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विकास उपाध्याय ने कहा-आर्थिक पैकेज की घोषणा 'ऋणं कृत्वा घृतं पिबेत्' की योजना पर मोदी सरकार

रविशंकर शर्मा  | 29 Jun , 2021 08:17 PM
विकास उपाध्याय ने कहा-आर्थिक पैकेज की घोषणा 'ऋणं कृत्वा घृतं पिबेत्' की योजना पर मोदी सरकार

रायपुर। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव विकास उपाध्याय ने कोरोना राहत के नाम पर आर्थिक पैकेज के ऐलान पर कहा है कि मोटे तौर पर यह उधार बांटने की ही योजना है। "ऋणं कृत्वा घृतं पिबेत्" यानी कर्ज़ लो और घी पियो। लगता है कि मोदी सरकार ऐसा ही कुछ कहना चाहती है।  एक बार नहीं बार-बार कह रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से सोमवार को कुल 6,28,993 करोड़ रुपए का नया पैकेज लाने का ऐलान इसी का एक हिस्सा है। विकास उपाध्याय ने कहा,सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस वक्त कंज्यूमर की जेब में पैसे डालकर मांग बढ़ाने की जरूरत है, उस वक्त केन्द्र की मोदी सरकार व्यापारियों और उद्यमियों को कर्ज देने पर क्यों इतना जोर दे रही है? कर्ज लेकर कोई उद्योगपति या दुकानदार करेगा क्या? उसके लिए कर्ज की जरूरत या अहमियत तभी होती है, जब उसके सामने ग्राहक खड़े हों और उसे माल खरीदने, भरने या बनाने के लिए पैसे की जरूरत हो। देश की हालत आज ऐसी नहीं है। मोदी सरकार की लचर व्यवस्था के कारण देश आज आर्थिक आपातकाल से गुजर रही है।


विकास उपाध्याय ने कहा,इस बात पर गंभीर सवाल है कि इन योजनाओं से कितना फायदा होगा और किसे होगा? सरकार पहले ही जो क्रेडिट गारंटी स्कीम लाई थी, उसमें तीन लाख करोड़ के सामने सिर्फ़ दो लाख 69 हजार करोड़ रुपए का ही कर्ज उठा है। फिर डेढ़ लाख करोड़ बढ़ाकर सरकार क्या हासिल करेगी। इस वक्त की सबसे बड़ी मुसीबत है बाजार में मांग की कमी और उसकी वजह है लाखों की संख्या में बेरोजगार हुए लोग, बंद पड़े कारोबार और लोगों के मन में छाई हुई अनिश्चितता। सरकार को कुछ  ऐसा करना चाहिए, जिससे इसका इलाज हो,और तब शायद उसे इस तरह कर्ज बांटने की जरूरत नहीं रह जाएगी। विकास उपाध्याय ने भाजपा को इसके लिए कहा है कि जब तक जियो सुख से जियो. और यहां तो हाल ऐसा है कि दुख ही दूर होने का नाम नहीं ले रहा।

 

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