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15-12-2019
भूपेश बघेल के चुनावी दंगल में ताल ठोकने से जागी भाजपा, बृजमोहन को बनाया चुनाव संचालन समिति का अध्यक्ष

रायपुर। भूपेश बघेल के नगरीय निकाय चुनावी दंगल में उतर कर ताल ठोकने से भाजपा की कुंभकर्णी नींद टूटती नज़र आ रही है। अब तक असंतुष्टों को मनाने के उलझी भाजपा चुनावी मैदान में कही नज़र नही आ रही थी। जो हाल कभी कांग्रेस का हुआ करता था करीब करीब उसी स्थिति में भाजपा पंहुच चुकी है मगर भूपेश बघेल ने कुशल नेतृत्व का प्रमाण देते हुए कांग्रेस को गुटबाज़ी से कब का उबार लिया है। विधानसभा चुनाव में चारों खाने चित्त करने के बावजूद भूपेश बघेल भाजपा पर हमला करने का कोई मौका नही चूकते और गुटबाज़ी में उलझी भाजपा डिफेंस भी ढंग से नहीं कर पा रही है। सप्ताह भर बाद मतदान होना है और आज अचानक भूपेश बघेल ने 6 चुनावी सभाओं में ताल ठोंक कर भाजपा को चुनौती दे डाली। भूपेश बघेल की गर्जना से भाजपा की नींद टूटी है और उन्होंने भूपेश के सामने बृजमोहन को खड़ा एक तीर से की निशाने साध दिए है। एक तरफ भूपेश-बृजमोहन की ट्यूनिंग की अफवाहों पर विराम लगाने की दिखावटी कोशिश है तो दूसरी ओर चुनाव के नतीजे विपरीत आने पर उन्हीं अफवाहों का फायदा उठाने की तैयारी भी कर ली गई है। बहरहाल अब तो वाकओवर देती नज़र आ रही भाजपा की नैया बृजमोहन के हाथ में आने से चुनावी दंगल जोरदार हो जाएगा।

08-12-2019
कांग्रेस और जेसीसीजे के प्रत्याशी समेत 6 लोगों का नामांकन किया गया निरस्त

जांजगीर-चाम्पा। 30 नवंबर से 6 दिसंबर तक अभ्यर्थियों के द्वारा नामांकन दाखिल करने के बाद 7 दिसंबर शनिवार दिन को स्कूटनी की गई। जहां जिले भर में भरे गए अभ्यार्थियों के द्वारा नामांकन की जांच की गई। जिले में 1 हजार 38 नामांकन दाखिल किए गए थे। जिले के 15 नगरीय निकाय में 6 नामांकन को निरस्त किया गया है। इसमें खरौद नगर पंचायत के वार्ड 11 की कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन निरस्त किया गया है। वहीं सक्ती नगर पालिका के वार्ड 15 के जनता कांग्रेस छग के प्रत्याशी का नामांकन निरस्त किया गया है। जिले में 1 हजार 38 नामांकन दाखिल किए गए थे, जिसमें 6 नामांकन को निरस्त किया गया है। सोमवार 9 दिसम्बर तक नाम वापस लिए जाएंगे, इसके बाद वार्ड में चुनावी दंगल की सुरुवात हो जाएगी जहा प्रत्याशी जोर आजमाइश कर करने की जोद्दोजहत में लग जायेंगे। वहीं मुकाबले की तस्वीर भी साफ हो जाएगी कि चुनावी मुकाबला किनके-किनके बीच होगा। इसके बाद 21 को मतदान और 24 को मतगणना की कर प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला हो जाएगा।

18-10-2019
पीएम मोदी ने कहा-आर्टिकल 370 के जिक्र पर कांग्रेस के पेट में होता है दर्द

सोनीपत। हरियाणा के चुनावी दंगल में चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में सोनीपत के गोहाना हलके में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को जनता को संबोधित किया। इस दौरान अपने भाषण में उन्होंने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अब तो देश भी जान गया है कि जब आर्टिकल 370 का जिक्र होता है तो कांग्रेस के पेट में दर्द होता है। पीएम ने कहा कि कांग्रेस के नेताओं ने जम्मू-कश्मीर के बारे में ऐसे बयान दिए कि जिसका फायदा पाकिस्तान ने उठाया। वह इन बयानों के आधार पर दुनिया में अपना केस मजबूत करने में जुटा है। यह कांग्रेस और पाकिस्तान के बीच कैसी केमेस्ट्री है। यह दर्द और हमदर्द का रिश्ता लगता है। पीएम ने कहा कि हरियाणा वीरों की धरती है। हरियाणा के लोगों ने लोकसभा चुनाव में बड़े-बड़े नेताओं को सबक सिखाया और उनका अहंकार तोड़ डाला। पीएम मोदी ने पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का नाम लिए बिना उन पर जमकर हमले किए। पीएम ने कहा कि कि अखाड़ा चाहे कुश्ती का हो या युद्ध का मैदान हो, तिरंगा की शान बुलंद करने में हरियाणा का नौजवान सबसे आगे रहा है। मोदी ने जनता से सवाल पूछते है कहा कि क्या मुझे हरियाणा की इस भावना को बुलंद करना चाहिए कि नहीं, क्या मुझे देशहित में फैसले लेने चाहिए कि नहीं। क्या देशहित राजनीति से ऊपर होना चाहिए कि नहीं, हरियाणा की जो भावना है, वह कांग्रेस और उसके जैसे दलों के कान में नहीं पड़ रही है। बता दें कि हरियाणा की सभी 90 विधानसभा सीटों के लिए एक ही चरण में 21 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे। इसी दिन महाराष्ट्र के भी 288 सीटों के लिए विधानसभा का चुनाव होना है। इसके तीन दिन बाद यानी 24 अक्टूबर को चुनाव के नतीजे आएंगे। 

27-09-2019
दंतेवाड़ा हारे, चित्रकोट जीतेंगे, यानी अब मारा तो मारा, अब मार कर देख

रायपुर। दंतेवाड़ा का चुनावी दंगल कांग्रेस ने जीत लिया है। कांग्रेस ने यह सीट जीत कर भाजपा से वापस अपना गढ़ छीन लिया है। दंतेवाड़ा परंपरागत रूप से कांग्रेस का अभेद्य किला रहा है जिस पर भीमा मंडावी दो बार विजय पताका फहराने में सफल रहे थे,पर उनके निधन के बाद उनकी पत्नी यह कारनामा नहीं नहीं दिखा पाई। कांग्रेस हालांकि यह सीट जीत तो गई है पर जीत का अंतर राज्य के पिछले विधानसभा चुनाव जैसा करिश्माई नहीं रहा। स्व भीमा मंडावी भी बहुत कम अंतर से जीते थे और कांग्रेस उस अंतर को पाटकर  विजय रेखा लांघ गई। भाजपा का सहानुभूति लहर पर सवार तो कर जीत का सपना तो साकार नहीं हो पाया वही कांग्रेस की देवती कर्मा के लिए मतदाताओं ने महेंद्र कर्मा को अभी तक याद रख कर जीत दिला दी। यह चुनाव भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण था मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की प्रतिष्ठा दांव पर थी तो दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह भी अपनी खोई हुई साख वापस पाना चाह रहे थे। मतदाताओं का रुख साफ रहा और कांग्रेस पहले चरण से लगातार बढ़त बनाती चली गई कहीं कोई कांटे की टक्कर नहीं दिखी। एक प्रकार से कहा जा सकता है कि लोकसभा चुनाव में आई मोदी लहर का असर इस बार नजर नहीं आया और भूपेश बघेल सरकार के कामकाज पर दंतेवाड़ा की जनता ने मुहर लगा दी।

अब भाजपा की ओर से यह कहना की दंतेवाड़ा कांग्रेस का किला था जो वह बचा ले गए हास्यास्पद है उनका यह कहना की चित्रकूट चुनाव हम जीत कर दिखाएंगे भी हास्यास्पद ही कहा जा सकता है। भाजपा को अब मंथन करना चाहिए के 15 साल जो छत्तीसगढ उसका मजबूत किला कहलाता था वह ढह गया है और कांग्रेस बस्तर में फिर से मजबूत होकर उभरी है। राज्य में उसकी पकड़ कहीं ढीली होती नजर नहीं आ रही। दंतेवाड़ा चुनाव भाजपा के लिए आने वाले नगरी निकाय चुनाव में भी सचेत  होने के संकेत हैं। गुटबाजी जो कभी कांग्रेस की परंपरा रही वह अब भाजपा की पहचान बनती जा रही है और गुटों में बटी कॉन्ग्रेस को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एक सूत्र में बांधने में सफल रहे हैं दंतेवाड़ा के चुनावी नतीजे कांग्रेस का हौसला कई गुना बढ़ा रहे हैं तो पहले से ही कमजोर हो चली भाजपा  का मनोबल गिराने वाले नजर आते हैं। बहरहाल कांग्रेस इस जीत के साथ चित्रकूट चुनाव के लिए दुगने जोर से तैयार नजर आती है तो भाजपा फिर से विचार मंथन मे उलझी नजर आती है।

03-09-2019
चुनावी दंगल में शहीद की पत्नी का मुकाबला शहीद की ही पत्नी से

रायपुर। दंतेवाडा में चुनावी बिगुल बज चुका है। बस्तर की राजनीति में सहानभूति का बडां महत्व है। जिसका उदाहरण 2013 के विधानसभा चुनाव में देखा जा चुका है। बस्तर टाइगर महेन्द्र कर्मा की शहादत के बाद 2013 में कांग्रेस नें उनकी धर्मपत्नी देवती कर्मा पर दांव खेला।कांग्रेस का ये दांव 2013 में एकदम सटीक साबित हुआ। बस्तरवासियों ने नक्सली हमलें में शहीद महेन्द्र कर्मा की पत्नी देवती कर्मा के साथ पूरी सहानभूति जताई और जीत का सेहरा देवती कर्मा के सिर बंध गया। एक समान्य घरेलू महिला देवती कर्मा दंतेवाडा विधायक देवती कर्मा बन गई। इस बात ने साबित कर दिया कि बस्तर की राजनीति में सहानभूति का बडा बोल बाला है।जल्द ही दंतेवाडा उपचुनाव होना है।  सहानभूति की राजनीति को भाजपा और कांग्रेस दोनो ही पर्टियों बडा ही जोर दिया है। कांग्रेस ने पूर्व विधायक देवती कर्मा को प्रत्याशी घोषित किया है। तो वही भाजपा ने ओजस्वी मंडावी को चुनावी मैदान में उतारा है।ओजस्वी मंडावी लोकसभा चुनाव 2019 में चुनाव प्रचार के दौरान नक्सली हमलें में शहीद विधायक भीमा मंडावी की धर्मपत्नी है। मतलब शहीद की पत्नी का मुकाबला शहीद की ही पत्नी सें अब देखना ये होगा कि सहानभूति की राजनीति में किसका पल्ला भारी है?

22-10-2018
NOTA : 2013 में 4 लाख 1058 लोगों ने नेताओं पर नहीं किया एतबार, जीत के अंतर से अधिक पड़ा नोटा को वोट

रायपुर। प्रदेश में चुनावी दंगल शुरू हो गया है। कई सीटों में ऐसे उम्मीदवारों को दोहराया गया जो मामूली अंतर से जीते या हारे थे। करीब 15 ऐसी सीटें हैं, जहां नोटा पर पड़ा वोट जीत के अंतर से अधिक था। यानि नोटा ने वोटों के गणित को काफी प्रभावित किया। यदि नोटा पर पड़े वोटों को साध लिया जाता तो परिणाम बदले जा सकते थे। पिछले विधानसभा चुनाव 2013 में नोटा पर कुल 4,01,058 मत पड़े थे। यह कुल मतदान प्रतिशत का 3.07 प्रतिशत मत था। नोटा को जितना वोट मिला, उतना प्रदेश की कई राजनीतिक दलों का भी वोट शेयर नहीं था। 

बता दें कि धरसींवा विधानसभा सीट पर बीजेपी के देवजी भाई पटेल को 2,390 वोटो से जीत मिली थी। यहां नोटा को 3,740 वोट मिले थे। वहीं, बैकुंठपुर सीट पर बीजेपी के भैयालाल राजवाड़े 1,060 मतों से जीते थे और यहां नोटा पर 3,265 वोट पड़े थे। ऐसे ही कोंडागांव विधानसभा सीट पर कांग्रेस के मोहन मरकाम ने 5,135 मतों से जीत हासिल की थी। इस सीट पर नोटा को 6,773 मिले थे। कवर्धा सीट पर नोटा को जीत-हार के अंतर से 3 गुना ज्यादा वोट मिले थे।

प्रदेश की मोहला विधानसभा सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशी तेजकुंवर गोवर्धन नेताम ने 956 वोटों से जीत दर्ज की थी। वहीं, इस सीट पर नोटा को 5742 वोट मिले थे। इस सीट पर नेताम को 42,648 और बीजेपी के भोजेश शाह को 41,692 मत प्राप्त हुए थे। यहां जीत-हार के अंतर से 6 गुना से ज्यादा वोट नोटा को मिले थे। 

इसी तरह खैरागढ़ विधानसभा सीट पर कांग्रेस के गिरवर जंघेल को 2,190 वोटों से जीत मिली थी। यहां नोटा पर 4,643 वोट पड़े थे। कवर्धा विधानसभा सीट पर बीजेपी के अशोक साहू ने 2,558 वोटों से जीत हासिल की थी। इस सीट पर जीत-हार के अंतर में 3 गुना से ज्यादा 9,229 वोट नोटा को मिले थे। देखिए और किन-किन सीटों पर नोटा को अधिक वोट मिले। 

विधानसभा सीट           विधायक                      पार्टी        जीत-हार का अंतर          नोटा

मुंगेली                       पुन्नूलाल मोहले              बीजेपी           2745                      5025

पत्थलगांव                  शिवशंकर पैकरा          बीजेपी              3909                    5533

कांकेर                     शंकर ध्रुवा क                कांग्रेस             4625                     5208

राजिम                    संतोष उपाध्याय             बीजेपी             2441                     5673

दंतेवाड़ा                  देवती कर्मा                    कांग्रेस           5987                     9677

तखतपुर                 राजू सिंह क्षत्री               बीजेपी          608                        1557

दुर्ग ग्रामीण            रमशीला साहू                 बीजेपी          2979                     3544

रायपुर ग्रामीण        सत्यनारायण शर्मा          कांग्रेस          1861                      3521

डोंगरगांव              दलेश्वर साहू                 कांग्रेस          1698                      4062

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