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Assembly Election : पांच सीटों पर चुनाव लड़ेगी माकपा, गठबंधन से नहीं है एतराज

प्रिया पांडेय  | 27 Aug , 2018 04:13 PM
Assembly Election : पांच सीटों पर चुनाव लड़ेगी माकपा, गठबंधन से नहीं है एतराज

रायपुर। प्रदेश में 2018 में होनी वाले विधानसभा चुनाव के लिए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी प्रदेश के पांच सीटों में अपने दावेदार पेश करेगी। इससे पहले पार्टी केवल दो से तीन सीटों में ही अपने चुनाव लडती आ रही है। वहीं इस बार अपना पैर पसारते हुए पार्टी सीटों पर बढ़ोत्तरी करते हुए पांच सीटों से चुनाव लड़ने की तैयारी में है।

जन आधार नहीं होने से केवल पांच सीटों पर लड़ेगी चुनाव

90 सीट से चुनाव ना लड़ने के विषय में पार्टी के राज्य सचिव संजय पराते ने कहा है कि हमारे पास अधिक जन आधार नहीं है इसलिए हम पुरे 90 सीटों से चुनाव नहीं लड़ पा रहे हैं, लेकिन इन पांच सीटों के आलवा जो भी पार्टी काबिल होगा और भाजपा के विरुद्ध हमारी लड़ाई लड़ सकेगा उसे हम उस क्षेत्र में अपना समर्थन देंगे। इस बार हम केवल उन्ही सीटों पर चुनाव लड़ने लड़ रहे हैं, जहां पर हमारे लोगों की अधिकता है।

केवल पांच सीटों में प्रत्याशी उतारकर भाजपा को सत्ता से हटाएगी माकपा!

वैसे तो माकपा केवल पांच सीटों पर ही चुनाव लड़ रही है, लेकिन माकपा का कहना है कि हम भाजपा मुक्त छत्तीसगढ़ देखना चाहती है, इसलिए कांग्रेस और बसपा के प्रत्यशियों को अन्य सीटों पर अपना समर्थन देंगे और अपने तौर पर पूरी तरह से सुनिश्चित करेंगे कि जीत केवल हमारे प्रत्याशियों की ही हो।

माकपा की होगी ये चुनावी रणनीति

चुनावी रणनीति के विषय में संजय पराते ने कहा कि चुनाव को लेकर हमारी बहुत ही स्पष्ट रणनीति है। हम अपनी वाम पंथी लोगों को एक जुट करेंगे और जितनी भी वामपंथी पार्टियां है उसका एक साथ मिलकर समर्थन करेंगे। हमारे कार्यकर्ताओं की संख्या गिन पाना तो कठिन है, लेकिन हम सब एक दुसरे से जुड़े हुए हैं। हम सब अलग-अलग संगठनों के रूप में काम कर रहे हैं।

ये होंगे चुनाव के मुद्दे

संजय पराते ने कहा है कि माकपा शुरू से ही अपने चुनावी मुद्दों को लेकर स्पष्ट रही है। हमेशा से सीपीएम को मुद्दे बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था, मजदूरों से सम्बंधित समस्यों पर आधरित रही है। 15 सालों से भाजपा की सरकार सत्ता में है लेकिन आज तक प्रदेश के युवाओं, किसानों और मजदूरों को केवल छला ही जा रहा है। आज युवा बेरोजगार हैं, किसान आत्महत्या कर रहे हैं, मजदूरों की चिंता भी भाजपा की सरकार को केवल चुनाव के वक्त ही होती है।

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