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काम नहीं आई तिकड़में, कानूनी दांव पेंच और दुष्प्रचार, सब पर भारी पड़ा साथियों का असन्तोष, ले डुबा सरकार

अनिल पुसदकर  | 20 Mar , 2020 09:37 AM
काम नहीं आई तिकड़में, कानूनी दांव पेंच और दुष्प्रचार, सब पर भारी पड़ा साथियों का असन्तोष, ले डुबा सरकार

भोपाल/रायपुर। तमाम राजनीतिक और कानूनी दांवपेच के बावजूद कमलनाथ अपनी सरकार बचाने में नाकाम नजर आ रहे हैं। उनके संकट मोचन व खास सिपहसलार दिग्विजय सिंह ने तो फ्लोर टेस्ट के पहले ही हार मान ली है। और यह भी मान लिया है कि वे अपने बागी विधायकों से संपर्क करने में नाकाम रहे। यानी कल तक जो उनकी पार्टी के सदस्य थे उन्होंने कमलनाथ और दिग्विजय सिंह से बात तक करना जरूरी नहीं समझा। आखिर ऐसी क्या वजह थी जो इतनी कड़वाहट उनके बीच आ गई। उनका असंतोष ना केवल पार्टी बल्कि सरकार को भी ले डूबा है मध्यप्रदेश में। अब सभी राजनीतिक दलों को इस बात पर भी गौर करना पड़ेगा कि पार्टी के भीतर के असंतोष को हल्के में ना लिया जाए। अगर साथियों की अनदेखी की कीमत सरकार गवा कर चुकानी पड़े तो यह किसी भी सूरत में फायदेमंद सौदा नजर नहीं आता। बहरहाल कमलनाथ की सारी तिकड़में कानूनी दांवपेच सब बेकार जाते नजर आ रहे हैं। उनके दुष्प्रचार का हथियार भी बेअसर ही साबित हुआ है। और धन के दुरुपयोग का आरोप तो अब राजनीतिक पार्टियों को एक दूसरे पर लगाना ही नहीं चाहिए क्योंकि कोई दूध का धुला नहीं है।

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