GLIBS

नक्सल मोर्चे पर सरकार की कोई कारगर नीति नहीं : बृजमोहन अग्रवाल  

रविशंकर शर्मा  | 25 Sep , 2020 11:03 PM
नक्सल मोर्चे पर सरकार की कोई कारगर नीति नहीं : बृजमोहन अग्रवाल  

रायपुर। भाजपा विधायक व पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने प्रदेश सरकार पर नक्सली मोर्चे पर पूरी तरह असफल होने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि यह सरकार आदिवासी जनता की रक्षा करने में पूरी तरह असफल रही है। पूरे प्रदेश में जब नक्सलवाद चरम में था, तब भी बस्तर की आदिवासी जनता की इतनी बड़ी संख्या में हत्या नहीं हुई,जो अब हो रही है। नक्सल मोर्चे को लेकर इस सरकार की कोई नीति नहीं है। सरकार को दो साल होने को हैं और यह तय नहीं कर पाई है कि उन्हें नक्सली मोर्चे पर मैदान में लड़ाई लड़नी है या बातचीत करनी है। सरकार के नक्सल मोर्चे पर कोई योजना नहीं होने व इसी नकारा रवैये के चलते ही पूरे बस्तर में नक्सली एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं। अब बस्तर के निरीह आदिवासी जनता की लगातार हत्या कर रहे हैं। पिछले 6 माह में ही 75 से अधिक आदिवासी  ग्रामीणों की हत्या नक्सलियों ने की है।

कांग्रेस की सरकार आते ही नक्सली प्रदेश में हावी हो गए हैं। अग्रवाल ने कहा है कि सरकार के ढुलमुल रवैये के चलते पूरे बस्तर में नक्सलियों ने आतंक व दहशत का साम्राज्य स्थापित कर लिया है। ग्रामीणों की लगातार हत्या हो रही है। अकेले बीजापुर जिले में इसी महीने 15 से अधिक आम लोगों की नक्सलियों ने हत्या कर दी है और यही स्थिति बस्तर के अन्य जिले में है। रोज नक्सली चुन चुन कर ग्रामीणों की शासकीय कर्मचारियों की हत्या कर जनता के मन में भय व दहशत का राज कायम कर रहे हैं। सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है। सरकार निरीह आदिवासियों की जान बचा पाने में पूरी तरह असफल है। अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने पहले दिन से ही अपने बयानों में यह स्पष्ट कर दिया था कि वे नक्सली साफ करने व लड़ने नहीं बातचीत से हल निकालने के पक्षधर है, सरकार का नक्सलियों के प्रति साफ्ट रवैय्या रहा है। नक्सली इसी को देखकर समझ गए कि सरकार ने तो लड़ने से पहले ही उनके सामने सरेंडर करने की नीति पर है। नक्सली बस्तर के गांवोें में जहां आम जनता की व शासकीय कर्मचारी की खुलेआम हत्या कर रहे है। बस्तर से बाहर धमतरी, गरियाबंद, कवर्धा, राजनांदगांव के अंदरूनी इलाकों, जहां उनके पैर उखड़ गए थे। बल्कि पूरी तरह इनका सफाया हो गया था अब वहां पर भी फिर अपनी सक्रियता लगातार बढ़ा रहे हैं।

Author/Journalist owns and is responsible for views/news published and the publisher/printer is in no way liable for such content.