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नज़ीर यानी रायपुर के हॉकी के सुनहरे दिन के बेमिसाल नज़ीर

10 Apr , 2020 01:26 PM

रायपुर। एक दौर था जब रायपुर का नाम हॉकी के राष्ट्रीय नक्शे पर शान से चमकता था। वह छत्तीसगढ़ की हॉकी का सुनहरा दौर था। राजनांदगांव का लालबाग बिलासपुर रेलवे की हॉकी और रायपुर का एथलेटिक क्लब हॉकी की शान हुआ करता था। तब हॉकी के सालाना कार्यक्रम का अंतिम पड़ाव हुआ करता था नेहरू मेमोरियल गोल्ड कप टूर्नामेंट। देश की सारी जानी मानी टीम व सितारे हॉकी का अपना जादू यहां दिखाने आते थे। सुभाष स्टेडियम कभी हॉकी के दीवानों से पटा रहता था। नए लड़के ग्राउंड में उतरने के लिए अपनी बारी का 3-4 दिन इंतजार किया करते थे। पोलैंड के खिलाफ जब भारत की टीम का यहां प्रदर्शन मैच हुआ था तब रायपुर के ही सुब्बी पांडे और अज्जू भाई को मैदान पर उतारा गया था। कुछ देर के लिए ही सही पूरा स्टेडियम तालियों से गूंज गया था। सारे लोगों ने अपने शहर के हॉकी के सितारों का जमकर स्वागत किया था। अज्जू भाई, सुब्बी पांडे के दौर के बाद हॉकी ने बहुत उतार-चढ़ाव देखें। क्रिकेट हॉकी पर हावी होता चला गया था लेकिन एक नाम ऐसा रहा नजीर का जो खुद अपनी नजीर बन गया। नजीर ने स्कूल से ही हॉकी पकड़ी और आज भी वो हॉकी ही थामे हुए हैं।

कोरोना ने जब सारी दुनिया में कहर मचा रखा है सारी दुनिया की रफ्तार थाम ली है तब भी नजीर भाई हॉकी उठाकर अपने ही घर में उससे अपना प्यार जताने से नही चूकते। हॉकी के लिए जो दीवानगी नजीर भाई में देखने मिलती है वो बेमिसाल है। आज भी नजीर यानि हॉकी और हॉकी यानि नजीर भाई। लॉक डाउन के पहले तक रोज सुबह शाम रोज निस्वार्थ भाव से अपनी सेवाएं हॉकी की नई पौध तैयार करने के लिए दे रहे थे। हॉकी के लिए उनका प्यार बेमिसाल है। चाहे स्कूल के टूर्नामेंट हो कॉलेज के पुलिस के या फिर गोल्ड कप के शुरुआती मैच, उनकी हॉकी का जादू हर मैच में लोगों के सिर चढ़कर बोलता था। उनके जादू को लोग आज भी याद करते हैं। उनके समकालीन बहुत से नाम हैं अगर उनको गिनाना शुरू करें तो बहुत लंबी दास्तान हो जाएगी। फिलहाल हॉकी के सुनहरे दिनों की नजीर नजीर भाई को सौ-सौ सलाम वे सलामत रहे और हॉकी इन नई पौध तैयार करते रहे।