GLIBS

29-11-2020
ठंड में रखे अपना विशेष ध्यान : शारीरिक तापमान में अस्थिरता हाइपोथर्मिया है वजह 

रायपुर। हमारे शरीर का एक सामान्य तापमान होता है, जो कि शरीर द्वारा संचालित होता है। जब शरीर का तापमान सामान्य व सुरक्षित स्तर से अचानक नीचे गिर जाता है, तो यह अल्पताप या हाइपोथर्मिया कहलाता है। यह समस्या गंभीर भी साबित हो सकती है। हाइपोथर्मिया के संबंध में जानकारी देते हुए डॉ रामेश्वर शर्मा ने बताया कि ठंड के मौसम में हमारा शरीर आवश्यकतानुसार शारीरिक गर्मी का उत्पादन नहीं कर पाता, जितनी गर्मी की हमारे शरीर द्वारा मांग होती है। सर्दी के मौसम में हमारे शरीर को अधिक सामान्य तापमान चाहिए होता है, लेकिन जब शरीर जरूरी गर्माहट को संरक्षित नहीं रख पाता तो मुश्किल स्थिति बन जाती है। यह समस्या ज्यादा देर ठंड या ठंडे पानी में रहने की वजह से भी हो सकती है।

जाने शरीर का सामान्य तापमान : शरीर का सामान्य तापमान उम्र, लिंग और स्वास्थ्य की स्थिति पर निर्भर करता है। वैसे, सामान्य शारीरिक तापमान 97.7 डिग्री फारेनहाइट यानी 36.5 डिग्री सेल्सियस से लेकर  99.5 डिग्री फारेनहाइट यानी 37.5 डिग्री सेल्सियस तक होता है। न्यून्तम सामान्य शारीरिक तापमान 36 डिग्री सेल्सियस भी हो सकता है। शारीरिक तापमान के 95 डिग्री फारेनहाइट से नीचे गिरने को हाइपोथर्मिया कहा जाता है और 38 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा शारीरिक तापमान को बुखार की समस्या कहा जाता है। शरीर में गर्मी बनाए रखने का कार्य दिमाग का एक हिस्सा करता है, जिसे हाइपोथेलेमस कहा जाता है। जब हाइपोथेलेमस को संकेत मिलता है कि शरीर में गर्माहट का स्तर गिर रहा है, तो यह शारीरिक तापमान को उठाकर सामान्य बनाने का कार्य करता है। 

जाने क्या है लक्षण : हाइपोथर्मिया की वजह से आपके सोचने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। हाइपोथर्मिया की स्थिति में बोलने की गति कम हो जाती है। हाइपोथर्मिया के कारण अत्यधिक कंपन महसूस हो सकता है। हाइपोथर्मिया की समस्या में व्यक्ति की सांसें धीमी पड़ जाती हैं। हाइपोथर्मिया की समस्या सोचने की क्षमता पर बुरा असर डालती है, कुछ लोगों को इस समस्या की वजह से शारीरिक थकान का सामना भी करना पड़ सकता है। हाइपोथर्मिया की वजह से याद्दाश्त भी कमजोर हो सकती है। हाइपोथर्मिया में हाथ और पैरों में सुन्नपन हो सकता है। नवजातों की त्वचा हाइपोथर्मिया की वजह से बिल्कुल लाल या ठंडी हो सकती है। इसके अलावा, नवजात बच्चों की ऊर्जा, हाइपोथर्मिया की वजह से काफी कम हो सकती है।हाइपोथर्मिया से ग्रस्त होने पर बोलचाल में परेशानी, ध्यान केंद्रित करने में समस्या, चाल लड़खड़ाने लगती है।हाइपोथर्मिया बिगड़ने पर व्यक्ति बेहोश भी हो सकता है।

रहना होगा सावधान : हाइपोथर्मिया की समस्या वैसे तो किसी को भी हो सकती है,लेकिन उम्र हाइपोथर्मिया की समस्या में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। समान्य तौर पर बुर्जुगो और बच्चो विशेषकर नवजात शिशुओ को यह समस्या होती है। क्योंकि इन लोगों में सामान्य शारीरिक तापमान को बनाए रखने की क्षमता कम हो जाती है। शरीर की सामान्य तापमान बनाए रखने की क्षमता नकारात्मक रूप से प्रभावित होती है। शराब या ड्रग्स का सेवन करने से भी आपको हाइपोथर्मिया की समस्या का खतरा हो सकता है। इसमें शराब का सेवन करना ज्यादा खतरनाक हो सकता है। क्योंकि, शराब का सेवन करने से आपके शरीर के गर्म होने का झूठा एहसास होता है, जबकि असल में रक्त धमनियां फैल जाती हैं और त्वचा के जरिए ज्यादा शारीरिक गर्मी शरीर से निकल जाती है। डिमेंशिया या बाइपोलर डिसऑर्डर जैसी अन्य मानसिक समस्या होने की वजह से भी आपको हाइपोथर्मिया की दिक्कत हो सकती है। मानसिक समस्या होने की वजह से लोग अपनी पर्याप्त देखभाल नहीं कर पाते और ऐसे में सर्दी के मौसम में पर्याप्त देखभाल के बिना बाहर जाना खतरनाक हो सकता है और उनके सामान्य शारीरिक तापमान में गिरावट का कारण बन सकता है।

29-11-2020
त्रिदोष में लाभकारी है आंवला, आयुर्वेद में है आंवले का औषधीय महत्व

रायपुर/बैकुंठपुर। आंवला सेहत के लिए फायदेमंद फल है। इसमें हमारी सेहत के लिए जरूरी सभी गुणकारी मिनरल और विटामिन मौजूद होते हैं। इसके पोषक तत्व कई तरह की बीमारियों से हमारा बचाव करते हैं। आंवले को डाइट में कई तरीके से शामिल किया जा सकता है। इसका जूस मुरब्बा आचार कच्चा खाने पर शरीर को फायदा होता है। आयुर्वेद में भी आंवले को लाभकारी बताया गया है यह जानकारी देते हुए आर्युवेद चिकित्साधिकारी डां जगतनारायण मिश्रा ने बताया,” त्रिदोष यानी वात, कफ और पित को खत्म करने की क्षमता आंवले में होती है। अस्थमा से राहत पाने और इम्युनिटी बढ़ाने के लिए आंवले में पाया जाने वाला विटामिन सी कारगर साबित होता है जो यूटीआई और मेटाबॉलिज्म बढ़ाने का काम करता है। आंवला कोल्ड कफ के अलावा शरीर में वायरल और बैक्टीरियल इंफेक्शन नहीं होने देता आंवले में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो कैंसर सेल्स से लड़ने का काम भी करते हैं ।“

रोगों से निजात दिलाएगा गुणकारी आंवला : आंवला का जूस शरीर की सभी प्रक्रियाओं को संतुलित करता है। अस्थमा में फायदेमंद आंवला सांस की बीमारियों जैसे अस्थमा को सही रखने साथ साथ डायबिटीज को भी कंट्रोल करता है। आंवले से पाचन तंत्र भी बिल्कुल सही रहता है। इसमें मौजूद विटामिन सी को इम्यूनिटी और रेसिपरेटरी ट्रैक्ट दोनों के लिए अच्छा माना जाता है। नियमित रूप से आंवले का जूस पीने से कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है और शरीर  सेहतमंद रहता है। इसमें पाया जाने वाला एमिनो एसिड और एंटीऑक्सीडेंट की वजह से दिल सुचारू रूप से काम करता है। आंवला में लीवर को सुरक्षित रखने के सारे तत्व पाए जाते हैं। यह शरीर के सारे विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है। आंवले का रस खासी और मुंह के छालों के लिए बहुत फायदेमंद है। आंवले को एक कारगर घरेलू उपाय की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है दो चम्मच आंवला जूस में दो चम्मच शहद मिलाकर रोज पीने से सर्दी और खांसी में काफी मदद मिलती है। मुंह के छालों से छुटकारा पाने के लिए जो चम्मच आंवले के जूस को पानी में मिलाकर उससे गरारे कर सकते हैं। घरेलु उपचार के साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सक की राय भी अति आवश्यक इसलिए अपने चिकित्सक की राय अवश्य लें।

29-11-2020
पेरियापिकल यानी दांतों का असहनीय कष्टदायी फोड़ा मुंह में संक्रमण होने से होता है और इलाज न कराना घातक है

रायपुर। दांतों में फोड़ा होना काफी कष्टदायी होता है। दांतों में फोड़ा मुंह में संक्रमण होने से निकलता है। इससे दांत या मसूड़ों में पस हो जाता है। दांतों के अंत में निकले फोड़े को पेरियापिकल और मसूड़े के फोड़े को पेरियोडोंटल कहते हैं। ज्यादा दिनों तक इसका इलाज नहीं करने पर फोड़े के आसपास की हड्डी और दांत खराब हो जाते हैं जो कि काफी कष्टदायी होता है। दंत फोड़ा चोट पहले किसी दांत संबंधी इलाज के कारण हो सकता है। 

दांत में फोड़े के लक्षण
दांत में जब फोड़ा होता है, तो उसके शुरुआती लक्षण हमें दिखने लगते है। इसमें दांत और मसूड़ों का दर्द धीरे-धीरे जबड़ा, कान और गर्दन तक पहुंच जाता है। जिस दांत या मसूड़े में फोड़ा निकलता है, उसमें तेज दर्द होता है। अगर इसमें लापरवाही बरती गई तो दर्द जबड़ा, कान और गर्दन तक फैल जाता है। संक्रमण बढ़ने से पहले आपको डेंटिस्ट से संपर्क करना चाहिए।

दंत फोड़े से बचाव
दांतों के फोड़े से बचने के लिए इनको स्वस्थ रखना जरूरी है। फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से दिन में दो बार ब्रश करना चाहिए। खाना खाकर नमक के गुनगुने पानी से मुंह धोएं। ताकि खाने का कण आपके मुंह में न बचे। 3-4 महीने में टूथब्रश को बदलें। आप एंटीसेप्टिक या फ्लोरिनेटेड माउथवॉश भी ले सकते हैं।

28-11-2020
दूषित भोजन और पानी से हो सकते हैं दस्त, जो मौत का भी कारण बन सकता है

रायपुर। हैजा व्यक्ति द्वारा दूषित भोजन या पानी पीने के कारण होने वाला आँत संबंधी संक्रामक रोग है। जो गंभीर दस्त का कारण बनता है। इससे निर्जलीकरण हो सकता है और अगर इलाज न हो तो मृत्यु भी हो सकती है। हैजा दस्त/अतिसार/डायरिया वाला रोग है, जो कि विब्रियो कोलरा बैक्टीरिया के कारण होता है। यह प्रजाति मनुष्य के लिए सामान्य नहीं है। मानव पाचन तंत्र में बैक्टीरिया की उपस्थिति उसके मूल जीवन चक्र का स्वाभाविक हिस्सा नहीं है। हैजा के बैक्टीरिया व्यक्ति में दूषित भोजन खाने या पानी पीने के माध्यम से संक्रमित हो सकता है। आमतौर पर इस महामारी के संदूषण का प्रमुख स्रोत् संक्रमित व्यक्ति का मल होता है। जब मक्खियाँ मल पर बैठती है, तब मक्खियों के पैरों की गद्दी में बैक्टीरिया चिपक जाते है। जब ये मक्खियाँ खाने की वस्तुओं पर बैठती हैं, तब बैक्टीरिया आहार में पहुँच जाता है। 

बचाव का तरीका
रैपिड कालरा डिपस्टिक टेस्ट से हैजा की पहचान की जाती है। इसके लिए व्यक्ति के मल की जरूर होती है। ‘यह दो से 15 मिनट का टेस्ट होता है। इस टेस्ट में मल के नमूने में एक डिपस्टिक पट्टी डालते हैं, जो उसमें बनी पंक्तियों को जांचती है’ यदि लाल रेखाएं डिपस्टिक पर दिखती हैं तो यह हैजा का लक्षण है। 

उपचार जरूरी
हैजा या कालरा का उपचार जल्दी होना चाहिए ‘हैजा से शरीर में पानी की कमी और शारीरिक लवण कम हो जाते हैं’ इसके लिए ओआरएस मरीज को पीने के लिए दिया जाता है। तरल पदार्थों को भी नसों द्वारा शरीर में पहुंचाया जाता है।

27-11-2020
सर्दियों में अश्वगंधा वाले चाय का करें सेवन, कैंसर की बीमारी से भी मिलेगी निजात

रायपुर। सर्दियों में शरीर को बाहर से गर्म रखने के साथ ही अंदर से भी गर्म रखने की जरूरत है। कोरोना महामारी के कारण सर्दियों में खास ख्याल रखने की जरूरत है। ऐसे में आप कुछ खास जड़ी-बूटियों का सेवन कर खुद को सुरक्षित रख सकते हैं। अश्वगंधा का नाम को सभी ने सुना है लेकिन कम ही लोग हैं जो इसके फायदों से वाकिफ है। अश्वगंधा का सेवन सर्दियों में करना काफी फायदेमंद माना जाता है। अश्वगंधा पाउडर से एक कप चाय बनाने के लिए आप सबसे पहले डेढ़ कप पानी को गैस पर उबलने के लिए रख दें। जब पानी तेज गर्म हो जाए तो उसमें 1 टी-स्पून (एक छोटा चम्मच) अश्वगंधा पाउडर डालें। इस पानी को तब तक पकाएं, जब तक यह 1 कप ना रह जाए। आपकी अश्वगंधा चाय तैयार है। इसमें आप शहद डालकर भी पी सकते हैं। इसके साथ गुड का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि गुड की तासीर काफी गर्म होती है और अश्वगंधा की तासीर भी काफी गर्म होती है।

अश्वगंधा के फायदे : रात में सोते समय बिस्तर पर करवट बदलते रहते हैं। इसका मतलब है कि आपको अच्छी नींद नहीं आती है। ऐसे में अश्वगंधा का सेवन इस समस्या के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। अश्वगंधा का सेवन करने से दिल संबंधित बीमारियों का खतरा कम हो जाता है क्योंकि इसमें पाए जाने वाले एंटीआक्सीडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक होते हैं। अश्वगंधा में पाए जाने वाले एंटी-इंफ्लेमेट्री गुण लिवर में होने वाली सूजन की समस्या दूर करने में सहायक होता है। यह सूजन कम करता है। अश्वगंधा का सेवन करने से कैंसर जैसी घातक बीमारी से भी बचा जा सकता हैं। इसमें मौजूद एंटी-ट्यूमर गुण वैकल्पिक उपचार के लिए काफी अच्छा माना जाता है। इस लिए सर्दियों में ज्यादा से ज्यादा अश्वगंधा वाले चाय का उपयोग करें।

23-11-2020
चीज गार्लिक ब्रेड टोस्ट टेस्टी नाश्ता बनाने में आसान, सुबह हो या शाम या बच्चों का टिफिन हर किसी के लिए परफेक्ट


रायपुर। सुबह या शाम को चाय के साथ चीज गार्लिक ब्रेड टोस्ट एक बहुत ही अच्छा चयन है। ये आसान नाश्ता जो की झटपट बनकर तैयार हो जाता है। इसे आप सुबह के नाश्ते के लिए, बच्चों के टिफिन के लिए या शाम की चाय या नाश्ते के लिए भी बनाकर तैयार कर सकते हैं।

सामग्री -
4 स्लाइस सफेद ब्रेड
4 बड़े चम्मच नरम मक्खन
1/2 कप मोजेजारेला चीज
10-12 लहसुन की कालिया छिली हुए
2 बड़े चम्मच धनिया पत्ती कटी हुई
1 बड़ा चम्मच चिली फ्लेक्स

विधि-
सभी आवश्यक सामग्री ले लीजिए।
एक कटोरे में मक्खन को डालिए।
फिर लहसुन की कलियो को कद्दूकस करे।
इस मिश्रण को मिलाए ताकि मक्खन और लहसुन अच्छी तरह से मिल जाए।
ब्रेड का स्लाइस लें और एक तरफ 1 बड़ा चम्मच लहसुन वाला मक्खन को फैला दीजिए।
अब ब्रेड के उपर अपने इच्छानुसार चीज को कद्दूकस करें।
फिर चीज पर कुछ धनिया के पत्ते और चिली फ्लेक्स छिड़के।
एक पैन गरम करे और उसमे 1/4 छोटा चम्मच मक्खन डालें।
तैयार ब्रेड को पेन में रखें।
पेन को ढक दे और 3 मिनट के लिए ब्रेड को धीमी आच ब्राउन होने तक सिकने दे या जब तक कि चीज पूरी तरह से पिघल नहीं जाता।
चीज पिघल चुका है और कुरकुरी, चीज लहसुन ब्रेड टोस्ट सर्व करने के लिए तैयार है।

23-11-2020
एवरग्रीन साड़ी के साथ इम्प्रेसिव लुक चाहिए तो ट्राई कीजिए रफल स्लीव्स ब्लाउज 

रायपुर। साडी के साथ फैशन के लिए किसी इंसपिरेशन की तलाश कर रही है तो ट्राई करें ट्रेंडी ब्लाउज स्टाइल। फैशन की दुनिया में साड़ी एवरग्रीन है। हालांकि साड़ी के साथ कैरी किए गए ब्लाउज की डिजाइन्स में अच्छी खासी वेरायटीज की भरमार है। साड़ी को आप इस ट्रेंडी और फैशनेबल ब्लाउस स्टाइल के साथ कैरी कर सकती हैं। ब्लाउज का ये स्टाइल कई बॉलीवुड अभिनेत्रियों ने कैरी किया है जो है रफल स्लीव्स ब्लाउज। ये ब्लाउज इन दिनों फैशन की दुनिया में खासा अपनी जगह बनाए हुए है। रफल में भी कई तरह की डिजाइन देखने को मिलती हैं। आप लॉन्ग स्लीव्स या डबल लेयर्स स्टाइल के ब्लाउज कैरी कर सकती हैं। इसके साथ आप हो सके तो सिंपल साड़ी ही पहनें क्योंकि वह बेहतरीन लगेगी। अगर आप हैवी साड़ी के साथ इस तरह के ब्लाउज़ पहनती हैं तो वह इतना अच्छा लुक नहीं देंगे। वहीँ बोट नेक के साथ ब्लाउज़ की खूबसूरती बेहतरीन होगी। यह डिजाइन ब्लाउज स्टाइल में काफी पसंद की जाती है। रफल स्लीव्स ब्लाउज ऐसा ब्लाउज है, जिसे आप अपनी साड़ी के साथ मैच करके फैशन के साथ रम सकती हैं।

23-11-2020
धूप न सेकने की वजह से विटामिन डी की कमी का शिकार होते हैं लोग ऊपर से पौष्टिक आहार की कमी, बीमार तो होंगे ही

रायपुर। शहरों में रहनेवाले करीब 80-90 फीसदी लोग विटमिन डी की कमी से होने वाली समस्याओं से जूझ रहे हैं। वजह, अब लोग धूप में ज्यादा नहीं निकलते और न ही पौष्टिक खाना खाते हैं। दिक्कत यह है कि ज्यादातर लोगों को इसकी जानकारी ही नहीं होती या फिर वे जानकर भी इस बात को मानने को तैयार नहीं होते कि धूप न सेंकने की वजह से भी वे बीमार पड़ सकते हैं। विटमिन डी की सबसे बड़ी खासियत है कि यह शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व भी है और हॉर्मोन भी। इतना ही नहीं यह सूर्य से मिलने वाला इकलौता विटमिन भी है। सूर्य के अलावा यह विटमिन बादाम, अंडा, मछली, आदि में मिलता है। शरीर के लिए जरूरी विटमिन डी का 80 प्रतिशत हिस्सा धूप से मिलता है, जबकि डायट से 20 प्रतिशत।

22-11-2020
वायु प्रदूषण करता है फेफड़ों पर हमला और कोरोना काल में ज्यादा घातक होता है, उससे बचने के लिए लीजिए हर्बल टी

रायपुर। शहरों में लोगों को वायु प्रदूषण का सामना करना पड़ता है। इस कोरोना काल में लोगों को बहुत सावधानियां रखना पड़ता है। कोरोना और प्रदूषण दोनों ही फेफड़ों पर हमला करते हैं, ऐसे में आपको अपने खान-पान का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। आप अपनी डाइट में पानी और हर्बल टी शामिल कर सकते हैं जो शरीर को प्रदूषण के बुरे असर से बचा सकता है।

पानी- सांसों से शरीर में पहुंचे जहर को बाहर निकालने के लिए पानी बहुत जरूरी है। इसलिए पानी पीना नहीं भूलें। इससे शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई सही बनी रहेगी और वातावरण में मौजूद जहरीली गैसें अगर ब्लड तक पहुंच भी जाएंगी तो कम नुकसान पहुंचाएंगी। 

हर्बल टी- हर्बल टी सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद होती है। इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर में मौजूद टॉक्सिंस को बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसके साथ ही यह प्रदूषण के कारण होने वाली एलर्जी से भी सुरक्षित रखती है। आप घर पर भी तुलसी, अदरक, और नींबू के रस की मदद से हर्बल टी बना सकते हैं।

22-11-2020
फिर लौटा फ्लोरल प्रिंट का दौर, विंटर के लिए फ्लोरल ब्लेजर समर और घर के लिए कम्फी फ्लोरल पाजामा ट्राई तो कीजिए

रायपुर। फ्लोरल प्रिंट का दौर एक बार फिर दशकों बाद लौट आया है। यह फैशन इन दिनों ट्रेंड में है। आप विंटर में फ्लोरल ब्लेजर, समर के लिए स्टाइलिश फ्लोरल ड्रेस और घर के लिए कम्फी फ्लोरल पजामा ले सकते हैं। अगर आप कम्फर्टेबल कपड़े पहनना पसंद करते हैं तो यह ट्रेंड आपको खूब पसंद आने वाला है। आज सेलिब्रिटीज से लेकर फैशन इंफ्लुएंसर तक सभी इस ट्रेंड को फॉलो कर रहे हैं। सिल्क और साटन फैब्रिक वाले फ्लोरल पजामे को बाहर पहनना चाहते हैं तो आप इनके साथ ज्वैलरी, चैन, बेल्ट और सनग्लासेस पहन सकते हैं। आप अपने फ्लोरल पजामे के ओवरकोट पहनकर लेयरिंग भी कर सकते हैं। हील्स के साथ आपका ये लुक और भी बेहतरीन लगेगा। अगर आप भी जीन्स और तमाम ड्रेसेस से बोर हो चुके हैं तो आप इस तरह से ये स्टाइल ट्राई कर सकते हैं। फ्लोरल पजामे या ड्रेस आपको सिंपल और कैजुअल लुक देंगे, इसके साथ ही यह आपको कम्फर्टेबल भी फील करवाते हैं।

22-11-2020
अचानक आए मेहमानों को फटाफट सर्व करने के लिए बनाइए ब्रेड पनीर रोल टेस्टी टेस्टी हेल्दी हेल्दी

रायपुर। कम समय है तो कोई बात नहीं काम समय में ब्रेड पनीर रोल तैयार हो जाता है। यह हेल्दी रेसिपी भी है। आप इस रेसिपी की गुडनेस बढ़ाने के लिए ब्राउन ब्रेड का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। साथ ही डीप फ्राई करने की बजाय रोस्ट करके भी ब्रेड रोल बना सकते हैं। इन टिप्स से रोल्स और भी ज्यादा टेस्टी बनेंगे।

सामग्री :
वाइट या ब्राउन ब्रेड
पनीर 
प्याज
टमाटर 
धनिया 
मिर्च 
नमक 
हल्दी 
काली मिर्च 
तेल/घी 

विधि :
सबसे पहले ब्रेड के किनारे काटकर अलग कर लें। इसके बाद पनीर को मैश कर लें। पैन में घी या तेल डालकर इसमें प्याज को भूनें। फिर टमाटर डालकर भूनें। फिर इसमें नमक, हल्दी, मिर्च मिलाएं। अब इसमें मैश किया हुआ पनीर डालकर मिला लें। ऊपर से हरा धनिया और काली मिर्च डालकर गैस ऑफ कर दें। आप भरावन मिक्सचर में अपनी पसंद के हिसाब से जीरा, अजवाइन, बीन्स, भी डाल सकते हैं। मिक्सचर तैयार होने के बाद ब्रेड के अंदर इस मिक्सचर को डालकर लम्बाई में रोल को शेप देकर फ्राई या रोस्ट कर लें। आपके हेल्दी पनीर रोल्स तैयार हैं। ब्रेकफास्ट या टी ब्रेक में इस रेसिपी का मजा लें।

22-11-2020
टीवी पर जरूरत से ज्यादा कार्टून देखना बच्चों की कल्पनाशक्ति को करता है कमजोर, वास्तविकता से हो जाते हैं दूर

रायपुर। क्या आप जानते हैं की आपके बच्चे अगर ज्यादा टीवी देखते हैं तो उन पर बुरा प्रभाव पड़ता है। बच्चे अक्सर कार्टून ही देखना पसंद करते हैं। कार्टून देखने से बच्चों की काल्पनिक शक्ति पर बहुत बुरा असर पड़ता है और वह वास्तविक जीवन से दूर हो जाते हैं। इसके अलावा भी बहुत से ऐसे कारण है जो बच्चों के लिए सही नहीं है। आइए जानते हैं इसके बारे में …

लड़ाई करना -
कई कार्टून ऐसे होते हैं, जिसमें लड़ाई झगड़े दिखाए जाते हैं, जिसके कारण बच्चे भी उनकी तरह मारपीट और लड़ाई, झगड़ा करना सिख जाते हैं जो की गलत है। 

कार्टून की आवाज में बोलना -
बच्चे कार्टून के इतने दीवाने हो जाते हैं कि वह उन्हीं की आवाज में बात करना ज्यादा पसंद करते हैं। ऐसे में बच्चे पर उनकी भाषा का गलत प्रभाव पड़ता है जो कि अच्छा नहीं है। 

खाने पीने कि गलत आदत -
कार्टून देखकर ही बच्चे खाना खाना ज्यादा पसंद करते हैं, जिससे बच्चों को मोटापे की शिकायत ज्यादा रहती है। कुछ बच्चे तो ऐसे होते हैं जो उनकी हर आदत को फॉलो करते हैं। चाहे वह आदत खाने-पीने की क्यों ना हो।

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