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20 सालों तक फुटबॉल के दीवानों पर जादू छाया रहा नॉटली कॉस्टर का, उनसा न कोई हुआ न होगा

14 Apr , 2020 02:05 PM

रायपुर। बचपन से फुटबॉल के दीवाने थे वे। जब मौका मिलता वे फुटबॉल लेकर घर के आंगन में या सामने मैदान में खेलने में रम जाते थे। फुटबॉल के लिए उनबकी दीवानगी यूँही नहीं थी। वे खुद भी फुटबाल के जादूगर थे। बहुत कम उम्र में ही उन्हें स्कूल नेशनल खेलने का मौका मिला और फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। हम बात कर रहे हैं शहर के अपने समय के मशहूर फुटबॉल सितारे नॉटली कॉस्टर की। नॉटली कॉस्टर यानी फुटबॉल,फुटबॉल यानी नॉटली कॉस्टर। दूर-दूर से लोग उनका खेल देखने आते थे। फुटबॉल तो मानो उनके पैर से प्यार करती थी। उनके पैरों से लिपटे ही रहा करती थी। कमाल की जादूगरी थी उनके पैरों में। और तेजी तो मानो वे हवा से बातें करते थे। जब मैदान में उतरते थे, चारों ओर से शुरू होता नॉटली नॉटली नॉटली। 1960 में वे इंफाल में स्कूल नेशनल खेलें। 61 में इंदौर 62 में कोलकाता में उन्होंने स्कूल नेशनल में अपनी कला का जौहर दिखाया।

साल 70 आते आते वे संतोष ट्रॉफी के लिए मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करने लगे। 70 में कोलकाता 71 में बेंगलुरु 72 में चेन्नई और 73 में गोवा में उन्होंने फुटबॉल के मैदान में अपनी जादूगरी दिखाई। उसके बाद स्टेट बैंक मैं उनका चयन हो गया और वे स्टेट बैंक की तरफ से खेलने लगे। भोपाल सर्कल की ओर से वे 75 से 79 तक खेलते रहे। अहमदाबाद, विजयवाड़ा और कोलकाता में उन्होंने अपनी कला का जौहर दिखाया। स्टेट बैंक से ही रिटायर होने के साथ ही उन्होंने फुटबॉल को भी अलविदा कह दिया। स्टेट बैंक में चुने जाने से पहले उन्होंने होलीक्रॉस बैरन बाजार स्कूल में पढ़ाया भी। उनका शिष्य होने का सौभाग्य मुझे भी मिला। उस दौर में फुटबॉल में भिलाई का दबदबा हुआ करता था। भिलाई जिमखाना क्लब की ओर से वे खेला करते थे और उनके साथ खेला करते थे डॉक्टर सुबीर मुखर्जी,जहीर भाई,आनंद वर्मा और मोहित खान यह पांचो खिलाड़ी तब पांच पांडव कहलाया करते थे। उसके बाद पीपीएसए यानी पूर्व प्रवीर संघ यहां बना और वे आखिर तक पीपीएस के लिए खेलते रहे। नॉटली कॉस्टर उस दौर एक चमकता नक्षत्र फुटबॉल का जिसने छत्तीसगढ़ को फुटबॉल के नक्शे पर अलग पहचान दी।