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विकास ने कहा-बगैर सेवा दिए स्कूलों का फीस के लिए दबाव अनुचित, मध्यस्थता कराने तैयार हूं

रविशंकर शर्मा  | 06 Sep , 2020 03:45 PM
विकास ने कहा-बगैर सेवा दिए स्कूलों का फीस के लिए दबाव अनुचित, मध्यस्थता कराने तैयार हूं

रायपुर। संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने कहा है कि, निजी स्कूलों की ओर से लगातार पालकों से उस अंतराल की फीस की मांग की जा रही, जिस दौरान शैक्षणिक गतिविधियां पूरी तरह बंद थीं। यह पूरी तरह अनुचित है। बिना कोई सेवा दिए स्कूलों की ओर से फ़ीस और अन्य खर्चों की मांग करना "अवैध" है। स्कूल के एडमिशन फॉर्म में कोई फोर्स मेजर क्लॉज नहीं है। कुछ स्कूलों ने सितम्बर माह से ऑनलाइन क्लास शुरू करने की सूचना पालकों को दी है। साथ ही शर्त ये रखी जा रही है कि, पिछले महीनों के फीस न जमा करने की स्थिति में विद्यार्थियों को सम्मिलित नहीं किया जाएगा। ये शिक्षा के अधिकार पर सीधा हनन है।

विकास ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम का जिक्र करते हुए कहा है कि " विद्यार्थियों के एडमिशन फार्म में फोर्स मेजर क्लॉज नहीं है, इसलिए बिना सेवा के फीस और अन्य खर्च की मांग करना गैरकानूनी है।'' उन्होंने कहा है कि, इसके और भी गहराई पर जाएं तो ऑनलाइन कक्षाओं का एडमिशन फॉर्म में कोई उल्लेख नहीं है। फिर भी इस वैश्विक महामारी का अंदेशा, सभी को मालूम नहीं था कि, इतने लंबे समय तक रहेगा। तो निजी स्कूलों को भी विचार करना चाहिए कि, वह पूर्व वर्षों की तरह पूरे महीनों की फीस वसूली कैसे कर सकती है। अभी जो फीस की मांग की जा रही है, उसमें मार्च माह से लेकर पूरे वर्ष भर के फीस का जिक्र है, जो पूरी तरह से अनुचित व अव्यवहारिक है। विकास उपाध्याय ने छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन और पलकों के साथ बैठक कर इस समस्या के बीच का रास्ता निकालने मध्यस्थता करने की हामी भरी है। उन्होंने कहा है, हमें मिल बैठ कर ऐसी परिस्थितियों में कोई उचित रास्ता निकालने की जरूरत है, जिससे कि दोनों पक्षों को संतुष्टि मिल सके।

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