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18-05-2020
सीपीआई ने कलेक्टर के नाम एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

बीजापुर। सीपीआई के जिला सचिव कमलेश झड़ी ने ज्ञापन के माध्यम से जिला प्रशासन से ये मांग की है कि विगत दो दिन पहले ग्राम पुसगुड़ी के ग्रामीण पीडीएस के तहत मिलने वाले राशन लेने मोदकपाल राशन की दुकान गए हुए थे। इसकी दूरी करीब 7 किमी है। राशन को लेकर जाते वक्त राशन से भरी ट्रेक्टर पलट गई, जिसमें सवार आंनदराव यालम की मौके पर ही मौत हो गई, अन्य तेरह ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस मामले को लेकर सीपीआई जिला प्रशासन से ये मांग करती है कि मृतक परिवार एवं घायलों को प्रशासन की ओर से उचित मुआवजा कि राशि दी जानी चाहिए जिससे उनकी आर्थिक मदद हो सके, साथ ही हम ये भी माँग करते हैं कि राशन की दुकान गांव से इतने दूरी पर न हो कि ग्रामीणों को आने जाने और राशन निर्यात के परेशनियों का सामना न करना पड़े। भविष्य में ऐसे हादसों का सिकार ग्रामीण न हो। वहीं एसडीएम हेमेंद्र भुआर्य ने आश्वासन देते हुए कहा है कि इस मामले को गम्भीरता से लेते हुए क्लेक्टर से चर्चा कर सड़क बनाना, राशन को गांव तक पहुंचाने जैसे समस्या का जल्द ही निवारण किया जाएगा।

24-02-2020
डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा का वामपंथी पार्टियों ने किया विरोध

गुना। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के विरोध में सीपीआई,सीपीएम एसयू सीआई (कम्युनिस्ट) पार्टी द्वारा संयुक्त रूप से स्थानीय जय स्तंभ चौराहे पर प्रदर्शन कर विरोध जताया गया। इस दौरान ट्रंप के पुतले का दहन किया गया। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सीपीएम के डॉ.विष्णु शर्मा ने कहा कि अमेरिका पिछले 3 साल से भारत के बाजार को अपने डेयरी कृषि व चिकित्सा यन्त्रों  से ज्यादा से ज्यादा भर देने के लिए भारत पर दबाव बनाता रहा है आज जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत दौरे पर आए हैं तो उनका एकमात्र उद्देश्य व्यापारिक समझौते करना। इसके तहत भारत सरकार अमेरिका से दूध और दूध से बनी चीजें पनीर,लस्सी आदि को भारत सरकार भारत में आयात करने की अनुमति देने जा रही है। डॉ. शर्मा ने कहा कि इसके परिणाम घातक होंगे। इन समझौते से देश के 10 करोड़ पशुपालक किसान 4.8 करोड़ देश के कारोबारी का व्यापार तबाह हो जाएगा। सीपीआई से योगेंद्र शर्मा ने कहा कि यह वही अमेरिका है,जो दूसरे गरीब देशों पर खुल्लम-खुल्ला सैनिक हमले करके उन देशों की आजादी और संप्रभुता को पैरों तले रौंदा आया है। अमेरिका हथियारों का सौदागर है। हथियारों से उसकी अर्थ व्यवस्था चलती है। वह अपने हथियारों को बेचता है और इसके लिए वह देशों को आपस में लड़ता है।प्र दर्शन का संचालन लोकेश शर्मा ने किया। प्रदर्शन में लक्ष्मीनारायण नामदेव, कल्याण लोधा सहित कार्यकर्ता उपस्थित थे।

राकेश किरार की रिपोर्ट

14-02-2020
आम आदमी को लगा झटका, थोक महंगाई दर बढ़ी,3.1 प्रतिशत पर पहुंची

नई दिल्ली। थोक महंगाई दर के जारी आंकड़ों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारत सरकार ने थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के आधिकारिक आंकड़े शुक्रवार को जारी किए गए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, थोक मूल्य पर आधारित मुद्रास्फीति जनवरी 2020 में 3.1 फीसदी रही। मासिक थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित वार्षिक मुद्रास्फीति एक साल पहले इसी महीने (जनवरी 2019) के दौरान 2.76 प्रतिशत थी। प्याज और आलू जैसी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते यह इजाफा हुआ है। इससे पिछले महीने दिसंबर 2019 में थोक महंगाई दर 2.59 फीसदी थी।

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान गैर-खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी दिसंबर के 2.32 प्रतिशत से लगभग तीन गुना बढ़कर 7.8 प्रतिशत हो गई। खाद्य वस्तुओं में सब्जियों की कीमतें 52.72 प्रतिशत बढ़ीं,जिसमें सबसे अधिक योगदान प्याज का रहा। इस दौरान प्याज की कीमतों में 293 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई, जबकि इसके बाद आलू की कीमतों में 37.34 प्रतिशत इजाफा हुआ। इस सप्ताह की शुरुआत में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति जनवरी में छह साल के उच्चतम 7.59 प्रतिशत के करीब पहुंच गई थी। इसकी मुख्य वजह सब्जियों और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी रही। यह मई 2014 के बाद से मुद्रास्फीति की उच्चतम दर है, जब यह 8.33 प्रतिशत थी। 

 

07-09-2019
सीपीआई के 25 कार्यकर्ता ने ली कांग्रेस की सदस्यता

दंतेवाड़ा। कांग्रेस सरकार की योजनाओं से प्रभावित होकर शनिवार को सीपीआई के 25 कार्यकर्ता ने कांग्रेस की सदस्यता ली। जिला मुख्यालय से सटे ग्राम पंचायत मड़से में गुमड़ा के भूतपूर्व सरपंच के नेतृत्व में सीपीआई के 25 कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम, बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी, कांग्रेस प्रत्याशी देवती महेंद्र कर्मा, जिलाध्यक्ष विमल सुराना के सामने कांग्रेस में शामिल हुए। बीजापुर विधायक विक्रम मण्डावी ने कहा कि सिर्फ 8 महीने में ही कांग्रेस सरकार अपनी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में सफल रही है। दन्तेवाड़ा उपचुनाव में कांग्रेस को इसका फायदा जरूर मिलेगा।
 

 

05-09-2019
सुप्रीम कोर्ट ने इल्तिजा मुफ्ती को दी मां महबूबा मुफ्ती से मिलने की इजाजत

नई दिल्‍ली। जम्‍मू कश्‍मीर की पूर्व मुख्‍यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा को सुप्रीम कोर्ट ने अपनी मां से मिलने की इजाजत दे दी है। इल्तिजा जिन्‍हें घर में सना के नाम से बुलाया जाता है, उन्‍होंने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। इस याचिका में उन्‍होंने अथॉरिटीज से अपील की थी कि उन्‍हें उनकी मां से मिलने की इजाजत दी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इल्तिज़ा को चेन्नई से श्रीनगर जाने और अपनी मां से मुलाकात की इजाज़त दे दी है। कोर्ट ने साफ किया कि इसके अलावा श्रीनगर में उन्हें कहीं आने-जाने के लिए प्रशासन की इजाज़त लेनी होगी। 

बता दें कि पांच अगस्‍त को घाटी से आर्टिकल 370 को हटाया गया था और उसके एक दिन पहले यानी चार अगस्‍त को घाटी के कुछ नेताओं को नजरबंद किया गया था। इनमें महबूबा के अलावा दो और पूर्व मुख्‍यमंत्री उमर अब्‍दुल्‍ला और उनके पिता फारूक अब्‍दुल्‍ला भी शामिल हैं। इल्तिजा ने अपनी याचिका में कहा है कि उनकी मां की तबियत ठीक नहीं है और पिछले एक माह से उनकी मुलाकात अपनी मां से नहीं हो पाई है। उन्‍हें अपने मां के स्‍वास्‍थ्‍य की चिंता है, जो ठीक नहीं हैं। इल्तिजा के वकील आकाश कामरा ने कहा है कि याचिका बिल्‍कुल उसी तरह की है जो सीपीआई (एम) के महासचिव सीताराम येचुरी की ओर से दायर की गई थी। 28 अगस्‍त को सुप्रीम कोर्ट ने येचुरी की याचिका पर फैसला दिया था और सरकार से कहा था कि उन्‍हें कश्‍मीर जाने दिया जाए। येचुरी ने अपनी पार्टी के नेता मोहम्‍मद युसूफ तारीगामी से मिलने की इजाजत कोर्ट से मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट ने येचुरी को इस शर्त पर कश्‍मीर जाने की इजाजत दी थी कि वह सिर्फ स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़ी चिंताओं पर ही तारीगामी से बातचीत करेंगे।

23-05-2019
बेगूसराय से भाजपा उम्मीदवार गिरिराज सिंह ने कन्हैया कुमार को दी शिकस्त

पटना। बिहार के सबसे हॉट सीट बेगूसराय में भाजपा उम्मीदवार गिरिराज सिंह ने लगभग तीन लाख से ज्यादा मतों से सीपीआई के कन्हैया कुमार को हरा दिया है। शुरुआती दौर में जब यहां के कम्युनिस्ट प्रभाव वाला क्षेत्र बछवाड़ा और तेघड़ा के ईवीएम की गिनती हुई तो कन्हैया कुमार कई बार दूसरे स्थान पर रहे, लेकिन गिरिराज सिंह ने बाद में निर्णायक बढ़त बना ली और अंत में वे तीन लाख के भारी मतों के अंतर से जीतने में कामयाब हो गए। दरअसल बेगूसराय की सीट पर सबसे दिलचस्प चुनावी लड़ाई मानी जा रही थी। कन्हैया कुमार के लिए वामपंथी धड़ों के कई सेलिब्रेटीज भी बेगूसराय पहुंचे, लेकिन कोई रणनीति काम नहीं आई।

27-10-2018
Alliance: बस्तर में सीपीआई, बसपा, जकांछ गठबंधन में दरार 

रायपुर। बस्तर में सीपीआई,बसपा और जकांछ गठबंधन टूटने की कगार पर पहुंच गया है। ये जानकारी पार्टी के जानकार सूत्रों ने दी। उन्होंने बताया कि दरअसल महागठबंधन में  सीपीआई को 2 सीटें मिली थीं, तो वहीं अब वो 5 सीटों पर अपने उम्मीदवारों को उतारने की तैयारी कर रहा है। इसी के बाद से बहुजन समाज पार्टी और सीपीआई दोनों दल एक दूसरे के आमने-सामने आ गए हैं, जिसके चलते दलों में आपस में ही लड़ाई शुरू हो गई है।

पहले क्या तय हुआ था आपस में :

जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे और बहुजन समाज पार्टी के बीच गठबंधन के दौरान अजीत जोगी की पार्टी को 55 सीटें और 35 सीटें बसपा को मिली थी, उसके बाद इस गठबंधन में सीपीआई ने अपनी इंट्री की तो उसे बस्तर संभाग की दंतेवाड़ा और कोंटा विधानसभा की 2 विधानसभा सीटें बसपा के खाते की दे दी गई, लेकिन सीपीआई ने गठबंधन को दरकिनार करते हुए बस्तर संभाग की 5 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशियों को उतार दिया। अब इसके बाद से बसपा और सीपीआई में अंतर्कलह शुरू हो गई है।

ये गठबंधन के नियमों के खिलाफ : बाजपेयी

छत्तीसगढ़ बहुजन समाज पार्टी प्रदेश अध्यक्ष ओपी बाजपेयी का कहना है कि सीपीआई का कदम निश्चित ही गठबंधन के नियमों के खिलाफ है। इसलिए गठबंधन में सीपीआई के बने रहने को लेकर आल स्तर के नेताओं से चर्चा की जा रही है।

हमें कम सीटें मिली हैं : सीपीआई नेता

दूसरी ओर सीपीआई नेता आरडीसीपी राव का कहना है कि हमें कम सीटें मिली हैं, हमें गठबंधन में बाद में शामिल किया गया। हम तो 2 विधानसभा सीट से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। इस पूरे मामले को लेकर गठबंधन के सूत्रधार अजीत जोगी की पार्टी मानती है कि दोनों दलों के नेताओं को समझाने की कोशिश की जा रही है, पार्टी के महामंत्री अब्दुल अमीद हयात का कहना है कि दोनों दलों से चर्चा की जा रही है। दोनों को मना लिया जाएगा, हालांकि सीपीआई के नेता कह रहे हैं कि जब बस्तर संभाग की 2 विधानसभा सीटों पर समझौता हो गया था तो फिर कोंटा और दंतेवाड़ा से बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल क्यों करवाया?

 

19-10-2018
BJP: बीस सालों में कवासी लखमा की काट नहीं ढूंढ सकी भाजपा

कोंटा। कोंटा विधानसभा सीट को कांग्रेस का गढ़ माना जाता है। यही वजह है कि बीते चार चुनावों में कांग्रेस जीत का परचम लहराते आ रही है। इस विधानसभा सीट पर सीपीआई का प्रभाव भी दिखता है। चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो सीपीआई के नेता मनीष कुंजाम कोंटा विधानसभा सीट से दो बार विधायक चुने जा चुके हैं। अगर बात सन 1980 की करें तो सोयम जोगैया निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में वहीं 1985 में कांग्रेस के माड़वी हांदा कोंटा से विधायक निर्वाचित हुए हैं।  वर्तमान सियासत की बात करें तो भाजपा पिछले 15 सालों से सरकार में लगातार रहने के बाद भी कोंटा विधानसभा सीट जीत नहीं पाई है। बीजेपी हर बार तगड़ी रणनीतियां बनाती है, लेकिन फिर भी जीत हासिल नहीं कर पाती। इसका मुख्य कारण भाजपा में हावी गुटबाजी को माना जाता है। 

साल 2008 के विधानसभा चुनाव में बस्तर की 12 सीटों में से भाजपा ने 11 सीट अपने नाम किए वहीं  एकमात्र कोंटा सीट पर हार का सामना करना पड़ा था। 2013 के चुनाव में भाजपा के धनीराम बारसे ने कवासी लखमा को कड़ी टक्कर दी लेकिन अंतिम दौर में वे पीछे रह गए और 5786 वोटों से चुनाव हार गऐ। वर्तमान में सुकमा भाजपा संगठन आज भी कई गुटों में नजर आता है। संगठन के पदाधिकारी उपरी तौर पर चाहे कितनी  भी एकजुटता  दिखाने की कोशिश करते हैं लेकिन अंदर से गुटों में बंटे हुए हैं। यही कारण है कि पार्टी के शीर्ष पंक्ति में गिने जाने वाले रामप्रताप सिंह को संगठन की जिम्मेदारी दी गई है। ताकि 2018 के विस चुनाव में गुटबाजी को दूर कर किसी तरह कोंटा में कमल खिलाने में कामयाबी मिल सके।  

कांग्रेस में लखमा वन मैन आर्मी, भाजपा में कई चहरे

भाजपा के सामने सबसे बड़ी परेशानी यह है कि कोई सर्वमान्य चहरा नहीं है। वहीं कांग्रेस में कवासी लखमा एकमात्र चहरा हैं और लगातार विजयी होते आ रहे हैं। अब चुनाव करीब है तो विधायक  टिकट के लिए भाजपा में दावेदारी शुरू हो गई है। भाजपा में दावेदारों की लिस्ट कुछ लंबी हैं। पिछले चुनाव में कवासी लखमा को टक्कर दे चुके धनीराम बारसे दावेदार हैं तो  कोन्टा के सोयम मुक्का भी विधायक  टिकट की लाइन में खड़े हैं। कोंटा नगर पंचायत की अध्यक्ष रही मौसम मुत्ति शर्मा भी भाजपा से टिकट की दावेदार मानी जा रही हैं। हालांकि कांग्रेस में लगातार जीत दर्ज करने वाले कवासी लखमा के अलावा कोई विकल्प नहीं दिखता। उपनेता प्रतिपक्ष होने के साथ ही पार्टी में मजबूत छवि और बस्तर के कद्दावर नेता के लिहाज से भी कवासी लखमा सीट के एकमात्र दावेदार होंगे ये तय माना जा रहा है। 

कोंटा विधानसभा की समस्याएं एवं मुद्दे

कोंटा विधानसभा में मुद्दों और समस्याओं की बात करें तो यहां की सबसे बड़ी समस्या नक्सलवाद और पिछड़ापन है। विकास भी यहां का सबसे बड़ा मुद्दा है। कई दशकों से एनएच का निर्माण नहीं कराया जा सका है। बारिश के दिनों में जिले का आधा हिस्सा सड़क संपर्क से कट जाता है। बुनियादी सुविधाओं से ज्यादातर आबादी अछूती है। जिले के कई इलाकों तक प्रशासन की सीधी पहुंच आज भी नहीं है, जिसके चलते सड़क, स्वास्थ्य व शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं अंदरूनी इलाकों तक नहीं पहुंच पाई हैं। सरकारी योजनाओं का फायदा लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है। कोंटा विधानसभा का दूसरा बड़ा मुद्दा पोलावरम बांध भी है, आंध्र सीमा में इसका निर्माण करायाा जा रहा है। बांध के बनने से कोंटा विधानसभा के करीब 17 गांव डूबान क्षेत्र में आ रहे हैं। प्रभावित गांवों के लोगों में असमंजस की स्थिति है कि वे जाएं तो कहां जाएं? 

एक नजर में कोंटा विधानसभा

कोंटा सुकमा जिले का एकमात्र विधानसभा क्षेत्र है जो  3 लाख 33 हजार 530 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला हुआ है। यहां की जनसंख्या करीब 2 लाख सत्तर हजार है। जिला सुकमा दण्डकारण्य क्षेत्र का हिस्सा रहा जो बस्तर जिले का भाग रहा है। सुकमा वर्ष 1952 से उपतहसील के रूप में अस्तित्व में आया। सुकमा विकासखण्ड 1956 में बना, कोंटा विकासखण्ड कार्यालय 1 अप्रैल 1960 में बना। कोंटा अनुविभागीय कार्यालय मुख्यालय सुकमा का निर्माण 1976 में हुआ। 1998 दंतेवाड़ा जिला का निर्माण बस्तर जिला से अलग कर किया गया जिसमें सुकमा दंतेवाड़ा का हिस्सा बना। 1 जनवरी 2012 को दंतेवाड़ा से पृथक कर सुकमा को जिला बनाया गया। 

 पदाम नंदा एकमात्र भाजपा नेता जिन्होंने लखमा को दी टक्कर

बस्तर की 12 सीटों में कोंटा विधानसभा एकमात्र ऐसी सीट है जिस पर 1998 से लेकर 2018 तक कांग्रेस के कवासी लखमा का कब्जा है। इस बीच कोंटा की सियासत लगातार बदलती रही। माओवाद और सलवा जुडूम के बीच ही इसका समीकरण बनता और बिगड़ता रहा। विधानसभा चुनाव 2003 से 2008 के बीच का एक ऐसा समय था जहां नक्सलियों और सरकार के बीच युद्ध छिड़ी हुई थी। इस दौरान सलवा जुडूम अभियान अपनी चरम पर पहुंच गया था। कोंटा विकासखण्ड के अधिकांश गांव इसकी चपेट में आ गए थे। ग्रामीण गांव छोड़कर सरकारी शिविरों में जा बसे।  कई गांव खाली हो चुके थे। दोरनापाल, मराईगुड़ा, कोंटा, ऐर्राबोर में ग्रामीणों की भीड़ जुट गई थी। गांव खाली हुए तो माओवादियों का तांडव भी बढ़ गया था।   विधायक कवासी लखमा और पूर्व विधायक मनीष कुंजाम सुलवा जुडूम के खिलाफ  थे। विधानसभा चुनाव 2008 में कवासी लखमा के खिलाफ  एक बार फिर पदाम नंदा मैदान में थे। वहीं भाकपा से रामा सोड़ी उम्मीदवार थे। माहौल पूरी तरह सरकार के पक्ष में था। सभी की जुंबा पर कोंटा में कमल खिलने की चर्चा थी। लेकिन कवासी लखमा ने भाजपा के पदाम नंदा को नजदीकी मुकाबले मे 192 वोट के अंतर से हराया दिया। भाजपा के पदाम नंदा ही एक ऐसे नेता थे जिन्होंने कवासी लखमा को कड़ी टक्कर दी थी। इसके बाद अब तक दूसरा कोई नेता नहीं आया। 

17-10-2018
Assembly Elections: गुरिल्लावार की तरह हर सीट पर  रोचक होगा मुकाबला

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण में 18 सीटों पर बसपा व जोगी गठबंधन के तहत 10 पर छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस, 2 पर सीपीआई और 6 सीटों पर बसपा अपने उम्मीदवार मैदान में उतारने जा रही है। बसपा के खाते की 6 सीटों में डोंगरगढ़ (एससी), डोंगरगांव, अंतागढ़ (एसटी),  कोंडागांव(एसटी),  कांकेर(एसटी) व केशकाल (एसटी) में प्रथम चरण के लिए नामांकन फॉर्म लेने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बसपा इस बार अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा बीजेपी व कांग्रेस के उम्मीदवारों के नाम तय होने के बाद जारी करेगी।

बसपा इस बार 6 सीटों के लिए तीन-तीन लोगों का फार्म जमा करवा रही है। इनमें से एक उम्मीदवार को पार्टी टिकट के रूप मे ई- फॉर्म दिया जाएगा। इस बार चुनाव में गुरिल्लावार की तरह हर सीट पर मुकाबला रोचक होगा।  90 में से 30 सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला होने से कांग्रेस व बीजेपी प्रत्याशियों के नाम का ऐलान करने से बगावती तेवर को रोकने की रणनीति पर भी प्लान किया जा रहा है।

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