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जब पानी सिर से ऊपर गुजरने लगा तब प्रदेश सरकार को स्वास्थ्य विभाग में भर्ती करने होश आया : भाजपा

हर्षित शर्मा  | 28 Jul , 2020 08:35 PM
जब पानी सिर से ऊपर गुजरने लगा तब प्रदेश सरकार को स्वास्थ्य विभाग में भर्ती करने होश आया : भाजपा

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और स्वास्थ्य सेवाओं के रिक्त पदों पर संविदा और सीधी भर्ती की दी गई अनुमति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब पानी सिर से ऊपर गुजरने लगा तब जाकर प्रदेश सरकार को होश आना इस बात का प्रमाण है कि वह प्रदेश के हितों को लेकर कतई गंभीर नहीं है। श्रीवास्तव ने कहा कि यदि प्रदेश सरकार यह काम छह माह पहले भी कर लेती तो प्रदेश में कोरोना संकट इतना भयावह नहीं होता। संजय श्रीवास्तव ने कहा कि प्रदेश सरकार अब भी मार्च 2021 तक और आगामी 3 माह तक के लिए इन रिक्त पदों पर भर्ती की अनुमति देकर अपनी बदनीयती का ही इजहार कर रही है। इन रिक्त पदों पर नियमित भर्ती न की जाकर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में मजाक किया जा रहा है।

आज कोरोना संक्रमण के विस्पोटक स्तर पर पहुँचने के लिए जवाबदेह प्रदेश सरकार अब इन पदों पर भर्ती की अनुमति देकर अपनी नाकामियों को ढँकने की असफल कोशिशों में जुटी है जबकि प्रदेश साक्षी है कि कोरोना की जाँच और उपचार के मोर्चे पर प्रदेश सरकार एकदम नाकारा साबित हुई है और अब भी वह इस महामारी की रोकथाम को लेकर संजीदा नहीं दिख रही है। अभी भी प्रदेश सरकार ने रिक्त पदों पर भर्ती की सिर्फ अनुमति दी है। अभी इन पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने, विज्ञापन निकालने, दीगर प्रक्रिया पूरी करने में न जाने यह प्रदेश सरकार कितना वक्त लगाएगी? भर्ती के लिए दी गई अनुमति के मुताबिक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के रिक्त 3449 पदों पर मार्च 2021 तक संविदा भर्ती एवं कोविड-19 डेडिकेटेड हॉस्पिटल के 379 पदों पर तीन माह के लिए संविदा भर्ती की जा सकेगी। इसी प्रकार स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सा अधिकारी, ग्रामीण चिकित्सा अधिकारी, स्टाफ नर्स, मेडिकल लैब टेक्नॉलॉजिस्ट, बहुउद्देश्यीय स्वा. कार्यकर्ता (महिला व पुरुष) के रिक्त 21 सौ पदों पर भर्ती की अनुमति प्रदान की गई है। श्रीवास्तव ने कहा कि प्रदेश सरकार जनस्वास्थ्य के साथ क्रूर खिलवाड़ करने पर आमादा रही और नतीजतन प्रदेश कोरोना के शिकंजे में बुरी तरह फँस चुका है। प्रदेश सरकार तो क्वारेंटाइन सेंटर्स तक की व्यवस्था बनाने में भी नाकारा साबित हुई।

 

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