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​​​​​​​पुर्नवास नीति में हो रही देरी पर सरकार करें श्वेत पत्र जारी: अमित जोगी

अखिलेश तिवारी  | 06 Jul , 2019 05:27 PM
​​​​​​​पुर्नवास नीति में हो रही देरी पर सरकार करें श्वेत पत्र जारी: अमित जोगी

रायपुर। छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस जोगी के अध्यक्ष अमित जोगी ने गोदावरी और इंद्रावती नदी पर बांध बनाए जाने पर पुर्नवास नीति में हो रही देरी पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि सरकार के द्वारा जब आंध्रप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम पारित करा गया तो मुख्य रूप से जल को लेकर तीन बांधों के निर्माण को सहमति दी गई थी। आंध्रप्रदेश में गोदावरी नदी पर पोलावरम बाँध को यूपीए की सरकार ने 70000 करोड़ का आवंटन कराके और एनडीए सरकार ने उसे ‘राष्ट्रीय परियोजना’ घोषित कर दिया। इस संबंध में डुबान में आने वाले कोंटा-छिन्दगढ़ क्षेत्र के 47 ग्राम पंचायतों में आज तक न तो भूअर्जन और पुनर्वास अधिनियम के अनिवार्य प्रावधानों के अंतर्गत कोई जन सुनवाई कराई गई और 1980 में गोदावरी वॉटर डिस्प्यूट ट्रायब्यूनल द्वारा निर्धारित 150 फीट की अधिकतम डुबाई स्तर को भी बढ़ाकर 180 फीट कर दिया गया। अमित जोगी ने कहा कि इस संबंध में मैंने विधान सभा से प्रस्ताव पारित किया था किंतु आज तक उसपर भी राज्य शासन ने कोई कार्यवाही नहीं की है।
इसी प्रकार तेलंगाना में इंद्रावती और गोदावरी नदियों के संगम में इचमपल्ली विकास खंड में दो बाँधों के निर्माण को सृजला सृवंती और देव दुल्ला में स्वीकृति दी गई थी। कलेक्टर बीजापुर द्वारा राज्य शासन को सौंपी पर्यावरण-सामाजिक प्रभाव रिपोर्ट के अनुसार इन बाँधों के निर्माण से बीजापुर-भोपालपतनम का 40000 हेक्टर क्षेत्र डुबान में आएगा। इस रिपोर्ट के आधार पर भी छत्तीसगढ़ शासन ने कोई आपत्ति नहीं की। इस विषय में ये बताना जरूरी है कि जब 2002 में तत्कालीन अविभाजित आन्ध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने अजीत जोगी को बाँधों के भूमिपूजन के लिए निमंत्रण दिया था, तब उन्होंने स्पष्ट रूप से यह कहके मना कर दिया था कि मैं आऊंगा जरूर लेकिन भूमिपूजन करने नहीं आमरण अनशन करने। 

 अमित जोगी ने ऐसी स्थिति में दोनों दलों के नेताओं के मुंह का ताला नहीं खुलता है तो उत्तर-मध्य बस्तर भारत का सबसे बड़े रेगिस्तान और दक्षिण बस्तर भारत का सबसे बड़ा बाँध बन कर रह जाएँगे। उन्होंने कहा कि इस विषय पर सरकार को तत्काल श्वेत पत्र जारी करना चाहिए।

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