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Video : विकास उपाध्याय ने मुख्यमंत्री से की शिकायत,निजी अस्पतालों की मनमानी पर एक्शन लेने की मांग  

रविशंकर शर्मा  | 05 Sep , 2020 04:41 PM
Video : विकास उपाध्याय ने मुख्यमंत्री से की शिकायत,निजी अस्पतालों की मनमानी पर एक्शन लेने की मांग  

रायपुर। संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से निजी अस्पतालों  के मनमानी की शिकायत की है। उन्होंने निजी अस्पतालों की ओर से कोविड-19 मरीजों से मनमाने तरीके से पैसे वसूली करने की बात कही है। विकास उपाध्याय ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से आग्रह किया है कि वे वर्चुअल मीटिंग लेकर सभी निजी अस्पतालों के संचालकों को इस बाबत बात कर स्पष्ट हिदायत दें। उन्होंने कहा है कि छत्तीसगढ़ की जनता के साथ किसी तरह की लूट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस बात का ध्यान नहीं देने या मनमानी जारी रहने पर ऐसे अस्पतालों के लाइसेंस रद्द किए जाएं। विकास उपाध्याय ने ऐसे निजी अस्पतालों के संचालकों को स्पष्ट हिदायत दी है कि वे इस वैश्विक महामारी के समय मानवता का सही परिचय दें। विकास ने कहा है कि स्वास्थ्य सेवाएं देना किसी सामान बेचने जैसा नहीं है। ऐसा कर स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले निजी अस्पताल के संचालक 'मेडिकल क्लीनिक कंज्यूमर प्रोटेक्शन ऐक्ट' का खुला उलंघन कर रहे हैं। 90 फीसदी पीड़ितों से लगातार ये शिकायतें मिल रही है कि, निजी अस्पतालों में कोरोना का डर दिखा कर उनसे मनमाने तरीके से लाखों रुपए वसूले जा रहे हैं।

कई मरीज तो ऐसे भी हैं, जो इन निजी अस्पतालों में महज 3 दिन की फीस 6 लाख रुपए तक चुकाए हैं। उन्होंने कहा है किस छत्तीसगढ़ में मरीजों की बढ़ोतरी हुई है,नतीजन सरकारी अस्पतालों में अब जगह नहीं है। मजबूरन प्रदेश भर के संक्रमित लोग अच्छे इलाज के आशा में रायपुर के निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। स्थिति ये है कि, अब इन अस्पतालों में कोविड-19 के अलावा अन्य बीमारी से ग्रसित लोग नहीं के बराबर ही हैं। इसका फायदा ये निजी अस्पतालों के संचालक भरपूर उठा रहे हैं। विकास ने कहा है कि अस्पताल मरीज या उसके परिजनों को केस से जुड़े सभी कागजात की फोटोकॉपी दे। ये फोटोकॉपी अस्पताल में भर्ती होने के 24 घंटे के भीतर और डिस्चार्ज होने के 72 घंटे के भीतर दी जानी चाहिए। पर ये भी नहीं किया जा रहा है। कई बार देखा गया है कि अगर अस्पताल का पूरा बिल न अदा किया गया हो तो मरीज को अस्पताल छोड़ने नहीं दिया जाता है। बाम्बे हाईकोर्ट ने इसे 'गैर कानूनी कारावास' बताया है। कभी-कभी अस्पताल बिल पूरा नहीं दे पाने की सूरत में लाश तक नहीं ले जाने देते।

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