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नेताजी जयंती पर तेज हुई बंगाल की सियासत, राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने की मांग

नेताजी जयंती पर तेज हुई बंगाल की सियासत, राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने की मांग

रायपुर/नई दिल्ली। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती 23 जनवरी को पराक्रम दिवस मनाने की केंद्र सरकार की घोषणा का नेताजी के परिवार ने स्वागत किया है। सत्तारूढ़ टीएमसी और फॉरवर्ड ब्लॉक ने एक सुर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती को ”पराक्रम दिवस” के तौर पर मनाए जाने के केंद्र सरकार के निर्णय की आलोचना की। तृणमूल कांग्रेस के नेता सौगत राय ने कहा कि इस दिन को केवल पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जाना ही काफी नहीं है। उन्होंने कहा, ” 23 जनवरी को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया जाना चाहिए। हम लंबे समय से यह मांग कर रहे हैं। वह राष्ट्रीय नेता थे और आजाद हिंद फौज के प्रमुख थे। ऐसे में केवल पराक्रम दिवस के जरिए यह दोनों बिंदु प्रदर्शित नहीं होते हैं। हमने इस दिन को देश प्रेम दिवस के तौर पर मनाने की भी मांग की थी।” उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम शायद राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए उठाया गया है। दूसरी ओर नेताजी के पौत्र चंद्र कुमार बोस ने कहा है कि पराक्रम दिवस मनाने का केंद्र सरकार का फैसला स्वागत योग्य है लेकिन उचित होगा अगर इस दिन को “देश प्रेम दिवस” के तौर पर मनाए जाने की बहुप्रतीक्षित मांग को भी मान्यता दी जाए। उन्होंने कहा, नेता जी के परिवार की तरफ से केंद्र सरकार की इस पहल का मैं स्वागत करता हूं लेकिन लंबे समय से नेताजी की जयंती को पूरे देश में देश प्रेम दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इसलिए और बेहतर होगा अगर केंद्र सरकार इस दिन को देश प्रेम दिवस के तौर पर भी मान्यता दे। नेताजी द्वारा वर्ष 1939 में गठित पार्टी ‘फॉरवर्ड ब्लॉक’ के राज्य सचिव नरेन चटर्जी ने कहा, जंयती को ‘पराक्रम दिवस’ के बजाय ‘देश प्रेम दिवस’ के तौर पर मनाया जाना चाहिए। बता दें कि सीएम ममता बनर्जी भी कह चुकी हैं कि उन्हें पराक्रम दिवस मनाना पसंद नहीं आ रहा है।
 

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