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धुन का पक्का विनय बैसवाड़े बस खेलता रहा और चमका टेबिल टेनिस का सितारा बनकर, चैंपियनों का चैंपियन

16 Apr , 2020 03:21 PM

रायपुर। एक बार उसने टेबल टेनिस का बल्ला थामा तो बस वही उसका सबसे प्यारा साथी बन कर रह गया। आज भी टेबल टेनिस के लिए उसका प्यार कम नहीं हुआ है। टेबल टेनिस का चमकता सितारा आज छत्तीसगढ़ में टेबल टेनिस की नई पौध तैयार करने में लगा हुआ है। हम बात कर रहे हैं टेबल टेनिस के शानदार सितारे विनय बैसवाड़े की। स्कूल जीवन से ही टेबल टेनिस से उसका प्यार हुआ जो आज भी बरकरार है। अखंड मध्यप्रदेश में वे तीन बार विजेता रहे और दो बार उपविजेता। जब छत्तीसगढ़ बना तो आपने वर्ग में वह 8 बार विजेता रहे और 5 बार विजेता बनने से चुप कर रनर अप रहे। ऑल इंडिया इंस्टिट्यूशनल टेबल टेनिस टूर्नामेंट में 7 बार उन्होंने कांस्य पदक जीते और अखिल भारतीय पब्लिक सेक्टर टेबल टेनिस टूर्नामेंट में 4 बार विजेता बनकर कप उठाने का गौरव हासिल किया। अखिल भारतीय जीवन बीमा निगम टेबल टेनिस स्पर्धा में 4 बार विजेता और 8 बार उपविजेता रहे विनय बैसवाड़े। 2008 के अखिल भारतीय कारपोरेट ओलंपिक में भी विजेता बनने का गौरव हासिल किया था विनय बैसवाड़े ने। राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं में भाग लेने की तो शायद गिनती उन्हें भी याद नही होगी और अखंड़ मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ की टेबिल टेनिस टीम के कितनी बार कप्तान रहे ये भी वे शायद बता नही पाएंगे। झारखंड में हुए 34वें. राष्ट्रीय खेलों में उन्होंने छत्तीसगढ़ की टेबल टेनिस टीम की कप्तानी की। कोच तो वे जाने कितनी बार बने और अपनी टीम को पदक भी दिलाते रहे।

2005 में पुणे नेशनल रैंकिंग टेबल टेनिस प्रतियोगिता में क्वार्टर फाइनल खेलकर देश के टॉप 08 खिलाड़ियों में स्थान भी बनाया था। वे अंतरराष्ट्रीय अंपायर भी है और उन्होंने बहरीन में हुए टेबल टेनिस के जूनियर वर्ल्ड कप में शानदार बेदाग अंपायरिंग भी की। उनकी खेल प्रतिभा का लाभ टेबल टेनिस संघ के प्रदेश अध्यक्ष शरद शुक्ला ने उन्हें संघ का महासचिव बनाकर उठाया और वे महासचिव के रूप में संघ को लगातार प्रगति की ओर ले जाने में कोई कसर नही छोड़ रहे है। स्वभाव से बेहद शर्मीले विनय सच मे विनय की प्रतिमूर्ती है। छत्तीसगढ़ को अपनी इस विलक्षण खेल प्रतिभा पर गर्व है। टेबल टेनिस संघ का उपाध्यक्ष होने के नाते मुझे भी उनपर गर्व है। सौ सौ सलाम इस शानदार खिलाड़ी को।