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अब झीरम घाटी हत्याकांड के शहीदों के हत्यारे सींखचों के पीछे जाएंगे : कांग्रेस

हर्षित शर्मा  | 14 Aug , 2019 02:52 PM
अब झीरम घाटी हत्याकांड के शहीदों के हत्यारे सींखचों के पीछे जाएंगे : कांग्रेस

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि झीरम घटना की जांच कर रहे जस्टिस प्रशांत मिश्रा आयोग के कार्य क्षेत्र में इन बिंदुओं को जोड़े जाने और अधिसूचना जारी करने लोगों से जानकारी मांगे जाने का कांग्रेस स्वागत करती है। कांग्रेस कार्यकर्ता और शहीदों के परिजन 2013 से आज तक इस षड्यंत्र के पीछे छुपी सच्चाई का इंतजार करते रहे हैं, जिसकी अब जाकर जांच संभव होगी। झीरमघाटी की घटना एक आपराधिक और राजनैतिक षड्यंत्र की घटना थी। इसकी एनआईए की जांच में षड्यंत्र की जांच की गयी और न ही झीरम घाटी की घटना की जांच कर रहे जस्टिस प्रशांत मिश्रा आयोग की न्यायिक जांच में जांच के बिन्दुओं में इसे शामिल किया गया। कांग्रेस की सरकार ने अधिसूचना जारी कर न्यायिक जांच आयोग जस्टिस प्रशांत मिश्रा की जांच में नए आठ बिंदुओं को शामिल किया गया है। इन बिंदुओं पर जानकारी रखने वाले लोगों से शपथ पत्र के माध्यम से जानकारी मांगी गई है। एनआईए की जांच में पूर्व की रमन सिंह सरकार द्वारा बनाए गए नोडल अधिकारियों ने जांच में रोड़ा अटकाने का काम किया था। जब केंद्र में बीजेपी की सरकार बनी तो झीरम के षड़यंत्र की जांच ही नहीं की गई। न्यायिक जांच आयोग भी जांच में इन बिंदुओं को शामिल नहीं किए जाने को लेकर अब तक जांच नहीं कर पा रहा था, लेकिन अब झीरम के षड़यंत्र की जांच भी होगी और सच्चाई भी सामने आएगी। एनआईए अपनी फाइनल रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर चुकी है और फाइल को लेकर एनआईए के समक्ष बात रखी जाएगी। 

प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि इस अधिसूचना के मुताबिक बहुचर्चित झीरम घाटी कांड की न्यायिक जांच के लिए जांच के बिन्दुओं में बदलाव किया गया है। झीरम घाटी कांड की जांच के लिए न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में गठित विशेष न्यायिक जांच आयोग ने यह बिंदु तय किए है। राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति जो इस घटना के संबंध में जानकारी रखते हैं वह आयोग के कैंप कार्यालय बिलासपुर या सचिव से एडिशनल रजिस्ट्रार उच्च न्यायालय बिलासपुर में जानकारी लिखित में दे सकते हैं।

झीरमघाटी की जांच के लिए अब सार्वजनिक अधिसूचना जारी की गई है। इस घटना के बारे में जानकारी रखने वाले कोई भी व्यक्ति अपनी गवाही दे सकते हैं। शपथपत्र भरकर न्यायिक जांच आयोग के समक्ष अपनी बात रख सकते हैं। 27 कांग्रेसियों समेत 31 लोगों की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी। इस कांड से संबंधित आम लोगों, स्थानीय निवासी, सुरक्षा कर्मी, किसान से लेकर सभी लोगों से खुलेआम जानकारी के संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। प्रमुख 8 बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई, जो छत्तीसगढ़ सरकार ने तय की थी। इसमें ज्यादातर बिंदु राजनीतिक षडयंत्र से संबंधित हैं। यूनिफाइड कमांड के अध्यक्ष की भूमिका के साथ-साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा की सुरक्षा, कांग्रेस नेताओं के काफिले की सुरक्षा, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष स्व. नंदकुमार पटेल पर गरियाबंद में हुए हमले और एलेक्स पॉल मेनन के अपहरण के दौरान नक्सलियों से हुए समझौते को लेकर भी जांच के बिंदु शामिल हैं। 15 दिनों के भीतर कोई भी व्यक्ति इस जांच में सहयोग कर सकता है।

झीरम घटना की जांच में 8 नए बिन्दु
1. नवंबर 2012 में स्व. महेन्द्र कर्मा पर हुये हमले के पश्चात् क्या उनकी सुरक्षा की समीक्षा प्रोटेक्शन रिव्यू ग्रुप के द्वारा की गई थी?
2. स्व. महेन्द्र कर्मा को नवंबर 2012 में उन पर हुए हमले के बाद, उनके द्वारा मांगी गई अतिरिक्त सुरक्षा की मांग पर किस स्तर पर विचार निर्णय किया गया था और उस पर क्या कार्यवाही की गई थी?
3. गरियाबंद जिले में जुलाई 2011 में स्व. नंद कुमार पटेल के काफिले पर हुये हमले के बाद क्या स्व. पटेल एवं उनके काफिले की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी और क्या उन अतिरिक्त सुरक्षा मानकों का पालन जीरम घाटी घटना के दौरान किया गया?
4. क्या राज्य में नक्सलियों के द्वारा पूर्व में किये गये बड़े हमलों को ध्यान में रखते हुये नक्सली इलाकों में यात्रा आदि हेतु किसी निर्धारित संख्या में या उससे भी अधिक बल प्रदाय करने के कोई दिशा-निर्देश थे? यदि हां तो उनका पालन किया गया? यदि नही तो क्या पूर्व के बड़े हमलों की समीक्षा कर कोई कदम उठाये गये?
5. नक्सल विरोधी आपरेशन में और विशेषकर टी.सी ओ.सी. की अवधि के दौरान यूनिफाईड कमाण्ड किस तरह अपनी भूमिका निभाती थी? यूनिफाईड कमांड के अध्यक्ष के कर्तव्य क्या थे और यूनिफाईड कमाण्ड के तत्कालीन अध्यक्ष ने अपने उन कर्तव्यों का उपर्युक्त निर्वहन किया?
6. 25 मई 2013 को बस्तर जिले में कुल कितना पुलिस बल मौजूद था? परिवर्तन यात्रा कार्यक्रम की अवधि में बस्तर जिले से पुलिस बल दूसरे जिलों में भेजा गया? यदि हां तो किस कारण से और किसके आदेश से? क्या इसके लिये सक्षम स्वीकृत प्राप्त की गई थी?
7. क्या नक्सली किसी बड़े आदमी को बंधक बनाने के पश्चात् उन्हें रिहा करने के बदले अपनी मांग मनवाने का प्रयास करते रहे है? स्व. नंद कुमार पटेल एवं उनके पुत्र के बंधक होने के समय ऐसा नहीं करने का कारण क्या था?
8. सुकमा के तत्कालीन कलेक्टर, श्री अलेक्स पाल मेनन के अपहरण एवं रिहाई में किस तरह के समझौते नक्सलियों के साथ किये गये थे? क्या उनका कोई संबंध स्व. महेन्द्र कर्मा की सुरक्षा से था?