GLIBS

19-08-2019
जल्द ही स्मार्ट फोन में ऐसा दिखेगा वाटसऐप

नई दिल्ली। वॉट्सऐप अपने नाम के साथ फेसबुक का नाम जोड़ने वाला है। जल्द ही आपको यह अपडेट देखने को मिल सकता है। वॉट्सऐप ने अपने लेटेस्ट बीटा में यह नया अपडेट पेश कर दिया है। कंपनी ने अपनी ऐप में वॉट्सऐप फार्म फेसबुक टैग को जोड़ दिया है। यह लेटेस्ट बीटा एडिशन एक हफ्ते से भी कम समय में आ जाएगा। मगर कुछ बीटा यूज़र्स को अपनी ऐप में नया नाम दिखाई दे रहा है। यूज़र्स ने वीबीटा इनफो पर फोटो शेयर की है, जिसमें देखा जा सकता है कि वॉट्सऐप में ‘वॉट्सऐप फार्म फेसबुक ’ टैग ऐड कर दिया गया है।

फेसबुक ने वॉट्सऐप को कई साल पहले खरीदा था। मगर इस प्लेटफॉर्म पर फेसबुक का कोई जिक्र नहीं था, हालांकि अब कंपनी का नाम जुड़ने से यूज़र्स को पता चलेगा कि वॉट्सऐप फेसबुक का हिस्सा है। फेसबुक ने कंफर्म किया कि वह वाटसऐप और इंस्टाग्राम का नाम बदलने जा रही है। 

13-08-2019
कल धरती की कक्षा छोड़ देगा चंद्रयान-2 और चांद की तरफ  बढ़ेगा 

नई दिल्ली। चंद्रयान-2  बुधवार को धरती की कक्षा छोड़ देगा और फिर यह चांद पर पहुंचने के लिए 'चंद्रपथ' पर अपनी यात्रा शुरू कर देगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिक इसे चंद्रपथ पर डालने के लिए बुधवार सुबह एक महत्वपूर्ण अभियान प्रक्रिया को अंजाम देंगे। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा है कि भारतीय समयानुसार बुधवार तड़के तीन बजे से सुबह चार बजे के बीच अभियान प्रक्रिया 'ट्रांस लूनर इंसर्शन' (टीएलआई) को अंजाम दिया जाएगा। इसरो ने कहा कि चंद्रयान-2 के 20 अगस्त को चंद्रमा की कक्षा में पहुंचने और सात सितंबर को इसके चंद्र सतह पर उतरने की उम्मीद है। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के अध्यक्ष के। सिवन ने सोमवार को कहा कि 14 अगस्त को तड़के लगभग साढ़े तीन बजे हम 'ट्रांस लूनर इंजेक्शन' नामक अभियान प्रक्रिया को अंजाम देने जा रहे हैं। इस अभियान चरण के बाद 'चंद्रयान-2' धरती की कक्षा को छोड़ देगा और चांद की तरफ  बढ़ जाएगा। 20 अगस्त को हम चंद्र क्षेत्र में पहुंचेंगे। यह उल्लेख करते हुए कि 'चंद्रयान-2Ó बीस अगस्त को चांद के इर्द-गिर्द होगा, उन्होंने कहा कि  हमने चांद के आस-पास सिलसिलेवार अभियान प्रक्रियाओं को अंजाम देने की योजना बनाई है और अंतत: सात सितंबर को हम चांद पर इसके दक्षिणी ध्रुव के नजदीक उतरेंगे। इसरो अब तक 'चंद्रयान-2' को पृथ्वी की कक्षा में ऊपर उठाने के पांच प्रक्रिया चरणों को अंजाम दे चुका है। 

 

 

12-08-2019
20 अगस्त को पहुंचेगा चंद्रमा की कक्षा में चंद्रयान-2

अहमदाबाद। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अध्यक्ष के. सिवन ने सोमवार को कहा कि भारत के दूसरे चंद्र अभियान चंद्रयान-2  के 20 अगस्त को चंद्रमा की कक्षा में पहुंचने की संभावना है और सात सितंबर को यह चंद्रमा की सतह पर उतरेगा। उन्होंने अहमदाबाद  में संवाददाताओं से कहा कि अंतरिक्ष यान दो दिनों बाद पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकलना शुरू करेगा। भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक समझे जाने वाले डॉ. विक्रम साराभाई की जन्मशती समारोह में हिस्सा लेने सिवन अहमदाबाद पहुंचे थे। इसरो प्रमुख ने कहा कि 3850 किलोग्राम के चंद्रयान-2 में तीन हिस्से हैं जिसमें एक ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर है। अभियान के तहत 22 जुलाई को प्रक्षेपण कार्यक्रम के बाद सात सितंबर को यह चंद्रमा की सतह पर पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि 22 जुलाई को चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण के बाद हमने पांच बार प्रक्रिया को अंजाम दिया। चंद्रयान-2 का समग्र हिस्सा फिलहाल धरती के इर्द गिर्द घूम रहा है। अगली सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया बुधवार सुबह में शुरू होगी। उन्होंने कहा कि 14 अगस्त को तड़के साढ़े तीन बजे हम ट्रांस लूनर इंजेक्शन नामक प्रक्रिया शुरू करेंगे। इस प्रक्रिया में चंद्रयान-2 पृथ्वी की कक्षा से बाहर होकर चंद्रमा की ओर बढ़ेगा। इसके बाद 20 अगस्त को हम चंद्रमा  की कक्षा में पहुंचेंगे। सिवन ने कहा कि फिलहाल अंतरिक्ष यान बहुत अच्छा कर रहा है और इसकी सभी प्रणाली सही से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इसरो में वैज्ञानिक आगामी दिनों में खासकर दिसंबर में काफी व्यस्त होंगे जब अंतरिक्ष एजेंसी छोटे उपग्रहों को प्रक्षेपित करने का अभियान शुरू करेगी।

 

 

06-08-2019
चंद्रयान-2 पहुंचा चंद्रमा के पास, पांचवी बार पृथ्वी की कक्षा सफलतापूर्वक बदली

नई दिल्ली। चंद्रयान-2 ने मंगलवार को दोपहर बाद पृथ्वी की कक्षा पांचवी बार सफलतापूर्वक बदली। इसके साथ ही अब यह चंद्रमा के और पास पहुंच गया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) ने ट्वीट करके कहा,“आज चंद्रयान-2 ने पांचवीं बार पृथ्वी की कक्षा बदली। चंद्रयान-2 ने मंगलवार को अपराह्न तीन बजकर चार मिनट पर पांचवीं बार सफलतापूर्व कक्षा बदली। उन्होंने कहा कि चंद्रयान सभी मापदंड़ों पर सही ढ़ंग से काम कर रहा है। इससे पहले 24 जुलाई को अपराह्न 2.52 बजे पहली बार चंदयान ने कक्षा बदली थी। इसके बाद 26 जुलाई को दूसरी बार,29 जुलाई को तीसरी बार और दो अगस्त को चौथी बार चंद्रयान ने पृथ्वी की कक्षा बदली थी। चंद्रयान-2 का 22 जुलाई को दोपहर 2.43 बजे श्रीहरिकोटा (आंध्रप्रदेश) के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपण हुआ था, जिसके 16 मिनट बाद ही यान सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में पहुंच गया था। चंद्रयान-2 में ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) शामिल हैं, जो 48 दिन में तीन लाख 844 किमी की यात्रा पूरी करके चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा। स्वदेशी तकनीक से निर्मित चंद्रयान-2 में कुल 13 पेलोड हैं। आठ ऑर्बिटर में, तीन पेलोड लैंडर ‘विक्रम’ और दो पेलोड रोवर ‘प्रज्ञान’ में हैं। पांच पेलोड भारत के, तीन यूरोप, दो अमेरिका और एक बुल्गारिया के हैं। चंद्रयान-2 के 20 सितंबर को चांद की सतह पर उतरने की संभावना है और चांद की कक्षा में पहुंचने के बाद ऑर्बिटर एक साल तक काम करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य पृथ्वी और लैंडर के बीच संपर्क स्थापित करना है।

 

04-08-2019
भारत की फिर बढ़ी ताकत : क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल का सफल परीक्षण

भुवनेश्वर। ओडिशा में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने आज बालासोर उड़ान परीक्षण रेंज में जमीन से हवा में मार करने वाली क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। इस मिसाइल का परीक्षण ओडिशा तट से किया गया। इस मिसाइल ने सफलतापूर्वक अपने लक्ष्य को भेद दिया है। बता दें कि क्विक रिएक्शन मिसाइल को डीआरडीओ ने ही विकसित किया है। इस मिसाइल के सफल परीक्षण को डीआरडीओ की बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है। 

 

02-08-2019
धरती की चौथी कक्षा में पहुंचा चंद्रयान-2, चार पड़ाव हुए पूरे

बेंगलुरू। भारत के चंद्रयान-2 ने चांद की तरफ  एक और कदम बढ़ाते हुए शुक्रवार को सफलतापूर्वक धरती की चौथी कक्षा में प्रवेश कर लिया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बताया कि चंद्रयान-2 लगातार पृथ्वी की कक्षा से आगे बढ़ रहा है और 2 अगस्त को दोपहर दो से तीन बजे के बीच इसने चौथी बार कक्षा में बदलाव किया। अभी तक की सारी गतिविधियां सामान्य हैं और चार दिन बाद 6 अगस्त को यह धरती की अगली कक्षा में प्रवेश कर जाएगा। चंद्रयान-2 ने शुक्रवार को चौथी कक्षा में प्रवेश के साथ ही इसरो ने चांद तक पहुंचने के 15 अहम पड़ावों में से चार को पूरा कर लिया है। इससे पहले इसरो ने 24, 26 और 29 जुलाई को यान का धरती की पहली, दूसरी और तीसरी कक्षा में परिवर्तन कराया था। अंतरिक्ष एजेंसी के मुताबिक चांद के गुरुत्व क्षेत्र में प्रवेश करने पर चंद्रयान-2 के प्रोपेलिंग सिस्टम का इस्तेमाल इसकी रफ्तार धीमी करने के लिए किया जाएगा, ताकि यह चांद की प्रारंभिक कक्षा में प्रवेश कर सके। पृथ्वी के प्रभाव वाले क्षेत्र से चांद के आभामंडल में यह 14 अगस्त को प्रवेश करेगा। इसके साथ ही चंद्रयान-2 चांद की परिक्रमा करने लगेगा। 13 दिन के बाद रोवर 'प्रज्ञान' को लेकर जा रहा लैंडर 'विक्रम' यान से अलग हो जाएगा। कुछ दिन कक्षा की परिक्रमा के बाद यह 7 सितंबर को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा।

28-07-2019
आ रहा है हुवावेई का पॉप अप सेल्फी कैमरा स्मार्टफोन वाई 9 प्राइम

नई दिल्ली। मोबाइल फोन बनाने वाली चीन की कंपनी हुवावेई भी पॉप अप सेल्फी कैमरा के रेस में शामिल होते हुए गुरुवार को भारतीय बाजार में अपना नया स्मार्टफोन वाई 9 प्राइम लाँच करने जा रही है। यह फोन ऑनलाइन मार्केट प्लेस अमेजन पर सूचीबद्ध हो चुका है और इच्छुक ग्राहकों को इसके लाँच होने पर नोटिफाइ करने के लिए पंजीयन करने का विकल्प दिया गया है।

कंपनी ने इस वर्ष मई में इस फोन को चीन में लाँच किया था जिसका स्क्रीन 6.59 इंच का है। इसमें हुवावेई किरिन 710 सिस्टम ऑन चिप है। इसमें चार जीबी रैम और 128 जीबी रोम है जिसे 512 जीबी तक बढ़ाया जा सकता है। इसमें 16 एमपी, आठ एमपी और दो एमपी का ट्रिपल रियर कैमरा और 16 एमपी का पॉप अप सेल्फी कैमरा है। सभी कैमरे आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आधारित है। इसमें 4000 एमएएच की बैटरी है और यह एंड्रायड पाई ऑपरेटिंग सिस्टम पर आधारित है। कंपनी ने इसको एक अगस्त को भारतीय बाजार में लाँच करने की घोषणा की है।

27-07-2019
भारतीय ऑटो उद्योग को मंदी से निकलने में कितना समय लगेगा पता नहीं : मारुति सुजुकी

अहमदाबाद। दुनिया की प्रमुख ऑटो कंपनी मारूति सुजुकी के प्रबंध निदेशक सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी (एमडी एवं सीईओ) केनिचि आयुकावा ने शनिवार को कहा कि किसी को भी पता नहीं है कि भारतीय ऑटो क्षेत्र को मंदी के मौजूदा दौर से निकलने में कितना समय लग सकता है। वाहनों के कलपुर्जों के उत्पादकों के संगठन एएमसीए के दूसरे वैल्यू चेन समिट में भाग लेने यहां आये आयुकावा ने मौजूदा स्थिति को एक मुश्किल और चुनौतीपूर्ण समय बताया और इससे निकल जाने की उम्मीद भी जतायी। यह पूछे जाने पर कि भारतीय वाहन और ऑटो बाजार में मंदी का मौजूदा दौर कब तक चलेगा, यह किसी को नहीं पता। हमारी कंपनी और अन्य ऑटो कंपनियां अपना बेहतरीनतम प्रयास कर रही हैं पर यह कोई नहीं जानता की मंदी का मौजूदा दौर दरअसल कब तक चलेगा।

ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में कंपनी के गुजरात संयंत्र के विस्तारीकरण परियोजना के बारे में पूछे जाने पर आयुकावा ने कहा कि इसकी तीसरी इकाई का निर्माण का शुरू है जो अगले साल पूरा होगा और इसके जरिये उत्पादन भी शुरू हो जाने की संभावना है। इससे संयंत्र की उत्पादन क्षमता मौजूदा पांच लाख इकाई से बढ़ कर साढ़े सात लाख इकाई हो जायेगी। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कलपुर्जो के उत्पादन के मामले में स्थानीयकरण यानी लोकेलाइजेशन की नीति पर जोर दिया और इसे मंदी के दौर से निपटने और लागत खर्च को कम करने की चाबी करार दिया। उन्होंने गुजरात सरकार की नीतियों की सराहना भी की। बिजली अथवा बैटरी चालित वाहनों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि ऐसे वाहन जरूर मौजूदा मॉडलों के लिये चुनौती होंगे पर इनके बाजार में बड़े पैमाने पर आने में अभी पांच से दस साल का समय लगेगा।

22-07-2019
भारत ने अपने दूसरे महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 का किया सफल प्रक्षेपण, रचा इतिहास

श्रीहरिकोटा। भारत ने चंद्रमा पर अपने दूसरे महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 का देश के सबसे वजनी 43.43 मीटर लंबे जीएसएलवी-एमके3 एम1 रॉकेट की मदद से सोमवार को सफल प्रक्षेपण कर इतिहास रच दिया। चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) प्रक्षेपण के 16 मिनट बाद प्रक्षेपण यान से अलग हो गया और पृथ्वी की पार्किंग कक्षा में प्रवेश कर गया। इसके बाद उसने सात सितंबर को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंंडिंग करने के लिए अपनी 30844 लाख किलोमीटर की 48 दिन तक चलने वाली यात्रा शुरू कर दी।  देश के करोड़ों लोगों के सपनों के साथ 3850 किलोग्राम वजनी चंद्रयान-2 ने अपराह्न 2.43 बजे शानदार उड़ान भरी। इसके प्रक्षेपण के लिए उलटी गिनती 20 घंटे पहले रविवार शाम 6.43 बजे शुरू हुई थी। 

चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) प्रक्षेपण के 16 मिनट बाद प्रक्षेपण यान से अलग हो गया और पृथ्वी की 170.06 ७ 40400 किलोमीटर की पार्किंग कक्षा में प्रवेश कर गया। चंद्रयान 13 भारतीय पेलोड (आठ आॅर्बिटर पर, तीन लैंडर पर और दो रोवर पर) एक ऐसे मिशन पर रवाना हुआ है जहां अब तक कोई देश नहीं पहुंच सका है। लगभग एक दशक तक चले वैज्ञानिक अनुसंधानों और इंजीनियंिरग विकास के साथ चंद्रयान-2 चांद के अनछुए हिस्से दक्षिणी ध्रुव पर रोशनी डालेगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने दूसरे मिशन में सॉफ्ट लैंंिडग का लक्ष्य रखा है। लैंडर दो मीटर प्रति सेकेंड की बेहद धीमी गति से चंद्रमा पर उतरेगा। केवल तीन देशों रूस, अमेरिका और चीन ने ही अब तक चांद पर सॉफ्ट लैंंिडग की है। इससे पहले चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण 15 जुलाई को किया जाना था लेकिन तकनीकी खराबी आने के कारण इसे टाल दिया गया। इसरो ने 18 जुलाई को घोषणा की थी कि विशेषज्ञ समिति ने तकनीकी खराबी के कारण का पता लगा लिया है और उसे ठीक भी कर लिया गया है।

यह मिशन इसरो के इतिहास के सबसे कठिन मिशनों में से एक है। आज तक दुनिया के किसी अन्य देश ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अपना मिशन नहीं भेजा है। भारत के पहले चंद्र मिशन चंद्रयान-1 का प्रक्षेपण 22 अक्टूबर 2008 में किया गया था। इससे चांद की सतह पर पानी की मौजूदगी का पता लगाया गया है। चंद्रयान-2 प्रक्षेपण के बाद पहले 23 दिन पृथ्वी की कक्षा में ही रहेगा जहाँ से अगले पाँच दिन में इसे चाँद की कक्षा में स्थानांतरित किया जायेगा। चंद्रयान-2 का लैंडर सात ंिसतबर के आसपास चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर मैनजिनस सी और सम्पेलस एन क्रेटरों के बीच उतरेगा।

इसरो के अनुसार, पहले 23 दिन पृथ्वी की कक्षा में रहने के बाद चंद्रयान को चंद्रमा की कक्षा में स्थानांतरित करने वाले वक्र पथ पर डाला जायेगा। तीसवें दिन यह चंद्रमा की कक्षा में पहुँच जायेगा। वहाँ अगले 13 दिन तक चंद्रयान चंद्रमा की सतह से 100 किलोमीटर की ऊँचाई वाली कक्षा में चक्कर लगायेगा। तैंतालिसवें दिन लैंडर चंद्रमा की सतह पर उतरने के लिए ऑर्बिटर से अलग हो जायेगा जबकि ऑर्बिटर उसी कक्षा में चक्कर लगता रहेगा। चौवालिसवें दिन से लैंडर की गति कम की जायेगी और 48वें दिन वह चंद्रमा पर उतरेगा। यह मिशन इसरो के इतिहास के सबसे कठिन मिशनों में से एक है। चंद्रयान-2 का लैंडर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर मैनजिनस सी और सम्पेलस एन क्रेटरों के बीच उतरेगा। आज तक दुनिया के किसी अन्य देश ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर मिशन नहीं भेजा है।

चंद्रयान चंद्रमा की सतह से 100 किलोमीटर की ऊँचाई वाली कक्षा में चक्कर लगायेगा। अपने दूसरे मिशन में इसरो ने सॉफ्ट लैंंडिंग का लक्ष्य रखा है। लैंडर दो मीटर प्रति सेकेंड की बेहद धीमी गति से आहिस्ते से चंद्रमा पर उतरेगा। चंद्रयान के तीन हिस्से ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर हैं जिन्हें एक समेकित मॉड्यूल में रखा गया है। इस मॉड्यूल का वजन 3850 किलोग्राम है। यह 3.1 गुना 3.1 गुना 5.8 मीटर के आकार का है। ऑर्बिटर का वजन 2379 किलोग्राम है। इसमें 1000 वाट बिजली उत्पन्न करने की क्षमता है। इसमें आठ वैग्यानिक उपकरण यानी पेलोड हैं जो विभिन्न आँकड़े जुटायेंगे। यह एक साल तक चंद्रमा की कक्षा में रहेगा। लैंडर, जिसे भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के पितामह विक्रम साराभाई के नाम पर विक्रम नाम दिया गया है, चंद्रमा की सतह पर उतरेगा। यह एक चंद्र दिवस यानी करीब 14 दिन तक आँकड़े जुटाने का काम करेगा। इस पर चार पेलोड हैं। इसका वजन 1471 किलोग्राम है और यह 650 वाट बिजली उत्पन्न कर सकता है।

रोवर को प्रज्ञान नाम दिया गया है। इसका वजन 27 किलोग्राम है और इसमें छह पहिये लगे हैं। यह लैंडर से 500 मीटर के दायरे में चक्कर लगा सकता है। इस दौरान इसकी गति एक सेंटीमीटर प्रति सेकेंड होगी। इस पर दो पेलोड हैं। आॅर्बिटर और लैंडर बेगलुरु के पास ब्यालालू स्थित इंडियन डीप सी नेटव्रक नामक इसरो के नियंत्रण कक्ष से सीधे संपर्क में रहेंगे। ये आपस में भी संवाद कर सकेंगे। रोवर लैंडर के साथ संवाद करेगा। इस मिशन के मुख्य उद्देश्यों में चंद्रमा पर पानी की मात्रा का अनुमान लगाना, उसके जमीन, उसमें मौजूद खनिजों एवं रसायनों तथा उनके वितरण का अध्ययन करना, उसकी भूकंपीय गतिविधियों का अध्ययन, और चंद्रमा के बाहरी वातावरण की ताप-भौतिकी गुणों का विश्लेषण है। उल्लेखनीय है चंद्रमा पर भारत के पहले मिशन चंद्रयान-1 ने वहाँ पानी की मौजूदगी की पुष्टि की थी। इस मिशन में तरह-तरह के कैमरा, स्पेक्ट्रोमीटर, रडार, प्रोब और सिस्मोमीटर शामिल हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का एक पैसिव पेलोड भी इस मिशन का हिस्सा है जिसका उद्देश्य पृथ्वी और चंद्रमा की दूरी सटीक दूरी पता लगाना है।

22-07-2019
भारत ने रचा इतिहास, मिशन मून लॉच......

नई दिल्ली। इसरो के महत्वकांक्षी मून मिशन चंद्रयान-2 को दोपहर 2.43 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया गया। ‘बाहुबली’ नाम से चर्चित जीएसएलवी मार्क-3 रॉकेट सामान्य तरीके से काम कर रहा है। चंद्रयान-2 3.8 टन वजनी है। चंद्रयान-2 आज से 48वें दिन चांद की सतह पर पहुंचेगा। चंद्रयान-2 की कुल लागत 978 करोड़ रुपये है। 15 मंजिला इमारत जितना ऊंचा है चंद्रयान बाहुबली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) चंद्रमा के साउथ पोल पर चंद्रयान-2 को उतारेगा। बता दें कि चांद के इस हिस्से के बारे में दुनिया को ज्यादा जानकारी नहीं है। इसरो के मुताबिक, चंद्रयान-2 चांद के भौगोलिक वातावरण, खनिज तत्वों, उसके वायुमंडल की बाहरी परत और पानी की उपलब्धता की जानकारी एकत्र करेगा।  पहले इसे 15 जुलाई को लॉन्च किया जाना था, लेकिन ऐन वक्त पर लॉन्च व्हीकल में लीक जैसी तकनीकी खामी का पता चलने पर इसे टाल दिया गया था।

22-07-2019
चंद्रयान-2 का काउंटडाउन शुरू, आज दोपहर 2.43 पर लॉन्चिंग, श्रीहरिकोटा में सारी तैयारी पूरी

नई दिल्ली। चंद्रयान-2 की उल्टी गिनती रविवार शाम 6.43 से शुरू हो गई है 22 जुलाई को दोपहर 2.43 बजे इसे लॉन्च किया जाएगा श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से इसे छोड़ा जाएगा इस रॉकेट की लंबाई 44 मीटर लंबा और वजन 640 टन है। चांद पर जाने वाले भारत के चंद्रयान-2 का काउंटडाउन शुरू हो गया है। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (करफड) के चीफ के सिवन ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि चंद्रमा पर भेजे जाने वाले भारत के दूसरे यान की रविवार शाम को उल्टी गिनती 6.43 बजे से शुरू हो गई। पहले चंद्रयान-2 को 15 जुलाई को लॉन्च किया जाना था। चंद्रयान में लिक्विड कोर स्टेज पर ईंधन भरने का काम पूरा हो गया है। लेकिन लॉन्चिंग से एक घंटे पहले इसमें तकनीकी खराबी का पता चलने के बाद इसे रोक दिया गया. अब 22 जुलाई को दोपहर 2.43 बजे इसे लॉन्च किया जाएगा. इसरो ने बताया कि जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मार्क -3 (जीएसएलवी मार्क-3) में आई तकनीकी खराबी को ठीक कर लिया गया है। चंद्रयान-2 भारत का दूसरा सबसे महत्वाकांक्षी चंद्र मिशन है। इसे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से भारी-भरकम रॉकेट जियोसिन्क्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल-मार्क 3 (जीएसएलवी एमके 3) से लॉन्च किया जाएगा।

जीएसएलवी को 'बाहुबली' के नाम से भी पुकारा जाता है। यह रॉकेट 44 मीटर लंबा और 640 टन वजनी है। इसमें 3.8 टन का चंद्रयान रखा गया है। पृथ्वी और चांद की दूसरी करीब 3.844 किलोमीटर है। उड़ान के कुछ ही मिनटों बाद 375 करोड़ रुपये का जीएसएलवी-मार्क-3 रॉकेट 603 करोड़ रुपये के चंद्रयान-2 को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करेगा। वहां के चांद की यात्रा शुरू होगी। चंद्रयान-2 में लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान चांद तक जाएंगे। लैंडर विक्रम सितंबर या अक्टूबर में चांद पर पहुंचेगा और इसके बाद वहां प्रज्ञान काम शुरू करेगा। उल्टी गिनती के दौरान रॉकेट और अंतरिक्ष यान की प्रणालियां जांच से गुजरेंगी और रॉकेट इंजनों में ईंधन भरा जाएगा। अब तक इसरो ने 3 जीएसएलवी-एमके 3 रॉकेट भेजे हैं। पहला रॉकेट 18 दिसंबर 2014 को, दूसरा 5 फरवरी 2017 को और तीसरा 14 नवंबर 2018 को भेजा गया। जीएसएलवी-एमके 3 का इस्तेमाल भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए किया जाएगा, जो वर्ष 2022 के लिए तय है।

21-07-2019
मिशन चंद्रयान-2 की रिहर्सल हुई पूरी, सोमवार दोपहर 2 बजकर 43 मिनट पर होगी लॉन्चिंग

नई दिल्ली। मिशन चंद्रयान-2 सोमवार दोपहर दो बजकर 43 मिनट पर रवाना होगा। इसरो ने ट्वीट करके जानकारी दी है कि लॉन्च की रिहर्सल पूरी हो चुकी है और इसका प्रदर्शन समान्य है। जीएसएलवी-एमके-थ्री एम1 रॉकेट में कुछ तकनीकी दिक्कत के चलते 15 जुलाई को चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण रोक दिया गया था। इसरो ने बताया कि विशेषज्ञ समिति ने तकनीकी खामी की मुख्य वजह का पता लगा लिया और उसके बाद सही कदम उठाए गए हैं। अब इस 3,850 किलोग्राम वजनी 'चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 22 जुलाई को अपराह्न दो बजकर 43 मिनट पर होगा। यह अपने साथ एक ऑर्बिटर, एक लैंडर और एक रोवर ले जाएगा और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा। इसे चांद तक पहुंचने में 54 दिन लगेंगे।

Please Wait... News Loading