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श्रमिक स्पेशल ट्रेन अव्यवस्था और कुप्रबंधन का शिकार रही : शैलेश नितिन त्रिवेदी

रविशंकर शर्मा  | 15 Jun , 2020 05:48 PM
श्रमिक स्पेशल ट्रेन अव्यवस्था और कुप्रबंधन का शिकार रही : शैलेश नितिन त्रिवेदी

रायपुर। श्रमिक स्पेशल ट्रेन में अव्यवस्था, कुप्रबंधन, मजदूरों से ज्यादा किराया लेने का आरोप कांग्रेस ने लगाया है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि सब्सिडी तो दूर की बात है, मोदी सरकार ने वास्तव में श्रमिक ट्रेनों के लिए अतिरिक्त शुल्क वसूला है। त्रिवेदी ने कहा है कि केंद्र सरकार का दावा पूरी तरह से गलत है कि वह श्रमिक ट्रेनों के किराए में 85 प्रतिशत सब्सिडी दे रही है। राज्य सरकारों और मजूदरों से भी श्रमिक ट्रेनों के किराए के लिए प्रति श्रमिक अतिरिक्त शुल्क लिया गया है। भाजपा सरकार और संगठन की ओर से रेल किराये में 85 प्रतिशत सब्सिडी का आंकड़ा बिल्कुल गलत और निराधार है। केन्द्र सरकार अब यह स्पष्ट करें कि किस आधार पर 85 प्रतिशत किराया कम लेने का दावा किया जा रहा है? छत्तीसगढ़ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दिए गए शपथ पत्र में कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने 40 श्रमिक ट्रेनों के लिए 38,331,330 रुपए भारतीय रेल को दिए हैं। केन्द्र सरकार ने तो मजदूरों को न केवल पूरा किराया बल्कि सामान्य किराए से भी ज्यादा किराया देने के लिए मजबूर किया।

केन्द्र सरकार की ओर से निशुल्क भोजन पानी दिए जाने का दावा भी झूठ है। 50 से 100 रुपए अतिरिक्त सामान्य किराए से अधिक वसूले गए हैं। इसके बावजूद भोजन पानी की समुचित व्यवस्था नहीं हो पाई। अनेक मजदूर ट्रेनों में बासी खाने की शिकायतें मिली। भूखे मजदूरों को खाना फेकना पड़ा। मजूदरों को ट्रेनों में खाना दिया गया, वह भी अपर्याप्त था। अतिरिक्त किराए और भोजन की अव्यवस्थाओं के अलावा श्रमिक स्पेशल ट्रेनें और कई बार मार्ग से भटकी भी। वसई (मुंबई) से गोरखपुर के लिए चली ट्रेन, 700 किलोमीटर दूर पूर्वोत्तर में राउरकेला पहुंच गई थी। अहमदाबाद से चांपा के लिए चली ट्रेन 27 मई को छत्तीसगढ़ पहुंची, श्रमिकों की शिकायत थी की, 26 घंटे के सफर में उन्हें केवल एक बार भोजन दिया गया। केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने गलत दावा किया है कि ट्रेनें भटकी नहीं थी बल्कि रेल लाइनों की व्यस्तता के कारण उन्हें डायवर्ट किया गया था।

 

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