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वास्तु सुधारने से क्या फायदा हुआ भाजपा को? कुछ नहीं ना, तो फिर गेट नहीं चेहरे बदलिए, वरना ये गेट भी बन्द हो जाएगा

अनिल पुसदकर  | 13 Jan , 2020 11:00 PM
वास्तु सुधारने से क्या फायदा हुआ भाजपा को? कुछ नहीं ना, तो फिर गेट नहीं चेहरे बदलिए, वरना ये गेट भी बन्द हो जाएगा

रायपुर। भाजपा राज्य बनने के बाद पहले चुनाव में विजयी रही थी और उसने पहले चुनाव में विजयी होने के रिकॉर्ड को तीन बार बनाए रखा। हैट्रिक बनाने के बाद भाजपा की बुरी हार पर बहुत से लोगों ने इसमें पार्टी के प्रदेश कार्यालय के वास्तु को दोषी माना। वास्तुदोष सुधारने के लिए विशाखापट्टनम से वास्तु विशेषज्ञ बुलाया गया। वास्तु विशेषज्ञ ने अपने ज्ञान के अनुरूप राष्ट्रीय राजमार्ग धमतरी पर खुलने वाले मुख्य गेट को बंद करवा दिया। वास्तुशास्त्री को भवन में दोस्त नजर आया और उन्होंने भवन का वास्तु दोष ठीक करने के लिए राजमार्ग की ओर खुलने वाले गेट को बंद करवा कर माना बस्ती की ओर जाने वाले गेट को खुलवा दिया। तब पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ ही पार्टी के कर्ता-धर्ताओं को लगा के प्रवेश का रास्ता बदलने से शायद हार का मार्ग बंद हो गया और जीत का मार्ग प्रशस्त हो गया हो। पर वास्तुशास्त्री का वह ज्ञान सिर्फ भवन के लिए था पार्टी के लिए नहीं। पार्टी नए गेट को खुलवाने के बाद भी जीत के लिए तरस गई और नए गेट से भी नगरीय निकाय चुनाव की करारी हार पार्टी दफ्तर में पसर गई। यानी यह तो तय हो गया है कि दोष पार्टी के प्रदेश कार्यालय में नहीं है बल्कि दोष पार्टी के नेतृत्व में है। अभी भी समय है पार्टी का गेट बदलने की बजाय पार्टी का चेहरा बदले। चेहरा बदलने से हो सकता है कि लोग जीत के लिए नया रास्ता बना दे। अन्यथा गेट बदल कर देख लिया जीत का अता पता नहीं है। हार रास्ता बदल बदल कर दफ्तर तक पहुंचने से चूक नहीं रही है। पार्टी के चुके हुए चेहरों को अगर नहीं बदला जाता तो फिर पार्टी को हार के लिए फिर तैयार रहना चाहिए। जीत के लिए उसे नया गेट नहीं नया भवन नहीं नए चेहरे की जरूरत होगी। इस बात को समझना अब जरूरी हो गया है।

 

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