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01-08-2020
सुशांत सिंह मामले में रिया चक्रवर्ती की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 5 अगस्त को करेगा सुनवाई

नई दिल्ली। सुशांत सिंह राजपूत आत्महत्या मामले में पटना में दर्ज प्राथमिकी मुंबई स्थानांतरित करने के लिए एक्‍ट्रेस रिया चक्रवर्ती की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 5 अगस्त को सुनवाई करेगा। शीर्ष न्यायालय की वेबसाइट पर मौजूद सूची के मुताबिक चक्रवर्ती की मामले को स्थानांतरित करने वाली याचिका पर सुनवाई बुधवार को न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय की पीठ के समक्ष होगी। बिहार सरकार के बाद शुक्रवार को महाराष्ट्र सरकार ने कैविएट दाखिल की। महाराष्ट्र सरकार ने भी न्यायालय से अनुरोध किया है कि इस याचिका पर कोई भी आदेश देने से पहले उसका पक्ष भी सुना जाये। बिहार सरकार और सुशांत सिंह राजपूत के पिता द्वारा न्यायालय में कैविएट दाखिल किये जाने के बाद महाराष्ट्र सरकार के इस कदम का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि रिया चक्रवर्ती की स्थानांतरण याचिका पर उसका पक्ष सुने बगैर कोई भी आदेश नहीं दिया जाए। शीर्ष अदालत में अपनी याचिका में चक्रवर्ती ने आरोप लगाया कि राजपूत के पिता ने बिहार के पटना में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया।

रिया ने अपनी याचिका में कहा कि वह और राजपूत लिव-इन-रिलेशनशिप में थे। राजपूत की मौत तथा खुद उन्हें हत्या और बलात्कार की धमकियां मिलने के बाद से वह गहरे सदमे में हैं। उन्होंने याचिका में कहा, ”यह जिक्र करना मुनासिब होगा कि मृतक और याचिकाकर्ता आठ जून 2020 तक करीब एक वर्ष से लिव-इन-रिलेशनशिप में रह रहे थे, उसके बाद याचिकाकर्ता मुंबई में अपने आवास पर अस्थायी रूप से चली गई थीं।” चक्रवर्ती ने याचिका में यह भी कहा, ”राजपूत पिछले कुछ समय से अवसाद में थे, इसके लिए दवाएं ले रहे थे और 14 जून 2020 की सुबह उन्होंने बांद्रा स्थित आवास पर खुदकुशी कर ली थी।” उन्होंने कहा कि जब घटना पटना में नहीं हुई तो वहां जांच शुरू करना गलत है।

 

31-07-2020
सुशांत सिंह राजपूत मामले में महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की कैविएट

नई दिल्ली। सुशांत सिंह राजपूत मामले में अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती की याचिका पर पक्ष रखने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की है। राज्य सरकार चाहती है कि रिया की याचिका पर कोई भी आदेश पारित करने से पहले उसका पक्ष भी सुना जाए। इसके पहले बिहार सरकार और सुशांत के पिता भी कैविएट दाखिल कर चुके हैं। दरअसल, दिवंगत सुशांत सिंह राजपूत के पिता कृष्ण कुमार सिंह ने रिया चक्रवर्ती के खिलाफ पटना में एफआईआर दर्ज करवाई है। इसी केस को मुंबई ट्रांसफर कराने की मांग करते हुए रिया चक्रवर्ती ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। रिया की याचिका पर 5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। इसको लेकर बिहार सरकार का कहना है कि इस याचिका का विरोध करेंगे। राज्य के महाधिवक्ता ललित किशोर ने कहा कि शीर्ष अदालत में मुकुल रोहतगी राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगे।
 

12-06-2020
काशी-मथुरा विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका, प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट को दी गई चुनौती

नई दिल्ली। अयोध्या विवाद के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में काशी-मथुरा विवाद पर भी याचिका दाखिल की गई है। इस याचिका में प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 को चुनौती दी गई है। हिंदू पुजारियों के संगठन विश्व भद्र पुजारी पुरोहित महासंघ ने इस एक्ट के प्रावधान को चुनौती दी है।इस याचिका में काशी व मथुरा विवाद को लेकर कानूनी कार्रवाई को फिर से शुरू करने की मांग की गई है। याचिका में जिस प्लेसेज आफ वरशिप एक्ट को चुनौती दी गई है उसमें कहा गया है कि 15 अगस्त, 1947 को जो धार्मिक स्थल जिस संप्रदाय का था वो आज, और भविष्य में, भी उसी का रहेगा।हालांकि अयोध्या विवाद को इससे बाहर रखा गया क्योंकि उस पर कानूनी विवाद पहले का चल रहा था।

याचिका में कहा गया है कि इस एक्ट को कभी चुनौती नहीं दी गई और ना ही किसी कोर्ट ने न्यायिक तरीके से इस पर विचार किया। अयोध्या फैसले में भी संविधान पीठ ने इस पर सिर्फ टिप्पणी की थी, इसलिए जरूरी है कि इस याचिका पर विचार किया जाए।उधर अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास की तैयारी पूरी हो चुकी है। मन्दिर निर्माण से पहले समतलीकरण का काम पूरा होने को है। मंदिर का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों से सम्पन्न कराने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए श्रीराजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्यों ने प्रधानमंत्री से मुलाकात कर उनको राम मंदिर के शिलान्यास कार्यक्रम में शिरकत करने का आमंत्रण दिया है। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री ने आमंत्रण स्वीकार भी कर लिया है।

02-06-2020
देश का नाम 'इंडिया' की जगह 'भारत' करने की मांग, सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर सुनवाई स्थगित

नई दिल्ली। देश के नाम को 'इंडिया' के बजाए 'भारत' से संबोधित किए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर मंगलवार को सुनवाई टल गई। कोर्ट ने इसकी सुनवाई के लिए अगली तारीख भी नहीं दी है। इस याचिका पर प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई होनी थी। लेकिन सीजेआई बोबडे के मंगलवार को अवकाश पर होने की वजह से इसे टाल दिया गया। देश की शीर्ष अदालत में दायर इस याचिका में कहा गया है कि संविधान के पहले अनुच्छेद में लिखा है कि इंडिया यानी भारत। ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि जब देश एक है तो उसके दो नाम क्यों है? एक ही नाम का प्रयोग क्यों नहीं किया जाता है? याचिकाकर्ता का कहना है कि इंडिया शब्द से गुलामी झलकती है और यह भारत की गुलामी का निशान है। इसलिए इस…

30-04-2020
व्यापारी की याचिका पर कोर्ट ने कहा, अभ्यावेदन पर नियमानुसार निर्णय ले शासन

रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शासन को लॉक डाउन में फंसे व्यापारी को उत्तरप्रदेश जाने की अनुमति देने के लिए पेश अभ्यावेदन पर नियमानुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया है।बता दें कि याचिकाकर्ता मथुरा निवासी दीपक कुमार शर्मा व्यवसाय के सिलसिले में 20 मार्च को बिलासपुर आए थे। लॉक डाउन के कारण वे यहीं फंस गए। उन्होंने कलेक्टर को स्वयं के वाहन से वापस अपने घर मथुरा जाने की अनुमति प्रदान करने आवेदन दिया। अनुमति नहीं मिलने पर उन्होंने अधिवक्ता धीरज वानखेडे के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। गुरुवार को याचिका में सुनवाई हुई। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा केंद्र व् राज्य शासन का इस संबंध में गाइड लाइन जारी हुआ है। याचिकाकर्ता को अभ्यावेदन प्रस्तुत करने एवं शासन को इस पर नियमानुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

 

20-04-2020
 विजय माल्या को झटका, लंदन की अदालत ने खारिज की प्रत्यर्पण के खिलाफ दायर याचिका

नई दिल्ली। लंदन की अदालत ने विजय माल्या की भारत प्रत्यपर्ण के खिलाफ दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया है। भारतीय बैंकों का 9000 करोड़ रुपए लेकर फरार हो चुके किंशफिशर के मालिक माल्या ने लंदन की अदालत में भारत में प्रत्यर्पण के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसे सोमवार को कोर्ट ने खारिज कर दिया। विजय माल्या ने इस साल फरवरी में भारत में अपने प्रत्यर्पण के खिलाफ लंदन की उच्च न्यायालय में अपील की थी। इसपर आज फैसला आया है, जो माल्या के पक्ष में नहीं रहा।लंदन रॉयल कोर्ट में लॉर्ड जस्टिस स्टीफन इरविन और जस्टिस एलिजाबेथ लिंग ने अपना फैसला सुनाते हुए माल्या की अपील खारिज कर दी। इस फैसले के साथ ही भगोड़ा घोषित किए जा चुके शराब कारोबारी विजय माल्या की कोशिशे नाकाम हो गई। वहीं इस फैसले के बाद अब माल्या के प्रत्यर्पण पर अंतिम फैसला वहां की गृह सचिव प्रीति पटेल के पास जाएगा। बता दें कि माल्या ने हाल ही में ट्वीट कर जानकारी दी कि वो बैंकों का पैसा चुकाना चाहते हैं।

 

05-03-2020
हाईकोर्ट ने खारिज किया बोर्ड ऑफ डायरेक्टर का फैसला, मामला जिला सह.केंद्रीय बैंक में सीईओ की नियुक्ति का

दुर्ग। जिला सहकारी बैंक के तत्कालीन सीईओ व्ही.के. गुप्ता के ईओडब्लू की गिरफ्त में आने के बाद रिक्त हुए पद पर चेयरपर्सन प्रीतपाल बेलचंदन द्वारा 10 अगस्त 2017 को लेखाधिकारी एसके निवसकर को बैंक का सीईओ नियुक्त कर दिया गया था। इस नियुक्ति पर संचालक मंडल की सहमति भी ले ली गई थी। संचालक मंडल द्वारा सीईओ पद पर की गई इस नियुक्ति को अमान्य करते हुए छग राज्य सहकारी बैंक महाप्रबंधक द्वारा एस.के. जोशी की नियुक्ति सीईओ पद पर की गई थी। इस पर आपत्ति करते हुए इस निर्णय को उच्च न्यायालय में चुनौति दी गई थी। उच्च न्यायालय की सिंगल बेंच ने 19 जनवरी 2018 को दिए गए अपने फैसले में संचालक मंडल द्वारा की गई नियुक्ति को अवैधानिक करार दिया गया था। इस पर की गई अपील की सुनवाई पश्चात डिविजन बेंच ने सिंगल बेंच के निर्णय को बदलते हुए संचालक मंडल द्वारा लिए गए निर्णय को विधि सम्मत माना था। 

उच्च न्यायालय की डिविजन बेंच के इस फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत में अपील की गई थी। इस पर सुनवाई न्यायमूर्ति डॉ. धनंजय वाय. चंद्रचूर्ण व अजय रस्तोगी की संयुक्त खंडपीठ में की गई। खंडपीठ ने एसके जोशी के पक्ष में निर्णय देते हुए सिंगल बेंच हाईकोर्ट छत्तीसगढ़ के दिए गए फैसले को सही ठहराया है। पदभार बिना लौटाए जाने के बाद जोशी ने संचालक मंडल की नियुक्ति को चैलेंज करते हुए हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। उन्होंने निवसरकर की पदस्थापना को अवैध करार देते हुए मामले में फैसला तक नियुक्त पर रोक लगाने की मांग की थी। इस पर कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर नियुक्ति पर स्टे आर्डर जारी किया। इसके बाद जोशी ने 5 मई 2017 को पदभार ग्रहण किया था।

 

01-03-2020
हाईकोर्ट ने जिला पंचायत सीईओ को थमाया नोटिस, दिए यह निर्देश...

रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महिला व्याख्याता की याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला पंचायत सीईओ को नोटिस जारी कर 45 दिनों के अंदर एरियस की राशि भुगतान करने के निर्देश दिए है। बता दे कि बिलासपुर की सरकंडा निवासी राजश्री भारद्वाज ने वकील अब्दुल वहाब खान के माध्यम से याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता के अनुसार,वह शासकीय सूरजमल हाईस्कूल बिल्हा में व्याख्याता के पद पर वर्तमान में कार्यरत है। जिसकी एरियस की राशि का भुगतान नहीं किया गया है। 

29-02-2020
ट्रस्ट की याचिका पर हाईकोर्ट में फैसला सुरक्षित

रायपुर। बिलासपुर हाइकोर्ट ने मिक्की मेमोरियल ट्रस्ट की याचिका पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने फैसला अपने पास सुरक्षित रख लिया है। ट्रस्ट की याचिका को एकलपीठ ने खारिज कर दिया। इसके बाद एकलपीठ के फैसले के खिलाफ ट्रस्ट ने पुर्नयाचिका दायर की है। ट्रस्ट ने एकलपीठ के फैसले के बाद पुर्नयाचिका अपील प्रस्तुत की थी। याचिकाकर्ता ट्रस्ट ने एमजीएम अस्पताल के निरीक्षण को लेकर विधि सम्मत कार्यवाही ना करने का आरोप लगाया था। इससे दुर्भावना प्रकट हो रही है। जाहिर है कि ऐसी स्थिति में न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती है। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन व जस्टिस पीपी साहू की खंडपीठ में हुई रिट अपील की सुनवाई के बाद खंडपीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।

18-02-2020
टेलीकॉम उद्योगों को लगने वाला है बड़ा झटका, सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज की वोडाफ़ोन-आइडिया की याचिका

नई दिल्ली। बढ़ती महंगाई की दर से इन दिनों टेलीफोन कंपनियों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। वहीं वोडाफ़ोन आइडिया ने लगातार छठी तिमाही में घाटा उठाया है। सुप्रीम कोर्ट ने वोडाफ़ोन आइडिया की वो याचिका ख़ारिज कर दी है, जिसमे कंपनी ने 2500 करोड़ रुपये सोमवार को और शुक्रवार तक 1000 करोड़ रुपये देने की पेशकश की थी। कंपनी ने अपनी याचिका में ये मांग भी की थी कि उसके खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई न की जाए। जस्टिस अरुण मिश्र की अगुवाई वाली बेंच ने वोडाफ़ोन आइडिया की तरफ से पैरवी कर रहे एडवोकेट मुकुल रोहतगी की दलीलें सोमवार को ख़ारिज कर दी। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने वोडाफ़ोन आइडिया को किसी किस्म की राहत देने से इंकार कर दिया था। ये रक़म भले ही सरकारी राजस्व में अतिरिक्त कमाई के तौर पर दर्ज होगी पर ये माना जा रहा है कि पूरे टेलीकॉम उद्योग को इससे बड़ा झटका लगने वाला है।

 

17-02-2020
अब सेना में महिलाओं को मिलेगा स्थायी कमीशन, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई मुहर

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने की मांग वाली याचिका पर मुहर लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि केंद्र सेना में कंबैट इलाकों को छोड़कर सभी इलाकों में महिलाओं को स्थाई कमान देने के लिए बाध्य है। अदालत ने केंद्र से कहा कि 2010 में दिल्ली उच्च न्यायलय के आदेश के बाद इसे लागू किया जाना चाहिए था। अदालत ने कहा कि सामाजिक और मानसिक कारण बताकर महिलाओं को इस अवसर से वंचित करना ना केवल भेदभावपूर्ण है, बल्कि अस्वीकार्य भी है। अदालत ने केंद्र को अपने नजरिए और मानसिकता में बदलाव लाने को कहा है।

बता दें कि केन्द्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट के मार्च 2010 के उस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें हाईकोर्ट ने सेना को अपनी सभी महिला अफसरों को स्थायी कमीशन देने का आदेश दिया था। केंद्र का कहना था कि भारतीय सेना में यूनिट पूरी तरह पुरुषों की है और पुरुष सैनिक महिला अधिकारियों को स्वीकार नहीं कर पाएंगे। शीर्ष अदालत ने दिल्ली उच्च न्यायालयों के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि महिलाओं के सेना के 10 विभागों में स्थायी कमिशन दिया जाए। अदालत ने सरकार के महिलाओं को कमांड न देने को लेकर दिए तर्क को अतार्किक और समानता के अधिकार के खिलाफ बताया। अदालत ने कहा कि सशस्त्र बलों में लिंग आधारित भेदभाव खत्म करने के लिए सरकार की ओर से मानसिकता में बदलाव जरूरी है।

 

12-02-2020
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के केस की सुनवाई टली

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को कश्मीर पब्लिक सेफ्टी एक्ट, 1978 के तहत नजरबंद रखा गया है। इस मामले में उमर अब्दुल्ला की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अब शुक्रवार को सुनवाई करेगा। इस मामले की सुनवाई आज 12 फरवरी को होनी थी, लेकिन आज मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस शांतनागौदर ने खुद को सुनवाई से अलग किया। अब शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की एक अलग बेंच इस याचिका पर सुनवाई करेगी। उमर अब्दुल्ला पिछले कई महीनों से हिरासत में हैं।
बता दें कि उमर अब्दुल्ला की बहन सारा पायलट ने सरकार के फैसले के खिलाफ याचिका दाखिल की थी। अनुच्छेद 370 हटने के बाद 5 अगस्त से उमर अब्दुल्ला को हिरासत में रखा गया था। बीते दिनों ही उन्हें अपने आवास पर नजरबंद किया गया था। सारा पायलट ने उमर अब्दुल्ला को पांच फरवरी को पीएसए के अंतर्गत रखने के आदेश को असंवैधानिक बताया और कहा कि यह मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन करता है।

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