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19-08-2021
Video: महिला उत्पीड़न संबंधित प्रकरणों की राज्य महिला आयोग कर रही सुनवाई

कोरबा। जिले में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों की सुनवाई राज्य महिला आयोग की ओर से शुरू हो गई है। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक तथा सदस्य शशिकांता राठौर और अर्चना उपाध्याय इन प्रकरणों की सुनवाई कर रहीं है। महिला आयोग की यह सुनवाई जिला पंचायत के सभा कक्ष में चल रही है। डॉ. नायक और अन्य दो सदस्य पारिवारिक विवादों सहित महिला उत्पीड़न संबंधी प्रकरणों की सुनवाई कर रहे हैं। इस दौरान कार्यस्थल पर प्रताड़ना, दहेज प्रताड़ना, हत्या, मारपीट, संपत्ति विवाद, मानसिक प्रताड़ना, अपहरण, भरण-पोषण संबंधी विवादों का यथासंभव निपटारा होने की संभावना है।

 

11-08-2021
हाईकोर्ट में चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल मेडिकल कॉलेज मामले में हुई सुनवाई

बिलासपुर। हाई कोर्ट में बुधवार को चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल मेडिकल कॉलेज मामले में सुनवाई हुई। मामले में हाईकोर्ट ने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के 13 सदस्यों और बैंक को नोटिस जारी कर 3 हफ्ते में जवाब मांगा है। कोर्ट में पट्टा निरस्तीकरण, बैंक द्वारा शासन की जमीन को नीलाम किए जाने और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई हुई। बता दें कि मान्यता रद्द होने के बाद से छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए विधानसभा सत्र में भूपेश बघेल सरकार ने चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज के अधिग्रहण की घोषणा की थी। सरकार की घोषणा के बाद हाईकोर्ट में अधिग्रहण के खिलाफ याचिका पेश की गई थी। मामले में चंदूलाल चंद्राकर के पोते अमित चंद्राकर ने याचिका लगाई है।

 

05-08-2021
पेगासस जासूसी मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज

नई दिल्ली/रायपुर। पेगासस जासूसी मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस एनवी रमना और जस्टिस सूर्यकांत की बेंच करेगी। बता दें कि वरिष्ठ पत्रकारों एनराम और शशिकुमार, सीपीएम के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास और वकील एमएल शर्मा ने याचिकाएं दाखिल की हैं। पेगासस मामले की जांच को लेकर संसद में विपक्ष रोजाना हंगामा कर रहा है। याचिकाओं में सरकारी एजेंसियों की ओर से विशिष्ट नागरिकों, नेताओं और पत्रकारों की इजराइली स्पाइवेयर पेगासस के जरिए कथित जासूसी की खबरों के संबंध में जांच कराने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। पत्रकारों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत से कहा था कि याचिका के व्यापक असर को देखते हुए इस पर तत्काल सुनवाई की जरूरत है। याचिका में कहा गया है कि कथित जासूसी देश में विरोध की स्वतंत्र अभिव्यक्ति को दबाने और हतोत्साहित करने के एजेंसियों और संगठनों के प्रयास की बानगी है।

01-08-2021
पत्नी और बेटी को पहचानने से किया इनकार, डीएनए टेस्ट के निर्देश, दुधमुंही बच्ची को नहीं लाने पर हुई एफआईआर 

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने रविवार को प्रकरणों की सुनवाई के दौरान एक प्रकरण में डीएनए टेस्ट और एक अन्य केस में एफआईआर के निर्देश दिए हैं। एक प्रकरण में अनावेदक ने अपने आवेदिका पत्नी और बेटी को पहचानने से इंकार कर दिया। अनावेदक ने कहा कि यह न मेरी पत्नी है और न तो यह मेरी बेटी है। इस प्रकरण में अध्यक्ष डॉ नायक ने आगामी सुनवाई शिकायत के आधार पर जारी रखे जाने के पूर्व आवेदिका बेटी और अनावेदक का डीएनए टेस्ट कर रिपार्ट प्रस्तुत करने कहा। दरअसल आवेदिका पत्नी ने बताया कि सन 1980 में विवाह अनावेदक से हुआ था। ग्रामीण परिवेश में विवाह हुआ है और 5 साल तक अपने ससुराल में रही है। इस संबंध में डॉक्टरों से चर्चा के बाद थाना प्रभारी सिविल लाइन के माध्यम से सुपरिटेंडेंट मेडिकल कॉलेज को डीएनए टेस्ट के लिए भेजा गया है। डीएनए टेस्ट लेते तक आवेदिका मां और बेटी को सखी सेंटर में सुरक्षित रखा गया है। इस प्रकरण की समस्त जानकारी के लिए आयोग के समक्ष शासकीय कार्यावधि समय मे जानकारी को थाना प्रभारी, एसआई के माध्यम से आयोग को अवगत कराने कहा गया है।

एक अन्य प्रकरण में जिला जांजगीर से एसआई के माध्यम से अनावेदक को उपस्थित कराया गया। अनावेदक पिछले दिसंबर माह की सुनवाई में उपस्थित हुआ था, तब भी दुधमुंही बच्ची को लेकर नहीं आया था। आज सुनवाई में भी बच्ची को लेकर उपस्थित नहीं हुआ और आज आयोग के समक्ष उपस्थित होकर उच्चतम न्यायालय में लगाए पिटीशन को कॉपी दिखाकर कहा कि मामला कोर्ट में चल रहा है। साथ ही आयोग की अधिकारिता को मानने से इंकार किया। चूंकि अनावेदक का रवैया बार-बार बच्ची को लेकर ताला बंद कर घर के सदस्यों सहित फरार हो जाने का है। आज भी उसकी नियत बच्ची को देने की नहीं है। ऐसी स्थिति में आवेदिका को आयोग से सीधा सिविल लाइन थाना भेजा गया। थाना सिविल लाइन ने अनावेदक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

30-07-2021
पेगासस जासूसी मामला : सुप्रीम कोर्ट में अगस्त के पहले हफ्ते में होगी सुनवाई

नई दिल्ली/रायपुर। पेगासस जासूसी मामले में दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में अगस्त के पहले हफ्ते में सुनवाई होगी। शुक्रवार को सीजेआई एनवी रमना ने अगस्त के पहले हफ्ते में याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है। वहीं वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि उन्होंने तत्काल सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट के सामने वरिष्ठ पत्रकार एन राम और शशि कुमार की याचिका मेंशन की। कपिल सिब्बल ने कहा कि ये नागरिकों की स्वतंत्रता को प्रभावित करता है और सुप्रीम कोर्ट की इस पर तत्काल सुनवाई की आवश्यकता है। इस पर सीजेआई ने कहा कि कोर्ट अगले हफ्ते मामले की सुनवाई करेगा। वहीं कपिल सिब्बल ने कहा कि सुनवाई मंगलवार या बुधवार को नहीं होनी चाहिए, क्योंकि वो दूसरे मामलों में व्यस्त हैं। इस पर सीजेआई ने कहा कि वो मामले को सुनवाई के लिए लिस्ट करते समय इसे ध्यान में रखेंगे। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में शीर्ष अदालत के एक मौजूदा या रिटायर जज की अध्यक्षता में जांच की मांग की गई है। ताकि सरकार की तरफ से इजरायली सॉफ्टवेयर पेगासस का इस्तेमाल करके राजनेताओं, कार्यकर्ताओं और पत्रकारों की जासूसी करने की रिपोर्ट की जांच की जा सके।

27-07-2021
मानहानि मुकदमे की सुनवाई में कंगना नहीं हुईं हाजिर, कोर्ट ने जाहिर की नाराजगी, 1 सितंबर को पेश होने को कहा

मुंबई। अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ गीतकार जावेद अख्तर ने मानहानि का मुकदमा दर्ज किया हुआ है। इस केस की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कंगना पर तीखी टिप्पणी की है। कंगना रनौत केस की सुनवाई में हाजिर नहीं हो रही हैं। इस पर कोर्ट ने सख्त नाराजगी जाहिर की है। मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कंगना रनौत को अगली सुनवाई यानी 1 सितंबर को कोर्ट में पेश होने को कहा है। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि अगर इस बार कंगना रनौत कोर्ट में पेश नहीं होती हैं तो उनके खिलाफ गिरफ्तारी का वॉरंट जारी किया जाएगा।

19-07-2021
राज्य अनुसूचित आयोग ने की सुनवाई, राजकुमारी दीवान ने कहा- आदिवासी समाज की रक्षा के लिए प्रयासरत है

गरियाबंद। जाने अनजाने में जो फर्जी मुठभेड़ हो रहे हैं उसमें आदिवासियों की मौत भी हो रही है। इस बात को लेकर आयोग काफी गंभीर है और आयोग आदिवासियों को न्याय दिलाने के लिए पूरी तौर पर प्रयासरत है। यह बातें राज्य अनुसूचित आयोग के सदस्य नितिन पोटाई ने गरियाबंद में हुई चर्चा में कही। दरअसल छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग की उपाध्यक्ष राजकुमारी दीवान, आयोग के सदस्य नितिन पोटाई एवं सचिव  केएस ध्रुव गरियाबंद दौरे पर थे। यहां उन्होंने सभी पक्षों की सुनवाई के बाद  आगामी तारीख देते हुए सुनवाई के विषय पर साक्ष्य देने का निर्देश दिए। राजकुमारी दीवान ने कहा कि आयोग आदिवासी समाज की रक्षा के लिए सतत प्रयासरत है। किसी के साथ अन्याय ना हो या देखना उनका प्रमुख दायित्व है। इस उद्देश्य को लेकर वे प्रदेश के हर जिले में पहुंचकर समस्याओं की जानकारी ले उनके निराकरण का प्रयास कर रहे हैं।

राजकुमारी दीवान ने कहा कि समाज के द्वारा अनेक प्रकरण सामने लाए जा रहे हैं। उनका निराकरण भी किया जा रहा है। विशेषकर जमीन और उनके मालिकाना हक को लेकर विवाद ज्यादा आ रहे हैं। हम मामलों का निराकरण कर रहे हैं, जिसके चलते आदिवासी समाज का हित सामने आ रहा है। समाज के लोग जागरूक हो रहे हैं और हम  लगातार प्रयास कर रहे हैं कि आदिवासी समाज जागरूक हो अपने हकों और अधिकारों के लिए सामने आए। आयोग के माध्यम से इस उद्देश्य में सफल भी हो रहे हैं।

समिति के सदस्य नितिन पोटाई ने कहा कि जहां जहां भी नक्सली समस्या है वहां की भौगोलिक परिस्थितियां भी ऐसी है,जहां नक्सली और आदिवासियों में फर्क करना मुश्किल है। शायद यही कारण  है कि जाने अनजाने में जो फर्जी मुठभेड़ हो रही हैं उस में आदिवासियों की मौत भी हो रही है। इस बात को लेकर आयोग काफी गंभीर है और आयोग आदिवासियों को न्याय दिलाने के लिए पूरी तौर पर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि कई अवसरों पर देखा गया है कई  प्रकरणों में जमीन का आदिवासियों को मुआवजा भी नहीं मिलता। आदिवासियों की जमीन पर जबरदस्ती कब्जा किया जा रहा है,जिसकी हम लोग प्रमुखता से सुनवाई कर रहे हैं। इस अवसर पर बिंद्रानवागढ़ क्षेत्र के पूर्व  कांग्रेस प्रत्याशी जनकलाल ध्रुव, सर्व आदिवासी समाज के भरत दीवान तथा सरपंच संघ के मनीष ध्रुव के साथ ही आदिवासी समाज के अनेक प्रमुख लोग उपस्थित थे।

 

15-07-2021
दिल्ली हाईकोर्ट ने कोविशील्ड की दो खुराकों के बीच के अंतराल को घटाने संबंधी याचिका पर सुनवाई से इनकार

नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कोविशील्ड टीके की दूसरी खुराक के लिए निर्धारित 12 से 16 हफ्तों के अंतराल को 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों और अन्य गंभीर बीमारी से ग्रस्त लोगों के लिए घटाकर आठ हफ्ते करने के अनुरोध संबंधी याचिका पर सुनवाई से गुरुवार को इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने डॉ.सिद्धार्थ डे की दायर जनहित याचिका पर कहा, “हम नोटिस जारी करने के इच्छुक नहीं हैं। हम इसे हर्जाना लगाने के साथ खारिज करेंगे।” अदालत ने डे के वकील कुलदीप जौहरी से सवाल किया, “आपको किसी प्रक्रिया की जानकारी है? खुराकें कैसे तय की जाती हैं? खुराकें कौन निर्धारित कर रहा है? यदि हमारे पास ऐसा करने की शक्ति होती तो हमें प्रक्रिया में बदलाव करना पड़ता।” जौहरी ने जवाब दिया कि कोविड कार्यकारी समूह और अन्य विशेषज्ञ समूहों ने इस पहलू पर गौर किया है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में वैज्ञानिकों के अध्ययनों के आधार पर, कोविड-19 के नए स्वरुपों के मद्देनजर खुराकों के अंतराल को घटाने की जरूरत है। जौहरी ने दावा किया कि याचिका ईमानदार मंशा से दाखिल जनहित याचिका (पीआईएल) थी,जिसपर अदालत ने कहा कि उसे याचिका की नेक मंशा को लेकर कोई संदेह नहीं है और इस पर सुनवाई न करना बेईमानी का प्रमाण-पत्र नहीं है। जौहरी ने फिर बिना शर्त याचिका वापस ले ली।

 

15-07-2021
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जारी किया नोटिस, पूछा-  आजादी के 75 साल बाद भी क्या इस कानून की जरूरत है ?

नई दिल्ली। राजद्रोह कानून के संबंध में दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई की।  केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए पूछा कि 'आजादी के 75 साल बाद भी क्या इस कानून की जरूरत है'? चीफ जस्टिस एनवी रमण की अगुवाई वाली पीठ ने कहा, 'राजद्रोह का कानून औपनिवेशिक काल का है इसे ब्रिटिश द्वारा इस्तेमाल किया जाता था ताकि आजादी की आवाज को दबाया जा सके और इसका इस्तेमाल महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक के खिलाफ हुआ।' चीफ जस्टिस ने साथ ही कहा कि अगर आप इस धारा के तहत लगाए गए आरोपों को देखें तो ऐसे मामलों में दोषसिद्धि की दर काफी कम है और इसका दुरुपयोग होता रहा है। पीठ ने कहा कि उसकी मुख्य चिंता ‘कानून का दुरुपयोग’ है और उसने पुराने कानूनों को निरस्त कर रहे केंद्र से सवाल किया कि वह इस प्रावधान को समाप्त क्यों नहीं कर रहा। इस बीच, अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने प्रावधान की वैधता का बचाव करते हुए कहा कि राजद्रोह कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए कुछ दिशानिर्देश बनाए जा सकते हैं। 

दरअसल, पीठ मेजर-जनरल (सेवानिवृत्त) एसजी वोम्बटकेरे की एक नई याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 124 ए (राजद्रोह) की संवैधानिक वैधता को इस आधार पर चुनौती दी गई है कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार पर अनुचित प्रतिबंध है। चीफ जस्टिस एनवी रमन, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस ऋषिकेश राय की पीठ कहा कि वह राजद्रोह कानून की वैधता को लेकर अवलोकन करेगी। कोर्ट ने कहा कि राजद्रोह कानून का दुरुपयोग किसी बढ़ई को लकड़ी का एक टुकड़ा काटने के लिए कुल्हाड़ी देने जैसा है और मानो वो इसका इस्तेमाल पूरे जंगल को काटने के लिए कर रहा हो। कोर्ट ने कहा, 'किसी गांव में अगर एक पुलिस अधिकारी किसी को निशाना बनाना चाहता है तो वह सेक्शन 124 A का इस्तेमाल कर सकता है...लोग इससे डरे हुए हैं।' कोर्ट ने कहा राजद्रोह को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं हैं और इन सभी पर एक साथ सुनवाई होगी।

 

15-07-2021
जीपी सिंह केस में अगली सुनवाई मंगलवार को,न्यायालय ने सरकार से मांगा जवाब

रायपुर। निलंबित आईपीएस जीपी सिंह की याचिका पर जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की पीठ ने गुरुवार को सुनवाई की। जीपी सिंह ने उनके खिलाफ हुई कार्रवाई को पूर्वाग्रह से ग्रसित बताते हुए न्यायालय से संरक्षण और सीबीआई से जांच कराने की मांग की थी। न्यायालय ने राज्य सरकार से जवाब देने और केस की डायरी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने मामले को सुनवाई के लिए मंगलवार को रखा है। ज्ञात हो कि एसीबी ने एडीजी जीपी सिंह के सरकारी आवास में छापामार कार्रवाई की थी। आय से अधिक संपत्ति के मामले में जब्त दस्तावेजों को जब्त कर मामला दर्ज किया गया था। उनके घर से मिली डायरी के आधार पर राजद्रोह का प्रकरण अलग से दर्ज किया गया। आईपीएस जीपी सिंह ने इसके खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

15-07-2021
breaking : निलंबित एडीजी जीपी सिंह की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई आज

रायपुर। निलंबित एडीजी जीपी सिंह की याचिका पर हाईकोर्ट में आज सुनवाई होगी। 
जस्टिस एनके व्यास की कोर्ट में ये सुनवाई पूरी होगी। जीपी सिंह ने पूरे प्रकरण की सीबीआई से जांच की मांग की है। याचिका में अंतरिम राहत की मांग भी शामिल है। गौरतलब है कि निलंबित आईपीएस अफसर जीपी सिंह पर राजद्रोह का केस दर्ज किया गया है।

14-07-2021
राज्य महिला आयोग ने की 20 प्रकरणों की सुनवाई, 14 केसों का किया निराकरण

कांकेर। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ.किरणमयी नायक की उपस्थिति में कलेक्ट्रोरेट के सभाकक्ष में 20 प्रकरणों की सुनवाई की गई। इसमें 14 प्रकरणों का निराकरण किया गया तथा 6 प्रकरणों के पक्षकार अनुपस्थित पाये गये। सुनवाई के दौरान दहेज प्रताड़ना के प्रकरण में आवेदिका उपस्थित व अनावेदक अनुपस्थित होने पर एसआई कांकेर को आयोग की ओर से प्रकरण को निराकृत करने की जिम्मेदारी दी गई। इसमें आवेदिका के प्रकरण की तफ्तीश अपने सामने कराने निर्देशित किया गया है। अनावेदक को सामने बुलाकर आवेदिका व बच्चे के भरण-पोषण के संबंध में अनावेदक से राशि स्वीकृति कराने के निर्देश दिए गए। पहले पत्नी को तलाक अनावेदक दूसरी शादी करने वाला है, जिससे शादी करना चाहते हैं, उसका भी बयान दर्ज कर 10 दिवस के भीतर आयोग के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत करने निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि पहले पत्नी को तलाक दिए बिना दूसरी शादी करने वालों पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी। आयोग द्वारा कार्यालय संयुक्त संचालक एवं नगरीय प्रशासन कांकेर को कार्यवाही कर छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग कार्यालय को सूचित करने निर्देशित किया गया है। आयोग की सुनवाई में अधिवक्ता शमीम रहमान, संरक्षण अधिकारी तुलसी मानिकपुरी, एसआई कांकेर सहित जनप्रतिनिधि एवं महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

 

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