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23-08-2020
कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक सोमवार को, मौजूदा राजनीतिक हालातों पर होगी चर्चा

नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी में नेतृत्व बदले जाने की चर्चाओं के बीच पार्टी की नीति बनाने की सर्वोच्च संस्था कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की सोमवार को एक अहम बैठक होने वाली है। बता दें कि कई कांग्रेसी नेताओं ने अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को एक पत्र लिखा था,जिसमें नेतृत्व परिवर्तन की मांग की गई थी, हालांकि पार्टी ने इस तरह के किसी भी पत्र से इनकार किया है। पार्टी ने कहा है कि कार्य समिति की बैठक में मौजूदा राजनीतिक हालातों पर चर्चा होगी। इसके बावजूद नेतृत्व परिवर्तन पर चर्चाओं का बाजार गर्म है। कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि 24 अगस्त को सीडब्ल्यूसी की बैठक सुबह 11 बजे बुलाई गई है,जो वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए होगी। पिछली बैठक में जिस तरह से 2019 के आम चुनाव में पार्टी की हार को लेकर कुछ सांसदों ने मुद्दा उठाया था और तीखी बहस हुई थी, उससे सोमवार को कार्य समिति की बैठक काफी महत्वपूर्ण हो गई है। इसके बाद कुछ नेताओं ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर नेतृत्व परिवर्तन और कार्य समिति के लिए चुनाव कराने की मांग कर डाली थी। पार्टी से निलंबित प्रवक्ता संजय झा ने कहा था कि सांसदों समेत कांग्रेस के 100 नेताओं ने सोनिया गांधी को पत्र लिख कर नेतृत्व परिवर्तन की मांग की थी। उन्होंने अंतरिम अध्यक्ष की जगह फुल टाइम अध्यक्ष बनाने की मांग की थी,जो कि पार्टी को फिर से जीवित करे।

 

12-08-2020
छत्तीसगढ़ के लिए एक राजनीतिक आपदा की तरह है कांग्रेस सरकार : विष्णुदेव साय

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार को हर मोर्चे पर बुरी तरह विफल बताया है। साय ने कहा कि प्रदेश सरकार छत्तीसगढ़ के लिए एक राजनीतिक आपदा से जरा भी कम नहीं है। कर्ज के बोझ से प्रदेश दबा जा रहा है, कानून-व्यवस्था सरेआम दम तोड़ रही है, कोरोना का संक्रमण विस्फोटक हो चला है और लोग अब क्वारेंटाइन सेंटर्स ही नहीं, इलाज के दौरान कोविड अस्पतालों में आत्महत्या करने के लिए विवश हो रहे हैं और शराब के गोरखधंधे में भी गबन होना प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर रहा है। इन सबके बावजूद, राज्य सरकार और कांग्रेस को अपनी विफलताओं पर जरा भी कोफ़्त नहीं होना बेहद शर्मनाक है।


साय ने कहा कि कर्ज पर कर्ज लेकर प्रदेश सरकार राज्य को कंगाली की अंधी सुरंग में धकेल रही है। 18 महीनों में ही रिकॉर्ड तोड़ कर्ज लेकर राज्य सरकार ने यहाँ के अर्थतंत्र को पस्त कर दिया है। कर्ज लेकर राज्य सरकार जिन योजनाओं को लागू करने का ढोंग रच रही है, वे योजनाएँ भी इक साल में ही दम तोड़ रही हैं। किसानों के पिछले खरीफ सत्र के धान-मूल्य की अंतर राशि की दूसरी किश्त देने तक के लिए सरकार के खजाने में पैसे नहीं हैं, जब अंतर राशि के भुगतान के लिए कर्ज लिया ही तो सरकार अब किसानों की शेष अंतर राशि का किश्तों के बजाय एकमुश्त भुगतान करे। दूसरी तरफ चालू खरीफ सत्र की धान खरीदी के लिए पंजीयन की प्रक्रिया सरकार शुरू करने जा रही है। पिछला भुगतान नहीं कर पाने वाली सरकार अगली खरीदी के लिए राशि कहाँ से जुटा पाएगी, यह भी साफ नहीं है। साय ने कटाक्ष किया कि दम तोड़तीं नरवा-गरुवा-घुरवा-बारी, गौठान, रोका-छेका, गौ-धन न्याय योजना, लाउड स्पीकर से पढ़ाई जैसी तमाम योजनाओं के लिए तो सरकार के पास न तो फंडिंग का स्रोत दिख रहा है, न ही सरकार इन योजनाओं के लिए आर्थिक प्रावधान को लेकर गंभीर नजर आ रही है।

 

25-07-2020
राजनीतिक प्रतिशोध में अंधी हो चुकी सरकार, लोक-कल्याण की योजनाओं को बंद करने पर आमादा : सुनील सोनी

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष व संसद सदस्य सुनील सोनी ने प्रदेश सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध में अंधी हो चुकी सरकार लोक-कल्याण की योजनाओं को बंद करने का आरोप लगाया है। सोनी ने कहा कि पहले प्रदेश सरकार ने पूर्ववर्ती भाजपा राज्य सरकार की मुख्यमंत्री स्मार्ट कार्ड स्वास्थ्य योजना सहित अन्य अनेक जनहितकारी योजनाओं और केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई आयुष्मान योजना बंद करने का काम कर चुकी है। सोनी ने इस बात पर हैरत जताई कि केंद्र सरकार की महती प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत कुल 6.75 लाख आवासों के लक्ष्य के मुकाबले प्रदेश सरकार द्वारा सिर्फ 1.57 लाख आवास ही स्वीकृत किए गए हैं और बाकी 5.18 लाख आवास प्रदेश सरकार ने केंद्र को वापस लौटा दिए।

इससे प्रदेश के गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों के अपने आवास का सपना धरा ही रह गया है। प्रदेश सरकार की बदलापुर की राजनीति के चलते अब प्रदेश के लाखों परिवार उन्हीं झुग्गियों में रहने के लिए विवश रहेंगे,जिनमें रहकर गुजर-बसर करना किसी नारकीय यंत्रणा से कम नहीं होता।सोनी ने कहा कि यह बेहद शर्मनाक स्थिति है कि गरीबों-मजदूरों की हितैषी होने का दावा करने वाली सरकार उन्हीं के आवास के सपने को चूर-चूर करने पर आमादा है। इससे साफ है कि कांग्रेस और उसकी प्रदेश सरकार का राजनीतिक चरित्र गरीबों के राजनीतिक इस्तेमाल करने का ही है।

 

24-07-2020
शराबबंदी के मुद्दे पर दगाबाजी करना और राजनीतिक चतुराई दिखाना कांग्रेस को बहुत महंगा पड़ेगा : भाजपा

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता व पूर्व विधायक श्रीचंद सुंदरानी ने शराबबंदी के मुद्दे पर कांग्रेस नेताओं के नित नए बयानों को शर्मनाक बताया है। सुंदरानी ने कटाक्ष किया कि कोरोना संक्रमण के इस भयावह दौर में भी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समेत कांग्रेस के नेता सियासी लफ्फाजियों से बाज नहीं आ रहे हैं। कांग्रेस के लोग यह बात अच्छी तरह समझ लें कि गंगाजल की कसम खाकर शराबबंदी के मुद्दे पर दगाबाजी और राजनीतिक चतुराई दिखाना अंतत: कांग्रेस को बहुत महंगा पड़ेगा। सुंदरानी ने कहा कि सांसद डॉ. सरोज पांडेय के लिखे पत्र पर मुख्यमंत्री बघेल और कांग्रेस नेताओं के बयानों ने साफ कर दिया है कि सरकार प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी करने को तैयार ही नहीं है और वह इसे अगले चुनाव तक लंबा खींचकर इस पर राजनीति करने पर उतारू हो चुकी है। कांग्रेस प्रवक्ताओं के बयान को लेकर सुंदरानी ने कहा कि मुख्यमंत्री बघेल और भाजपा राष्ट्रीय महामंत्री व  सांसद डॉ. पांडेय के बीच हुए पत्र-व्यवहार पर अपना प्रलाप करके वे दाल-भात में मूसलचंद बनने की चेष्टा क्यों कर रहे हैं।

सुंदरानी ने सवाल किया कि कोरोना संकट में आम आदमी की सेहत की रक्षाके साथ ही दवा व दैनिक जरूरतों के सामान की ऑनलाइन होम डिलीवरी सुनिश्चित करने के बजाय शराब की ऑनलाइन होम डिलीवरी कराने वाली अपनी प्रदेश सरकार से भी तो कांग्रेस के नेता कभी मुखर होकर सवाल करने की हिम्मत दिखाएँ। सांसद सरोज पांडेय से सवाल करने से पहले मुख्यमंत्री बघेल और कांग्रेस के नेता इस बात का जवाब दें कि प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के उस बयान का क्या अर्थ है, जिसमें उन्होंने साफ कहा है कि अब जो प्रदेश में लॉक डाउन लगाया गया है, वह जनता के कहने पर लगाया गया है, कोरोना को रोकने में वह प्रभावी सिद्ध नहीं होगा। सुंदरानी ने कहा कि मंत्री सिंहदेव के बयान से साफ हो गया है कि प्रदेश सरकार अब भी कोरोना मुक्त छत्तीसगढ़ के लिए कतई गंभीर और संजीदा नहीं है। पीएम से अधिकार मांगकर सीएम ने वह डीएम को दे दिया।

05-07-2020
घरेलू विवाद में दो पक्षों में भिड़ंत एक-दूसरे के खिलाफ की रिपोर्ट

रायपुर। प्रथम मुख्यमंत्री स्व.अजित जोगी के ओएसडी रहे राहील रउफी सहित उनके भाई नेहाल रउफी पर पुलिस ने छेडख़ानी समेत अन्य कई गंभीर धाराओं में अपराध पंजीबद्ध किया है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार 3 जून की शाम 4 बजे इंटीरियर डिज़ाइनर की छात्रा अपनी मां और परिचितों के साथ राहील रउफी के भाई नेहाल के निवास पर पारिवारिक विवाद सुलझाने पहुंची थी। इसी दौरान नेहाल के छोटे भाई फरहान सहित राहील रउफी ने युवती और उसकी मां  से अश्लील गाली-गलौज करते हुए उसके कपड़े फाड़ दिए और मारपीट कर कमरे में बंद कर दिया। इसके बाद बेइज़्ज़त करने की नियत से युवती का हाथ पकड़ अश्लीलता की इतना ही नहीं पूर्व मुख्यमंत्री जोगी के ओएसडी रहे राहिल रउफी ने युवती व उसकी माता को बीच रोड तक जाकर गाली देते हुए गला काट कर जान से मारने की धमकी दी। घटना की शिकायत मुजगहन थाना पुलिस से की गई है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 354 ,354 (क ), 506, 294, 323, 34 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया है।

मामले में राहील रउफी की भाभी इसरत रौफी 34 वर्ष पति नेहाल रउफी ने मुजगहन थाने में रिपोर्ट दर्ज करायी है कि 3 जून को शाम 4 बजे सायमा युसूफ अपनी मां मीना युसूफ को लेकर प्रार्थिया के घर आकर घरेलू विवाद के संबंध में बात करते हुए गाली-गलौज की। इतना ही नहीं अपनी मां के साथ मिलकर मारपीट भी किया जिसके कारण उसके गले में चोट आई वहीं पति नेहाल रउफी के द्वारा बीच बचाव करने पर उनके साथ भी गाली-गलौज कर धक्का दिया। घटना की रिपोर्ट पर पुलिस ने धारा 294, 323, 34, 506, 448 के तहत अपराध कायम कर मामले को जांच में लिया है।

27-06-2020
राजनीतिक आलोचना की आड़ में छत्तीसगढ़ का अपमान ना करें अजय चंद्राकर : विकास उपाध्याय

रायपुर। पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के ट्वीट पर पश्चिम विधायक विकास उपाध्याय ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि ऐसा लगता है कि छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ की अपमान करने वाली इस टिप्पणी की मुख्य वजह मानसिक दिवालियापन और दिमाग में कोशिकाओं की जगह गोबर भरी सोच से उत्पन्न हुई है। इसलिए उन्हें अपना दिमागी इलाज कराना चाहिए। मैं उन्हें भरोसा दिलाता हूं कि उस पूरी इलाज का खर्च में खुद वहन करूंगा और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना करूंगा। विकास ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति और माटी के उत्थान का काम कर रहे छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार की राजनीतिक आलोचना की सीमाओं के परे जाकर विपक्ष अपनी ओछी मानसिकता का प्रदर्शन कर रहा है। हमें यह बताते हुए गर्व है कि हमारे छत्तीसगढ़ी संस्कृति से निकली नरवा गरवा घुरवा बारी योजना के साथ अब गोधन योजना के जरिए छत्तीसगढ़ी सम्मान को जगाने की कोशिश मैं हमारी सरकार लगी है।

विपक्ष अपने राजनीतिक धर्म से विमुख होकर सरकार की आलोचना में बौद्धिक विवेक खो चुका है। अजय चंद्राकर की टिप्पणी सरकार की नीतियों की जगह छत्तीसगढ़ के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने वाली है। छत्तीसगढ़ के ढाई करोड़ लोगों की जनता के प्रतिनिधित्व करने वाले छत्तीसगढ़ के प्रतीक के साथ ऐसी तुलना छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ की जनता का अपमान है। हम विपक्ष की आलोचना स्वस्थ राजनीति का हिस्सा मानते हैं, लेकिन आलोचना के नाम पर अपनी ओछी मानसिकता से छत्तीसगढ़ की जनता के स्वाभिमान के साथ जब भी खिलवाड़ करने की कोशिश की जाएगी तो उसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। बीजेपी विधायक अजय चंद्राकर की यह टिप्पणी अक्षम्य में है। इस तरीके की के लिए उन्हें छत्तीसगढ़ की जनता से सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए।

22-05-2020
बसों के किराए को लेकर कांग्रेस पर जमकर भड़की मायावती, खूब सुनाई खरी-खोटी, कही यह बात

नई दिल्ली। राजस्थान की कांग्रेस सरकार की ओर से उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को 36 लाख रुपए के बिल भेजने का मामला गरमाता जा रहा है। इस मामले को लेकर कांग्रेस और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के बीच लगातार राजनीतिक बयानबाजी जारी है। बता दें कि बीते दिन राजस्थान सरकार ने कोटा से यूपी बॉर्डर तक भेजे गए बच्चों की बसों का किराया यूपी सरकार को सौंप दिया। मामले पर बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा है।
 
मायावती ने कही यह बात : 

मायावती ने ट्वीट किया कि राजस्थान की कांग्रेस सरकार द्वारा कोटा से करीब 12000 युवक-युवतियों को वापस उनके घर भेजने पर हुए खर्च के रूप में यूपी सरकार से 36.36 लाख रुपए और देने की जो मांग की गई है, वह उसकी कंगाली व अमानवीयता को प्रदर्शित करता है। दो पड़ोसी राज्यों के बीच ऐसी घिनौनी राजनीति अति-दुखद है। 

राजनीतिक खेल-खेल रही है कांग्रेस :

मायावती ने अपने एक अन्य ट्वीट में लिखा, ''लेकिन कांग्रेसी राजस्थान सरकार एक तरफ कोटा से यूपी के छात्रों को अपनी कुछ बसों से वापस भेजने के लिए मनमाना किराया वसूल रही है तो दूसरी तरफ अब प्रवासी मजदूरों को यूपी में उनके घर भेजने के लिए बसों की बात करके जो राजनीतिक खेल कर रही है यह कितना उचित व कितना मानवीय?'' मायावती ने एक अन्य ट्वीट में लिखा साथ ही, 'अम्फान' तूफान के ताण्डव से खासकर पश्चिम बंगाल में जो व्यापक तबाही व बर्बादी हुई है वह अति-दुःखद। जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित है। ऐसे में खासकर केन्द्र सरकार को आगे बढ़कर हर प्रकार से राज्य को वहाँ के हालात सामान्य बनाने में मदद करनी चाहिए।

जानिए क्या है पूरा विवाद :

असल में लॉक डाउन के दौरान राजस्थान में करीब 11 हजार छात्र उत्तर प्रदेश के फंसे हुए थे। इन्हें उत्तर प्रदेश सरकार ने घर पहुंचाने के लिए 560 बसें भेजी थीं। लेकिन छात्रों की संख्या अधिक होने की वजह से राजस्थान सरकार ने 70 बसों का इंतजाम किया था। इन्ही बसों का किराया अब राजस्थान सरकार द्वारा मांगा जा रहा है। पत्र में  आरएसआरटीसी ने लिखा है कि अप्रैल 17 से 19 तक  कोटा में पढ़ रहे छात्रों को उत्तर प्रदेश के फतेहपुर सीकरी (आगरा) और झांसी तक पहुंचाने के लिए आरएसआरटीसी द्वारा बसों की व्यवस्था कर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। जिसका बचा हुआ पेमेंट 36,36,664 (छत्ती लाख छत्तीस हजार छ सौ चौसठ रुपये)  इतना है। पत्र में आरएसआरटीसी ने यूपीएसआरटीसी के लिए बैंक अकाउंट डिटेल भी दिए हैं। यह लेटर 8 मई का है लेकिन मीडिया में 21 मई को सामने आया है।

19-05-2020
देश हम सभी का है तो ज़िम्मेदारी भी सभी की है : प्रकाशपुन्ज पाण्डेय

रायपुर। समाजसेवी व राजनीतिक विश्लेषक प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने वर्तमान स्थिति के मद्देनज़र मज़दूरों की इस हालत का कसूरवार केंद्र की मौजूदा मोदी सरकार को ठहराया है। उन्होंने कहा है कि नोटबंदी की तरह ही देश में लॉकडाउन का निर्णय भी पूर्णतः बिना तैयारी के लिया हुआ एक गैरजिम्मेदाराना कदम था,जिसका खामियाज़ा आज पूरे देश को भुगतना पड़ रहा है। जब लॉकडाउन करना ही था तो मोदी सरकार को सबसे पहले सभी मंत्रियों से, उनके सलाहकारों से साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के तमाम मुख्यमंत्रियों से सलाह लेनी थी। और भी उचित होता अगर पूर्व प्रधानमंत्रियों, पूर्व मंत्रियों, विपक्षी दलों, पत्रकारों और समाज के तमाम समाजसेवी व बुद्धिजीवी वर्ग की भी सलाह लेते। अगर जो ऐसा हुआ होता तो शायद देश में आज ऐसी विकट परिस्थितियाँ उत्पन्न ना होतीं और ना ही कोई किसी को दोष दे पाता।पाण्डेय ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था पहले से ही चरमराई हुई थी लेकिन लॉकडाउन के बाद यह और जर्जर हो चुकी है लोगों के पास पैसे नहीं है, खाने के लिए संसाधनों की कमी है। यही नहीं लोगों में कोरोनावायरस के कारण जो डर उत्पन्न हो गया है वह भी सबसे बड़ा कारण है कि आज देश में एक असमंजस की स्थिति बनी हुई है। किसी को नहीं समझ रहा है कि आगे ऐसे कब तक जीना पड़ेगा? ऐसे कब तक विपरीत परिस्थितियों में काम करना पड़ेगा?

अगर इन सब चीजों के बारे में पहले से ही डिजास्टर कंट्रोल की तैयारी की गई होती तो शायद यह दिन नहीं देखना पड़ता। उसके ऊपर मज़दूरों का मीलों पैदल चलना और देश के जगह-जगह से उनकी मौत की ख़बरें आना और पीड़ादायक है। दिल बैठ जाता है देख कर जब किसी मज़दूर की घर वापसी के दौरान मौत की खबर आती है। लेकिन इसी बीच कोरोना वायरस के प्रकोप पर भी कोई रोकथाम होती नहीं दिखती क्योंकि जब लॉकडाउन 1 किया गया था तब कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या 500 थी और अब वह बढ़कर एक लाख पहुंच चुकी है। यह अच्छी बात है कि उसमें से कई लोग ठीक भी हो रहे हैं, लेकिन उसके कारण लोग मर भी तो रहे हैं। आज भी यह प्रश्न बना हुआ है कि जब कोरोना वायरस की कोई दवा बनी ही नहीं है तो लोग ठीक कैसे हो रहे हैं इस बात को अगर सरकार समझाने में कारगर हो जाती तो शायद लोग और भी संभल जाते पर आज तिथि बहुत ही विकट बन चुकी है।

 

01-05-2020
महाराष्ट्र सरकार के लिए खुशखबरी, 27 मई से पहले होंगे महाराष्ट्र विधान परिषद के चुनाव...

मुबंई। भारतीय चुनाव आयोग ने शुक्रवार को फैसला किया कि महाराष्ट्र विधान परिषद के चुनाव 27 मई से पहले होंगे। देश में घातक कोरोना वायरस के प्रकोप के बीच चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र में विधान परिषद के लिए चुनाव कराने की अनुमति दे दी है। बता दें कि महाराष्ट्र के मौजूदा राजनीतिक संकट के बीच राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने चुनाव आयोग से विधान परिषद की 9 खाली सीटों पर चुनाव कराने की गुजारिश की थी। विधान परिषद की नौ सीटें 24 अप्रैल से रिक्त हैं। चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र में एमएलसी चुनाव कराने की इजाजत दे दी है। चुनाव आयोग ने फैसला लिया है कि महाराष्ट्र विधान परिषद के चुनाव 27 मई से पहले होंगे।

बता दें कि ठाकरे ने पिछले साल 28 नवंबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। खास बात है कि वो मौजूदा समय में किसी भी विधानसमंडल के सदस्य भी नहीं है। ऐसे में संविधान के तहत ठाकरे को सीएम बनने के छह महीने के भीतर अर्थात 27 मई 2020 तक किसी भी सदन का सदस्य होना जरूरी हो जाता है। वह बिना चुनाव लड़े ही राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। लेकिन संविधान के अनुच्छेद 164 (4) के मुताबिक, यदि सदन से बाहर का कोई व्यक्ति मंत्री या मुख्यमंत्री बनता है तो शपथ ग्रहण से छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद (जिन राज्यों में है) का सदस्य बनना अनिवार्य है।

30-04-2020
ऋषि कपूर के निधन पर राष्ट्रपति,पीएम समेत कई बड़े राजनीतिक हस्तियों ने जताया दुख,कहा-वो दिलों में हमेशा रहेंगे जिंदा

नई दिल्ली। मशहूर बॉलीवुड अभिनेता ऋषि कपूर का मुंबई के एक अस्पताल में गुरुवार को निधन हो गया। ऋषि कपूर के निधन पर राजनीतिक और सामाजिक जगत की हस्तियों ने शोक व्‍यक्‍त किया है। पीएम ने ट्वीट कर कहा दिवंगत अभिनेता को बहुआयामी और जीवंत बताया। पीएम ने ऋषि के साथ अपनी मुलाकात को भी याद किया। ऋषि का कैंसर के कारण आज मुंबई के एक अस्पताल में निधन हो गया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मशहूर अभिनेता के भारतीय सिनेमा जगत में दिए योगदान को याद करते हुए ऋषि कपूर, उनकी पत्‍नी नीतू कपूर के साथ अपना पुराना फोटो शेयर किया। पीएम ने अपने ट्वीट में लिखा- बहुआयामी, प्रिय और जीवंत ...ये ऋषि कपूरजी थे। प्रतिभा का पावरहाउस थे। मैं हमेशा सोशल मीडिया पर भी उनसे अपनी बातचीत को याद करूंगा। वह फिल्मों और भारत की प्रगति के बारे में भावुक थे। उनके निधन से दुखी हूं। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना, शांति। गौरतलब है कि ऋषि कपूर ने अपने ऊर्जा भरे अभिनय से बड़ी संख्‍या में लोगों को दिल जीता और लाखों की संख्‍या में प्रशंसक बनाए। 

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ट्वीट कर लिखा कि ऋषि कपूर के असामयिक निधन से गहरा दुःख हुआ है। उनके सदाबहार और प्रसन्नचित्त व्यक्तित्व तथा ऊर्जा के कारण यह विश्वास करना मुश्किल है कि वे नहीं रहे। उनका निधन सिने जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके परिवार, शुभचिंतकों और प्रशंसकों के प्रति मेरी शोक संवेदनाएं।

गृह मंत्री अमित शाह ने ऋषि कपूर के निधन पर कहा कि दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर जी के निधन के बारे में जानने पर दुख हुआ। वह अपने आप में एक संस्था थे। ऋषि कपूर जी का निधन भारतीय सिनेमा के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्हें उनके असाधारण अभिनय कौशल के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना। ओम शांति।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी अभिनेता ऋषि कपूर के निधन पर दुख जताते हुए कहा कि जाने माने फिल्म अभिनेता ऋषि कपूर के निधन से दुखी हूं। उन्होंने अपने अनमोल अंदाज और अदाकारी से अपने प्रशंसकों के दिलों में खास जगह बनाई। दुख की इस घड़ी में मेरे विचार, उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं।ओम शांति।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ऋषि कपूर के निधन पर श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि भारतीय सिनेमा के लिए यह एक भयानक सप्ताह है, जिसमें एक और किंवदंती अभिनेता ऋषि कपूर का निधन हो गया है। एक अद्भुत अभिनेता, पीढ़ी दर पीढ़ी एक विशाल प्रशंसक के साथ, वह बहुत याद किया जाएगा। इस दुख की घड़ी में उनके परिवार, मित्रों और प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदना।

केंद्रीय मंत्री मुख्‍तार अब्‍बास नकवी ने ऋषि कपूर के फिल्‍मों में दिए योगदान को याद करते हुए उन्‍हें भावभानी श्रद्धांजलि दी है। नकवी ने अपने ट्वीट में लिखा, "जमाना बड़े ग़ौर से सुन रहा था, तुम ही सो गए दास्तां कहते-कहते"…। कला की विरासत, इंसानियत और शराफत से भरपूर ऋषि कपूर जी का निधन अपूरणीय क्षति। श्रद्धासुमन। ॐ शांति...।

29-04-2020
देश में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या 31 हज़ार पर, मृतकों का आंकड़ा 1007, संक्रमण की रफ्तार कम पर रुकी नहीं

दिल्ली/रायपुर। देश में कोरोना पॉजिटिव केसेस की संख्या 31000 पार हो चुकी है। मृतकों की संख्या भी 1007 हो चुकी है और इसमें कहीं भी विराम लगता नजर नहीं आ रहा है। हालांकि 7000 से ज्यादा कोरोना पॉजिटिव मरीज ठीक हो कर घर वापस जा चुके हैं लेकिन फिर भी कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या में इजाफा होना रुक नहीं रहा है। संतोष की बात यह है कि देश में कोरोना के संक्रमण की रफ्तार पर नियंत्रण पा लिया गया है और यह बहुत कम हो गई है लेकिन कोरोना का संक्रमण पूरी तरह रोकने में अभी तक सफलता नहीं मिल पाई है जो चिंता का कारण बना हुआ है। मुंबई दिल्ली दोनों ही हॉटस्पॉट बने हुए हैं। देश की राजनीतिक और औद्योगिक राजधानी दोनों ही बीमार नजर आ रही है।

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