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शिवरतन ने पूछा : क्या प्रदेश सरकार नाकामियों की पोल खुलने से डरकर विस में चर्चा के बजाय मुँह चुराने को विवश हो गई?

हर्षित शर्मा  | 12 Aug , 2020 08:35 PM
शिवरतन ने पूछा : क्या प्रदेश सरकार नाकामियों की पोल खुलने से डरकर विस में चर्चा के बजाय मुँह चुराने को विवश हो गई?

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता व विधायक शिवरतन शर्मा ने प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र चार दिनों का रखे जाने पर प्रदेश सरकार पर कटाक्ष किया है। शिवरतन ने पूछा कि क्या प्रदेश सरकार अपनी नाकामियों की पोल खुलने से इतनी भयभीत हो गई है कि अब वह विधानसभा में भी चर्चा करने के बजाय मुँह चुराने को विवश हो गई है? हर मोर्चे पर विफल प्रदेश सरकार एक गहरे अपराध-बोध से जूझ रही है, ऊपर से हाल के एक सर्वे ने सरकार और सत्तारूढ़ दल की जमीन खिसका दी है। इतनी कम अवधि का सत्र रखकर सरकार ने साफ कर दिया है कि प्रदेश के हित में कोई सार्थक चर्चा करने को वह तैयार नहीं है।

शर्मा ने कहा कि विधानसभा में चर्चा करने और प्रतिपक्ष के सवालों का जवाब देने से सरकार डर रही है और इसीलिए वह सिर्फ चार दिनों का सत्र बुला रही है अन्यथा कोई कारण नहीं है कि सत्र की अवधि इतनी कम रखी जाए। जब सरकार कोरोना संक्रमण के नजरिए से रोज हर विधायक को टेस्ट कराके ही विधानसभा में प्रवेश करने देगी तो फिर यह व्यवस्था तो लंबी अवधि के सत्र के लिए भी संभव थी। प्रदेश को हजारों करोड़ रुपए के कर्ज से लाद चुकी प्रदेश सरकार अपनी तमाम योजनाओं की मिट्टी-पलीद कर चुकी है। कोरोना के मोर्चे पर निकम्मेपन का परिचय दे चुकी है। क्वारेंटाइन सेंटर्स और अब कोविड अस्पताल तक अस्वाभाविक मौत के केंद्र बनते जा रहे हैं। कोरोना की जाँच रिपोर्ट संबंधित संदिग्ध मरीज की मौत के बाद भी नहीं मिल रही है। कोरोना से मृत मरीजों का तीन-चार दिनों तक अंतिम संस्कार तक नहीं किया जा सक रहा है। शिवरतन ने कहा कि अपने नाकारापन को ढँकने और प्रदेश के सामने अपने छलावों के पदार्फाश से बचने के लिए ही प्रदेश सरकार सिर्फ चार दिनों का विधानसभा सत्र बुलाकर अपनी जिम्मेदारी से मुँह चुराने में लगी है।

 

 

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