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05-01-2021
धरमराज युवा संगठन ने चितालंका देवगुड़ी में किया पौधरोपण

रायपुर दंतेवाड़ा। धरमराज युवा संगठन ने चितालंका देवगुड़ी में पौधरोपण किया। धरमराज युवा संगठन ने सोमवार को चितालंका देवगुड़ी में 200 आम, एवं चिकू पौधेरोपण किया साथ ही इस दौरान संगठन ने लोंगो को अधिक से अधिक पौधे लगाने के लिए जागरूक भी किया संगठन ने बताया कि पौधे लगाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना है।कल्पना कीजिए कि अगर पेड़ वाईफाई सिग्नल देते तो हम कितने सारे पेड़ लगातेए शायद हम ग्रह को बचाते। बहुत दुख की बात है कि वे केवल ऑक्सीजन का सृजन करते हैं। कितना दुखद है कि हम प्रौद्योगिकी के इतने आदी हो गए हैं कि हम अपने पर्यावरण पर होने वाले हानिकारक प्रभावों की अनदेखी करते हैं। न केवल प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल प्रकृति को नष्ट कर रहा है बल्कि यह हमें उससे अलग भी कर रहा है। अगर हम वास्तव में जीवित रहना चाहते हैं और अच्छे जीवनयापन करना चाहते हैं तो अधिक से अधिक पेड़ लगाए जाने चाहिए।

ऑक्सीजन लेने और कार्बन डाइऑक्साइड को छोड़ने के अलावा पेड़ पर्यावरण से अन्य हानिकारक गैसों को अवशोषित करते हैं, जिससे वायु शुद्ध और ताजी बनती है। जितने हरे.भरे पेड़ होंगे उतना अधिक ऑक्सीजन का उत्पादन होगा और अधिक विषैली गैसों को यह अवशोषित करेंगे। प्रदूषण का स्तर इन दिनों बहुत अधिक बढ़ रहा है। इससे लड़ने का एकमात्र तरीका अधिक से अधिक पेड़ लगाना है। उदाहरण के लिए पेड़ों से घिरे क्षेत्र, गांव और जंगल शुद्ध पर्यावरण को बढ़ावा देते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि ये कम प्रदूषण से प्रभावित क्षेत्र हैं। दूसरी ओर शहरी आवासीय और औद्योगिक क्षेत्रों में खराब प्रदूषण और कम पेड़ों की संख्या के कारण खराब गुणवत्ता की वायु है।

20-12-2020
ऐतिहासिक भूतहा तालाब को किया जा रहा सूखाने का प्रयास,पर्यावरण को पहुंचाया जा रहा नुकसान : संजीव शर्मा

जगदलपुर।  लालबाग हाउसिंग बोर्ड के नज़दीक जगलपुर का ऐतिहासिक भूतहा तालाब है, जहां रविवार को सामाजिक कार्यकर्ता संजीव शर्मा अपने साथियों के साथ पहुंचे। उन्होंने बताया कि नाला बनाने के नाम पर तालाब का पानी बेवजह बहाया जा रहा है और पानी में केमिकल भी मिलाया गया है, जिसके कारण तालाब की मछलियां भी मर रही है। संजीव शर्मा ने कहा कि तालाब के पीछे जिन भूमाफियाओं की ज़मीन है, जिसका कोई पहुंच मार्ग नहीं है। अब उस तक पहुंच मार्ग बनाने के लिए तालाब का पानी धीरे धीरे कर के बहाया जा रहा है। तालाब का रकबा लगभग 5 एकड़ का है,जिसे सूखाने के काम  किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इसे तत्काल रोका ना गया तो शहर के पर्यावरणप्रेमियों के साथ मिल कर आंदोलन करेंगे।

 

17-12-2020
निगम क्षेत्र में 18 और 21 दिसंबर को नहीं बिकेगा मांस-मटन,आदेश के उल्लंघन पर जोन अधिकारियों पर होगी कार्रवाई

रायपुर। छत्तीसगढ शासन के पर्यावरण एवं नगरीय विकास विभाग के आदेश के परिपालन में नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग ने सभी 70 वार्डों  के पशुवध गृहों,मांस-मटन विक्रय केन्द्रों को बंद रखने का आदेश दिया है। गुरू घासीदास जयंती 18 दिसंबर और संत तारण तरण जयंती 21 दिसंबर को मांस-मटन की दुकानें बंद रखी जाएगी। आदेश का उल्लघन करने पर निगम स्वास्थ्य विभाग की ओर से तत्काल मांस-मटन जब्त किया जाएगा। संबंधित दुकानदार व व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी विजय पाण्डेय ने निगम के समस्त जोन स्वास्थ्य अधिकारियों और जोन स्वच्छता निरीक्षकों को दोनों दिवसों पर अपने-अपने क्षेत्रों में दिनभर निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। नगर निगम आयुक्त सौरभ कुमार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि दोनों दिवसों में निगम क्षेत्र में कही भी प्रतिबंध के बावजूद मांस-मटन की कोई भी दुकान खुली मिली तो उक्त क्षेत्र से संबंधित जोन कमिश्नर और जोन स्वास्थ्य अधिकारी पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

 

16-12-2020
खराब लाइफस्टाइल और पर्यावरण के कारण आप हो सकते हैं सीओपीडी के शिकार

रायपुर। खराब लाइफस्टाइल और पर्यावरण का परिणाम से सीओपीडी हो सकता है। सीओपीडी फेफड़ों की बीमारी है। इसके लक्षण अस्थमा और ब्रोंकाइटिस से मिलते-जुलते हैं। यह क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस है, जिसमें मरीज की एनर्जी कम हो जाती है, वह कुछ कदम चलकर ही थक जाता है। सांस नली में नाक से फेफड़े के बीच सूजन के कारण ऑक्सीजन की सप्लाई घट जाती है। इसका असर अन्य अंगों पर भी पड़ता है। ये लक्षण होने पर डॉक्टर से संपर्क जरूर करें। 

सीओपीडी के लक्षण :
दो महीने तक लगातार बलगम की तकलीफ रहती है और खांसी के सामान्य सिरप और दवाएं असर नहीं करती हैं। अधिक बलगम वाली खांसी की समस्या रहना, सांस की तकलीफ, खासकर शारीरिक श्रम करने पर, सांस लेने में घरघराहट और सीने में जकड़न होना आदि इसके लक्षण हैं।

01-11-2020
पर्यावरण हितवा संगवारी की अनूठी पहल,50वीं वर्षगांठ पर लगाएंगे 50 पौधे

‌दुर्ग। पर्यावरण के लिए समर्पित रहकर कार्य करने वाले हितवा संगवारी के संयोजक रोमशंकर यादव ने अपनी जन्मदिन की 50वीं जन्मदिन की 50वीं वर्षगांठ पर 50 पौधरोपण करने की अनूठी पहल की है। दुर्ग जिला कलेक्टर डॉ.सर्वेश्वर नरेन्द्र भूरे, एसपी प्रशांत ठाकुर के आतिथ्य मे इस पौधरोपण की शुरुआत किये। यादव का जन्मदिन 6 नवंबर को है,जिस दिन वे 50  पौधरोपण का लक्ष्य पूरा करेंगे। इस मौके पर पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में विशिष्ट योगदान देने वालों को पर्यावरण हितवा संगवारी सम्मान से सम्मानित किया गया। यहां बताना लाजमी है की रोमशंकर यादव पिछले 14-15 सालों से अपने जन्मदिन पर 15 सालों से पौधरोपण करते आ रहे हैं। साथ ही अपने परिवार के सदस्यों के जन्मदिन पर भी वे पिछले कई वर्षों से पौधरोपण कर रहे हैं। यही नहीं शादी के सालगिरह, पितृपक्ष में पितरों की स्मृति में भी पौधरोपण किए जाते हैं। उनके द्वारा शादी,जन्मदिन,नामकरण संस्कार व गृह गृह प्रवेश आदि मांगलिक अवसरों पर पौधे उपहार में भेंट किया जाता है। कार्यक्रम का शुभारंभ कलेक्टर एवं एसपी द्वारा बरगद के पौधे की पूजा अर्चना कर की गई साथ ही रक्षा सूत्र बांधे। इसके पश्चात 50 पौधरोपण अभियान का पौधेरोपित कर शुभारंभ किये। साथ ही कलेक्टर डॉ.सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे ने हितवा संगवारी द्वारा किये जा रहे प्रयास की सराहना की।

संस्था द्वारा कलेक्टर को हितवा संगवारी अभ्यारण को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने, शमशान घाट एवं गार्डन में रिवाल्विंग गेट लगाने और रखरखाव के लिये कर्मचारी की मांग रखी। इस दौरान डॉ.मोनिका चावले, गेंदलाल देशमुख,   पुनीत कौशिक, खुमान सिंह यादव, सुभाष साव ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वालों  को पर्यावरण हितवा संगवारी सम्मान  से सम्मानित किया। गौरतलब हो कि पर्यावरण हितवा संगवारी द्वारा 23 साल से पर्यावरण संरक्षण के लिये प्रयास की जा रही है। 6 लाख से अधिक पौधो,जिसे बीएसपी द्वारा रोपा गया है उसका संरक्षण कर चुके हैं। साथ ही उनके प्रयास से 2 लाख नये पेड़ तैयार हुए हैं इस तरह हितवा संगवारी अपने हितवा संगवारी अभ्यारण में लगभग साढ़े आठ लाख पेड़ो को बचाकर रखें इसमें उन्होंने लगभग 50 हजार सागौन के पेड़ो को पुनर्जीवित किया।रोमशंकर मंडला डिंडोरी के जंगल मे जल जंगल जमीन को लेकर आयोजित संवाद यात्रा भी वर्ष  में किये थे वहीं वर्ष 2004-05 में खारुन नदी के उद्गम पटेचुआ से खारुन संगम स्थल सोमनाथ तक लगभग ढाई सौ किलोमीटर पदयात्रा किये थे इसी वर्ष 2004-05 के लिए नेहरू युवा केन्द्र द्वारा जिला युवा पुरस्कार से सम्मानित किये गए| मौके पर प्रमुख रूप से ज्ञानप्रकाश साहू,होरीलाल देवांगन,शरद यादव,सुमन क्षत्रिय,कामदेव साहू, इन्द्रमन साहू, पवन यादव, हिमांचल साहू , देवलाल यादव,  पुखराज यादव सहित अन्य उपस्थित थे।

20-10-2020
रैम्प और पहुंच मार्ग मरम्मत के बाद रेत के मूल्य में कमी आने की संभावना, 319 खदानों में निविदा जारी

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देशन पर रेत की सुचारू आपूर्ति तय करने के लिए खनिज विभाग की ओर से इस वर्ष प्रदेश में कुल 107 रेत भण्डारण अनुज्ञा स्वीकृत की गई है। साथ ही प्रदेश के विभिन्न जिलों में रेत के अवैध उत्खनन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई कर प्रकरण दर्ज किए गए हैं। जुर्माना भी वसूल किया गया है। खनिज विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार पूरे प्रदेश में अवैध उत्खनन के 37 प्रकरण, अवैध परिवहन के 1726 प्रकरण और अवैध भण्डारण के 26 प्रकरण दर्ज करते किए गए हैं। संबंधितों से 2 करोड़ 7 लाख 49 हजार 89 रुपए समझौता राशि की वसूली भी की गई है। विभाग ने बताया है कि वर्तमान में प्रदेश में कुल 319 रेत खदानों में निविदा जारी की गई है। कुल 210 रेत खदानों में पर्यावरण सम्मति प्राप्त होने के बाद अनुबंध के बाद ये खदानें संचालित की जा रही हैं और शेष रेत खदानों में पर्यावरण सम्मति प्राप्त करने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। वर्तमान समय में प्रदेश के सभी जिलों में रेत खदान आबंटन के लिए निविदा जारी की जा चुकी है। वर्तमान में भारत सरकार, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से जारी गाइडलाइन के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य के लिए 10 जून से 15 अक्टूबर तक वर्षाऋतु में रेत खनन को प्रतिबंधित किया गया था। वर्षाऋतु के पूर्व प्रदेश में रेत का औसतन मूल्य 5000-7000 रुपए प्रति हाइवा (10 घनमीटर) था। वर्षाऋतु के दौरान प्रदेश में प्रतिवर्ष रेत के मूल्य में बढ़ोत्तरी होती है, इस दौरान रेत की सुचारू आपूर्ति किए जाने के लिए इस वर्ष खनिज विभाग ने विशेष प्रयास कर प्रदेश में कुल 107 रेत भंडारण अनुज्ञा स्वीकृत किया गया। चूंकि भण्डारण अनुज्ञप्ति क्षेत्र में सीमित भण्डारण क्षमता होने के कारण रेत की कीमतों में आंशिक वृद्धि देखी गई है। वर्षाकाल के बाद अधिकतर जिलों के कई रेत खदानों में वर्तमान में पानी भरा हुआ है और कई रेत खदानों में रैम्प और पहुंच मार्ग मरम्मत का कार्य भी किया जा रहा है। इन रेत खदानों में आगामी दिनों में लोडिंग और परिवहन का कार्य आरंभ हो जाएगा, जिससे मूल्य में और कमी आने की संभावना है।

वर्षा ऋतु के पूर्व और वर्षा ऋतु के दौरान विभिन्न जिलों में रेत के मूल्यों की तुलनात्मक जानकारी निम्नानुसार है। वर्षा ऋतु के पूर्व रायपुर जिले में रेत का मूल्य 8000 रुपए से 9000 रुपए था। वर्षा ऋतु में बढ़कर 16000 से 17000 रुपए हो गया था। वर्तमान में यह घटकर 9000 से 9500 रुपए हो गया है। रैम्प निर्माण और पहुंच मार्ग मरम्मत पश्चात रेत की कीमत 7000 से 8000 रुपए संभावित है। इसी तरह बिलासपुर जिले में वर्षा ऋतु के पूर्व 5000 रुपए से 6000 रुपए था। वर्षा ऋतु में बढ़कर 10000 से 12000 रुपए हो गया था। वर्तमान में यह घटकर 7000 से 8000 रुपए हो गया है रैम्प निर्माण एवं पहुंच मार्ग मरम्मत के बाद रेत की कीमत 5000 से 7000 रुपए संभावित है। बस्तर जिले में वर्षा ऋतु के पूर्व 5000 रुपए से 6000 रुपए था। वर्षा ऋतु में बढ़कर 7000 से 8000 रुपए हो गया था। रैम्प निर्माण और पहुंच मार्ग मरम्मत के बाद रेत की कीमत 4000 से 5000 रुपए संभावित है। राजनांदगांव जिले में वर्षा ऋतु के पूर्व 7000 रुपए से 8000 रुपए था। वर्षा ऋतु में बढ़कर 9000 से 10000 रुपए हो गया था। वर्तमान में यह घटकर 8000 से 9000 रुपए हो गया है और रैम्प निर्माण और पहुंच मार्ग मरम्मत के बाद रेत की कीमत 7000 से 8000 रुपए संभावित है। इसी तरह जांजगीर-चांपा जिले में वर्षा ऋतु के पूर्व 5000 रुपए से 7000 रुपए था। वर्षा ऋतु में बढ़कर 9000 से 10000 रुपए हो गया था। वर्तमान में यह घटकर 4500 से 7000 रुपए हो गया है। रैम्प निर्माण और पहुंच मार्ग मरम्मत के बाद रेत की कीमत 4000 से 5000 रुपए संभावित है।

23-09-2020
बेवजह काटा गया कारगिल चौक स्थित बरगद का पेड़ : ग्रीन आर्मी

रायपुर। पेड़ों की बेवजह कटाई, रायपुर शहर में ऐसे बेतहाशा मामले सामने आते रहे हैं। एक ओर जहां जनता और सरकार, पर्यावरण को बचाने हर वर्ष पेड़ लगाने का कार्य कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग लगातार अपने हिसाब से, नियम विरुद्ध पेड़ों की कटाई कर रहे हैं। ग्रीन आर्मी विगत कई वर्षों से इन मुद्दों को सजगता से उठता रहा है। संस्था न केवल पेड़ लगाने का कार्य करती है, वहीं उन्हें बचाने और सवारने के लिए भी संकल्पित है। रायपुर के सुंदर नगर, कारगिल चौक में एक बड़े बरगद के पेड़ की कटाई विगत दिनों की गई। एक पेड़ की इतनी निर्ममता से की गई कटाई का जिम्मेदार कौन, नियमों को ताक पर रख कर कटाई करने का क्या उद्देश्य, उस वृक्ष से किसे नुकसान हो रहा था, क्या शासन से कटाई के पूर्व अनुमति ली गई। इन सवालों का जवाब कौन देगा।

ग्रीन आर्मी के संस्थापक अमिताभ दुबे के नेतृत्व में एक टीम ने उस जगह का निरीक्षण किया। उस पेड़ को काटने की कोई वजह नहीं पाई गई। अपने किसी निजी हित के लिए किए गए इस कृत्य के लिए काटने वाले को जवाब देना होगा। अमिताभ दुबे ने शासन से अनुरोध किया है कि, इस आशय में ठोस कानून बनाये एवं प्रत्येक वृक्ष की कटाई पर 100 पौधे लगाने एवं उनकी 2 साल तक देखरेख करने की सज़ा दें। ग्रीन आर्मी की अपील है, शहरवासी सामने आएँ, और लॉक डाउन के इस समय में मुहिम का हिस्सा घर बैठे बने। आपके आस पास हो रही पेड़ों की कटाई पर सवाल उठायें एवं ग्रीन आर्मी तक बात पहुचायें, हम एक्शन लेंगे।

सुंदर नगर, कारगिल चौक के इस पेड़ कटाई पर ग्रीन आर्मी चुप नहीं रहेगी और संबंधित व्यक्ति द्वारा 100 पौधे लगने तक मुहिम जारी रहेगी। इस मामले में लिखित शिकायत भी ग्रीन आर्मी पार्षद, महापौर, कलेक्टर से लेकर सांसद तक 11 जगह दर्ज करवा रहे हैं। इस मुहिम को स्थानीय लोगों का भी भरपूर साथ मिल रहा है। यह आंदोलन जारी रहेगा, यही संस्था की स्थापना का उद्देश्य है।

02-09-2020
भाजपा नवनियुक्त जिलाध्यक्ष श्रीचंद सुंदरानी ने किया पौधारोपण

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी महर्षि बाल्मीकि वार्ड के कार्यकर्ताओं ने नवनियुक्त जिलाध्यक्ष श्रीचंद सुंदरानी के साथ एटीएम चौक प्रस्तावित अटल चौक स्थित गार्डन में पौधारोपण किया। इस अवसर पर सुंदरानी ने आम एवं सीताफल के फलदार पौधे लगाएं। साथ ही आम लोगों से अपील की है कि पर्यावरण की रक्षा के लिए अधिक से अधिक पौधों का रोपण कर उसकी देखरेख करें। इससे न केवल हमारा शहर हरा भरा रहेगा बल्कि नागरिकों को ऑक्सीजन भी पर्याप्त मात्रा में मिलेगी। पौधारोपण कार्यक्रम में प्रमुख रूप से जिला मीडिया प्रभारी राजकुमार राठी, मंडल अध्यक्ष रविंद्र सिंह ठाकुर, जितेंद्र नाग ,मेघुराम साहू, अशोक गुप्ता, मिनी पांडे, डॉ विवेक श्रीवास्तव, अखिल चटर्जी, किशोरचंद नायक, अजय राणा, गज्जू साहू, अनिल यादव, अमलेश सिंह, जयराम कुकरेजा, चयन जैन, विकास शुक्ला, प्रहलाद क्षत्रिय, जूही कुमारी, जुबेदा बानो उपस्थित रही।

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