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14-09-2019
पृथ्वी की ओर बढ़ रहे हैं दो धूमकेतु, बुर्ज खलीफा जितना बड़ा है आकार

नई दिल्ली। दो बड़े धूमकेतु पृथ्वी की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं हालांकि ये पृथ्वी से टकराएंगे नहीं बल्कि नजदीक से गुजर जाएंगे। अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने बताया है कि इन धूमकेतुओं का आकार बुर्ज खलीफा जितना बड़ा है। बता दें कि बुर्ज खलीफा दुनिया की सबसे ऊंची इमारत है। पहली बार है जब कोई धूमकेतु पृथ्वी के इतने नजदीक से गुजरने वाला है। नासा ने ऐसी किसी भी आशंका को खारिज कर दिया है कि ये धूमकेतु हमारे ग्रह के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। ये धरती से करीब 3.5 मिलियन मील की दूरी से गुजर जाएंगे। नासा के मुताबिक जब से सोलर सिस्टम का निर्माण हुआ है तभी से ये धूमकेतु ऐसे ही हैं। इस बीच एक अन्य धूमकेतु सूरज की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इस धूमकेतु को हाल ही में तलाश किया गया है। हालांकि ये वाला धूमकेतु पृथ्वी से काफी दूर से गुजरेगा। माना जा रहा है कि ये सूरज से टकराने के बाद एक बार फिर से अंतरिक्ष में चला जाएगा।

06-08-2019
चंद्रयान-2 पहुंचा चंद्रमा के पास, पांचवी बार पृथ्वी की कक्षा सफलतापूर्वक बदली

नई दिल्ली। चंद्रयान-2 ने मंगलवार को दोपहर बाद पृथ्वी की कक्षा पांचवी बार सफलतापूर्वक बदली। इसके साथ ही अब यह चंद्रमा के और पास पहुंच गया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) ने ट्वीट करके कहा,“आज चंद्रयान-2 ने पांचवीं बार पृथ्वी की कक्षा बदली। चंद्रयान-2 ने मंगलवार को अपराह्न तीन बजकर चार मिनट पर पांचवीं बार सफलतापूर्व कक्षा बदली। उन्होंने कहा कि चंद्रयान सभी मापदंड़ों पर सही ढ़ंग से काम कर रहा है। इससे पहले 24 जुलाई को अपराह्न 2.52 बजे पहली बार चंदयान ने कक्षा बदली थी। इसके बाद 26 जुलाई को दूसरी बार,29 जुलाई को तीसरी बार और दो अगस्त को चौथी बार चंद्रयान ने पृथ्वी की कक्षा बदली थी। चंद्रयान-2 का 22 जुलाई को दोपहर 2.43 बजे श्रीहरिकोटा (आंध्रप्रदेश) के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपण हुआ था, जिसके 16 मिनट बाद ही यान सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में पहुंच गया था। चंद्रयान-2 में ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) शामिल हैं, जो 48 दिन में तीन लाख 844 किमी की यात्रा पूरी करके चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा। स्वदेशी तकनीक से निर्मित चंद्रयान-2 में कुल 13 पेलोड हैं। आठ ऑर्बिटर में, तीन पेलोड लैंडर ‘विक्रम’ और दो पेलोड रोवर ‘प्रज्ञान’ में हैं। पांच पेलोड भारत के, तीन यूरोप, दो अमेरिका और एक बुल्गारिया के हैं। चंद्रयान-2 के 20 सितंबर को चांद की सतह पर उतरने की संभावना है और चांद की कक्षा में पहुंचने के बाद ऑर्बिटर एक साल तक काम करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य पृथ्वी और लैंडर के बीच संपर्क स्थापित करना है।

 

04-08-2019
चंद्रयान-2 के कैमरे से ऐसी दिखती है पृथ्वी

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चंद्रयान-2 द्वारा ली गई पृथ्वी की कुछ सुंदर तस्वीरें रविवार को जारी की। इसरो ने ट्विटर पर चंद्रयान-2 के एलआई4 कैमरे से ली गई पांच तस्वीरें जारी की है। इसरो ने ट्वीट कर कहा, “यह चंद्रयान-2 द्वारा ली गई पृथ्वी की सुंदर तस्वीरों का पहला सेट है। गौरतलब है कि देश के चंद्रमा के लिए दूसरे महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 को 22 जुलाई को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया गया था। वह 20 अगस्त को चंद्रमा की कक्षा में पहुंचेगा। 

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