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GLIBS Exclusive
22-11-2020
CH / SHOWS
07:39pm

खरी खरी। कोरोना एक बार फिर से पैर पसारने लगा है। आंकड़ों की बात माने तो इसकी वापसी होती दिख रही है और त्योहारों का मजा अब सजा बन कर सामने आता नज़र आ रहा है। बेखौफ बिना मास्क सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाते हुए कोरोना गाइडलाइन को ठेंगा दिखाते हुए जो त्योहारों में हमने मटरगश्ती की है उसके दुष्परिणाम अब सामने दिख रहे हैं। त्योहारों का मजा सजा बन कर सामने आ गया है। कोरोना अब डराने वाले होता जा रहा है। राजधानी में बीते दिन 273 मामले सामने आए जो उसके आने वाले दिनों में और बढ़ने के संकेत दे रहे हैं।

21-11-2020
CH / SHOWS
08:11pm

खरी खरी। छत्तीसगढ़ में अभी भी मजदूरों का उत्तर प्रदेश में जाने का सिलसिला जारी है। 3 बस बलोदा बाजार में पकड़ाई और एक महासमुंद में, यह बताता है कि हमारे मजदूरों का खून चूसने वाले गिद्धों की नजर आज भी छत्तीसगढ़ पर लगी हुई है। छत्तीसगढ़ के मजदूरों को सारे देश के लोग यहां से ले जाते हैं और उनका खून चूसते हैं। अब रोक लगना बहुत जरूरी है।

14-11-2020
CH / NEWS
06:27pm

धनतेरस नरक चौदस और अब दिवाली यानी त्योहारों का मेला और दिवाली के बाद भी यह सिलसिला थमता नहीं है गोवर्धन पूजा और भाई दूज। उत्साह उमंग खुशियों का पूरा सप्ताह साल भर तरोताजा रखने के लिए काफी होता है। हर कोई मां लक्ष्मी की पूजा कर रहा है । हर कोई मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने की कोशिश कर रहा है। मां लक्ष्मी का प्रसन्न होना यानी सुख समृद्धि धन संपदा वैभव मान सम्मान पद प्रतिष्ठा क्या नहीं मिलता? सब कुछ मिल जाता है मां लक्ष्मी के आशीर्वाद से। तो फिर देर किस बात की है मेरे संग बोलो जय लक्ष्मी मैया की। प्रेम से बोलो जय लक्ष्मी मैया की। सारे बोलो जय लक्ष्मी मैया की।

08-11-2020
CH / SHOWS
09:01pm

खरी खरी| फिर हत्या हो गई शहर में। एक महिला को सिर्फ इसलिए जान से हाथ धोना पड़ा क्योंकि उसने शराब पीने के लिए आरोपियों को रुपये नही दिए।यानी शराब पिलाओ नही तो जान से हाथ धोना पड़ेगा। ये हाल है राजधानी का।कंहा तो शांति का टापू कहलाता था छत्तीसगढ़ और अब अपराधगढ़ कहलाने लगा है।

08-11-2020
CH / NEWS
08:28pm

कोरोना काल के गहन अंधकार को चीरकर खुशियों का उजाला बिखेरने को दीपावली की तैयारियां आतुर नजर आ रही है। मंदी की तमाम अटकलबाजियों पर बाजार की रौनक विराम लगाती दिख रही है। निराशा और भय के वातावरण को हराकर लक्ष्मी मैया का स्वागत करने को  राजधानी का बाजार सज धज कर तैयार है। यूं ही नहीं कहता कोई दिवाली को खुशियों,उमंगो का त्यौहार। लक्ष्मी माता कोरोना काल में भी अपने भक्तों पर सुख संपदा  बरसाती नजर आ रही है।

06-11-2020
CH / SHOWS
08:14pm

खरी खरी। दिवाली आते ही शोर मचाना शुरू हो जाता है वायु प्रदूषण का। ऐसा लगता है कि वायु प्रदूषण सिर्फ दिवाली के समय ही होता है। और दिवाली के जाते ही वायु प्रदूषण का मामला फिर से ठंडे बस्ते में चला जाता है क्योंकि दिवाली के कुछ समय बाद न्यू ईयर आता है। नया साल सारी दुनिया में मनाया जाता है। सारी दुनिया में पटाखे फोड़े जाते हैं तब प्रदूषण नहीं होता क्या? सिर्फ भारत में मनाई जाने वाली दिवाली से ही  प्रदूषण होता है क्या? पटाखों से प्रदूषण होता है तो उसके उत्पादन पर रोक लगा दो। उत्पादन की अनुमति क्यों देते हो? बिक्री  की अनुमति क्यों देते हो? रोक लगा दो उत्पादन पर रोक लगा दो बिक्री पर ना उत्पादन होगा ना बिकेगा तो फूटेगा भी नही। ये क्या तरीका है उत्पादन की अनुमति दे रहे हो बिक्री की अनुमति दे रहे हो और फोड़ने पर रोक लगा रहे हो। यह सब रुकना चाहिए। चोचलेबाजी बंद होना चाहिए। और नियम सबके लिए बराबर होना चाहिए। अगर दिवाली पर पटाखे प्रदूषण फैलाते हैं तो न्यू ईयर पर भी प्रदूषण होता है। अगर दिवाली पर प्रतिबंध लगता है तो न्यू ईयर पर भी पटाखे फोड़ने पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।

05-11-2020
CH / SHOWS
08:42pm

जल मिशन में हजारों करोड़ के टेंडर में गड़बड़ी सामने आने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आनन-फानन में कैबिनेट की बैठक में उस टेंडर प्रक्रिया को निरस्त कर दिया था मुख्यमंत्री ने अपना काम पूरा कर दिया लेकिन उसके बाद अफसर के खिलाफ कार्यवाही और दोषियों के खिलाफ सजा देने का काम विभाग और मंत्री को करना था जो उन्होंने नहीं किया उल्टे वही अफसर जिस पर उंगलियां उठ रही थी फिर से टेंडर प्रक्रिया बनाने में जुट गया है तो ऐसी स्थिति में क्या कहा जा सकता है भूपेश बघेल की अपनी सरकार को क्लीन चिट देने की पूरी मेहनत पर वही अफसर फिर से पानी फेरता नजर आ रहा है ऐसे में तो सवाल उठता ही है कि मंत्री बड़ा या अफसर

04-11-2020
CH / SHOWS
07:29pm

खरी खरी। एक बच्चे का अपहरण हो गया। उसके लिए फिरौती मांगी जा रही है। यह सब हो रहा है छत्तीसगढ़ में जो कभी शांति और अमन का टापू कहलाता था। अब न यंहा शांति है ना अमन चैन से कोई जी नहीं पा रहा है। हत्या बलात्कार ठगी लूट तस्करी यह सब तो चल ही रहा था अब यह अपहरण और फिरौती का भी खेल शुरू हो गया है। बेहद शर्मनाक स्थिति है। बेहद चिंतनीय स्थिति है। बेहद निराशाजनक स्थिति है। पुलिस को चाहिए कि वह तत्काल सक्रिय होकर अपनी गिरती साख को बचा ले।

04-11-2020
CH / NEWS
07:07pm

भूखे प्यासे रहकर अपने पति की लंबी आयु की कामना करना और शाम होते ही सज धज कर पतिदेव का इंतजार करना चांद के साथ पति का चेहरा देखना चंद्रमा के साथ पति की तुलना करना पति के प्रति अटूट प्रेम विश्वास आस्था व्यक्त करना इसी को करवा चौथ कहते हैं दिन भर भूखे प्यासे रहकर भी पति की लंबी आयु की कामना करना यह त्याग तपस्या का प्रतीक है

03-11-2020
CH / SHOWS
08:14pm

खरी खरी। क्रिमिनल फ्रेंडली है हमारी पुलिस। अगर ऐसा नहीं होता तो शहडोल मध्य प्रदेश से सटोरिए यहां आकर क्यों सट्टा खिलाते?अगर ऐसा नहीं होता तो उड़ीसा के गांजा तस्कर ट्रक में नारियल के बीच 10 क्विंटल गांजा भरकर छत्तीसगढ़ क्यों लाते? आखिर दूसरे प्रदेशों के क्रिमिनल को भरोसा है छत्तीसगढ़ पुलिस पर कि वो अपराधियों से घृणा नहीं करती अपराध से घृणा करती है। बल्कि यों कहा जाए कि अपराधियों से घृणा नहीं करती अपराधियों से प्यार करने लगी है। उनका प्यार ही है जो दूसरे प्रदेश के अपराधियों को यंहा खींच लाता है। अपराधी आते है मज़े से रहते है लूट खसोट करते है और आराम से अपने घर चले जाते है क्योंकि हमारी पुलिस सिर्फ अपराध से घृणा करती है अपराधियो से नही।

31-10-2020
CH / SHOWS
08:40pm

खरी खरी। एक अबोध बच्ची जो अपने मकान में कभी किराए से रहने वाले इंसान पर भरोसा करती थी उसके बुलाने पर उसके साथ चली गई और उसकी दुनिया उजड़ गई। उसका कसूर इतना कि वह अपने पुराने किराएदार पर भरोसा कर बैठी और वह शैतान जो शायद सिर्फ इसीलिए दूसरे मकान में रह रहा था कि वो ये शैतानी हरकत कर सके। हवस का पुजारी वापस अपने गांव लौट गया है। अब पुलिस उसे ढूंढती फिरेगी। आखिर क्यों शहर के बाहर की रिहायशी बस्तियों में अपराधियों का जमावड़ा होते जा रहा है। उरला बिरगांव के इलाके में छत्तीसगढ़ कम उत्तर प्रदेश और बिहार क्यों ज्यादा दिख रहा है? यहां प्रांतवाद की बात नहीं है लेकिन बाहर से आने वाले लोगों का लेखा-जोखा क्यों नहीं है यह हैरानी की बात है? आखिर कब तक छत्तीसगढ़ की बेटियां यूं ही लूटते रहेगी?

30-10-2020
CH / SHOWS
07:59pm

खरी खरी। महीने भर से कोकीन के मामले में आए दिन कोई न कोई खुलासा पुलिस करती है। इस मामले में पुलिस खुद की पीठ खुद ही थपथपाती है। अब सवाल ये उठता है कि आए दिन हो रहे खुलासे के बावजूद महीने भर से चल रहे इस मामले में अब तक पुलिस गिरोह के सरगना तक नहीं क्यों पहुंच पाई? तो फिर और कितने खुलासे लगेंगे? कोकीन की पुड़िया मानो प्याज हो गई है। परत दर परत परत दर परत खुलासे पर खुलासे खुलासे पर खुलासे और नया कुछ भी नहीं हो रहा है। जनता भी पुलिस के खुलासों को पचा नहीं पा रही है और महीने भर से चल रहे इस ड्रामे का पटाक्षेप चाहती है।