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महंगाई ने आम नागरिकों के घरों का बजट किया असंतुलित, किसानों की तोड़ी कमर : कांग्रेस

रविशंकर शर्मा  | 18 Jun , 2021 10:58 PM
महंगाई ने आम नागरिकों के घरों का बजट किया असंतुलित, किसानों की तोड़ी कमर : कांग्रेस

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता मोहम्मद असलम ने कहा है कि मोदी सरकार ने 7 सालों में अच्छे दिन क्या लाए हैं, अब आम नागरिकों को भी अपनी मूलभूत जरुरतों के लिए मुंह ताकना पड़ता है। डीजल-पेट्रोल की बढ़ी कीमतों ने हर तरह की वस्तुओं को न सिर्फ महंगा किया है, अपितु जनता से दूर ही कर दिया है। रोटी-कपड़ा और मकान जिसके लिए वह पूरी जिंदगी जद्दोजहद करता है, वह मिलना भी दूभर होता जा रहा है। गरीब बढ़ती महंगाई के कारण अपना घरौंदा भी न दुरुस्त करा पा रहा है और न ही नया निर्माण कार्य कराने में सक्षम है। भवन निर्माण केवल ईट, रेत, गिट्टी, सीमेंट और सरिया से पूर्ण नहीं होता है। उसके साथ मजदूरी के अलावा अन्य सामानों की जरुरत पड़ती है। सब कुछ  के दाम आसमान छू रहे हैं और लगभग दोगुने हो चुके हैं।

इन सब पर पेट्रोलियम सामग्री के ऊंचे दाम का जबरदस्त प्रभाव पड़ा है। सामग्री से अधिक परिवहन का दर हो चुका है। यही वजह है कि आम नागरिकों के लिए अब भवन सामग्री खरीदना पहुंच से दूर हो गया है। भवन निर्माण में प्रयोग होने वाली बहुत सी सामग्री पेट्रोलियम पदार्थों पर आधारित है, जो सामानों के दाम बढ़ाने में सहायक हैं। भवन निर्माण सामग्री की कीमतों में वृद्धि हो अथवा थोक सामान के दर हों या खुदरा वस्तुओं की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि हो, डीजल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के कारण ही आम लोगों का दम निकल रहा है। किसानों की कमर तोड़ने में केंद्र सरकार ने कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है। किसानों को डीजल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से प्रति एकड़1800 रुपए का अतिरिक्त भार पड़ रहा है। कृषि औषधि और खाद कि महंगाई का उन पर अतिरिक्त बोझ है। यही नहीं सब्जियों, पैकेज फूड, डेयरी प्रोडक्ट, किराना सामान, दाल, अनाज, दवाइयां, फलों में भी अप्रत्याशित वृद्धि से आम लोगों की रसोई का बजट असंतुलित हो गया है। इलाज महंगा होना और रोजमर्रा की जरुरत बहुत महंगी होना जनता पर दोहरी मार है। कांग्रेस पार्टी सहित आम नागरिक लगातार महंगाई को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना कर रहे हैं और प्रदर्शन किए जा रहे हैं, किंतु इस ओर सरकार की लापरवाही एवं अहंकार को स्पष्ट देखा जा सकता है। महंगाई पर नियंत्रण करना तो दूर जनता की जेब पर डाका डालना ही केंद्र सरकार का मुख्य उद्देश्य बन गया है।

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