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अब सत्याग्रह करे का होत है जब विधायक पार्टी गए छोड़, इतनी मेहनत पहले करते तो आज सरकार खतरे में नहीं होती दिग्गी राजा

अनिल पुसदकर  | 18 Mar , 2020 09:31 AM
अब सत्याग्रह करे का होत है जब विधायक पार्टी गए छोड़, इतनी मेहनत पहले करते तो आज सरकार खतरे में नहीं होती दिग्गी राजा

बेंगलुरु/रायपुर। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को बेंगलुरु में हिरासत में ले लिया गया। वे वहां रुके कांग्रेसी विधायकों से मिलने गए थे। पुलिस ने उन्हें रोका और हिरासत में लिया तो वे हिरासत में ही धरने में बैठ गए अब सवाल यह उठता है इन विधायकों ने खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस लेकर साफ कर दिया कि वह अपनी मर्जी से यहां आए हैं। उन्हें दिग्विजय सिंह कैसे बंधक करार दे रहे हैं? फिर उन विधायकों की इतनी फिक्र यदि उनके पार्टी को छोड़ने से पहले करते तो शायद आज कमलनाथ सरकार संकट में नहीं होती। जब समय था अपने विधायकों के असंतोष को शांत करने का उनकी समस्याओं के निराकरण का तब उनको अनदेखा किया गया। और जब असंतोष का ज्वालामुखी फूटा तो अब उन्हें मनाने की कोशिश हो रही है।

उधर कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर कर कांग्रेस के बागी विधायकों को बंधक बताने की कोशिश कर रही है। सभी नेता बार-बार चीख-चीख कर कह रहे हैं कि कांग्रेस के विधायकों को बंधक बनाया गया है। जबकि इन आरोपों का सभी बागी विधायकों ने बेंगलुरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस लेकर साफ कर दिया कि वे सब सरकार की उपेक्षा से नाराज होकर अपनी मर्जी से पार्टी छोड़कर यहां आए है। अब सवाल यह उठता है, जब विधायक खुद कह रहे हैं कि वह अपनी मर्जी से आए हैं तो दिग्विजय सिंह कैसे करार दे सकते हैं कि वे बंधक है? बहरहाल सरकार बचाने और गिराने की इस लड़ाई में और भी कई दिलचस्प मोड़ आएंगे जब तक फ्लोर टेस्ट नहीं हो जाता। कांग्रेस सारी कवायद इसलिए कर रही है कि फ्लोर टेस्ट ना हो और भाजपा फ्लोर टेस्ट कराने पर अड़ी हुई है।

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