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Video: अनर्गल आरोप लगाकर झूठ फैलाने में लगे हैं विष्णुदेव साय : मो. अकबर

ग्लिब्स टीम  | 06 Aug , 2021 08:50 PM
Video: अनर्गल आरोप लगाकर झूठ फैलाने में लगे हैं विष्णुदेव साय : मो. अकबर

रायपुर। हाथियों के हमले से मानव को होने वाले नुकसान को रोकने गांव में खुले में धान रखने के प्रयोग पर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष विष्णुदेव साय के आरोपों का प्रदेश के वन मंत्री मो.अकबर ने कड़ा जवाब दिया है। वन मंत्री ने कहा है कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को हाथियों व धान के संबंध में सामान्य जानकारी भी नहीं है। विष्णुदेव साय अपनी पार्टी की परम्परा के अनुरूप झूठ फैलाने में लगे हैं कि वर्ष 2019-20 का सड़ा धान कई गुना अधिक कीमत पर वन विभाग खरीदने जा रहा है। वन विभाग धान खरीद ही नहीं रहा है बल्कि खाद्य विभाग धान का प्रदाय वन विभाग को कर रहा है। साय अपनी जानकारी सुधारें, खरीफ वर्ष 2020 का अच्छा गुणवत्ता का धान खाद्य विभाग ने वन विभाग को दिया है। खाद्य विभाग को धान का भुगतान लागत मूल्य अनुसार किया जाएगा।

केन्द्र की किसी भी राशि का उपयोग नहीं होगा
मो.अकबर ने कहा कि हाथी को गांवों में घुसने से रोकने खुले में धान रखने के प्रयोग में केंद्र की राशि का उपयोग होने की चिंता जताने वाले साय जान लें कि इसमें केन्द्र की किसी भी राशि का उपयोग नहीं होगा। विष्णुदेव साय ने यह पूछा है कि किस कमेटी ने यह सर्वेक्षण किया है कि हाथी को गावों में घुसने से रोकने खुले में धान रख दिया जाए, तो इसका सीधा आशय है कि विष्णुदेव साय को हाथियों के संबंध में सामान्य जानकारी तक नहीं है। हाथियों का दल गांवों में आबादी बस्तियों में मकान के उसी कमरे को तोड़ता है जहां धान, मक्का, महुआ आदि रखा होता है। इसके बाद हाथी इसे खा कर चट कर जाता है।

हाथियों ने खाया खुले स्थान पर रखा धान
वन मंत्री मो.अकबर ने बताया कि हाथियों का मानव से द्वंद रोकने प्रयोग के तौर पर धान को खुले स्थान पर रखा जा रहा है। अभी धरमजयगढ़ वन मंडल में 6 अलग-अलग स्थानों पर रखे गए धान को हाथियों ने खाया है। खुले में रखे धान से गांवों में नुकसान रूकता है तो इस प्रयोग को आगे भी जारी रखा जाएगा।

छत्तीसगढ़ के धान को सड़ा धान कहना अन्न-अन्नदाता का अपमान
मो. अकबर ने कहा कि विष्णुदेव साय बार-बार छत्तीसगढ़ में उत्पन्न होने वाले धान को सड़ा धान सड़ा धान कह रहे हैं जबकि इसी धान से चावल बनाकर इसे एफसीआई को दिया जा रहा है, जिसे एफसीआई देश के अनेक राज्यों में भेज रहा है। छत्तीसगढ़ में उत्पन्न धान से बने चावल का उपयोग यहां की जनता कर रही है। अच्छी गुणवत्ता के धान को सड़ा धान कहना अन्न और अन्नदाता का अपमान है।

संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति न करें साय
वन मंत्री के अनुसार हाथियों को रोकने खुले में धान रखने की व्यवस्था के बारे में साय ने जानना चाहा है तो वह समझ लें कि वन विभाग को मालूम है कि हाथी को गांवों में घुसने से रोकने धान कहां रखना है। हाथियों के दल की निगरानी वन विभाग करता है। इसके आधार पर गांववासियों को सतर्क भी किया जाता है। मो.अकबर ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार के समक्ष चिंता यह है कि हाथियों का मानव से होने वाले द्वंद को कैसे कम किया जाए और कैसे रोका जाए ताकि होने वाली जनहानि, संपत्ति हानि व फसलों का नुकसान रोका जाए। इसलिए इस समय हाथियों के जो 16 दल अलग-अलग स्थानों में राज्य में विचरण कर रहे हैं, उन्हीं स्थानों और मार्गों के बीच में पड़ने वाले ग्रामों में ही वन विभाग प्रयोग के तौर पर ग्राम पंचायत या ग्रामवासियों के सहयोग से धान रखवाता है। ताकि धान खाने के बाद हाथी लौट जाएं और मकानों को क्षतिग्रस्त न करें।

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