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सरकार जनहित के प्रति लापरवाह व दुर्भावनाग्रस्त,तीन नए मेडिकल कॉलेजों की अर्जी रद्द होना इसका एक और उदाहरण :भाजपा

राहुल चौबे  | 10 Jun , 2021 09:33 PM
सरकार जनहित के प्रति लापरवाह व दुर्भावनाग्रस्त,तीन नए मेडिकल कॉलेजों की अर्जी रद्द होना इसका एक और उदाहरण :भाजपा

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अनुराग सिंहदेव ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित प्रदेश में तीन नए मेडिकल कॉलेज की अर्जी रद्द कर दिए जाने पर प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा है। सिंहदेव ने कहा कि छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार जन हितैषी कार्यों के प्रति कितनी लापरवाह व असंवेदनशील है तथा केंद्र द्वारा छत्तीसगढ़ की जनता के हित के लिए दी गई सौगात के प्रति कितना दुर्भाव रखती है, प्रदेश के प्रस्तावित तीन नए मेडिकल कॉलेजों की अर्जी रद्द होना इसका एक और उदाहरण है।


भाजपा प्रदेश प्रवक्ता सिंहदेव ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लोगों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं मिले और यहां के छात्रों के लिए चिकित्सा शिक्षा की और अधिक स्तरीय शिक्षा प्रदेश के विद्यार्थियों को मिले, इसके लिए केंद्र सरकार ने कोरबा, महासमुंद और काँकेर में नए मेडिकल कॉलेज कोलने की स्वीकृति दी थी और प्रत्येक कॉलेज के लिए जो 200 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं, उसकी प्रथम किश्त के रूप में 50-50 करोड़ रुपए जारी भी कर दिए गए हैं। परंतु राज्य सरकार ने अपनी ज़िम्मेदारियों का निर्वहन न करते हुए ज़रूरी दस्तावेज़ नेशनल मेडिकल काउंसिल को प्रस्तुत ही नहीं किए जबकि किसी कॉलेज को खोलने के लिए नेशनल मेडिकल काउंसिल की नियमावलि सार्वजनिक दस्तावेज़ है और पब्लिक डोमेन पर उपलब्ध है। सिंहदेव ने कोफ़्त जताते हुए कहा कि पर्याप्त बेड संख्या नहीं होने और जीएसटी जमा नहीं करने के कारण इन चिकित्सा महाविद्यालयों का आवेदन रद्द होना प्रदेश सरकार और संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करने के लिए पर्याप्त है।

आज जब नेशनल मेडिकल काउंसिल की तरफ से प्रस्ताव रद्द होने का पत्र आता है तब हड़बड़ाकर अधिकारी एक-दूसरे पर ज़िम्मेदारी डालने का शर्मनाक उपक्रम कर रहे हैं और आनन-फानन अर्हताएँ पूरी करने का दावा कर रहे हैं। यह बात साफ़ ज़ाहिर करती है कि राज्य की कांग्रेस सरकार मेडिकल कॉलेज खोलने जैसे जनहित के संवेदनशील मसलों पर भी गंभीर नहीं है जबकि केंद्र द्वारा इन महाविद्यालयों की घोषणा होने पर प्रदेश सरकार तथा कांग्रेस के जनप्रतिनिधि व नेता इसका श्रेय अपने खाते में डालने का हास्यास्पद उपक्रम करते बगलें बजा रहे थे।

 

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