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अरबो खरबो की खनिज संपदा से ज्यादा महत्व दिया भूपेश ने हाथियों को 

सोनम शर्मा  | 16 Aug , 2019 04:47 PM
अरबो खरबो की खनिज संपदा से ज्यादा महत्व दिया भूपेश ने हाथियों को 

रायपुर। हाथियों और मानवों के बीच लगातार बढ़ रहे टकराव को टालने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने अरबो खरबो की खनिज संपदा को दरकिनार कर दिया।उन्होंने लेमरू को विश्व स्तरीय हाथी रिज़र्व बनाने की घोषणा करके सबको बता दिया कि उन्हें छत्तीसगढ़ से,यंहा के निवासियों से,वन्य प्राणियों से व पर्यावरण की चिंता राजस्व से ज्यादा है।इस परियोजना की शुरुआत 2005 से शुरू हुई और केंद्र सरकार की सहमति के बावजूद ये अटकी हुई थी जिसकी नैया भूपेश बघेल ने पार लगा दी। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद भूपेश बघेल राज्य के हित में बेहिचक बड़े बड़े फैसले रहे थे,लेकिन सबसे बड़ा और चौंका देने वाला फैसला विश्व स्तरीय हाथी रिज़र्व बनाने का है।इस इलाके में अरबो खरबो के कोयला भंडार होने के अलावा,रेडियोएक्टिव मिनरल्स का भी खज़ाना है।खनिज संपदा के अलावा भी ये इलाका बायो डायवर्सिटी का अद्भुत उदाहरण है।

दुर्भाग्य से इस इलाको को हाथियों के लिए सुरक्षित करने की योजना सिर्फ अफसरशाही के कारण आतंकी रही।2005 से शुरू हुई योजना पर अब अमलीजामा पहनाया जाएगा ।इस बीच केंद्र सरकार के परिपत्र पर तत्कालीन फारेस्ट अफसर ने नकारात्मक जवाब दिया और ये सिलसिला लगातार चलता रहा क्योंकि देश के सबसे बड़े घरानों में से एक कि नज़र यंहा दबी खनिज संपदा पर पड़ चुकी थी। सत्ता परिवर्तन के साथ ही इस  परियोजना का भाग्य बदला।औधोगिक घरानों से ज्यादा अपने राज्य की जनता को तवज्जो देने वाले भूपेश बघेल के हाथ राज्य की कमान आई और वन विभाग की कमान यंही पले बढ़े,पढ़े आईएफस राकेश चतुर्वेदी के हाथों आई।दोनों का राज्य के लिए लगाव जगजाहिर है और भूपेश बघेल की इच्छानुसार लेमरू में हाथी रिज़र्व बनाने की दिशा में राकेश चतुर्वेदी ने तत्काल सकारात्मक कार्रवाई शुरू कर उसे अंजाम तक पहुंच दिया।
      यंहा ये बताना गैर जरूरी नही होगा कि राज्य में नक्सलियों के बाद हाथी ही सबसे बड़ी समस्या बन हुए थे।हाथी मानव द्वंद खूनी रूप ले चुका है और इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए भूपेश बघेल ने जो कदम उठाए है,वो मील के पत्थर साबित होंगे।भूपेश बघेल के इस कदम की राज्य और हाथी प्रभावित क्षेत्रों में जमकर तारीफ हो रही है और उनके इस कदम से छत्तीसगढ़ को एक विश्व स्तरीय हाथी रिज़र्व मिलेगा।

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