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ये है योगी आदित्यनाथ के 5 कड़े सवाल 

ग्लिब्स टीम  | 17 Apr , 2017 02:11 PM
ये है योगी आदित्यनाथ के 5 कड़े सवाल 

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लखनऊ में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की जयंती के मौके पर किताब विमोचन के एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए योगी ने कई नई बहसों और सवालों को जन्म दे दिया है. योगी ने कहा कि ट्रिपल तलाक महिलाओं के अधिकार पर हमला है लेकिन कुछ लोगों के मुंह क्यों बंद हैं. योगी ने अपने भाषण में ट्रिपल तलाक और कॉमन सिविल कोड पर अपनी बात रखी.

योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण के दौरान ये 5 कड़े सवालों को जन्म दिया...

1. ट्रिपल तलाक चीरहरण जैसा, कुछ लोग सियासी फायदे के लिए मौन क्यों हैं?

2. जो देश हित के इन मुद्दों पर मौन हैं वे अपराधियों की तरह. आखिर देश के मुद्दों पर चुप्पी क्यों?

3. शादी के लिए, महिलाओं के हक के लिए एक जैसा कानून क्यों नहीं हो सकता?

4. देश एक है तो कानून एक क्यों नहीं हो सकता?

5. कौन लोग हैं जो कॉमन सिविल कोड के विरोधी हैं?

क्या बोले सीएम योगी?

आपको बता दें कि सोमवार को सीएम योगी लखनऊ में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की जयंती पर किताब विमोचन के कार्यक्रम में बोल रहे थे. उस दौरान उन्होंने कहा कि ट्रिपल तलाक महिलाओं के अधिकार पर हमला है लेकिन कुछ लोगों के मुंह क्यों बंद हैं. योगी ने इस मामले पर द्रौपदी के चीरहरण का उदाहरण दिया.

मुस्लिम बहनों को हो रही दिक्कत : पीएम

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्रिपल तलाक को लेकर बड़ा बयान दिया था. उन्होंने कहा है कि तीन तलाक से मुस्लिम बहनों को दिक्कत हो रही है और केंद्र सरकार इस पर जल्द हल चाहती है. पीएम मोदी ने ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित बीजेपी की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी के आखिरी दिन रविवार को कहा कि बीजेपी का रुख तीन तलाक मुद्दे पर बिल्कुल साफ है.

'राज नहीं समाज बदलना है'

पीएम ने अपने संबोधन में कहा कि हमारे वरिष्ठ नेता कहा करते थे, राज नहीं समाज को बदलना है. प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर कोई सामाजिक बुराई है तो समाज को जागना चाहिए और न्याय प्रदान करने की दिशा में प्रयास करना चाहिए. प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि मुस्लिम महिलाओं को शोषण का सामना नहीं करना चाहिए.

क्या है मुस्लिम नेताओं की राय? 

मुस्लिम धर्मगुरू राशिद महली फिरंगी ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं के हक के लिए उनके शिक्षा और रोजगार पर ध्यान दिय़ा जाना चाहिए. तो वहीं जफरयाब जिलानी बोले कि इस्लाम में फैमिली लाइफ के बारे में जो तरीका बताया गया है वह सही तरीका है. कुछ महिलाएं इसका विरोध कर रही हैं लेकिन आप जाकर लोगों से पूछें अधिकांश लोग इसके खिलाफ नहीं हैं. मुस्लिम नेता शाइस्ता अंबर इस मुद्दे पर कहा कि ये धर्म का मामला ही नहीं है. ये महिलाओं के अधिकार और उनके हक का मामला है. इसमें धर्मगुरुओं की बातों में नहीं आना चाहिए और महिलाओं को कानूनी सुरक्षा दी जानी चाहिए.

मुस्लिम महिलायें शरीयत के साथ

आपको बता दें कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बेवजह तीन तलाक देने वाले शख्स का सामाजिक बहिष्कार करने का फैसला किया है. मुस्लिम बोर्ड ने तीन तलाक पर 5 करोड़ महिलाओं के सर्वे का हवाला दिया और कहा कि मुस्लिम महिलाएं शरीयत के साथ हैं. मुस्लिम पर्सनल बोर्ड ने लखनऊ में चली दो दिन की बैठक के बाद साफ किया कि तलाकशुदा महिलाओं की हर संभव मदद के लिए पर्सनल लॉ बोर्ड तैयार है. बोर्ड ने मियां-बीवी के विवाद को लेकर कोड ऑफ कंडक्ट भी जारी किया और मुसलमानों को फिजूलखर्जी से बचने की सलाह दी. इसके साथ ही पर्सनल बोर्ड ने सलाह दी कि मां-बाप अपनी बेटी की शादी में दहेज ना देकर प्रोपर्टी में महिलाओं की हिस्सेदारी दें.

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