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21-12-2020
चिटफंड कंपनी की संपत्ति कुर्क, निवेशकों को अब तक नहीं मिली राशि

धमतरी। सनशाइन इन्फ़ो बिल्ड चिटफंड कंपनी के निवेशक आज कलेक्टोरेट पहुंचे। यहां उन्होंने कंपनी में निवेश किए गए रुपयों को जल्द वापस करने की मांग की। बताया कि हाईकोर्ट बिलासपुर के आदेश अनुसार चिटफंड कंपनी की जमीन जो कि छत्तीसगढ़ के जामगांव दुर्ग-भिलाई अर्जुनी धमतरी देमार में स्थित है उसे नीलामी कर निवेशकों के पैसे वापस देने को कहा है। इस पर प्रशासन द्वारा जमीनों को कुर्क कर दिया गया है लेकिन चिटफंड कंपनी के निवेशकों को अभी तक राशि वापस नहीं मिली है। निवेशकों ने बताया कि जोधपुर हाईकोर्ट के आदेश को 6 साल बीत चुके हैं लेकिन अभी तक कंपनी में निवेश किए हुए पैसे वापस नहीं मिले हैं। चिटफंड कंपनी में पैसा निवेश करने वालों की संख्या 77 है,जिनकी कुल राशि 16 लाख 33 हजार रुपए है। निवेशकों के पैसा नहीं मिलने के कारण सभी को बहुत ज्यादा आर्थिक एवं मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

 

21-10-2020
हवाई सेवा शुरू करने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

रायपुर/बिलासपुर। शहर में हवाई सेवा शुरू करने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है। बता दें कि इससे पहले हाईकोर्ट ने असिस्टेंट सालिसिटर जनरल के गोलमोल जवाब पर नाराजगी जताई थी। साथ ही मामले में अब सैन्य अफसरों को तलब करने की चेतावनी भी दी है। बीते दिन इस मामले की सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा ने बताया कि 5 अक्टूबर को राज्य सरकार ने आपरेशन एरो स्टैंडर्ड के डायरेक्टर को पत्र लिखकर बिलासपुर में टू सी केटगरी एयरपोर्ट को फोर-सी में परिवर्तित करने की अनुमति मांगी है। 12 अक्टूबर को दिल्ली के सिविल एविएशन ने राज्य शासन को पत्र लिखकर बताया कि फोर सी कैटगरी के लाइसेंस के लिए जरूरी दस्तावेज अनिवार्य है। इसके बाद 19 अक्टूबर को सभी पक्षों की बैठक हुई। इसमें फोर सी कैटगरी एयरपोर्ट बनाने को लेकर चर्चा की गई। इसके लिए बहुत सारे निर्माण कार्य व जमीन की जरूरत है।

महाधिवक्ता ने बताया कि वर्तमान में थ्री-सी केटगरी एयरपोर्ट के लिए काम चल रहे हैं। सेना को प्रबंधन के लिए दी गई 78.22 एकड़ जमीन को जिला प्रशासन ने वापस ले लिया है। याचिकाकर्ता कमल दुबे के वकील आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि थ्री-सी कैटगरी एयरपोर्ट शुरू होने के बाद फोर-सी कैटगरी के लिए भी काम शुरू किया जा सकता है। बहस के दौरान हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार व रक्षा मंत्रालय की तरफ से उपस्थित असिस्टेंट सालिसिटर जनरल से पूछा कि आप की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई है। पिछले आदेश के संबंध में उन्होंने बताया कि राज्य शासन ने जो फाइल की है उसकी कापी नहीं मिली है। कॉपी एक दिन पहले ही दे दी गई है। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की। साथ ही चेतावनी दी कि अगली पेशी में सैन्य अधिकारियों को तलब कर पूछताछ की जाएगी। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है।

28-07-2020
हाईकोर्ट ने निजी स्कूल संचालकों कोे इन शर्तों पर दी ट्यूशन फीस वसूलने की अनुमति

रायपुर। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अब निजी स्कूल संचालक छात्रों से ट्यूशन फीस ले सकेंगे। हाईकोर्ट ने निजी स्कूल प्रबंधन को सशर्त अनुमति दी है। शर्तों के मुताबिक स्कूल प्रबंधन बीते सत्र में तय निर्धारित ट्यूशन फीस ही लेंगे। इसके एवज में शिक्षकों व स्टॉफ को वेतन देना होगा। इतना ही नहीं इस दौरान स्कूल प्रबंधन अपने किसी भी स्टॉफ को नौकरी से बाहर नहीं निकालेगा। बिलासपुर प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने अपने वकील के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर लोक शिक्षण संचालनालय के 1 अप्रैल 2020 को जारी आदेश को चुनौती दी थी। संचालनालय ने एक आदेश जारी कर कोरोना संक्रमण को देखते हुए फीस की वसूली पर रोक लगा दी थी। साथ ही यह भी हिदायत दी थी कि दबावपूर्वक फीस वसूलने पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। बीते दिन मामले की सुनवाई जस्टिस पी सैम कोशी की एकल पीठ में हुई। सुनवाई के बाद जस्टिस कोशी ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। जस्टिस कोशी ने निजी स्कूल प्रबंधन को ट्यूशन फीस वसूलने की अनुमति दी है, लेकिन साथ ही यह सुनिश्चित करने कहा है कि आर्थिक संकट के कारण जो अभिभावक फीस जमा नहीं कर सकते हैं उन्हें छूट दे।

इसके लिए अभिभावकों को आवेदन देना होगा। उनके आवेदन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करना होगा। कोर्ट ने यह भी कहा है कि फीस में कोई बढ़ोतरी न की जाए और किसी भी स्टॉफ को नौकरी से नहीं निकाला जाए। सभी बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई का लाभ देने के निर्देश भी दिए हैं। प्रदेशभर के 22 निजी स्कूलों के संचालकों के संगठन बिलासपुर प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन की ओर से राज्य शासन के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। 'जस्टिस पी सैम कोशी ने 14 पेज का विस्तृत आदेश जारी किया है। इसमें स्कूल प्रबंधकों को ट्यूशन फीस लेने की अनुमति तो दी है साथ ही यह भी निर्देश दिया है कि इस दौरान किसी भी स्टॉफ को नौकरी से नहीं निकाला जाएगा। उन्हें नियमित रूप से वेतन भी दिया जाएगा। बकाया और वर्तमान ट्यूशन फीस के अलावा कोई दूसरी फीस भी वे नहीं ले सकेंगे। साथ ही फीस में इस दौरान वृद्घि भी नहीं कर सकेंगे। कोर्ट ने यह भी कहा है कि जो अभिभावक वास्तविक आर्थिक संकट के कारण फीस पटाने में सक्षम नहीं है उन्हें फीस से छूट दी जाए। इसके लिए स्कूल प्रबंधन को मापदंड तय करना चाहिए। अभिभावकों को व्यक्तिगत रूप से स्कूल प्रबंधक के सामने उपस्थित होना पड़ेगा और अपनी आय का विवरण देकर बताना होगा कि वे इस समय फीस देने में सक्षम नहीं हैं।'

23-05-2020
हाईकोर्ट ने कहा सरकार को जांच का पूरा अधिकार, अमन सिंह की याचिका रद्द

रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व प्रमुख सचिव अमन सिंह को हाईकोर्ट बिलासपुर से करारा झटका लगा है। स्वयं के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी जांच और ईओडब्ल्यू द्वारा की जा रही जांच को रोकने अमन सिंह ने बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। अमन सिंह के खिलाफ दिल्ली निवासी विजया मिश्रा ने आरटीआई से प्राप्त जानकारी के आधार पर प्रधानमंत्री कार्यालय को शिकायत की थी कि आरईएस से पीआरएस लेने के बाद, तत्कालीन सरकार द्वारा अमन सिंह को संविदा नियुक्ति दी गई थी तथा संविदा नियुक्ति हेतु अमन सिंह ने कनार्टक में पदस्थापना के दौरान उसके विरुद्ध भ्रष्टाचार की जांच होने व उसके विरुद्ध चार्जशीट जारी होने के तथ्य को छिपाया था। पीएमओ द्वारा विजया मिश्रा की शिकायत जांच एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु राज्यशासन को भेजे जाने पर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जांच के लिए एसआईटी गठित किया गया।

अमन सिंह द्वारा पूर्व जांच में आरोप निराधार पाए जाने का हवाला देते हुए पुन: जांच के लिए एसआईटी गठनन को नियम विरुद्ध बताते हुए हाईकोर्ट की शरण ली थी। जस्टिस पी. सैम कोशी की सिंगल बैंच ने दिनांक 28 फरवरी 2020 को सुनवाई पूर्ण की कर निर्णय सुरक्षित रख लिया था। दिनांक 21 फरवरी 2020 को पारित निर्णय में ललिता कुमारी विरुद्ध उप्र शसन एवं अन्य, तेलंगाना शासन विरुद्ध मानाजीपेत एलियाज, जयललिता एवं अन्य विरुद्ध कर्नाटक राज्य एवं अन्य प्रकरणों में हुए पूर्व निर्णयों (लैण्ड मार्क डिसीजन) का हवाला देते हुए राज्य शासन द्वारा विजया मिश्रा की शिकायत जांच हेतु एसआईटी जांच गठन को उचित ठहराते हुए याचिकाकर्ता अमन सिंह द्वारा राज्य शासन पर पूर्वाग्रह एवं दुर्भावनावश कार्यवाही करने के आरोप को निराधार होना माना है। कोर्ट ने अपने निर्णय में यह भी उल्लेखित किया है कि याचिकाकर्ता अमन सिंह, शासन पर लागए गए अपने आरोपों को प्रमाणित करने में असफल रहे। हाईकोर्ट ने अमन सिंह के उस तर्क को भी नहीं माना कि राज्य शासन द्वारा उसे पूर्व में नोटिस जारी कर जवाब लिया गया था व उसे क्लीन चीट दे दी गई थी। इसे कार्यवाही न मानते हुए अपने निर्णय में जांच कराने का अधिकार राज्य शासन के पास सुरक्षित होना एवं किसी जांच में संतुष्ट न होने की स्थिति में राज्य सरकार को दोबारा जांच कराने का पूर्ण अधिकार होना माना है। हाईकोर्ट के इस निर्णय को पूर्व प्रमुख सचिव अमन सिंह की करारी हार के रूप में देखा जा रहा है।

07-03-2020
21 मार्च से शार्ट फिल्म फेस्टिवल, दिखाई जाएगी देश-विदेश की फिल्में  

बिलासपुर। विधिक जागरूकता पर शार्ट फिल्म फेस्टिवल का आयोजन 21 व 22 मार्च को हाईकोर्ट बिलासपुर के ऑडिटोरियम किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में हो रहे शार्ट फिल्म फेस्टिवल में अब तक 54 देशों की 637 एंट्री मिल चुकी है। फिल्म फेस्टिवल के लिए जीपीआरएसएस द्वारा तकनीकी सहयोग प्रदान किया जा रहा है। 05 से 10 मिनट की फिल्मों के लिए चार विषय निर्धारित किये गये हैं। जुरी के निर्णय के मुताबिक 22 श्रेणियों में पुरस्कार दिये जाएंगे। समाज तक संदेश पहुंचाने के लिए सिनेमा सबसे सशक्त माध्यम है। जिससे लोगों की बातों को शीघ्र ही समझने एवं समझाने में सरलता होती है।

फिल्मों के लिए तय किये गये थे चार मुद्दे
 कानूनी जागरूकता पर आधारित देश की पहली शार्ट फिल्म प्रतियोगिता शूट फॉर लीगल अवेयरनेस 2020 के लिए चार विषय तय किये गये हैं। इसमें मानव तस्करी, बाल अधिकार (बाल श्रम निषेध और शिक्षा का अधिकार), नशामुक्ति और पीड़ितों का पुनर्वास और साइबर क्राइम शामिल हैं। शार्ट फिल्म फेस्टिवल के सीजन-3 के लिए पाकिस्तान, ईरान, अमेरिका, कनाडा, आस्ट्रेलिया, फिलीपींस, इंडोनेशिया, चिली, कोलंबिया, चेक रिपब्लिक, डेनमार्क, इजिप्ट, फ्रांस, जर्मनी सहित 54 देशों की फिल्में आई हैं। छत्तीसगढ से भी बड़ी संख्या में फिल्में भेजी गई हैं।

चार विषयों के लिए 6 केटेगरी
 चार विषयों पर 6 केटेगरी में शार्ट फिल्में मंगाई गई थी, इसमें छत्तीसगढ़ी, अंग्रेजी व अन्य भारतीय भाषाएं, सुपर शार्ट्स, इन हाउस, गैर प्रतिस्पर्धी श्रेणी और नो वॉर्डर्स केटेगरी शामिल है। इन हाउस में राज्य और जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों की एंट्री शामिल है।

5 लाख से अधिक के 22 पुरस्कार
भारतीय प्रतियोगियों को 22 पुरस्कार दिये जाएंगे। अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों के लिए 2 सम्मान होंगे। छत्तीसगढ़ी में बेस्ट शार्ट फिल्म को 1 लाख और दूसरी को 51 हजार रूपये दिये जाएंगे। इसी तरह हिन्दी, अंग्रेजी और अन्य भारतीय भाषाओं में बेस्ट शार्ट फिल्म को 1 लाख रूपये और दूसरी को 51 हजार रूपये के एक-एक पुरस्कार दिये जाएंगे। बेस्ट सुपर शार्ट्स को 21 हजार, रनर अप को 11 हजार और सेकेंड रनर अप को 5100 रूपये के पुरस्कार दिये जाएंगे।

आम लोगों के लिए शार्ट फिल्म फेस्टिवल का आयोजन
कानूनी जागरूकता से जुड़ें विषयों को रचनात्मक रूप से सहज-सरल तरीके से आम लोगों तक पहुंचाने के लिए शार्ट फिल्म फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है। आयोजन पूरी तरह निःशुल्क है। इस संबंध में अन्य जानकारी के लिए सिद्धार्थ अग्रवाल, सदस्य सचिव, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर, दूरभाष क्रमांक 07752-410210 से तथा शशांक शेखर दुबे, विधिक सहायता अधिकारी, मोबाईल नंबर 9131525540 से संपर्क कर सकते हैं।


 
 

16-01-2020
पूर्व प्रमुख सचिव अमन सिंह की पत्नी को हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत

रायपुर। छत्तीसगढ़ में भाजपा शासन काल के समय में प्रमुख सचिव रहे अमन सिंह की पत्नी यास्मीन सिंह को आज हाईकोर्ट बिलासपुर से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा उनके मामले में एसीबी जांच के दिए गए निर्देश पर फिलहाल रोक लगा दी है। न्यायाधीश गौतम भादुड़ी की बेंच में आज यास्मीन सिंह द्वारा लगाई गई याचिका में सुनवाई हुई। कोर्ट ने यास्मीन सिंह के वकील की ओर से दी गई दलील के बाद फिलहाल उनके खिलाफ राज्य सरकार द्वारा एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) से जांच कराने के दिए आदेश पर रोक लगाते हुए इस संबंध में शासन को आदेशित किया है। ज्ञात हो कि भाजपा सरकार के समय में यास्मीन सिंह की नियुक्ति और उन्हें किए गए बड़े पैमाने पर भुगतान को लेकर कांग्रेस सरकार के पास शिकायत आई थी। ये शिकायत आरटीआई कार्यकर्ता उचित शर्मा ने की थी। इस शिकायत को आधार बनाकर सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एसीबी को अधिकृत किया है। इधर सरकार के इस आदेश को चुनौती देते हुए यास्मीन सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, जिस पर आज हाईकोर्ट ने फिलहाल एसीबी की जांच पर रोक लगा दी है,वहीं मामले में अगली सुनवाई 10 फरवरी की तारीख तय किया है।

 

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