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ग्रामसभा और ग्राम पंचायतों के अधिकारों का हनन बर्दाश्त नहीं: रूपकुमारी चौधरी

ग्रामसभा और ग्राम पंचायतों के अधिकारों का हनन बर्दाश्त नहीं: रूपकुमारी चौधरी

महासमुन्द। भाजपा जिलाध्यक्ष रूपकुमारी चौधरी ने कहा कि त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था में सबसे शक्तिशाली ग्रामसभा को बनाया गया है। ग्रामसभा को व्यापक पैमाने पर अधिकार दिया गया, लेकिन इस अधिकार को धीरे धीरे समाप्त किया जा रहा है और ग्रामसभा में सत्ता पक्ष अतिक्रमण कर रही है। इससे ग्राम सभा के औचित्य समाप्त हो रहा है। भाजपा जिलाध्यक्ष श्रीमती चौधरी ने बताया कि महासमुंद जिले के ग्राम पंचायतों में गांव में बनाये जा रहे गौठान की व्यवस्था देखरेख के लिए शासन समिति गठन करने ग्रामसभा को आदेशित की है। ग्रामसभा में सर्वसम्मति से गौठान समिति के लिए अध्यक्ष सहित सदस्य संख्या शासन व्दारा चाही गई अनुसार गठन कर प्रस्ताव भेजना है जबकि इसके लिए सरपंचों को भरोसे में नहीं लिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका सम्पूर्ण अधिकार ग्रामसभा को है लेकिन कांग्रेस नेताओं द्वारा गौठान से संबंधित पंचायतों में समिति मे अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष का नाम तय कर संबंधित पंचायतों में भेजा गया है। उन्होंने ने विभिन्न मीडिया के माध्यम से मिले जानकारी के आधार पर बताया कि कांग्रेस विधायकों के कार्यालय से भेजे गये नाम पर ग्रामसभा से अनुमोदन  कराये जाने अधिकारी भी तैनात किया गया है। भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि विगत वर्ष भी ग्रामसभा व्दारा गौठान समिति का चयन कर ग्राम पंचायतों व्दारा प्रस्ताव भेजा गया था लेकिन ग्राम सभा व्दारा प्रस्तावित नाम के बजाए दूसरे व्यक्ति को अध्यक्ष कोषाध्यक्ष बना दिया गया है।


महासमुंद भाजपा जिलाध्यक्ष रुपकुमारी चौधरी ने कहा है कि त्रिस्तरीय पंचायत राज में ग्रामसभा को सम्पूर्ण अधिकार दिया गया है ग्रामसभा व्दारा पारित प्रस्ताव सर्वमान्य होता है बावजूद ग्रामसभा के व्दारा गौठान समिति बना कर भेजे गये प्रस्ताव के विपरीत कांग्रेसीयों के दबाव में प्रशासन व्दारा समिति अध्यक्ष बनाये गये हैं। शासन प्रशासन के इस कृत्य से ग्रामसभा की अवहेलना के साथ साथ बेजाधिकार का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस तरह के हरकतों से त्रिस्तरीय पंचायत राज अधिकार का हनन ही नहीं पंचायत एवं ग्रामसभा सदस्यों का अपमान है। रूपकुमारी चौधरी ने कहा सरकार को अपने अनुसार गौठान समिति का गठन करना ही था तो वे अपने कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं का नाम चिन्हांकित कर शासन स्तर से समिति बनाकर पंचायतों ऊपर थोप दिया जाना चाहिए था। ग्रामसभा से प्रस्तावित कराने का कोई मतलब ही नहीं रह जाता। रूपकुमारी चौधरी इस पर नाराजगी जताई और कहा यदि  प्रशासन व्दारा ग्रामसभा एवं ग्राम पंचायतों के अधिकारों का हनन किया जाता है इन परिस्थितियों में पंचायत में चुने गए जनप्रतिनिधियों का कोई औचित्य नहीं रह जाता चुने हुए जनप्रतिनिधियों का शासन के दबाव में प्रशासन के द्वारा एक तरफा कार्यवाही उनके अधिकार पर कुठाराघात है। इन परिस्थितियों में भारतीय जनता पार्टी पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकार  की लड़ाई लड़ेगी।  उन्होंने कांग्रेस के नेताओं को भी सीधे-सीधे शब्दों में कहा है कि वे पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों को रोकने से बाज आए और उन्हें स्वतंत्रता पूर्वक काम करने की छूट दी जाए।

 

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