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सावरकर कांग्रेस के लिए गद्दार तो शिवसेना के लिए महान, ये हाल है कॉमन मिनिमम प्रोग्राम का

अनिल पुसदकर  | 15 Dec , 2019 01:02 AM
सावरकर कांग्रेस के लिए गद्दार तो शिवसेना के लिए महान, ये हाल है कॉमन मिनिमम प्रोग्राम का

रायपुर। तेल और पानी के मेल के खेल की पोल आखिर खुल ही गई। शिवसेना कांग्रेसऔर एनसीपी महागठबंधन सावरकर के मुद्दे पर बंटता नजर आ रहा है। राहुल गांधी का बयान कि मैं राहुल सावरकर नहीं हूं शिवसेना के गले की फांस बन गया है। वह शिवसेना के गले उतर नहीं रहा है। शिवसेना की राजनीति सिर्फ और सिर्फ महाराष्ट्र तक ही सीमित है और महाराष्ट्र में सावरकर को स्वातंत्र्य वीर कहा जाता है। ऐसे में राहुल का सावरकर पर हमला कांग्रेस एनसीपी शिवसेना के कॉमन मिनिमम प्रोग्राम की धज्जियां उड़ाता नजर आता है। वैसे भी इस महागठबंधन के अस्तित्व में आने से पहले ही इसके खत्म हो जाने की आशंकाओं पर ज्यादा बात हुई है। सिर्फ और सिर्फ भाजपा को रोकने के लिए इस तरह का गठबंधन कांग्रेस ने कर्नाटक में भी किया था जहां उन्हें मुंह की खानी पड़ी। आज वहां भाजपा की सरकार है। कमोबेश ऐसी ही स्थिति महाराष्ट्र में थी। जहां विपरीत विचार विपरीत ध्रुव की पार्टियां आपस में मिल गई कि उन्हें नरेंद्र मोदी शाह की जोड़ी को रोकना था।भाजपा को सरकार बनाने से रोकना था। देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बनने से रोकना था। और खुद शिवसेना के सुप्रीमो को मुख्यमंत्री बनाना था। बहरहाल सरकार बने गिनती के दिन बीते हैं और विवाद शुरू हो गया है। यह बता देता है कि पानी और तेल का मेल हो नहीं सकता। और अगर हुआ भी तो उस मेल के खेल की पोल खुलनी तो तय ही है।

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