आधार पर सीबीआई इन तीन प्रारंभिक जांच को नियमित केस के रूप में बदल सकती है।

सीबीआई इस मामले की जांच के तहत यूपी सरकार के कम से कम दो पूर्व वरिष्ठ नौकरशाहों से स्पष्टीकरण मांग सकती है। इसमें बताया गया कि साल 2011-12 के दौरान मायावती के शासन काल के दौरान हुई इन सरकारी चीनी मिलों की बिक्री से सरकारी खजाने को कथित रूप से 1179 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। एजेंसी ने इस मामले में कथित अनियमतता के मामले में एक एफआईआर और छह प्रारंभिक जांच रजिस्टर्ड की थी।

हालांकि, बसपा सुप्रीमो मायावती ने इन आरोपों से इनकार करते हुए केंद्र पर चुनाव के दौरान सीबीआई के दुरुपयोग करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि उनके शासन काल के दौरान हुई इन 21 चीनी मिलों की बिक्री को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। इससे पहले पिछले साल 12 अप्रैल को उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने इस मामले में सीबीआई जांच की अनुशंसा की थी।

07-05-2019
तेज बहादुर के नामांकन रद्द के फैसले पर कल सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट वाराणसी से समाजवादी पार्टी प्रत्याशी तेज बहादुर यादव के नामांकन को रद्द करने के चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ  दाखिल याचिका पर बुधवार को सुनवाई करेगा। ज्ञात हो कि बीएसएफ  से बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव को समाजवादी पार्टी ने वाराणसी लोकसभा क्षेत्र से अपना उम्मीदवार बनाया था लेकिन उनका पर्चा खारिज हो गया था। वाराणसी के निर्वाचन अधिकारी ने तेज बहादुर यादव को नामांकन के बाद नोटिस जारी किया था और उसका जवाब देने को कहा था। जवाब देने में असमर्थ रहने के बाद तेज बहादुर का नामांकन खारिज कर दिया गया। इसके बाद तेज बहादुर ने दावा किया था कि उनका पर्चा गलत तरीके से रद्द किया गया। बाद में तेज बहादुर यादव ने पर्चा खारिज करने के चुनाव आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि आयोग को अपने फैसले पर विचार करना चाहिए। अब इस मामले पर बुधवार को सुनवाई होगी। वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण सुप्रीम कोर्ट में तेज बहादुर यादव का पक्ष रखेंगे। बता दें कि तेज बहादुर यादव पहले निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ  चुनाव लड़ रहे थे। बाद में समाजवादी पार्टी ने उन्हें अपना प्रत्याशी बना दिया। तेज बहादुर से पहले सपा के टिकट पर शालिनी यादव पीएम मोदी के खिलाफ  ताल ठोक रही थीं। तेज बहादुर का नामांकन रद्द होने के बाद सपा की पूर्व घोषित प्रत्याशी शालिनी यादव अब वाराणसी से मैदान में हैं।

 

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