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अयोध्या विवाद में एससी ने पूछा- क्या विवादित स्थल पर मंदिर था?

ग्लिब्स टीम  | 13 Aug , 2019 03:51 PM
अयोध्या विवाद में एससी ने पूछा- क्या विवादित स्थल पर मंदिर था?

नई दिल्ली। अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद पर पांचवें दिन की सुनवाई के दौरान मंगलवार को इस मुद्दे पर बहस शुरू हुई कि क्या इस विवादित स्थल पर पहले कोई मंदिर था? प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष रामलला विराजमान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने मस्जिद के निर्माण होने से पहले इस विवादित स्थल पर कोई मंदिर होने संबंधी सवाल पर बहस शुरू की। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तीन न्यायाधीशों की पीठ अपने फैसले में कहा है कि विवादित स्थल पर मंदिर था। वैद्यनाथन ने कहा कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एसयू खान ने अपने फैसले में कहा था कि मंदिर के अवशेषों पर मस्जिद का निर्माण किया गया। उच्च न्यायालय के सितंबर, 2010 फैसले के खिलाफ  दायर अपीलों पर सुनवाई कर रही संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति एसए बोबड़े, न्यायमूर्ति धनंजय वाई चन्द्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट इस समय अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि के तीनों पक्षकारों सुन्नी वक्फ  बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच बराबर बराबर बांटने का निर्देश देने संबंधी उच्च न्यायलय के फैसले के खिलाफ  दायर अपीलों पर सुनवाई कर रहा है। इस मामले की चौथे दिन की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने परासरन से जानना चाहा था कि इस मामले में मुद्दई के रूप में जन्म स्थान को एक कानूनी तौर पर व्यक्ति कैसे माना जा सकता है? इसके जवाब में वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा था कि हिन्दुत्व में किसी स्थान को मंदिर मानने के लिये वहां देवता की मूर्ति होना जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा था कि हिन्दू किसी एक रूप में ईश्वर की अराधना नहीं करते हैं बल्कि वे ऐसे दैवीय अवतरण की पूजा करते हैं जिसका कोई स्वरूप नहीं है।

 

 

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