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26-10-2020
नीरव मोदी की जमानत याचिका ब्रिटेन की अदालत ने की सातवीं बार खारिज

नई दिल्ली। ब्रिटेन की एक अदालत ने भगोड़े नीरव मोदी की जमानत याचिका सातवीं बार खारिज कर दी है। बता दें कि नीरव मोदी भारत में पंजाब नेशनल बैंक से 14 हजार करोड़ रुपए से अधिक के लोन की धोखाधड़ी और मनी-लॉन्ड्रिंग के मामले का आरोपी है और उसे भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। वहीं इससे पहले इस महीने की शुरुआत में ब्रिटेन की अदालत ने चल रही प्रत्यर्पण की सुनवाई को तीन नवंबर तक के लिए बढ़ा दिया था, लेकिन नीरव मोदी बार-बार जमानत पाने के लिए याचिका लगा रहा है। हालांकि उसे इस बार भी सफलता नहीं मिल सकी। गौरतलब है कि लंदन की पुलिस ने 19 मार्च को नीरव मोदी को गिरफ्तार किया था और उसके बाद से वह लंदन की वैंड्सवर्थ जेल में बंद है। वहीं वर्ष 2018 में पीएनबी घोटाले में नाम सामने आने से कुछ महीने पहले ही वह भारत से फरार हो गया था। भारत सरकार द्वारा नीरव मोदी के प्रत्यर्पण की हरसंभव कोशिश की जा रही है, ताकि जल्द से जल्द उसे भारत लाया जा सके।

 

 

14-10-2020
प्रॉपर्टी टैक्स के खिलाफ रजनीकांत ने दर्ज की थी याचिका, मद्रास हाईकोर्ट ने अभिनेता को दी चेतावनी

चैन्नई। साउथ सुपरस्टार रजनीकांत को बुधवार को उनेक प्रॉपर्टी टैक्स केस को लेकर मद्रास हाईकोर्ट ने कड़े शब्दों में फटकार लगाईं है। एक्टर के राघवेंद्र कल्याण मंडपम मैरिज हॉल पर ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन ने 6.5 लाख का संपत्ति कर जोड़ा था,जिसे लेकर वो नाराज थे। इस बात को लेकर उन्होंने मद्रास उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी। आज इस मामले पर सुनवाई के दौरान मद्रास उच्च न्यायालय की जस्टिस अनीता सुमंत ने रजनीकांत को चेतावनी देते हुए कहा कि टैक्स की मांग को लेकर आनन-फानन में अदालत दौड़ने के लिए उनपर अतिरिक्त खर्च लागू की जा सकती है। इस मामले में उनके वकील ने अदालत को जवाब देते हुए कहा कि इस केस को वापस लेने के लिए उन्हें समय चाहिए। बताया जा रहा है कि रजनीकांत का ये मैरिज हॉल तमिलनाडू के चेन्नई स्थित कोडमबक्कम में है,जिसपर 6.5 लाख का प्रॉपर्टी टैक्स लागू किया गया है। इस बात को लेकर नाराज रजनीकांत ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। एक्टर का कहना है कि कोरोना वायरस महामारी के चलते लगाए गए लॉकडाउन के कारण 24 मार्च, 2020 से ही उनका ये हॉल बंद पड़ा है। इसी के चलते वें इससे किसी भी तरह की कमाई नहीं कर पाए हैं। इसलिए उनकी इस संपत्ति पर लगाए गए इस टैक्स को खारिज करना चाहिए।

 

 

12-10-2020
फिल्म इंडस्ट्री की छवि धूमिल करने से नाराज सिनेमा जगत ने दिल्ली हाई कोर्ट में दायर की याचिका

मुंबई। फिल्म कंपनियों और संस्थाओं ने दिल्ली हाई कोर्ट में सोमवार को फिल्म इंडस्ट्री की छवि बिगाड़ने को लेकर याचिका दायर की है। दरअसल यह याचिका बॉलीवुड के खिलाफ गैर जिम्मेदाराना और अपमानजनक टिप्पणी करने से रोकने के लिए की गई है। याचिका दायर करने वालों में शाहरुख खान, सलमान खान, आमिर खान, आदित्य चोपड़ा, फरहान अख्तर और अजय देवगन की कम्पनियों समेत कई बड़े प्रोडक्शन हाउसेज शामिल हैं। याचिका में ना सिर्फ मीडिया ट्रायल को रोकने बल्कि न्यूज़ चैनल्स से प्रोग्राम कोड का पालन करते हुए छवि ख़राब करने वाले कंटेंट को हटाने की भी मांग की गई है। आरोप है कि चैनलों ने बॉलीवुड को लेकर भद्दी भाषा इस्तेमाल करते हुए छवि बिगाड़ने की कोशिश की है। याचिका के लिए 34 बड़े प्रोडक्शन हाउस और 4 फ़िल्म संस्थाएं एक साथ आई हैं। याचिका दायर करने वालों में मैकगफिन पिक्चर्स, नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट, कबीर खान फिल्म्स, लव फिल्म्स,राकेश ओमप्रकाश मेहरा पिक्चर्स, रेड चिलीज एंटरटेनमेंट, रिलायंस बिग एंटरटेनमेंट, रील लाइफ प्रोडक्शंस, रोहित शेट्टी पिक्चर्स, रॉय कपूर प्रोडक्शंस, सलमान खान वेंचर्स, सोहेल खान प्रोडक्शंस, वन इंडिया स्टोरीज, द प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया, द सिने ऐंड टीवी आर्टिस्ट एसोसिएशन, द फिल्म ऐंड टीवी प्रोड्यूसर्स काउंसिल स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन शामिल हैं। इसके साथ ही आमिर खान प्रोडक्शंस, ऐड-लैब फिल्म्स, अजय देवगन फिल्म्स, आंदोलन फिल्म्स, अनिल कपूर फिल्म ऐंड कम्युनिकेशन नेटवर्क, अरबाज खान प्रोडक्शंस, आशुतोष गोवारिकर प्रोडक्शंस, बीएसके नेटवर्क ऐंड एंटरटेनमेंट, केप ऑफ गुड फिल्म्स, क्लीन स्लेट फिल्म्स, धर्मा प्रोडक्शंस, एमे एंटरटेनमेंट ऐंड मोशन पिक्चर्स, एक्सेल एंटरटेनमेंट, फिल्मक्राफ्ट प्रोडक्शंस, होम प्रोडक्शन,  सिख्या एंटरटेनमेंट, टाइगर बेबी डिजिटल, विनोद चोपड़ा फिल्म्स, विशाल भारद्वाज फिल्म और यशराज फिल्म्स शामिल है।

 

01-08-2020
सुशांत सिंह मामले में रिया चक्रवर्ती की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 5 अगस्त को करेगा सुनवाई

नई दिल्ली। सुशांत सिंह राजपूत आत्महत्या मामले में पटना में दर्ज प्राथमिकी मुंबई स्थानांतरित करने के लिए एक्‍ट्रेस रिया चक्रवर्ती की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 5 अगस्त को सुनवाई करेगा। शीर्ष न्यायालय की वेबसाइट पर मौजूद सूची के मुताबिक चक्रवर्ती की मामले को स्थानांतरित करने वाली याचिका पर सुनवाई बुधवार को न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय की पीठ के समक्ष होगी। बिहार सरकार के बाद शुक्रवार को महाराष्ट्र सरकार ने कैविएट दाखिल की। महाराष्ट्र सरकार ने भी न्यायालय से अनुरोध किया है कि इस याचिका पर कोई भी आदेश देने से पहले उसका पक्ष भी सुना जाये। बिहार सरकार और सुशांत सिंह राजपूत के पिता द्वारा न्यायालय में कैविएट दाखिल किये जाने के बाद महाराष्ट्र सरकार के इस कदम का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि रिया चक्रवर्ती की स्थानांतरण याचिका पर उसका पक्ष सुने बगैर कोई भी आदेश नहीं दिया जाए। शीर्ष अदालत में अपनी याचिका में चक्रवर्ती ने आरोप लगाया कि राजपूत के पिता ने बिहार के पटना में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया।

रिया ने अपनी याचिका में कहा कि वह और राजपूत लिव-इन-रिलेशनशिप में थे। राजपूत की मौत तथा खुद उन्हें हत्या और बलात्कार की धमकियां मिलने के बाद से वह गहरे सदमे में हैं। उन्होंने याचिका में कहा, ”यह जिक्र करना मुनासिब होगा कि मृतक और याचिकाकर्ता आठ जून 2020 तक करीब एक वर्ष से लिव-इन-रिलेशनशिप में रह रहे थे, उसके बाद याचिकाकर्ता मुंबई में अपने आवास पर अस्थायी रूप से चली गई थीं।” चक्रवर्ती ने याचिका में यह भी कहा, ”राजपूत पिछले कुछ समय से अवसाद में थे, इसके लिए दवाएं ले रहे थे और 14 जून 2020 की सुबह उन्होंने बांद्रा स्थित आवास पर खुदकुशी कर ली थी।” उन्होंने कहा कि जब घटना पटना में नहीं हुई तो वहां जांच शुरू करना गलत है।

 

31-07-2020
सुशांत सिंह राजपूत मामले में महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की कैविएट

नई दिल्ली। सुशांत सिंह राजपूत मामले में अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती की याचिका पर पक्ष रखने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की है। राज्य सरकार चाहती है कि रिया की याचिका पर कोई भी आदेश पारित करने से पहले उसका पक्ष भी सुना जाए। इसके पहले बिहार सरकार और सुशांत के पिता भी कैविएट दाखिल कर चुके हैं। दरअसल, दिवंगत सुशांत सिंह राजपूत के पिता कृष्ण कुमार सिंह ने रिया चक्रवर्ती के खिलाफ पटना में एफआईआर दर्ज करवाई है। इसी केस को मुंबई ट्रांसफर कराने की मांग करते हुए रिया चक्रवर्ती ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। रिया की याचिका पर 5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। इसको लेकर बिहार सरकार का कहना है कि इस याचिका का विरोध करेंगे। राज्य के महाधिवक्ता ललित किशोर ने कहा कि शीर्ष अदालत में मुकुल रोहतगी राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगे।
 

12-06-2020
काशी-मथुरा विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका, प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट को दी गई चुनौती

नई दिल्ली। अयोध्या विवाद के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में काशी-मथुरा विवाद पर भी याचिका दाखिल की गई है। इस याचिका में प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 को चुनौती दी गई है। हिंदू पुजारियों के संगठन विश्व भद्र पुजारी पुरोहित महासंघ ने इस एक्ट के प्रावधान को चुनौती दी है।इस याचिका में काशी व मथुरा विवाद को लेकर कानूनी कार्रवाई को फिर से शुरू करने की मांग की गई है। याचिका में जिस प्लेसेज आफ वरशिप एक्ट को चुनौती दी गई है उसमें कहा गया है कि 15 अगस्त, 1947 को जो धार्मिक स्थल जिस संप्रदाय का था वो आज, और भविष्य में, भी उसी का रहेगा।हालांकि अयोध्या विवाद को इससे बाहर रखा गया क्योंकि उस पर कानूनी विवाद पहले का चल रहा था।

याचिका में कहा गया है कि इस एक्ट को कभी चुनौती नहीं दी गई और ना ही किसी कोर्ट ने न्यायिक तरीके से इस पर विचार किया। अयोध्या फैसले में भी संविधान पीठ ने इस पर सिर्फ टिप्पणी की थी, इसलिए जरूरी है कि इस याचिका पर विचार किया जाए।उधर अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास की तैयारी पूरी हो चुकी है। मन्दिर निर्माण से पहले समतलीकरण का काम पूरा होने को है। मंदिर का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों से सम्पन्न कराने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए श्रीराजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्यों ने प्रधानमंत्री से मुलाकात कर उनको राम मंदिर के शिलान्यास कार्यक्रम में शिरकत करने का आमंत्रण दिया है। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री ने आमंत्रण स्वीकार भी कर लिया है।

02-06-2020
देश का नाम 'इंडिया' की जगह 'भारत' करने की मांग, सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर सुनवाई स्थगित

नई दिल्ली। देश के नाम को 'इंडिया' के बजाए 'भारत' से संबोधित किए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर मंगलवार को सुनवाई टल गई। कोर्ट ने इसकी सुनवाई के लिए अगली तारीख भी नहीं दी है। इस याचिका पर प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई होनी थी। लेकिन सीजेआई बोबडे के मंगलवार को अवकाश पर होने की वजह से इसे टाल दिया गया। देश की शीर्ष अदालत में दायर इस याचिका में कहा गया है कि संविधान के पहले अनुच्छेद में लिखा है कि इंडिया यानी भारत। ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि जब देश एक है तो उसके दो नाम क्यों है? एक ही नाम का प्रयोग क्यों नहीं किया जाता है? याचिकाकर्ता का कहना है कि इंडिया शब्द से गुलामी झलकती है और यह भारत की गुलामी का निशान है। इसलिए इस…

30-04-2020
व्यापारी की याचिका पर कोर्ट ने कहा, अभ्यावेदन पर नियमानुसार निर्णय ले शासन

रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शासन को लॉक डाउन में फंसे व्यापारी को उत्तरप्रदेश जाने की अनुमति देने के लिए पेश अभ्यावेदन पर नियमानुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया है।बता दें कि याचिकाकर्ता मथुरा निवासी दीपक कुमार शर्मा व्यवसाय के सिलसिले में 20 मार्च को बिलासपुर आए थे। लॉक डाउन के कारण वे यहीं फंस गए। उन्होंने कलेक्टर को स्वयं के वाहन से वापस अपने घर मथुरा जाने की अनुमति प्रदान करने आवेदन दिया। अनुमति नहीं मिलने पर उन्होंने अधिवक्ता धीरज वानखेडे के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। गुरुवार को याचिका में सुनवाई हुई। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा केंद्र व् राज्य शासन का इस संबंध में गाइड लाइन जारी हुआ है। याचिकाकर्ता को अभ्यावेदन प्रस्तुत करने एवं शासन को इस पर नियमानुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

 

20-04-2020
 विजय माल्या को झटका, लंदन की अदालत ने खारिज की प्रत्यर्पण के खिलाफ दायर याचिका

नई दिल्ली। लंदन की अदालत ने विजय माल्या की भारत प्रत्यपर्ण के खिलाफ दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया है। भारतीय बैंकों का 9000 करोड़ रुपए लेकर फरार हो चुके किंशफिशर के मालिक माल्या ने लंदन की अदालत में भारत में प्रत्यर्पण के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसे सोमवार को कोर्ट ने खारिज कर दिया। विजय माल्या ने इस साल फरवरी में भारत में अपने प्रत्यर्पण के खिलाफ लंदन की उच्च न्यायालय में अपील की थी। इसपर आज फैसला आया है, जो माल्या के पक्ष में नहीं रहा।लंदन रॉयल कोर्ट में लॉर्ड जस्टिस स्टीफन इरविन और जस्टिस एलिजाबेथ लिंग ने अपना फैसला सुनाते हुए माल्या की अपील खारिज कर दी। इस फैसले के साथ ही भगोड़ा घोषित किए जा चुके शराब कारोबारी विजय माल्या की कोशिशे नाकाम हो गई। वहीं इस फैसले के बाद अब माल्या के प्रत्यर्पण पर अंतिम फैसला वहां की गृह सचिव प्रीति पटेल के पास जाएगा। बता दें कि माल्या ने हाल ही में ट्वीट कर जानकारी दी कि वो बैंकों का पैसा चुकाना चाहते हैं।

 

05-03-2020
हाईकोर्ट ने खारिज किया बोर्ड ऑफ डायरेक्टर का फैसला, मामला जिला सह.केंद्रीय बैंक में सीईओ की नियुक्ति का

दुर्ग। जिला सहकारी बैंक के तत्कालीन सीईओ व्ही.के. गुप्ता के ईओडब्लू की गिरफ्त में आने के बाद रिक्त हुए पद पर चेयरपर्सन प्रीतपाल बेलचंदन द्वारा 10 अगस्त 2017 को लेखाधिकारी एसके निवसकर को बैंक का सीईओ नियुक्त कर दिया गया था। इस नियुक्ति पर संचालक मंडल की सहमति भी ले ली गई थी। संचालक मंडल द्वारा सीईओ पद पर की गई इस नियुक्ति को अमान्य करते हुए छग राज्य सहकारी बैंक महाप्रबंधक द्वारा एस.के. जोशी की नियुक्ति सीईओ पद पर की गई थी। इस पर आपत्ति करते हुए इस निर्णय को उच्च न्यायालय में चुनौति दी गई थी। उच्च न्यायालय की सिंगल बेंच ने 19 जनवरी 2018 को दिए गए अपने फैसले में संचालक मंडल द्वारा की गई नियुक्ति को अवैधानिक करार दिया गया था। इस पर की गई अपील की सुनवाई पश्चात डिविजन बेंच ने सिंगल बेंच के निर्णय को बदलते हुए संचालक मंडल द्वारा लिए गए निर्णय को विधि सम्मत माना था। 

उच्च न्यायालय की डिविजन बेंच के इस फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत में अपील की गई थी। इस पर सुनवाई न्यायमूर्ति डॉ. धनंजय वाय. चंद्रचूर्ण व अजय रस्तोगी की संयुक्त खंडपीठ में की गई। खंडपीठ ने एसके जोशी के पक्ष में निर्णय देते हुए सिंगल बेंच हाईकोर्ट छत्तीसगढ़ के दिए गए फैसले को सही ठहराया है। पदभार बिना लौटाए जाने के बाद जोशी ने संचालक मंडल की नियुक्ति को चैलेंज करते हुए हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। उन्होंने निवसरकर की पदस्थापना को अवैध करार देते हुए मामले में फैसला तक नियुक्त पर रोक लगाने की मांग की थी। इस पर कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर नियुक्ति पर स्टे आर्डर जारी किया। इसके बाद जोशी ने 5 मई 2017 को पदभार ग्रहण किया था।

 

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