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20-06-2019
एपल की बिक्री घटने से स्मार्टफोन बाजार को झटका, सैमसंग ने फिर भी बनाया रिकॉर्ड

नई दिल्ली। एपल की बिक्री 20 प्रतिशत लुढ़कने से वर्ष 2019 की पहली तिमाही में दुनिया भर में प्रीमियम स्मार्टफोन के बाजार में 8 प्रतिशत की गिरावट आई है। यह बात काउंटरप्वाइंट रिसर्च की एक रिपोर्ट में कही गई। कांउटरप्वाइंट रिसर्च की मार्केट मॉनिटर सर्विस रिपोर्ट के अनुसार, आलोच्य तिमाही के दौरान दुनियाभर में प्रीमियम सेगमेंट में सैमसंग की बाजार हिस्सेदारी एक चौथाई रही, जोकि पिछले एक साल में कंपनी की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है।
 

हुआवेई ने भी बाजार में बढ़त बनाई
इस दौरान सैमसंग ने पहली बार एस-सीरीज में तीन डिवाइस लॉन्च किए, जबकि आमतौर पर कंपनी दो डिवाइस लांच करती थी। चीन की कंपनी हुआवेई ने भी प्रीमियम बाजार में दोहरे अंक की हिस्सेदारी दर्ज हासिल की। कैमरे की बेहतरीन क्वालिटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) प्रौद्योगिकी की बदौलत हुआवेई ने आलोच्य तिमाही का अच्छा प्रदर्शन किया, जिसमें उसके मैट व पी-सीरीज के फोन की बेहतरीन क्वालिटी का काफी योगदान रहा। रिसर्च एनालिस्ट वरुण मिश्रा ने एक बयान में कहा, 'यूजर के अपने आईफोन को लंबे समय तक रखने की प्रवृति से एपल की बिक्री प्रभावित हुई। आईफोन बदलने का चक्र औसतन दो साल से बढ़कर तीन से साल ज्यादा हो चुका है। वहीं, ग्लैक्सी एस-10 सीरीज के डिजाइन में काफी बदलाव आने और आईफोन की तुलना में बेहतर ऑफर मिलने से सैमसंग और एपल के बीच अंतर कम रह गया है, जिससे सैमसंग को फायदा मिला है।'

19-06-2019
वेस्टर्न डिजिटल ने लाँच किया हाई स्पीड एसएसडी

नई दिल्ली। स्टोरेज सॉल्यूशन प्रदान करने वाली कंपनी वेस्टर्न डिजिटल ने मंगलवार को भारतीय बाजार में हाई स्पीड डब्ल्यूडी ब्लैक एसएन750 एनपीएमई एसएसडी लाँच करने की घोषणा की जिसको गेंमिंग के लिए कंप्यूटर या लैपटॉप में उपयोग किया जा सकता है। कंपनी के चैनल सेल्स इंडिया के निदेशक खालिद वानी ने यहां इस एसएसडी को लाँच करते हुये कहा कि इसको दो टीबी क्षमता में विकसित किया गया है। इसको गेंमिंग या बहुत अधिक वीडियो स्ट्रीमिंग करने वालों को ध्यान में रखते हुये डिजाइन किया गया है। एक टीबी वाला एसएसडी से स्पीड बढ़कर 3470 एमबी प्रति सेंकेंड हो जाता है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही कारोबारियों के लिए भी डब्ल्यू डी ब्लैक एस एन 500 एनवीएमई एसएसडी लाँच किया गया जिसका स्पीड 1700 एमपी प्रति सेकेंड से अधिक है। यह डाटा तीव्र स्पीड में डाटा हस्तातंरण करने में सक्षम है। इसके साथ ही डब्ल्यूडी ब्ल्यू एसएसडी और डब्ल्यूडी ग्रीन एसटीए एसएसडी भी बाजार में उपलब्ध है। 
वानी ने कहा कि नया एसएसडी पुराने एसएसडी की तुलना में गेमिंग अनुभव या कंप्यूटर सर्फिंग के अनुभव को बहुत बेहतर बनाने के साथ बैगर बफरिंग के कंप्यूटर या लैपटॉप पर काम करता है।

 

19-06-2019
दो ग्रहों की हुई खोज, जहां हैं जीवन के आसार, धरती मिली गर्म और पानी की उम्मीद 

नई दिल्ली। दो ऐसे ग्रहों की खोजे की गई है, जो पृथ्वी के समान गर्म है और उनमें पानी हो सकता है। साथ ही यह जीवन का समर्थन करने के लिए अच्छा विकल्प हो सकते हैं। यह एक शोध में पता चला। वैज्ञानिक 2016 के बाद से 3.5-मीटर टेलीस्कोप का उपयोग करके पास के सितारों के पास मौजूद ग्रहों पर जीवन की खोज कर रहे हैं। अलमेरिया, दक्षिणी स्पेन में कैलार ऑल्टो वेधशाला और दो अन्य स्पैनिश दूरबीनों में कैद की गई छवियों में शोधकतार्ओं को हमारे सौर मंडल से लगभग 12.5 प्रकाश वर्ष दूर टेगेर्डन स्टार (एक ठंडा लाल बौना सितारे) से जुड़ी बड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। 

शोधपत्र के सह-लेखक इग्नासी रिबास ने कहा, टेगार्डन हमारे सूरज के द्रव्यमान का केवल आठ प्रतिशत है। यह सूर्य की तुलना में बहुत छोटा और बहुत कम चमकीला है। वास्तव में, पृथ्वी के बहुत करीब होने के बावजूद इसे 2003 तक खोजा नहीं गया था। सूर्य का तापमान जहां 5,500 सेल्सियस है, वहीं सितारे का तापमान लगभग 2,600 सेल्सियस है। यह हमारे सूर्य की तुलना में 10 गुना छोटा है, इसलिए यह 1,500 गुना कमजोर है और ज्यादातर अवरक्त तरंगों को प्रसारित करता है। एक बार तारे के मिल जाने के बाद वैज्ञानिकों ने डॉपलर तकनीक का इस्तेमाल किया, जिसे वोबबल विधि के रूप में भी जाना जाता है, जो अपने चारों ओर ग्रहों का पता लगाने के लिए मूल तारे के रेडियल-वेग माप का उपयोग करता है। डॉपलर तकनीक ने कम से कम दो संकेतों का पता लगाया, जिन्हें अब ग्रहों टेगार्डन बी और टेगार्डन सी के रूप में पहचाना गया है।

टेगार्डन बी का द्रव्यमान पृथ्वी के समान है और प्रत्येक 4.9 दिनों में सितारे की परिक्रमा करता है। दूसरे ग्रह कक्षा को पूरा करने में 11.4 दिन का समय लेता है, जो उसके वर्ष की लंबाई है। रिबास ने कहा, दूसरे शब्दों में, यह अपने सितारे के बेहद नजदीक है। उन्होंने कहा, जितना प्रकाश हम सूर्य से प्राप्त करते है, उससे 10 प्रतिशत अधिक प्रकाश टेगार्डन एक प्राप्त करता हैं, इसलिए हम सोचते हैं कि यह बहुत गर्म हो सकता है और इसमें पानी नहीं हो सकता है। लेकिन यह सिर्फ अटकलें हैं, क्योंकि इसके जलवायु के तत्व हैं जो हमें नहीं पता है और इसका मतलब यह हो सकता है कि यहां क्या पता तरल पानी हो।

टेगार्डन एक रहने योग्य क्षेत्र के बीच में घूमता है, जिसका अर्थ है कि इसकी सतह पर तापमान 0 डिग्री सेल्युकस और 100 डिग्री सेल्यियस के बीच है, जिसका अर्थ है कि इसकी सतह पर बहुत अच्छी तरह से पानी हो सकता है। इसके अलावा वैज्ञानिक इस बात से उत्साहित हैं कि इसके दूसरे दोनों गृह प्राक्सीमा के साथ-साथ जीवन का समर्थन करने के लिए सबसे अच्छा विकल्प हैं। ये वे ग्रह हैं, जिन्होंने अब तक खोजे गए सभी ग्रहों पर वास के लिए सबसे अच्छी स्थिति प्रस्तुत की।

14-06-2019
Zomato अब ड्रोन से पहुंचाएगा आपका खाना, किया गया परीक्षण

नई दिल्ली। ऑनलाइन ऑडरिंग और फूड डिलिवरी प्लेटफार्म जोमैटो ने कहा कि उसने हाइब्रिड ड्रोन का इस्तेमाल कर अपने पहले ड्रोन डिलिवरी का सफल परीक्षण किया है। जिसने फूड पैकेट डिलीवर करने के लिए 10 मिनट में पांच किलोमीटर की दूरी तय की और इस दौरान अधिकतम 80 किलोमीटर प्रति घंटा की गति हासिल की। जोमैटो ने कहा, ‘डीजीसीए द्वारा अनुमोदित दूरस्थ स्थलों में से एक में पिछले हफ्ते ड्रोन का परीक्षण किया गया। इस प्रकार के परीक्षण बेहद दूरस्थ स्थलों में किए जाते हैं, जिसमें खासतौर से इस प्रकार के परीक्षण के लिए ही डिजाइन किया गया है।’ हालांकि फूड एग्रीगेटर ने उस सटीक स्थान का खुलासा नहीं किया, जहां ड्रोन ने पैकेट डिलीवर किए।

नागरिक विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा 13 मई को जारी अधिसूचना के मुताबिक, इच्छुक कंपनियों को रिमोटली पॉलोटेड विमान प्रणाली (आरपीएएस) मानव रहित विमान प्रणाली (यूएएस) के एक्सपेरिमेंटल बियॉन्ड विजुअल लाइन ऑफ साइट ऑपरेशंस (बीवीएलओएस) के संचालन के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) जमा करने के लिए कहा गया है। जोमैटो के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी दीपिंदर गोयल ने एक बयान में कहा, फूड डिलीवरी के औसत 30 मिनट को 15 मिनट में बदलने के लिए हवाई मार्ग का सहारा लेना ही इकलौता संभव रास्ता है। सड़कें बहुत तेजी से डिलीवरी के लिए कुशल नहीं हैं। उन्होंने कहा, हम टिकाऊ और सुरक्षित वितरण प्रौद्योगिकी के निर्माण की दिशा में काम कर रहे हैं और हमारे पहले सफल परीक्षण के साथ, ड्रोन द्वारा फूड डिलीवरी अब सिर्फ एक सपना नहीं है।

14-06-2019
अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत ने उठाया बड़ा कदम, खुद का स्पेस स्टेशन बनाने की तैयारी में इसरो

नई दिल्ली। अंतरिक्ष के क्षेत्र में बड़ा कदम रखते हुए भारत अपना खुद का स्पेस स्टेशन लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। यह बात इसरो प्रमुख के सिवन ने गुरुवार को कही। यह महत्वाकांक्षी परियोजना गगनयान मिशन का विस्तार होगी। नई दिल्ली में मौजूद सिवन ने कहा कि हमें मानव अंतिरक्ष मिशन को लॉन्च करने के बाद गगनयान प्रोग्राम का विस्तार करना होगा। इसीलिए, भारत अपना स्पेस सेंटर लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है।

इससे पहले 12 जून को बंगलूरू में इसरो प्रमुख ने कहा था कि चंद्रमा की सतह पर खनिजों के अध्ययन और प्रयोग करने के लिए भारत के दूसरे अभियान 'चंद्रयान-2' 15 जुलाई को रवाना होगा। उन्होंने बताया था कि यह यान छह या सात सितंबर को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरेगा। चंद्रमा के इस हिस्से के बारे में वैज्ञानिकों के पास ज्यादा जानकारी नहीं है। बता दें कि चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण 15 जुलाई को रात 2:51 बजे श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से होगा। इसे जीएसएलवी मार्क-3 रॉकेट अंतरिक्ष में ले जाएगा। इस अंतरिक्ष यान का द्रव्यमान 3.8 टन है। इसमें तीन मॉड्यूल आर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) हैं।  

13-06-2019
विश्व में इंटरनेट इस्तेमाल करने में भारत दूसरे नंबर पर, पहले स्थान पर चीन काबिज 

नई दिल्ली। इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाला भारत विश्व में दूसरे नंबर पर है। पहले नंबर पर चीन है, जहां लोग सर्वाधिक इंटरनेट का उपयोग करते है। इंटरनेट इस्तेमाल के संबंध में 2019 की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्व में चीन इंटरनेट का उपयोग करने वाले के मामलों में सबसे ऊपर है। चीन का हिस्सा 21 प्रतिशत है और इसके बाद भारत 12 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है।
अमेरिका का हिस्सा भारत की तुलना में एक तिहाई कम आठ प्रतिशत ही है। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर इंटरनेट इस्तेमाल करने की वृद्धि दर मजबूती से किंतु धीमी गति से बढ़ रही है। हालांकि 2018 में इसकी वृद्धि दर एक साल पहले के सात प्रतिशत की तुलना में छह प्रतिशत रही थी।
तीन साल पहले भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में कदम रखने वाली मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो अमेरिका के बाद किसी भी अन्य देश की सबसे उन्नयन इंटरनेट कंपनी बन चुकी है। रिलायंस जियो के 30 करोड़ 70 लाख मोबाइल फोन उपभोक्ता हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया “हम एक हाईब्रिड ऑनलाइन से ऑफलाइन वाणिज्य मंच रिलायंस के खुदरा केंद्रों को जियो डिजिटल इंफ्रास्ट्रकचर एवं सेवाओं के साथ जोड़कर तैयार कर रहे हैं। इससे रिलायंस रिटेल केंद्रों पर 35 करोड़ उपभोक्ताओं की पहुँच होगी।

12-06-2019
रिलायंस जियो का नया ऑफर, मिलेंगे एजियो के कूपन, घर बैंठे कर सकेंगे शॉपिग

नई दिल्ली। रिलायंस जियो एक बार फिर एक नया ऑफर बाजार में लेकर आई है। अब आप अजियो और जियो के साथ घर बैठे शॉपिंग कर सकते हैं। दरअसल आप जियो के 198 और 399 के रिचार्ज पर AJIO.COM से मनचाही शौपिंग कर सकते हैं। जियो ग्राहक रिचार्ज करने पर ये सभी लाभों का लाभ उठा सकते हैं। 198 के रिचार्ज पर ग्राहकों को 198 रुपए के एजियो के कूपन मिलेंगे, जिन्हें 5 बार (हर महीने में एक बार) इस्तेमाल किया जा सकता है। कूपन को 999 रुपए के न्यूनतम कार्ट मूल्य पर इस्तेमाल किया जा

सकता है। साथ ही 399 के रिचार्ज प्लान पर ग्राहक को 399 रुपए के ही कूपन प्राप्त होंगे, जिन्हें कुल 5 बार और महीने में एक बार इस्तेमाल में किया जा सकेगा। इस कूपन को 1399 रुपए के न्यूनतम कार्ट मूल्य पर इस्तेमाल किया जा सकेगा। यह एजियो डिस्काउंट कूपन एजियो डॉट कॉम पर मौजूद होंगे। ऑफर नए जियो सब्सक्राइबर्स और मौजूदा सब्सक्राइबर्स के लिए होगा।

12-06-2019
चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण 15 जुलाई को

बेंगलुरु। चंद्रमा पर भारत के दूसरे मिशन चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण 15 जुलाई को किया जायेगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष डॉ. के. शिवन ने बुधवार को यहाँ एक प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण 15 जुलाई को तड़के दो बजकर 51 मिनट पर किया जायेगा। इसके प्रक्षेपण के लिए 3.8 टन वजन वाले जीएसएलवी-एमके3 प्रक्षेपण यान का इस्तेमाल किया जायेगा।

मिशन इस मायने में खास है कि इसका लैंडर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट उतरेगा। अब तक भेजे गये दुनिया के किसी भी मिशन में चंद्रमा के इस हिस्से पर लैंडिंग नहीं करायी गयी है। ऑर्बिटर चंद्रमा की सतह से 100 किलोमीटर ऊपर चक्कर लगाता रहेगा। लैंडर के आहिस्ते से चंद्रमा की सतह पर उतरने के बाद रोवर उससे अलग होकर सतह पर घूम-घूमकर प्रयोग करेगा और भविष्य के प्रयोग के लिए जरूरी साक्ष्य एकत्र करेगा। चंद्रयान-2 पर 13 भारतीय पेलोड (प्रयोग के लिए भेजे जाने वाले वैज्ञानिक उपकरण आदि) तथा एक नासा का पेलोड होगा। भारतीय उपकरणों में आठ ऑर्बिटर पर, तीन लैंडर पर और दो रोवर पर होंगे।

12-06-2019
इसरो ने दिखाई चंद्रयान-2 की पहली झलक, जुलाई में चंद्रमा पर उतरने की तैयारी

हैदराबाद। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) चंद्रमा पर रोवर उतारने के अपने महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 की तैयारी में जुटा है। इसरो ने बुधवार को चंद्रयान-2 मिशन की पहली झलक जारी की। चंद्रयान-2 के मॉड्यूल्स में लैंडर, ऑर्बिटर और रोवर लगे हैं। इन्हें इसरो के बेंगलुरू स्थित प्रतिष्ठान में तैयार किया जा रहा है। इस चंद्रयान-2 मिशन को नौ से 16 जुलाई के बीच श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च करने की योजना है। देश और दुनिया भर की निगाहें इसरो के इस मिशन पर लगी हैं। 

चंद्रयान-2 को स्वदेशी निर्मित जीएसएलवी मार्क III अंतरिक्ष की कक्षा में लेकर जाएगा। इसके मॉड्यूल के तीन हिस्से ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर हैं। लैंडर का नाम विक्रम और रोवर का नाम प्रज्ञान रखा गया है। लैंडर विक्रम में रोवर प्रज्ञान समाहित रहेगा और चंद्रमा पर विक्रम के उतरने के बाद रोवर प्रज्ञान सतह पर बाहर आएगा। इस मिशन के बारे में इसरो ने अब तक जो जानकारी दी है उसके मुताबिक मिशन के दौरान ऑर्बिटर पहले चंद्रमा की परिधि में चक्कर लगाएगा और फिर इसके बाद वह चंद्रमा के साउथ पोल पर लैंडिंग करेगा। चंद्रमा की सतह पर पहुंचने के बाद छह पहिए वाला प्रज्ञान वहां पहले से निर्धारित वैज्ञानिक खोज करेगा। चंद्रयान मिशन की यह पूरी प्रक्रिया इसरो के वैज्ञानिक पृथ्वी से नियंत्रित करेंगे। खास बात यह है कि 10 साल में यह दूसरी बार है जब इसरो चंद्रमा पर अपना दूसरा मिशन भेज रहा है। 2009 में चंद्रयान-1 की कामयाबी के बाद इसरो की यह दूसरी महात्वाकांक्षी योजना है। 

09-06-2019
सुखोई में ब्रह्मोस मिसाइलों को जोड़ने का काम शुरू, बढ़ेगी ताकत

नई दिल्ली। सुखोई फायटर जेट में ब्रह्मोस मिसाइलों को जोडऩे के काम में सरकार ने तेजी ला दी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक 40 सुखोई फाइटर जेट्स की बनावट में बदलाव करके उन्हें ब्रह्मोस मिसाइल ले जाने लायक बनाया जाएगा। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक सरकार के इस फैसले से इंडियन एयरफोर्स की ताकत में जबर्दस्त इजाफा होगा। सूत्रों के मुताबिक सरकार ने हिन्दु्स्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और ब्रह्मोस एयरोस्पेस को कहा है कि वे इस प्रोजेक्ट में तेजी लाएं, ताकि इसे तय समय सीमा दिसंबर 2020 से पहले पूरा किया जा सके। बता दें कि 2016 में सरकार ने ब्रह्मोस मिसाइल को 40 सुखोई जेट्स में अटैच करने का फैसला किया था। ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। इस प्रोजेक्ट पर वास्तविक काम 2017 के अंत में शुरू हुआ, लेकिन अब भी इसकी रफ्तार धीमी है। सूत्रों ने बताया कि 26 फरवरी को बालाकोट एयरस्ट्राइक और उसके बाद पाकिस्तान की ओर से भारत पर बदले की कोशिश के बाद सेना और सुरक्षा अधिकारियों की एक टॉप मीटिंग में ये महसूस किया गया कि सुखोई के साथ ब्रह्मोस मिसाइलों के इंटीग्रेशन की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए, इसके बाद इस काम को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने की प्रक्रिया शुरू हुई। सरकार ने हिन्दु्स्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को विशेष रूप से कहा है कि वह इस प्रोजेक्ट में ज्यादा मैनपावर और संसाधन का इस्तेमाल कर इसे जल्द पूरा करे। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद सुखोई के जरिए समुद्र या जमीन में मार कर सकने की वायुसेना की क्षमता में कई गुना इजाफा होगा। सुखाई विमान की उड़ान क्षमता और ब्रह्मोस मिसाइल की ताकत के बूते वायुसेना को रणक्षेत्र में सामरिक बढ़त हासिल होगी। बता दें कि 2.5 टन की ब्रह्मोस मिसाइल ध्वनि की रफ्तार से तीन गुणा गति से मार करता है और इसकी पहुंच 290 किलोमीटर है।

06-06-2019
भारत में जेनफोन की बिक्री पर लगी रोक

नई दिल्ली। ताइवान की स्मार्टफोन निर्माता कंपनी आसुस को दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा झटका देते हुए जेन और जेनफोन ट्रेडमार्क के साथ फोन और लैपटॉप की बिक्री पर रोक लगा दी है। साथ ही कोर्ट नेZen' और 'Zenfone' ट्रेडमार्क वाले प्रचार पर भी रोक लगा दी है। दरअसल टेलीकेयर नेटवर्क इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने आसुस पर ट्रेडमार्क को इस्तेमाल करने के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। इस मामले पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई और कोर्ट ने 28 मई 2019 से लेकर 8 हफ्तों तक जेन ब्रांड के फोन, टैबलेट, अक्सेसरीज आदि की बिक्री पर रोक लगा दी है।

गौरतलब है कि टेलीकेयर नेटवर्क कंपनी ने ट्रेड मार्क्स ऐक्ट 1999 के तहत जेन और  जेनमोबाइल ट्रेडमार्क को रजिस्टर किया था। इस ट्रेडमार्क के तहत कंपनी भारत में फीचर फोन और स्मार्टफोन बेचने की तैयारी कर रही थी, लेकिन इसी बीच साल 2014 में आसुस ने भारत में  Zenfone ट्रेडमार्क के साथ अपने स्मार्टफोन पेश कर दिए। ट्रेडमार्क के इस्तेमाल को लेकर टेलीकेयर का आरोप है कि इससे ग्राहकों के बीच दुविधा की स्थिति पैदा हो गई। वहीं आसुस ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उसने जेनफोन सीरीज का नाम प्राचीन जेन फिलॉसफी के आधार पर रखा है।

06-06-2019
भारत में सस्ता हुआ Moto G7, अब इतने में खरीदें

नई दिल्ली। इस साल मार्च के महीने में मोटोरोला ने भारत में Moto G7 स्मार्टफोन को लॉन्च किया था। अब दो महीनों बाद कंपनी ने इस स्मार्टफोन की कीमत में कटौती कर दी है। एक निजी वेबसाइट के मुताबिक, ऑफलाइन रिटेलर्स भारत में Moto G7 पर 1,000 रुपये का डिस्काउंट दे रहे हैं। Moto G7 को भारत में 16,999 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया था। अब कीमत में कटौती के बाद इस स्मार्टफोन को ग्राहक 15,999 रुपय में खरीद पाएंगे। इस कीमत में आप 4GB रैम और 64GB स्टोरेज वेरिएंट को खरीद पाएंगे। ग्राहकों के पास सिरेमिक ब्लैक और क्लियर वाइट कलर के ऑप्शन मौजूद होंगे।

ndiaShopps.com की रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल कीमत में कटौती केवल ऑफलाइन रिटेलर्स द्वारा ही ऑफर किया जा रहा है। हालांकि रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि जल्द ही फ्लिपकार्ट द्वारा भी अपने प्लेटफॉर्म पर इस ऑफर को उपलब्ध कराया जाएगा। खबर लिखे जाने तक फ्लिपकार्ट पर Moto G7 की कीमत 16,999 रुपये दिखाई दे रही है।

Moto G7 के स्पेसिफिकेशन्स

Moto G7 में FHD+ (2270×1080 पिक्सल) रिजोल्यूशन के साथ 6.2-इंच LCD डिस्प्ले दिया गया है. साथ ही हालिया ट्रेंड के हिसाब से इसमें वाटरड्रॉप नॉच भी मौजूद है। इस स्मार्टफोन में 4GB रैम और 64GB स्टोरेज के साथ क्वॉलकॉम स्नैपड्रैगन 632 प्रोसेसर मिलता है। इसकी इंटरनल मेमोरी को 512GB तक कार्ड की मदद से बढ़ाया जा सकता है। फोटोग्राफी के लिए Moto G7 में डुअल-कैमरा सेटअप दिया गया है। इस सेटअप में 12 मेगापिक्सल प्राइमरी सेंसर और 5 मेगापिक्सल सेकेंडरी सेंसरह मिलता है। वहीं सेल्फी के लिए यहां 8 मेगापिक्सल का कैमरा दिया गया है। इसकी बैटरी 3,000mAh की है। 

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