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दो वर्षों में 903 करोड़ खर्च फिर भी 5 लाख से ज्यादा बच्चे कुपोषित

ग्लिब्स टीम  | 13 Feb , 2018 09:50 PM
दो वर्षों में 903 करोड़ खर्च फिर भी 5 लाख से ज्यादा बच्चे कुपोषित

रायपुर। छत्तीसगढ़ में वर्ष 2017 में कुपोषण की रोकथाम पर लगभग 465 करोड़ रूपए खर्च किये जा चुके हैं फिर भी प्रदेश में 5 लाख 35 हजार बच्चे कुपोषित हैं। यह खुलासा मरवाही विधायक अमित जोगी के प्रश्न पर विधानसभा में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती रमशीला साहू द्वारा दिए गए जवाब से हुआ। अमित जोगी ने मंत्री से पूछा कि   प्रदेश में बच्चों में कुपोषण की रोकथाम के लिए कौन से योजनाएं चलायी जा रही हैं और विगत 2 वर्षों में इन रोजनाओं पर कितना खर्च हुआ है? साथ ही पिछले 2 वर्षों में प्रदेश में कुपोषित पाए गए बच्चों की संख्या की जानकारी मांगी।  जवाब में मंत्री रमशीला साहू ने बताया कि कुपोषण की रोकथाम के लिए शासन द्वारा 7 योजनाएं चलायी जा रही हैं। इन पर वर्ष 2015  - 2016  में 438 करोड़ 21 लाख खर्च हुए थे जबकि वर्ष 2016 - 2017 में लगभग 465 करोड़ खर्च हो चुके हैं फिर भी नवंबर 2017 के आकड़ों के अनुसार प्रदेश में 5 लाख 35 हजार 75 बच्चे कुपोषित हैं। सबसे ज्यादा 44,005 बच्चे बिलासपुर जिले में कुपोषित हैं। दूसरे नंबर पर मुख्यमंत्री का गृह जिला राजनांदगांव है जहाँ 36,442 बच्चे कुपोषित हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि दंतेवाड़ा और सुकमा जिलों में वर्ष 2016 के मुकाबले वर्ष 2017 में कुपोषित बच्चों की संख्या में वृद्धि हुई है। 
शासन पर जमकर  भड़के अमित जोगी 
आज विधानसभा में अवकाश घोषित हो जाने के कारण विधायक अमित जोगी मंत्री से इस विषय पर सवाल नहीं कर पाए लेकिन कुपोषण पर प्रतिक्रिया देते हुए वे सरकार पर जमकर भड़के। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा करोड़ों रूपए कुपोषण की रोकथाम के लिए चलायी योजनाओं पर खर्च किया जा रही है लेकिन हासिल कुछ भी नहीं हो रहा। क्या इन योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वन नहीं हो रहा है या कुपोषण की रोकथाम की आड़ में इन योजनाओं का पूरा पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है? अपने गृह जिले में सर्वाधिक कुपोषित बच्चों की संख्या होने पर अमित जोगी ने गहरा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार अपनी नाकामयाबी छुपाने के लिए अमित जोगी द्वारा गोद लिए बच्चे को फर्जी रूप से कुपोषित साबित करके जनता का ध्यान भटकाने में लगी हुई थी। कुपोषण खत्म करना इस सरकार के बस की बात नहीं है। तभी मुख्यमंत्री का गृह जिला कुपोषण के मामले में प्रदेश में दूसरे नंबर पर है।