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29-11-2019
छत्तीसगढ़ रेल कार्पोरेशन में बेवजह कर्मियों को बर्खास्तगी के नोटिस से विवाद, खतरे में नई परियोजनाएं

रायपुर। छत्तीसगढ़ रेल कार्पोरेशन  में 20 अफसर इंजीनियर को नौकरी से बर्खास्त करने का नोटिस दिया गया है। इस नोटिस से कारपोरेशन में हड़कंप मचा हुआ है और उनके भविष्य के साथ साथ नई परियोजनाओं का भविष्य भी अधर में लटक गया है। विवाद की जड़ अस्थाई प्रबंध निदेशक की मनमानी को माना जा रहा है जो लोक निर्माण विभाग से सेवानिवृत्त अफसर बताए जाते हैं। दरअसल छत्तीसगढ़ राज्य में रेल परियोजनाओं की पहचान उनके विकास और यातायात की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार रेल मंत्रालय ने मिलकर छत्तीसगढ़ रेल कार्पोरेशन लिमिटेड नामक उपक्रम का गठन किया था। कार्पोरेशन  4 नई रेल परियोजनाओं को विकसित करने का काम कर रहा है। कार्पोरेशन में पिछले 8 महीने से पूर्णकालिक प्रबंध निदेशक का पद खाली पड़ा है और अस्थाई तौर पर उस पद पर एक निदेशक वित्त काम कर रहे हैं।

रेल परियोजनाओं और उपक्रम चलाने का अनुभव ना होने कारण वहां परियोजना के विकास विकसित होने का काम लगभग ठप पड़ा है। इस बीच वहां हुई गलतियों को छुपाने के लिए पांच अधिकारियों को बिना जांच के नौकरियों से निकाल दिया गया था। एक बार फिर 20 अधिकारी और इंजीनियरों को नौकरी से बर्खास्तगी की नोटिस दे दी गई है। इन सारे अधिकारियों का कसूर इतना है कि सब ने जुलाई माह में कार्पोरेशन के चेयरमैन को कार्यालय में कार्यरत एक दैनिक वेतन भोगी कर्मी को हटाने के लिए ज्ञापन सौंपा था। विवाद यहीं से बढ़ता चला गया है और कई बार ज्ञापन देने के बावजूद दैनिक वेतन भोगी कर्मी को हटाने की बजाय उसे संरक्षण दिया जा रहा है तथा अन्य कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की नोटिस दी जा रही है। लगातार नौकरी से हटाए जाने की धमकी के कारण दफ्तर में माहौल बहुत खराब है तथा सभी कर्मचारियों अधिकारी मानसिक तनाव के कारण दूसरे संस्थानों में जाने का मन बना रहे हैं। ऐसा होता है तो राज्य में रेल परियोजनाओं के विकास पर ग्रहण लगने की आशंका है। राज्य सरकार और रेल मंत्रालय इस मामले को ठीक नहीं करते हैं तो राज्य की बहुप्रतीक्षित नई रेल परियोजना भी खतरे में पढ़ सकती है।

27-11-2019
पेंशन कल्याण मंडल का किया गया पुनर्गठन, चीफ सेकरेट्री होंगे चेयरमैन

रायपुर। राज्य सरकार पेंशन संबंधी समस्य़ाओं को लेकर बेहद गंभीर है। पेंशन संबंधी समस्याओं को लेकर लगातार आ रही शिकायतों के मद्देनजर राज्य सरकार ने पेंशन कल्याण मंडल का पुनर्गठन किया है। इस बाबत राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है। इस कमेटी में चीफ सेकरेट्री चेयरमैन होंगे, जबकि 9 अन्य सदस्य होंगे। 10 सदस्यीय ये कमेटी पेंशन संबंधी समस्याओं को सुलझाएगी व सरकार को इस दिशा में सुझाव देगी। वित्त विभाग की तरफ से जारी आदेश में जिन्हें पेंशन कल्याण मंडल में शामिल किया गया है उनमें चीफ सेकरेट्री चेयरमैन होंगे, वहीं वित्त विभाग के एसीएस, जीएडी के एसीएस, स्वास्थ्य विभाग के एसीएस मेंबर होंगे। इसके अलावा प्रदेश के अलग-अलग पेंशनधारी कल्याण संघ के अध्यक्षों को भी कल्याण मंडल में शामिल किया गया है।

25-11-2019
बीएसएनएल के कर्मचारियों ने शुरू की देशव्यापी भूख हड़ताल, कंपनी पर लगाए मजबूर करने के आरोप

नई दिल्ली। सरकारी टेलीकॉम कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के कर्मचारी आज देशव्यापी भूख हड़ताल पर हैं। कर्मचारी यूनियनों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) लेने के लिए मजबूर कर रही है। इसलिए आज कर्मचारी हड़ताल पर हैं।

कर्मचारियों को धमका रहा प्रबंधन - एयूएबी

इस संदर्भ में रविवार को ऑल इंडिया यूनियंस एंड असोसिएशंस ऑफ भारत संचार निगम लिमिटेड (एयूएबी) के संयोजक पी अभिमन्यु ने कहा कि प्रबंधन कर्मचारियों को धमका रहा है। कर्मचारियों को कहा जा रहा है कि वीआरएस नहीं लेने पर उन्हें दूर भेजा जा सकता है। इतना ही नहीं, कर्मचारियों से यह भी कहा जा रहा है कि अगर उन्होंने वीआरएस नहीं लिया, तो उनकी सेवानिवृत्ति उम्र की आयु घटाकर 58 वर्ष की जा सकती है।

योजना कर्मचारियों के लिए फायदेमंद नहीं

बता दें कि एयूएबी के अनुसार, कंपनी के आधे से ज्यादा कर्मचारी उसके साथ जुड़े हैं। अभिमन्यु ने कहा कि कर्मचारी अपनी इच्छा से वीआरएस योजना लें। कर्मचारियों को इसे लेने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन यह योजना कर्मचारियों के लिए फायदेमंद नहीं है। बीएसएनएल में 77 हजार कर्मचारियों ने वीआरएस के लिए आवेदन किया है। कंपनी में कुल 1.50 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं। फिलहाल स्कीम के अनुसार यह सारे कर्मचारी 31 जनवरी 2020 को अपने-अपने पद से रिटायर हो जाएंगे।

ये है योजना

योजना के मुताबिक कंपनी के सभी स्थायी कर्मचारी, जो किसी दूसरे संस्थान या फिर विभाग में प्रतिनियुक्ति पर हैं और 50 साल की उम्र को पूरा कर चुके हैं वो वीआरएस के लिए आवेदन कर सकते हैं। बीएसएनएल के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक पीके पुरवार ने कहा कि सरकार और बीएसएनएल की ओर से दी जा रही यह श्रेष्ठ वीआरएस सुविधा है और इसे कर्मचारियों को सकारात्मक रूप में देखना चाहिए। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने पिछले महीने ही 69 हजार करोड़ रुपये का पुनरुद्धार पैकेज बीएसएनएल और एमटीएनएल को दिया था। एमटीएनएल ने भी अपने कर्मचारियों के लिए वीआरएस योजना पेश की है। 

 

17-11-2019
सांसद गौतम गंभीर के लगे गुमशुदगी के पोस्टर, जानिए क्या है लिखा...

नई दिल्ली। पूर्व किक्रेटर और दिल्ली के भाजपा सांसद गौतम गंभीर के गुमशुदा होने के पोस्टर लगाए गए हैं।  पोस्टर में लिखा है, क्या आपने इन्हें देखा है। आखिरी बार इन्हें इंदौर में जलेबी खाते देखा गया था पूरी दिल्ली इन्हें ढूंढ रही है। बता दें कि 15 नवंबर को दिल्ली में वायु प्रदूषण पर शहरी विकास की संसदीय स्थायी समिति की बैठक में गौतम गंभीर शामिल नहीं हुए थे। इसके बाद संसदीय कमेटी की बैठक को स्‍थगित कर दिया गया था। संसदीय समिति के 29 सांसद सदस्य हैं, लेकिन बैठक के लिए सिर्फ 4 सांसद ही पहुंचे थे। एमसीडी के तीनों कमिश्नर, डीडीए के वाइस चेयरमैन और पर्यावरण मंत्रालय के संयुक्त सचिव भी इस बैठक में नहीं पहुंचे थे। कई वरिष्ठ अधिकारियों के बैठक में नहीं पहुंचने के कारण से दिल्ली में वायु प्रदूषण के मसले पर प्रेजेंटेशन नहीं हो पाई। ऐसे में दिल्ली में सांसद गौतम गंभीर के गुमशुदगीे के पोस्टर लगाए गए हैं।

16-11-2019
रजत शर्मा ने अपने पद से दिया इस्तीफा, कहा - काम करना नहीं था आसान

नई दिल्ली। रजत शर्मा ने सभी को हैरान करते हुए अपने एक बहुत ही बड़े पद से इस्तीफा दे दिया है। दिल्ली ऐंड डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट असोसिएशन (डीडीसीए) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। यह जानकारी डीडीसीए ने अपने ऑफिशल ट्विटर अकाउंट पर दी। डीडीसीए ने लिखा है- रजत शर्मा ने डीडीसीए के अध्यक्ष पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे को एपेक्स काउंसिल को भेजा गया है। बता दें कि रजत शर्मा जुलाई 2018 में इस पद के लिए चुने गए थे।

रजत शर्मा एक निजी हिंदी समाचार चैनल के चेयरमैन और एडिटर इन चीफ हैं। रजत शर्मा ने कहा, 'ऐसा लगता है कि डीडीसीए में ईमानदारी और पारदर्शिता के सिद्धांतों के साथ चलना संभव नहीं है, जिससे किसी भी कीमत पर मैं समझौता करने के लिए तैयार नहीं हूं।' शर्मा ने अपने ऑफिशल ट्विटर अकाउंट पर लिखा- प्रिय सदस्यों, जबसे आपने मुझे डीडीसीए का अध्यक्ष चुना है मैं समय-समय पर आपको अपने काम के बारे में जानकारी देता रहा हूं। मैंने डीडीसीए को बेहतर बनाने के लिए, प्रफेशनल और पारदर्शी बनाने के लिए जो कदम उठाए उसके बारे में आपको बताया। आपसे किए गए वादों के पूरा होने की जानकारी दी। उन्होंने आगे लिखा, 'यहां काम करना आसान नहीं था, लेकिन आपके विश्वास ने मुझे ताकत दी। आज मैंने डीडीसीए का अध्यक्ष पद छोड़ने का फैसला किया है और अपना इस्तीफा एपेक्स काउंसिल को भेज दिया है। आपने जो प्यार और सम्मान मुझे दिया है उसके लिए आपका आभार।' उल्लेखनीय है कि रजत शर्मा के कार्यकाल के दौरान कोटला क्रिकेट ग्राउंट को नया नाम दिया गया था। उसे अब दिवंगत केंद्रीय मंत्री और डीडीसीए के पूर्व अध्यक्ष अरुण जेटली के नाम पर अरुण जेटली क्रिकेट स्टेडियम से जाना जाता है।

09-09-2019
मुंबई में इस इलाके में घरों की कीमत है सबसे अधिक, एक वर्गफुट की इतना है दाम...

मुंबई। दक्षिणी मुंबई का तारदेव देश का सबसे महंगा आवासीय इलाका है। यहां उपलब्ध घरों की औसत कीमत की दर 56 हजार रुपये प्रति वर्गफुट से अधिक है। संपत्ति संबंधी परामर्श देने वाली कंपनी एनरॉक ने यह जानकारी दी है। एनरॉक के अनुसार, इसके बाद वर्ली और महालक्ष्मी इलाके का स्थान रहा, जहां घरों की औसत कीमत की दर क्रमश: 41,500 रुपये और 40 हजार रुपये प्रति वर्गफुट है। एनरॉक ने देश के 10 सबसे महंगे आवासीय इलाकों की सूची तैयार की है। कंपनी के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि 56,200 रुपये प्रति वर्गफुट की दर से दक्षिणी मुंबई का तारदेव इलाका पहले स्थान पर रहा है। चेन्नै का नुंगमबक्कम 18 हजार रुपये प्रति वर्गफुट के साथ चौथे, एगमोर 15,100 रुपये प्रति वर्गफुट के साथ पांचवें तथा अन्ना नगर 13 हजार रुपये प्रति वर्गफुट के साथ सातवें स्थान पर रहा। दिल्ली का करोलबाग 13,500 रुपये प्रति वर्गफुट के साथ छठे स्थान पर रहा। गुरुग्राम का गोल्फ कोर्स रोड 12,500 रुपये प्रति वर्गफुट के साथ नौवें स्थान पर रहा। पुणे का कोरेगांव तथा कोलकाता का अलीपुर क्रमश: 12,500 रुपये प्रति वर्गफुट और 11,800 रुपये प्रति वर्गफुट के साथ आठवें तथा 10वें स्थान पर रहा।

 

07-06-2019
कौन है वो शख्स जिसे अजीम प्रेमजी ने सौंप दी 1.76 लाख करोड़ की कंपनी

नई दिल्ली। दिग्गज आईटी कंपनियों में शामिल विप्रो के मालिक अजीम प्रेमजी ने रिटायरमेंट की घोषणा कर दी है। अजीम प्रेमजी विप्रो के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन व प्रबंध निदेशक पद से 30 जुलाई 2019 को रिटायर हो जाएंगे। अजीम प्रेमजी के रिटायरमेंट के बाद उनके बेटे रिशद प्रेमजी अगले 5 सालों के लिए इस पद को संभालेंगे। यानी बेटे के हाथ में कंपनी की कमान होगी। रिशद प्रेमजी 31 जुलाई से पदभार संभालेंगे। 

रिशद की पहचान सिर्फ अपने पिता अजीम प्रेमजी की वजह से नहीं है, उन्होंने बतौर कारोबारी खुद अपनी पहचान भी बनाई है। साल 2007 में  रिशद विप्रो से जुड़े थे। यहां रिशद ने इन्वेस्टर रिलेशन और कॉरपोरेट अफेयर्स से जुड़े काम शुरू किया। विप्रो में काम शुरू करने से पहले वो बेव कंपनी लंदन में काम करते थे। उन्होंने जीई कैपिटल के साथ भी काम किया है। रिशद विप्रो की तरफ से चलाए जा रहे सामाजिक और शिक्षा से जुड़े कामों को भी देखते रहे हैं। अजीम प्रेमजी के बेटे रिशद प्रेमजी ने हावर्ड बिजनेस स्कूल से एमबीए और अमेरिका के वेस्लेयन यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है। इसके साथ ही रिशद ने लंदन के स्कूल आॅफ इकोनॉमिक्?स से भी स्पेशल कोर्स किया है। साल 2014 में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ने रिशद को यंग ग्लोबल लीडर के तौर पर सम्मानित किया था। रिशद आईटी कंपनियों के संगठन नैस्कॉम के चेयरमैन भी रहे हैं।

03-01-2019
Students: धरने पर बैठे इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स

भिलाई। रूगंटा इंजीनियरिंग कॉलेज R-1 में 3 जनवरी को विद्यार्थियों ने उत्पाद मचाया हुए घरने पर बैठ गए। हंगामा उस वक्त हुआ जिस समय विद्यार्थी प्रैक्टिकल एग्जाम दे रहे थे। दोपहर 2 बजे से प्रैक्टिकल शुरू हुआ और लगभग २.१५ बजे मैकेनिकल पांचवें सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने परीक्षा छोड़ दी और चेयरमैन कक्ष के सामने धरने पर बैठ गए। विद्यार्थियों ने चेयरमैन कक्ष परिसर में जमकर तोडफ़ोड़ की। पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई है। इस दौरान पुलिस प्रशासन को बीच बचाव करने पहुंचना पड़ा।

एक प्रोफेसर को प्रबंधन ने बर्खास्त कर दिया
मामला यह है कि कॉलेज में मैकेनिकल के पै्रक्टिकल चल रहे थे, उस वक्त एक प्रोफेसर आए और पर्चा हल कर रहे विद्यार्थियों को बताया कि प्रबंधन ने उन्हें कार्य से बर्खास्त कर दिया है।  विद्यार्थियों को जैसे ही यह बात पता चला  हंगामा शुरू कर दिया।  इस दौरान कॉलेज की बाकी फैकल्टी भी हड़ताल में बैठ गई और प्रैक्टिकल एग्जाम धरे रहे गए। फैकल्टी के धरने पर बैठाने की वजह यह बताई जा रही है कि कॉलेज प्रबंधन ने निजी कारणों से उन्हें कई महीनों का वेतन नहीं दिया है। इस मामले की शिकायत कॉलेज की तमाम फैकल्टी पहले भी छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय को कर चुके है। फैकल्टी की अपने विरोध प्रदर्शन के साथ देर रात तक कॉलेज में डटी रही।

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