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29-08-2020
डॉ.चरणदास महंत ने कहा- लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाना और लोकतांत्रिक व्यवस्था की अगुवाई हमारा संकल्प

रायपुर। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के नए भवन के शिलान्यास के अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को बधाई दी। उन्होंने कहा कि उनकी परिकल्पना के अनुरूप सर्वसुविधायुक्त आधुनिक तकनीक से लैस भव्य भवन की आधारशिला रखी गई है। यह भवन नहीं, लोकतंत्र का मंदिर है। इस मौके पर हम सभी विधायक संकल्प लेते हैं कि, हम भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने की अगुवाई करेंगे। इस मौके पर डॉ. महंत ने छत्तीसगढ़ के निर्माण में भागीदारी निभाने वाले पुरखों को नमन किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि पुरखों के आशीर्वाद से हम सब छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा में जुटे रहेंगे। डॉ. महंत ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनकी सरकार का उल्लेख करते हुए कहा कि, आप सभी को छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा का मौका मिला है।

उन्होंने गरीबों, किसानों, मजदूरों, आदिवासियों,वंचितों की बेहतरी के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि, जनकल्याण के कार्यों के लिए सभी का सहयोग मिल रहा है। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि, छत्तीसगढ़ बाबा गुरुघासी दास, संत कबीर की धरती है। छत्तीसगढ़ वास्तव में प्रेम की धरती है। हम सब प्रेम और सद्भाव का उदाहरण बनें। कोरोना संकटकाल में मास्क लगाएं परंतु वाणी की मिठास बनाए रखें। सोशल डिस्टेंसिंग रखें, परंतु दिलों के बीच दूरी न आने पाए। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने विधानसभा भवन के शिलान्यास के लिए मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष सहित सभी लोगों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि, विधायकों के लिए भी निकट भविष्य में आवास की व्यवस्था होगी।

 

29-08-2020
नफरत फैलाने वाली ताकतें लोकतंत्र के सामने चुनौती,संविधान भवनों से नहीं भावनाओं से बचेगा : सोनिया गांधी

रायपुर। सांसद सोनिया गांधी,सांसद राहुल गांधी और मोतीलाल वोरा की वर्चुअल उपस्थिति में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने शनिवार को नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ विधानसभा के नए भवन के निर्माण के लिए बटन दबाकर शिलापट का अनावरण किया। नवा रायपुर के सेक्टर 19 में लगभग 270 करोड़ रुपए की लागत से यह भवन महानदी और इंद्रावती भवन के पीछे 51 एकड़ में बनेगा। मुख्य भवन का निर्माण 52 हजार 497 वर्ग मीटर में किया जाएगा। कार्यक्रम में सांसद सोनिया गांधी ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के नए भवन के लिए छत्तीसगढ़ की जनता को बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि, संसद और विधानसभा लोकतंत्र के सबसे बड़े स्तंभ और पवित्र मंदिर हैं। यहां संविधान की रक्षा होती है, लेकिन यह याद रखना होगा कि, संविधान भवनों से नहीं भावनाओं से बचेगा। उन्होंने कहा कि, हमारे पुरखों ने आजादी की लड़ाई लड़ी, उनके सपनों को पूरा करने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। सोनिया गांधी ने देश की वर्तमान स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि, देश और समाज में नफरत फैलाने वाली ताकतें लोकतंत्र के सामने चुनौती बन गई हैं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता खतरे में हैं, लोकतांत्रिक संस्थाएं ध्वस्त हैं। नफरत फैलाने वाली ताकतें चाहती हैं कि, समाज के सभी वर्ग के लोग अपना मुंह बंद रखें। वह देश का मुंह बंद करना चाहती हैं। सोनिया गांधी ने कहा कि,राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू, डा. राजेंद्र प्रसाद, बाबा साहब डा. भीमराव अंबेडकर ने यह सोचा नहीं होगा कि आजादी के 73 वर्ष बाद ऐसा कठिन समय का सामना लोगों को करना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि,आज हम शपथ लें कि हम समाज के अंतिम व्यक्ति को ध्यान में रखकर फैसले लेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और छत्तीसगढ़ सरकार के कामकाज की सराहना करते हुए कहा कि, छत्तीसगढ़ सरकार अंतिम व्यक्ति को ध्यान में रखकर फैसले ले रही है। उन्होंने इस मौके पर छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से किसानों, आदिवासियों, गरीबों के हित में किए जा रहे कामों के साथ ही राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना, सुपोषण अभियान, तेंदूपत्ता संग्रहण दर में वृद्धि का उल्लेख किया और कहा कि, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समावेशी दृष्टिकोण से सभी वर्गों के विकास के लिए काम कर रहे हैं। सांसद राहुल गांधी ने अपने प्रेषित संदेश में कहा कि, छत्तीसगढ़ सरकार जनता के प्रति अपने उत्तरदायित्व को बेहतर तरीके से निभा रही है। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार की राजीव गांधी किसान न्याय योजना और गोधन न्याय योजना के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सराहना करते हुए कहा कि,छत्तीसगढ़ सरकार ने अपने इस फैसले से किसानों-गरीबों-मजदूरों के हाथों में पैसा पहुंचाने का काम किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि छत्तीसगढ़ सरकार के जनोन्मुखी कार्य आगे भी जारी रहेंगे। राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ के नए विधानसभा के शिलान्यास के लिए सभी को बधाई दी। सांसद राहुल गांधी के इस संदेश का वाचन संसदीय मंत्री रविंद्र चौबे ने किया।

 

02-08-2020
लोकतंत्र की हत्या पर मौन क्यों हैं तथाकथित लोकतंत्र के सेनानी : धनंजय ठाकुर

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा है कि,मीसा बंदी पेंशन योजना बंद करना, छत्तीसगढ़ के हित और जनहित में लिया गया फैसला है। पूर्व की रमन सरकार ने 2008 में भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोगों को पालने पोषने सरकारी खजाने का दुरुपयोग किया। बीते 12 साल में सरकारी खजाने पर 100 करोड़ से अधिक की राशि का बंदरबाट किया। 100 करोड़ की राशि छत्तीसगढ़ के किसानों, नौजवानों, मजदूरों, महिलाओं के स्वास्थ, शिक्षा,रोजगार, सुरक्षा पर खर्च की जाती। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह आरएसएस और भाजपा से जुड़े लोगों को सरकारी खजाने से दूधभात खिलाते रहे। बीते 6 साल से देश में अघोषित आपातकाल लगा है। लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। ऐसे समय में स्वयंभू लोकतंत्र के सेनानी बीते 6 साल से कहां गायब है? मोदी भाजपा की सरकार लोकतंत्र की हत्या कर रही है। काले धन की थैलियों से खरीदफरोख्त कर निर्वाचित राज्य सरकारों को अस्थिर किया जा रहा है।

देश के नवरत्न महारत्न  मिनिरत्न सरकारी कंपनियों को बेचा जा रहा है। रेलवे स्टेशन,लाल किला, हवाई अड्डे, विमानन सेवा भेल गेल सहित अनेक सरकारी कम्पनियों संपत्तियों को बेचा जा रहा है। अभिव्यक्ति की आजादी का हनन किया जा रहा है। ऐसे में तथाकथित स्वयम्भू लोकतंत्र के सेनानी क्या मात्र पेंशन लेने के लिए प्रगट होते रहेंगें ? मोदी सरकार के लोकतंत्र विरोधी कृत्यों के खिलाफ आवाज उठाने से ये तथाकथित सेनानी क्यों डर रहे है? मोदी भाजपा के लोकतंत्र विरोधी कृत्यों को सफल बनाने में तथाकथित सेनानी क्यों जुटे हैं?

26-07-2020
स्पीक अप फॉर डेमोक्रेसी में बोली ज्योत्सना महंत, भाजपा सत्ता स्वार्थ के कारण लोकतंत्र को तार तार करने में लगी है

रायपुर। कोरबा सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत ने स्पीक अप फॉर डेमोक्रेसी के नाम पर देशव्यापी विरोध में हिस्सा लेते हुए कहा कि, कांग्रेस की निर्वाचित राज्य सरकारों को रुपयों के दम पर भाजपा द्वारा अस्थिर किया जा रहा है। ज्योत्सना महंत ने कहा कि कर्नाटक, मध्यप्रदेश और अब राजस्थान की निर्वाचित राज्य सरकारों को भाजपा द्वारा धन तंत्र के इस्तेमाल और केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग के अलोकतांत्रिक रवैए को पूरा देश देख रहा है और समझ भी रहा है। 

ज्योत्सना महंत ने कहा कि एक और देश करोना संकट से जूझ रहा है और पूरे देश में संक्रमण की संख्या लगातार बढ़ रही है। देश के सामने खड़ी आर्थिक चुनौतियों और बाढ़ जैसी समस्याओं से निपटने के बजाय भाजपा का पूरा ध्यान जनप्रतिनिधियों की खरीदी बिक्री कर कांग्रेस की निर्वाचित राज्य सरकारों को अस्थिर करने में है। राज्यपाल जैसे संवैधानिक पदों का दुरुपयोग करने में भाजपा ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। राजस्थान में राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री और मंत्री मंडल की सलाह के बाद विधानसभा का सत्र बुलाने से इनकार किया जा रहा है जबकि यह संवैधानिक रूप से आवश्यक और अनिवार्य है। संविधान की रक्षा का अपना दायित्व निभाने के बजाए राजभवन भाजपा के राजनैतिक हितों के साधन के केंद्र बन चुके हैं। ज्योत्सना महंत ने कहा कि भाजपा अपने सत्ता स्वार्थ के चलते भारत के लोकतंत्र को तार तार करने में लगी है, मैं राजस्थान के राज्यपाल से आग्रह करती हूं कि वे अपने पद के कर्तव्यों का निर्वहन करें।

10-07-2020
मुख्यमंत्री की वन मैन शो की प्रवृत्ति और राज्यपाल का अधिकार छीनना लोकतंत्र व संविधान में अनास्था का प्रतीक : डॉ.रमन

रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पर हस्ताक्षर करने के लिए प्रदेश की राज्यपाल अनुसुईया उईके पर दबाव बनाने की प्रदेश सरकार की कोशिशों को घोर अलोकतांत्रिक, असंसदीय और असंवैधानिक बताते हुए इसकी निंदा की है। रमन सिंह ने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार में न तो राजनीतिक समझ-बूझ है, न ही प्रशासनिक क्षमता दिख रही है और अब वह राज्यपाल पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाने की कोशिश करती है तो एक बार फिर संघीय ढाँचे व संवैधानिक प्रक्रिया का खुला अपमान होगा। रमन सिंह ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का अब तक का कार्यकाल देश के संघीय ढाँचे की अवहेलना और प्राय: हर नाजुक मौकों पर संवैधानिक प्रक्रिया को चुनौती देने में ही जाया हुआ है। अपनी सरकार की सारी शक्तियाँ खुद में केंद्रित करके मुख्यमंत्री जिस तरह का वन मैन शो चला और चलाना चाह रहे हैं, वह उनकी लोकतंत्र में गहरी अनास्था का परिचायक तो है ही, अब राज्यपाल के अधिकार छीनने की यह कोशिश उनके घोर असंवैधानिक आचरण का प्रदर्शन है। देश के इस संवैधानिक ढाँचे की एक निश्चित प्रक्रिया है और प्रदेश सरकार राज्यपाल को संविधान प्रदत्त अधिकार छीनने पर आमादा होकर उस संवैधानिक ढाँचे व प्रक्रिया को अवरुद्ध करने का अलोकतांत्रिक व असंसदीय कार्य कर रही है। यह इस प्रदेश सरकार की गलत परम्परा की मिसाल होगा।

 

26-06-2020
देश आज जितना डरा हुआ और विभाजित है, ऐसा कभी नहीं था : रविन्द्र चौबे

रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के बयान पर मंत्री रविन्द्र चौबे ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को आपातकाल पर बयान देने से पहले आईने में सच्चाई देखनी चाहिए। आज देश जिस दौर से गुजर रहा है, उससे बुरी स्थिति में आजादी के बाद से कभी नहीं गुजरा। यह ऐसा समय है जब देश में लोकतंत्र का अपहरण हो चुका है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सबसे बड़े खतरे में है। प्रेस की स्वतंत्रता के इंडेक्स में भारत नीचे लुढ़ककर 142वें स्थान पर पहुंच चुका है और पाकिस्तान से बस दो पायदान ऊपर है। अदालतों की हालत यह है कि सारी अदालतें डरी हुई हैं और पहली बार हुआ है कि न्यायाधीशों को बाहर निकलकर प्रेस के सामने आना पड़ा। एक न्यायाधीश की हत्या हो गई और उसकी जांच तक नहीं हुई।उन्होंने कहा है कि जब देश में प्रधानमंत्री कपड़ों से लोगों की पहचना की बात कर रहे हो तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह का माहौल देश में हैं। दिल्ली के जामिया मिलिया और जेएनयू के छात्रावासों में खुले आम गुंडागर्दी के बाद जिस तरह से लीपापोती की गई वह भी इस डरावने समय को रेखांकित करता है। दिल्ली में जो दंगे हुए उसके पीछे भी भाजपा नेता थे, लेकिन कोरोना के संकटकाल में भी गिरफ़्तारी दूसरों की होती रही, आरोप पत्र में नाम सामाजिक कार्यकतार्ओं के आते रहे।कृषि मंत्री ने कहा है कि बृजमोहन अग्रवाल केंद्र में अपनी सरकार की छवि के बारे में विचार कर लेते तो अच्छा था। जो लोकतंत्र की हत्या करने पर तुली हुई है। चंद उद्योगपतियों को बढ़ावा देकर अर्जित धन से राज्य दर राज्य विधायकों की खरीद फरोख़्त में लगी नरेंद्र मोदी और अमित शाह की सरकार दरअसल लोकतंत्र की अब तक की सबसे घातक सरकार है। तानाशाही का इससे बड़ा उदाहरण क्या हो सकता है कि चार घंटे में आप नोटबंदी कर देते हैं और चार घंटों में देश को लॉक डाउन की विभीषिका में धकेल देते हैं। बृजमोहन अग्रवाल को अपनी याददाश्त पर जोर देकर सोचना चाहिए कि उनके मंत्री रहते रमन सिंह की सरकार ने पत्रकारों पर कैसे कैसे अत्याचार किए। उन्हें याद न हो तो एडिटर्स गिल्ड की बस्तर पर रिपोर्ट पढ़ लेनी चाहिए। उन्हें याद करना चाहिए कि कैसे उनके अफसरों ने प्रदेश में डर का एक माहौल बना रखा था, जिसमें हर कोई डरा हुआ था और अधिकारी तक यह कहते थे कि वे फोन पर बात करने से डरते हैं।

 

01-03-2020
एनआरसी-सीएए के खिलाफ सरकार से विधानसभा में प्रस्ताव पारित करने की मांग

रायपुर। छत्तीसगढ बचाओ आंदोलन ने सीएए, एनआरसी और एनपीआर को मोदी सरकार द्वारा लोकतंत्र और संविधान पर हमला बताया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि आरएसएस संचालित सरकार अपनी विभाजनकारी नीतियों को थोप कर पूरे देश और आम जनता को साम्प्रदयिक दंगो में झोंकना चाहती हैं। सीबीए ने दिल्ली में हुए दंगों को संघ और भाजपा द्वारा प्रायोजित बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन ने सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ प्रदेश भर में चल रहे आंदोलनों को मजबूत करने का फैसला किया है। इसके साथ ही उसने छत्तीसगढ़ विधानसभा में इसके विरोध में प्रस्ताव पारित करने की मांग की है। इस संबंध में सीबीए का एक प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी मुलाकात करेगा।

छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन की इस बैठक में वरिष्ठ आदिवासी नेता अरविंद नेताम, पूर्व विधायक व आदिवासी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनीष कुंजाम, कामरेड सी आर बक्शी, माकपा राज्य सचिव संजय पराते, समाजवादी नेता आंनद मिश्रा, जिला किसान संघ के सुदेश टेकाम, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा (मजदूर-किसान समिति) के रामाकांत बंजारे, छत्तीसगढ़ किसान सभा के नंदकुमार कश्यप, अधिवक्ता शालिनी गेरा, भारत जन आंदोलन के विजय भाई और जनसाय पोया सहित विभिन्न जनसंगठनों के नेता मौजूद थे। 

28-02-2020
भ्रष्टाचार की झुर्रियों से भरा है शासन का चेहरा, सरकार में आईना देखने की भी हिम्मत नहीं रही : भाजपा

रायपुर। भाजपा प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने ने प्रदेश सरकार द्वारा केन्द्र पर लगाए गए बदले की कार्रवाई के आरोप पर पलटवार करते हुए कहा कि कल कांग्रेस के अध्यक्ष इस छापे का स्वागत करते हुए कथित मलाईदार पोस्ट पर रहे अफसरों पर कार्रवाई पर खुशी जता रहे थे, आज ऐसा क्या हुआ कि सारी खुशी काफूर हो गयी और पूरी सरकार को राजभवन जाना पड़ा। उपासने ने कहा कि मुख्यमंत्री का डर आधारहीन है। भाजपा सरकार कभी भी कांग्रेस की तरह प्रतिरोध की कार्रवाई नहीं करती। अगर सीएम के विश्वासी अधिकारी सही होंगे तो उन्हें डरना नहीं चाहिए। उपासने ने कहा कि लेकिन यह भी सही है कि अगर गलत होंगे, जैसे की आशंका व्यक्त की जा रही है, तो उन्हें कोई बचा भी नहीं पायेगा। उपासने ने कांग्रेस द्वारा केन्द्र सरकार पर संघीय ढांचे पर प्रहार संबंधी आरोप को हास्यास्पद कहा है। उन्होंने कहा कि जबसे कांग्रेस सरकार सत्ता में आई है उसके तमाम फैसले संघीय ढांचे पर प्रहार करने जैसे रहे हैं, जिन फैसलों को सक्षम न्यायालयों ने खारिज भी किया है। अत: उन्हें ही संघीय ढांचे और लोकतंत्र पर प्रहार करते रहने का बड़ा अनुभव है। भाजपा की सरकारें ऐसा कभी नहीं करती।

सच्चिदानंद उपासने ने कहा कि कभी भी आयकर की कार्रवाई विज्ञापन देकर नहीं की जाती। छापे के अपने तौर तरीके हैं जिस पर विभाग ही बेहतर जानकारी दे सकता है लेकिन, छापे के दूसरे दिन जिस तरह से सरकार में  बैठे लोगों के चेहरे पर हवाइयां उड़ती दिख रही है, उससे यह तो आशंका प्रबल दिख रही है कि कोई कमजोर नस शायद विभाग के हाथ लगी हो। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार के समय भी आयकर विभाग प्रदेश के अफसरों एवं अन्य पर रूटीन कार्रवाई करता रहा है और केन्द्र में कांग्रेस की सरकार रही है फिर भी कभी भाजपा ने कोई हंगामा खड़ा नहीं किया। एकाएक कांग्रेस सरकार के सक्रिय होने पर लगता है कि दाल में कुछ काला जरूर है। उपासने ने समाचार, सुर्खी बटोरने की कोशिश छोड़कर कांग्रेस से प्रदेश के किसानों की समस्या पर ध्यान देने को कहा है। उन्होंने कहा कि जितना विचलित दिखायेंगे खुद को, प्रदेश की जनता में संदेहऔर गहरा होगा। उपासने ने कहा कि ऐसा लग रहा है मानो साल डेढ़ साल में ही शासन का चेहरा भ्रष्टाचार की झुर्रियों से भर गया है और सरकार में आईना देखने की भी हिम्मत नहीं रही। 

 

21-02-2020
अपने विचार दूसरों पर थोपना भी आतंकवाद का एक रूप : आरिफ मोहम्मद खान

नई दिल्ली। केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने शाहीन बाग प्रदर्शकारियों पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि लोग सड़कों पर बैठे हैं और अपने विचार दूसरों पर थोपने के लिए आम जन-जीवन को बाधित कर रहे हैं जो कि आतंकवाद का एक रूप है। राज्यपाल ने 'भारतीय छात्र संसद' में कहा कि उग्रता केवल हिंसा के रूप में सामने नहीं आती। यह कई रूपों में सामने आती है। अगर आप मेरी बात नहीं सुनेंगे, तो मैं आम जनजीवन को प्रभावित करूंगा। खान ने अपने भाषण में कहा कि असहमति लोकतंत्र का सार है। इससे कोई परेशानी नहीं है। लेकिन पांच लोग विज्ञान भवन के बाहर बैठ जाएं और कहें कि हमें यहां से तब तक न हटाया जाए जब तक कि यह छात्र संसद एक प्रस्ताव स्वीकार नहीं कर लेती, जिसे हम स्वीकार करते हैं। यह आतंकवाद का एक और रूप है। उन्होंने कहा कि चीजों को उलझाइए मत। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर दूसरों पर अपने विचार मत थोपिए। अनुच्छेद 370 हटाए जाने पर उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 में कुछ नहीं बचा है। बस इसके बारे में थोड़ा पढ़ लें। 

 

20-02-2020
परिवर्तन की शुरुवात परिवार से हो : कमला भसीन

धमतरी। गांधी ग्राम कंडेल के मिनी स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में प्रमुख वक्ता कमला भसीन ने जिले में चल रहे युवोदय कार्यक्रम को सराहते हुए गांधीजी के विचारों को युवाओं, लोगों तक ले जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि युवा दो तरह से होते हैं, उम्र से और मन से। जरूरत है कि इस युवा को अपने भीतर जिंदा रखें। उन्होंने अपने वक्तव्य में लैंगिक समानता पर अपने विचार रखे। उन्होंने बेटियों के भूर्ण हत्या, छेड़खानी, बंधनों, खामोशी से खेलने की, पिजरों से, शिक्षा के लिए, नौकरी करने की आजादी की बात रखी। कमला भसीन ने परिवार से ही समानता की शुरुवात करने की बात कही। साथ ही समाज में नैतिकता की सीख लड़कों को देने पर बल दिया। उन्होंने लड़कियों की सुरक्षा को सबसे महत्वपूर्ण कारक बताया।

इस मौके पर वक्ता विनयशील ने लोकतंत्र के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखते हुए कहा कि सपना देखने की आजादी देता है लोकतंत्र। विचारों को साझा करने, चर्चा करने, का अवसर देता है लोकतंत्र। साथ ही सही जनप्रतिनिधि का चयन करना लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मुख्यमंत्री के सलाहकार विनोद वर्मा ने इस अवसर पर बताया कि प्रदेश में लड़कियों को बराबरी का मौका मिला है। ये यहां देर रात भी जरूरी काम निपटाने घर से निकल सकती हैं। उन्होंने गांधीजी के विचारों को युवाओं से साझा करते हुए कहा कि आवश्यक है उनके विचारों को वर्तमान समय में आत्मसात किया जाए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर रजत बंसल ने बताया कि गांधीजी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने, युवाओं को सामाजिक-नैतिक मूल्यों, नशा मुक्ति, कैरियर के प्रति रुझान को और बढ़ाने एक सप्ताह का युवोदय कार्यक्रम चला। इसमें जिले के 136 हाई और हायर सेकंडरी स्कूल, 23 कॉलेज, नर्सिंग, आईटीआई के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। आज के कार्यक्रम में इन सात दिनों के आयोजनों की प्रदर्शनी लगाई गई। इस मौके पर युवोदय के लोगो का प्रदर्शन भी मंच से किया गया। ज्ञात हो कि युवोदय के जिला स्तरीय कार्यक्रम में आज जिले भर के 1600 बच्चों ने भाग लिया। इसमें स्कूल, कॉलेज, पॉलीटेक्निक, आई.टी.आई.के विद्यार्थी शामिल हुए। यहां 150 फीट लंबे खादी के कपड़े में गांधीजी पर आधारित आकर्षक पेंटिंग विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई। यहाँ युवाओं ने आई सपोर्ट युवोदय के बोर्ड पर हस्ताक्षर कर, सेल्फी जोन में फोटो भी खिंचवाई। इस सेल्फी जोन में प्लास्टिक के उपयोग को हतोत्साहित किया गया। इस दौरान बाल मेला भी आयोजित कर विद्यार्थियों की कला, विज्ञान के हुनर को प्रदर्शित किया गया।

 

17-02-2020
राजधानी में वृंदा करात की सभा का विरोध करेगी एबीवीपी

रायपुर। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की पोलित ब्यूरो सदस्य और पूर्व सांसद वृंदा करात की राजधानी रायपुर में होने वाली सभा का अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद विरोध करेगी। इस संबंध में रायपुर एएसपी प्रफुल्ल ठाकुर को एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन सौंपकर सभा स्थल बदलने की मांग की। महानगर मंत्री विभोर सिंह ठाकुर ने कहा कि विगत लंबे समय से रायपुर के जयस्तंभ चौक को घेरकर कुछ संगठनों की ओर से धरना दिया जा रहा है। इस धरने से आसपास का माहौल खराब हो रहा है। आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों का जमावड़ा रहता है। माकपा नेता वृंदा करात को इस धरने में बुलाकर रायपुर जैसे शांत शहर का माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है। जय स्तम्भ चौक शहीद वीर नारायण सिंह की याद में एक पवित्र स्थल है। विभोर ने कहा कि हमारी मांग है कि सभा की अन्यत्र स्थानान्तरित किया जाए या जय स्तम्भ चौक को सभा स्थल घोषित कर दिया जाए। एबीवीपी वृंदा करात की सभा का पुरजोर विरोध करेगी। मामले में एएसपी प्रफुल्ल ठाकुर ने कहा कि एबीवीपी की ओर से ज्ञापन सौंपा गया है। लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है। दोनों पक्षों से बात की जा रही है। कोई अप्रिय स्थिति न हो इसलिए बल भी तैनात किया जाएगा। ज्ञापन सौंपने के दौरान विभाग संयोजक विकास मित्तल, आकाश शर्मा, अखिलेश त्रिपाठी आदि मौजूद थे।

14-02-2020
पुलवामा हमले पर बोले भूपेश बघेल - शहीदों के परिवारों को न्याय कब मिलेगा?

रायपुर। एक वर्ष पूर्व पुलवामा हमले को याद कर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शहीदों को नमन किया। साथ ही हमले की जांच पर फिर से तीन सवाल किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ही के दिन गत वर्ष पुलवामा में शहीद हुए वीर जवानों की शहादत को कोटि-कोटि नमन करता हूँ। साथ ही लोकतंत्र का सिपाही होने के नाते पुन: सवालों को दोहराता हूँ कि
1. 300 किलो फऊ कहाँ से आया?
2. हमले की जाँच कहाँ तक पहुँची?
3. शहीदों के परिवारों को न्याय मिल गया?
बता दें कि पिछले साल 14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सीआरपीएफ का काफिला गुजर रहा था। सामान्य दिन की तरह ही उस दिन भी सीआरपीएफ के वाहनों का काफिला अपनी धुन में जा रहा था। तभी एक कार ने सड़क की दूसरी तरफ से आकर इस काफिले के साथ चल रहे वाहन में टक्कर मार दी। इसके साथ ही एक जबरदस्त धमाका हुआ। यह आत्मघाती हमला इतना बड़ा था कि मौके पर ही सीआरपीएफ के करीब 42 जवान शहीद हो गए।

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