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26-05-2020
सुप्रीम कोर्ट ने प्रवासी मजदूरों की समस्याओं को स्वत: संज्ञान में लिया, 28 मई को होगी सुनवाई

नई दिल्ली। लॉक डाउन के कारण देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे प्रवासी मजदूरों की समस्याओं और मुसीबतों का सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को 28 मई के लिए सूचीबद्ध किया है और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से इस मामले में सहयोग करने को कहा है।जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट इस मामले पर 28 मई को सुनवाई करेगा।कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार, दोनों ओर से कमियां रही हैं। कोर्ट ने कहा कि प्रवासी मजदूरों को आवास, भोजन और यात्रा की सुविधा देने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने की जरूरत है। बता दें कि लॉक डाउन के चलते लाखों की संख्या में प्रवासी मजदूर उन राज्यों में फंस गए थे जहां वह काम करने गए थे। आय और भोजन का कोई साधन न होने के चलते कई श्रमिक घर जाने के लिए पैदल ही सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा पर निकल गए थे। हालांकि, बाद में केंद्र सरकार ने इन मजदूरों को घर पहुंचाने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन और बस सुविधा संचालित करने का फैसला किया था। मजदूरों के पलायन के बाद मानवता को शर्मसार कर देने वाली घटनाएं सामने आई हैं। कहीं, गर्भवती महिला ने सड़क पर ही बच्चे को जन्म दिया और उसके कुछ घंटे बाद फिर यात्रा शुरू कर दी। वहीं, कुछ मजदूरों की ट्रेन के नीचे आ जाने से हुई मौत ने भी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। 

 

13-05-2020
छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में प्रकरणों की सुनवाई जारी

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील और शिकायत के प्रकरणों की सुनवाई की जा रही है। अपीलार्थी और जनसूचना अधिकारी/प्रथम अपीलीय अधिकारी प्रकरण से संबंधित तर्क/जवाब लिखित रूप से आयोग को ई-मेल या व्हाट्सअप और फैक्स से भेज सकते हैं। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील और शिकायत के प्रकरणों की सुनवाई वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्तों के द्वारा की जा रही है। राज्य के ग्रीन जोन जिले के अपीलार्थी और जनसूचना अधिकारी अपने जिले के कलेक्टोरेट स्थित एनआईसी (राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र) के वीडियोकक्ष में उपस्थित होकर अपना पक्ष रख सकते हैं और आयोग को अपना जवाब ई-मेल, व्हाट्सअप और फैक्स से भेज सकते हैं। छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग को अपना जवाब ई-मेल sic.cg@nic.in फैक्स नम्बर 0771-2512102 व्हाट्सअप नम्बर 9425502363 पर भेज सकते हैं।बताया गया कि कोविड-19 लॉकडाउन की अवधि में छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील और शिकायत के प्रकरणों की सुनवाई के लिए राज्य सूचना आयोग में अपीलार्थी/शिकायतकर्ता और प्रथम अपीलीय अधिकारी की उपस्थिति अनिवार्य नहीं है।

 

11-05-2020
रेरा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से शुरु की प्रकरणों की सुनवाई, दिशा निर्देश जारी

रायपुर। लॉकडाउन के दौरान छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) ने विभिन्न प्रकरणों की सुनवाई शुरु कर दी है। सोमवार से भू-संपदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2016 की धारा 31 के अंतर्गत प्राप्त शिकायतों की जांच के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई शुरु की गई है। रेरा के अध्यक्ष विवेक ढांड और सदस्य आरके टम्टा ने आज सुनवाई की। बताया गया कि आज आवेदक हरिद्वार से और अनावेदक प्रमोटर और अधिवक्ता रायपुर में अपने निवास से सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से शामिल हुए।रेरा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की प्रक्रिया के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिनके अनुसार पक्षकार और अधिवक्तागण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से प्रकरणों की सुनवाई में शामिल हो सकते हैं। अध्यक्ष विवेक ढांड ने बताया कि रेरा की ओर से 11 मई से सुनवाई के लिए नियत प्रकरणों की केस लिस्ट प्राधिकरण के वेब पोर्टल https ://rera.cgstate.gov.in पर उपलब्ध है। वर्तमान परिदृश्य में प्राधिकरण के समक्ष पक्षकारों की उपस्थिति के स्थान पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से उपस्थिति दर्ज की जा सकेगी। केस लिस्ट में उल्लेखित निर्धारित तिथि पर सुनवाई के लिए नियत  प्रकरणों से संबंधित पक्षकारों और अधिवक्तागणों को सुनवाई के एक दिन पूर्व और सुनवाई के एक घंटे पूर्व पुन: उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी पर सूचित किया जाएगा।उन्होंने बताया कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई के लिए सभी पक्षकारों को अपने मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी की जानकारी रेरा की शासकीय मेलडी office.rera.cg@gov.in पर एक सप्ताह के भीतर निर्धारित प्रारूप में भेजने को कहा गया है। इसमें प्रकरण क्रमांक, पक्षकार तथा अधिवक्ता (यदि कोई हो) का नाम, ई-मेल आईडी, मोबाइल नंबर स्पष्ट रूप से लिखा हो। प्राधिकरण की ओर से तीन कार्य दिवसों में ई-मेल प्राप्त होने की पुष्टि की जाएगी। इसमें किसी प्रकार की त्रुटि होने पर पक्षकार या अधिवक्ता प्रकरण की पेशी तिथि के तीन कार्य दिवस पूर्व तक नवीन मेल से सुधरी हुई जानकारी भेज कर प्राधिकरण के टेलीफोन नंबर 0771-4918927 पर सूचित कर सकेंगे।

01-05-2020
कोर्ट में वीडियो कान्फ्रेसिंग के जरिए हुई न्यायालयीन प्रकरणों की सुनवाई 

दुर्ग। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के दिशा निर्देश के अनुसार और जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्ग जीके मिश्रा के मार्गदर्शन एवं दिशा निर्देश में द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रामजीवन देवांगन, शुभ्रा पचौरी, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम फास्ट ट्रेक स्पेशल कोर्ट दुर्ग, गरिमा शर्मा, चतुर्थ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्ग के द्वारा न्यायालयीन प्रकरण की सुनवाईं वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से की गई। विडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से की गई जमानत प्रकरण की सुनवाई में पैरवी किये जाने वाले अधिवक्ता अपने आफिस से मोबाईल के माध्यम से जुड़े हुए थे तथा शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता भी अपने मोबाइल के माध्यम से जुड़े हुए थे। दोनों पक्षों के तर्क सुना गया और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए जमानत आवेदन की सुनवाई पूर्ण कर निराकरण किया गया।

29-04-2020
11 मई तक न्यायिक हिरासत में ही रहेगा नीरव मोदी, वीडियो लिंक से होगी सुनवाई

लंदन। हीरा कारोबारी नीरव मोदी को ब्रिटेन की एक अदालत ने मंगलवार को 11 मई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इसके बाद उसके मामले की पांच दिन वीडियो लिंक के जरिए सुनवाई की जाएगी। नीरव मोदी भारत में पंजाब नेशनल बैंक से दो अरब डालर (चौदह हजार करोड़ रुपये से अधिक) के कर्ज की धोखाधड़ी और मनी-लॉन्ड्रिंग के मामले में आरोपी है। साथ ही उसे भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। वह अपने प्रत्यर्पण के आदेश के खिलाफ ब्रिटेन की अदालत में चुनौती दे रहा है। नीरव इस समय दक्षिण पश्चिम लंदन की एक जेल में है।. उसे मंगलवार को वीडियो लिंक के जरिए ही जेल से अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया।ब्रिटेन की अदालतों में इस समय कोराना वायरस संक्रमण के खतरे के कारण ऑनलाइन वीडियो संपर्क के माध्यम से ही पेशी हो रही हैं। नीरव के मामले में जिला जज सैमुअल गूजी ने पहले तो इस लॉकडाउन के दौर में प्रत्यर्पण मामले की सुनवाई कार्यक्रम के अनुसार अगले महीने किए जाने पर आपत्ति जताई। बाद में सभी पक्ष मान गए कि सुनवाई के संबंध में अदालत की सीवीपी यानी सामान्य दृश्य प्रणाली का परीक्षण सात मई को होगा। 

इसमें केवल वकील शामिल होंगे। उसके बाद 11 मई को अंतिम सुनवाई शुरू होगी।जज ने कहा कि कुछ जेलों के कैदियों को व्यक्तिगत रूप से पेश कराया जा रहा है। इस लिए मैं वांड्सवर्थ जेल को निर्देश देता हूं कि नीरव मोदी को सुनवाई के लिए 11 मई को पेश किया जाए। यदि व्यक्तिगत रूप से पेश किया जाना व्यवहारिक ना हो तो सुनवाई में उसे वीडियो लिंक के जरिए शामिल कराया जाए। आज सम्बद्ध पक्षों में सहमति हुई कि सुनवाई के समय अदालत कक्ष में सीमित संख्या में ही लोग रहेंगे। नीरव मोदी को भारत के हवाले किए जाने की अर्जी से संबंधित मामले में यह सुनवाई पांच दिन चलेगी। ब्रिटेन सरकार ने भारत की अर्जी पर कार्रवाई के लिए स्वीकृति प्रदान कर दी थी। यह मामला भारत की दो जांच एजेंसियों केंद्रीय जांच ब्यूरो और सतर्कता निदेशालय ने दायर किया है। आरोप है कि नीरव मोदी ने भारतीय बैंक के फर्जी सहमति-पत्र दिखा कर विदेशों में बैंकों से कर्ज लिए और उस धन की हेरा फेरी की।

 

29-04-2020
Breaking : राजस्व न्यायालयों में सुनवाई अब 4 मई या इसके बाद, आदेश जारी

रायपुर। कोरोना वायरस (कोविड-19) के संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण के लिए 3 मई तक लॉक डाउन लागू किया गया है। इसे देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के सभी राजस्व न्यायालयों में लंबित प्रकरणों की सुनवाई 4 मई या इसके बाद रखने के निर्देश जारी किए हैं। इसके पहले 29 अप्रैल या इसके बाद सुनवाई करने की तारीख निश्चित की गई थी। अब राजस्व विभाग की ओर से सभी राजस्व अधिकारियों को राजस्व प्रकरणों के अंतर्गत आगामी पेशी की तारीख 4 मई या उसके आगे की तारीख को रखे जाने के निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में राजस्व विभाग की सचिव रीता शांडिल्य ने राज्य के सभी संभागायुक्तों, कलेक्टरों, अनुभागीय अधिकारी (राजस्व) और समस्त पीठासीन राजस्व अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही तय करने के निर्देश जारी किए हैं।

01-03-2020
हाईकोर्ट ने जिला पंचायत सीईओ को थमाया नोटिस, दिए यह निर्देश...

रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महिला व्याख्याता की याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला पंचायत सीईओ को नोटिस जारी कर 45 दिनों के अंदर एरियस की राशि भुगतान करने के निर्देश दिए है। बता दे कि बिलासपुर की सरकंडा निवासी राजश्री भारद्वाज ने वकील अब्दुल वहाब खान के माध्यम से याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता के अनुसार,वह शासकीय सूरजमल हाईस्कूल बिल्हा में व्याख्याता के पद पर वर्तमान में कार्यरत है। जिसकी एरियस की राशि का भुगतान नहीं किया गया है। 

17-02-2020
शाहीन बाग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा, दिल्ली सरकार,पुलिस करें प्रदर्शनकारियों से बात

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन बाग मामले पर सुनवाई के दौरान केंद्र,दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार को प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने को कहा। सोमवार को एक याचिका की सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नियम के मुताबिक, प्रदर्शन करने की जगह जंतर-मंतर है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि यह मुद्दा जनजीवन को ठप करने की समस्या से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर से हलफनामा देने को कहा है और अब इस मसले पर 24 फरवरी को अगली सुनवाई होगी। अदालत ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के लिए वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन को मध्यस्थ नियुक्त किया है।केंद्र सरकार ने सीएए पर फैसला संविधान के दायरे में और न्यायिक प्रक्रिया के तहत लिया है, जिसे पलटने का कोई औचित्य नहीं है। रही बात विरोध की तो खूब करे लेकिन किसी के अधिकारों को छीनकर...।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि लोगों को अपनी आवाज समाज तक पहुंचाने का अधिकार है। हम अधिकारों की रक्षा के विरोध के खिलाफ नहीं हैं। लोकतंत्र में अपनी आवाज जरूर पहुंचाएं। समस्या दिल्ली के ट्रैफिक को लेकर है। लेकिन आप दिल्ली को जानते हैं, यहां के ट्रैफिक को भी जानते हैं। हर कोई सड़क पर उतरने लगे तो क्या होगा? यह जनजीवन को ठप करने की समस्या से जुड़ा मुद्दा है हमारी चिंता इस बात को लेकर अगर लोग सड़कों पर उतर आएं और प्रदर्शन से सड़क बंद कर दें तो क्या होगा? अधिकारों और कर्तव्य के बीच संतुलन जरूरी है। शीर्ष अदालत ने शाहीन बाग प्रदर्शन पर कहा कि वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े प्रदर्शनकारियों से बात करें। संजय हेगड़े ने पूर्व जस्टिस कुरियन जोसेफ से भी चलने की अपील की। बता दें कि शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ धरना प्रदर्शन चल रहा है। इसकी वजह से रोड 13 ए बंद है। यह रोड दिल्ली और नोएडा को जोड़ती है। सड़क बंद होने की वजह से नोएडा और दिल्ली के बीच सफर करनेवालों को कई घंटे बेकार जा रहे हैं।

 

14-02-2020
निर्भया मामला : दोषियों को अलग-अलग फांसी देने वाली केंद्र की याचिका पर सुनवाई आज

 

नई दिल्ली। निर्भया मामले में दोषियों को अलग-अलग फांसी देने की इजाजत की मांग वाली केंद्र की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने चारों गुनहगारों को शुक्रवार दोपहर दो बजे तक जवाब देने का वक्त दिया है। इसके बाद अर्जी पर सुनवाई होगी। वहीं, एक और दोषी विनय शर्मा की दया याचिका खारिज होने की चुनौती देने वाली याचिका पर भी शीर्ष अदालत शुक्रवार को ही फैसला सुनाएगा। जस्टिस आर भानुमति, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने एक और दोषी पवन कुमार गुप्ता के लिए वरिष्ठ वकील अंजना प्रकाश को न्याय मित्र नियुक्त करने का आदेश दिया है। पवन गुप्ता इकलौता दोषी है, जिसने अभी तक सुधारात्मक याचिका नहीं दी है। उसने अभी दया याचिका भी नहीं दायर की है। केंद्र ने अपनी अर्जी में कहा है कि सिर्फ पवन के पास कानूनी विकल्प बचा है, लेकिन इस वजह से बाकी दोषियों की भी फांसी नहीं हो पा रही है। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की इस अर्जी पर दोषियों को नोटिस जारी किया था। अब कोर्ट को तय करना है कि क्या दोषियों को अलग-अलग फांसी पर लटकाया जा सकता है। केंद्र का कहना है कि फांसी को टालने के लिए दोषी जिस तरह से कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रहे हैं, उसे जारी रहने देना न्याय के हित में नहीं है।

विनय की दलील: मैं कानून का छात्र, कांग्रेस कार्यकर्ता भी
विनय शर्मा के वकील एपी सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दावा किया कि उनके मुवक्किल को जेल में लगातार मानसिक प्रताड़ना दी जा रही थी, इसके अलावा उसे कई तरह की दवाएं भी दी गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत में पहली बार चार युवाओं को फांसी दी जा रही है, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं रहा है। इस पर अदालत ने वकील को फटकार लगाते हुए कहा कि वह कानूनी बिंदुओं पर ही बात करें। तब एपी सिंह ने अदालत से कहा, विनय का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, वह आदतन अपराधी नहीं है। एक खेती करने वाले परिवार से है, कांग्रेस का कार्यकर्ता रहा है।

मेहता ने कहा, राष्ट्रपति के समक्ष सभी स्थिति साफ की गई थी
जस्टिस अशोक भूषण ने एपी सिंह ने कहा कि आप ये सब बताने की बजाय सिर्फ अपनी कानूनी दलीलें रखें। विनय शर्मा की ओर से जब एपी सिंह ने मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया तो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसे खारिज करते हुए कहा कि अदालत के फैसले, मेडिकल रिपोर्ट, परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को राष्ट्रपति के सामने रखा गया था। उसी के बाद दया याचिका खारिज हुई है। ऐसे में ये दलील नहीं दी जा सकती है।

02-02-2020
शिक्षकों और व्याख्याताओं की रिकवरी आदेश पर रोक

रायपुर। प्रदेश के कोंडागांव जिले के केशकाल विकासखंड में कार्यरत 6 शिक्षकों और व्याख्याताओं की रेट पर सुनवाई करते हुए बिलासपुर हाईकोर्ट ने बीते दिन जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी रिकवरी आदेश पर रोक लगा दी है। ब्लॉक के कई स्कूलों में कार्यरत किशोरी टोप्पो दशरू राम मंडावी, आनन्द राम नाग एवं अन्य शिक्षकों ने एडव्होकेट अनिल तावड़कर के माध्यम से  रिट लगाकर कर कहा है कि सभी कोंडागांव शिक्षा जिला विभाग के अंतर्गत आने वाले केशकाल विकासखंड के भिन्न-भिन्न गांवों के स्कूलों में कार्यरत हैं। रिट के मुताबिक जिला पंचायत के माध्यम से पंचायत विभाग में शिक्षाकर्मी के पदों पर हुई थी। सरकार ने निर्देश जारी कर बाद में शिक्षा विभाग में संविलियन कर दिया है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि जिला शिक्षा अधिकारी ने पत्र में इस बात की जानकारी नहीं दी है कि व्याख्याताओं और शिक्षकों को अधिक भुगतान करने का आधार क्या है।

01-02-2020
लाखों खर्च किए फिर भी कार में रही समस्या, उपभोक्ता फोरम से हर्जाना सहित सुधार का आदेश

दुर्ग। दुर्घटनाग्रस्त कार में सुधार के लिए सर्विस सेंटर ने लाखों रुपए वसूल किए फिर भी कार में समस्या बनी रही। मामले की शिकायत उपभोक्ता फोरम में होने पर कार मालिक के पक्ष में सुनवाई हुई। फोरम ने कार रिपेयरिंग सेंटर को हर्जाना चुकाने के साथ कार को सुधारने का भीआदेश दिया है।
बताया गया कि कार कंपनी के सुपेला भिलाई एवं रायपुर स्थित सर्विस सेंटर महादेवा कार्स प्राइवेट लिमिटेड ने दुर्घटना में क्षतिग्रस्त हुए वाहन की रिपेयरिंग के लिए लाखों रुपए लेने के बाद भी वाहन ठीक से नहीं बनाया। इस आचरण को व्यवसायिक कदाचरण एवं सेवा में निम्नता करार देते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने 21000 रुपये हर्जाना लगाया और वाहन को सुधार कर उसकी समस्या दूर करने के लिए आदेशित किया। कोहका भिलाई निवासी विनय कुमार प्रसाद की डस्टर कार अप्रैल 2017 में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। कार को लेकर परिवादी महादेवा कार्स प्राइवेट लिमिटेड के भिलाई शोरूम गया, जहां कार बनाने में असमर्थता जताते हुए रायपुर के मुख्य सर्विस सेंटर में ले जाने को कहा गया। रायपुर मुख्य सर्विस सेंटर में तीन महीने तक कार को रखने के बाद रिपेयरिंग चार्ज के रूप में 393632 रुपए लेकर 28 सितंबर 2017 को गाड़ी सुधार कर सौंपी गई लेकिन वाहन को ठीक से नहीं बनाया गया। उसमें एक-दो हफ्ते में ही प्रॉब्लम आना शुरू हो गई। वाहन में लहराने, स्टेयरिंग जाम होने तथा जंपिंग करने जैसी समस्या आने लगी। इसके बाद शिकायत करने पर सर्विस सेंटर की सलाह से पहली बार गाड़ी के टायर बदलवाये गए, फिर दोबारा गाड़ी में नया स्टेयरिंग लगवाया गया और बाद में गाड़ी के बुश बदलवाये गए। इसके बाद भी गाड़ी में लहराने की समस्या बनी रही। रिपेयरिंग के लिए लाखों रुपए लेने के बाद भी वाहन को पूरी तरह से ठीक नहीं किया गया। प्रकरण में अनावेदक सर्विस सेंटर महादेवा कार्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से अधिवक्ता उपस्थित हुए परंतु कोई जवाब पेश नहीं किया गया।
प्रकरण में पेश दस्तावेजों के आधार पर जिला उपभोक्ता फोरम ने यह प्रमाणित पाया कि वाहन के एवज में लाखों रुपये रिपेयरिंग चार्ज लेने के बाद भी सर्विस सेंटर वाहन की समस्या का निदान करने में असफल रहा, जबकि अनावेदकगण अधिकृत सर्विस सेंटर है, जहां कुशल इंजीनियरों की निगरानी में प्रशिक्षित मैकेनिकों की ओर से रिपेयरिंग का कार्य संपूर्ण सुविधाओं के साथ किया जाता है। ऐसे में वाहन की समस्या को दूर किया जाना असंभव नहीं है परंतु अनावेदकगण ने परिवादी की ओर से लाखों रुपए सुधार कार्य के एवज में लेने के बाद भी वाहन को समस्यामुक्त नहीं किया और वाहन में लहराने की समस्या विद्यमान रही। सर्विस सेंटर महादेवा कार्स प्राइवेट लिमिटेड रायपुर एवं भिलाई को व्यवसायिक कदाचरण एवं सेवा में निम्नता का जिम्मेदार ठहराते हुए 21000 रुपये हर्जाना लगाया। इसके तहत अनावेदकगण परिवादी को मानसिक कष्ट की क्षतिपूर्ति स्वरूप 20000 रुपये तथा वाद व्यय हेतु 1000 रुपये अदा करेंगे। एक माह के भीतर परिवादी से वाहन प्राप्त करेंगे तत्पश्चात 15 दिनों में वाहन की समस्या का निदान कर परिवादी को वाहन सुपुर्द करेंगे। परिवादी 15 दिन तक वाहन का परिचालन करके अनावेदकगण को संतुष्टि प्रमाण पत्र प्रदान करेगा।

28-01-2020
स्पीड ब्रेकर मामले में हाईकोर्ट ने कहा, राज्य शासन 10 दिन में पेश करे जवाब

रायपुर। सड़कों से स्पीड ब्रेकर हटाने में लेट—लतीफी को लेकर हाईकोर्ट ने कठोरता दिखाते हुुए गत दिन दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। हाईकोर्ट की संयुक्त पीठ ने पूछा है कि कहां-कहां की सड़कों पर अब तक स्पीड ब्रेकर नहीं हटाए गए हैं। ब्रेकरों को कब तक हटा लिया जाएगा। कोर्ट ने इसके लिए राज्य शासन को शपथ पत्र देकर जवाब पेश करने के लिए 10 दिनों की मोहलत दी है। इंडियन रोड कांग्रेस के मापदंड के विपरीत सड़क पर जगह-जगह स्पीड ब्रेकर बनाए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर बीते दिन चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन और जस्टिस पीपी साहू की संयुक्त पीठ में सुनवाई हुई। पूर्व में जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने राज्य शासन को सभी नगर निगम,नगर पालिका,नगर पंचायत व ग्राम पंचायत क्षेत्र की सड़कों से ब्रेकर हटाने के निर्देश दिए थे। बीते सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से जवाब पेश करते हुए कहा गया था। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस की डिविजन बेंच में हुई। सरकार की तरफ से सकारात्मक जवाब ना मिलने पर हाईकोर्ट ने शासन को 10 दिनों के भीतर जवाब पेश करने को कहा है। कोर्ट ने कहा है कि किन-किन निकायों व ग्राम पंचायतों की सड़कों से स्पीड ब्रेकर नहीं हटाए गए। उसकी जानकारी शपथ पत्र में देने को कहा है।

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