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छत्तीसगढ़ में सरकार बदल गई है तो केन्द्र को अपनी नीति में परिवर्तन नहीं करना चाहिए : मो. अकबर

रविशंकर शर्मा  | 08 Nov , 2019 06:37 PM
छत्तीसगढ़ में सरकार बदल गई है तो केन्द्र को अपनी नीति में परिवर्तन नहीं करना चाहिए : मो. अकबर

रायपुर। मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा कि 13 नवंबर को सभी किसान केंद्र सरकार से अनुरोध करने जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने मना कर दिया है, इसके बाद भी अनुरोध करने का हक राज्य सरकार को है। वायरल हो रहे पत्र में केंद्र सरकार की एमएसपी का जिक्र है,किसी भी स्थिति में सरकार किसानों से 2500 रुपए की दर से धान खरीदेगी। वर्ष 2018-19 में जब केन्द्र ने 24 लाख मीट्रिक टन चावल की अनुमति दी थी, उस समय यहां भाजपा की सरकार थी, चुंकि सरकार बदल गई है तो नीति में परिवर्तन नहीं होना चाहिए, जो पहले राज्य सरकार को दी गई थी वह इस बार भी हमकों अनुमति दी जाए। राजीव भवन में पत्रकारवार्ता में मंत्री मो. अकबर ने कहा कि वर्ष 2019 के लिए धान खरीदी की जो नीति निर्धारित की गई है,उसके हिसाब से 85 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी का लक्ष्य रखा गया है। भारत सरकार का समर्थन मूल्य 1815 और 1835 लेकिन सरकार अपने वादे के मुताबिक 25 सौ रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदेगी। अब जो प्रमुख समस्या छत्तीसगढ़ सरकार के सामने आ रही है, छत्तीसगढ़ की सरकार अपने वादे के मुताबिक 25 सौ रुपए प्रति क्विंटल कि दर से किसानों को भुगतान करेगी। वर्ष 2018-19 की जो नीति थी भारत सरकार की और जो अनुबंध हुआ था उसके हिसाब से 24 लाख मीट्रिक टन उसना चावल भारतीय खाद्य निगम में जमा करने का अनुमति दी थी। छत्तीसगढ़ राज्य में वर्तमान की स्थिति के हिसाब से भंडारण के लिए स्थान उपलब्ध नहीं है। सरकार खरीदी से पीछे नहीं हट रही है, कीमत से पीछे नहीं हट रही है।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पत्र लिखकर आग्रह किया है जिस प्रकार से वर्ष 2018-19 में चावल सेंट्रल पूल में जमा करने का अनुमति दी गई थी, जिसका धान के रूप में 38 लाख मीट्रिक टन होता है, वह इस बार भी हम को अनुमति दी जाए। पीडीएस सिस्टम है, सार्वजनिक वितरण प्रणाली उसमें सभी को 35 किलो चावल देना है, सभी को राशन कार्ड के दायरे में लाना है, इसके लिए हम को 25 लाख मीट्रिक टन चावल की जरुरत होती है और उसका 38 लाख मीट्रिक टन धान होता है। भारतीय खाद्य निगम उनकी तरफ से 24 लाख मीट्रिक टन उसना चावल जिसका 38 लाख मीट्रिक टन धान होता है, तो उसके लिए उनकी तरफ से सहमति प्राप्त नहीं हो रही है और इसीलिए 13 नवंबर को हम कांग्रेस पार्टी की तरफ से दिल्ली जाकर किसानों और व्यापारियों से प्राप्त पत्रों को सौंपगे।

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